वन्दे मातरम और उसका हिन्दी अर्थ-

वन्दे मातरम्!सुजलां सुफलां मलयजशीतलांशस्यश्यामलां मातरम्!शुभ-ज्योत्सना-पुलकित-यामिनीम्फुल्ल-कुसुमित-द्रमुदल शोभिनीम्सुहासिनी सुमधुर भाषिणीम्सुखदां वरदां मातरम्!सन्तकोटिकंठ-कलकल-निनादकरालेद्विसप्तकोटि भुजै



सोशल मीडिया की आम ज़िन्दगी में भागीदारी!

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गीता और विज्ञान

गीता औरविज्ञान गीता  के शब्द  आज  भी  हैं,  गूँजते गगन मेंकृष्ण की वाणी है  छिपी  ध्वनि-तरंग  में।हे विज्ञान !  तू ही बन जा, ईश का आविष्कारक,एकत्र कर,  वह  संचित  शब्द-कोष  पुनश्च।। ऊर्जा नष्ट न होती,  यह  है विज्ञान का सिद्धांतध्वनि-ऊर्जा  का  संभव  रूपांन्तरण  मात्र ।खोज लो कृष्ण के  शब्द,  उदगम क



सेक्स ज्ञान

सेक्स (Sex) का कोई शाब्दिक तात्पर्य नहीं है, दूसरा हर कोई (Everybody) इसे करना चाहता है. सेक्स (Sex) का आशय (Aim) सिर्फ जननेद्रियों (Genitals) से पूर्णतः संबंधित (Related) नहीं है. सेक्स (Sex) का आशय (Aim) उस महत्वपूर्ण (Essential) उद्यम से है जिस पर ईमानदारी (Scrupulosity) से मूल्य लगाया जाय तो यह



हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है उसके पीछे कुछ कारण है , अंग्रेजी भाषा में ये बात देखने में नहीं आती | ______________________

क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए,क्योंकि इनके उच्चारण के समयध्वनिकंठ से निकलती है।एक बार बोल कर देखिये |च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए,क्योंकि इनके उच्चारण केसमय जीभतालू से लगती है।एक बार बोल कर देखिये |ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए,क्योंकि इनका उच्चारण जीभ केमूर्धा से लगने पर ही सम्भव है।एक बार बोल कर द



सनातन धर्म की वैज्ञानिकता

33 करोड देवी देवता !ॐ , एक ओमकार ,परमेश्वेर, ईश्वर, भगवानहिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...सबसे पहली बात तो ये की अधूरा ज्ञान खतरना होता है।वैसे ही जैसे बिना सीखे



हिंदू धर्म की वैज्ञानिकता

हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क1- कान छिदवाने की परम्परा-भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है।वैज्ञानिक तर्क-दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचा



भारतीय माटी भारतीय जल

पाकिस्तानी हैं भारतीय गुजरा कलमाटी थी भारतीय और भारतीय थे फलएक समान थे भारतीय हवा, जल और स्थल सूझवान बनाओ भगवान उनको सूझवान बनाओवो भी थे कभी भारतीय घर-बाहर और भारतीय घाटवर्तमान में जो कहलाते हैं पाकिस्तानी खाट, बाट, हाट सूझवान बनाओ भगवान उनको सूझवान बनाओवो भी थे कभी भारतीय तन, मन और धनथे वो भी कभी भ



कर्म का फल कैसे और किसे मिलता है ?

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में भोजन करा रहा था। तब पंक्ति के अंत मैं बैठे एक ब्राम्हण को भोजन परोसते समय एक चील अपने पंजे में एक मुर्दा साँप लेकर राजा के उपर से गुजरी। और उस मुर्दा साँप के मुख से कुछ बुंदे जहर की खाने में गिर गई। किसी को कुछ पत्ता नहीं चला। फल स्वरूप वह ब्राह्मणजहरीला खान



स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियाँ

आजादी के बाद जहाँ भारत ने समाज के हर क्षेत्र में तेजी से विकास किया वहीं विज्ञान के क्षेत्र में भी अनेक उपलब्धियाँ हासिल कीं। स्वतंत्र भारत की प्रथम सरकार में विज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों का एक पृथक मंत्रालय बनाया गया। यह मंत्रालय भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने अधीन रखा था।



डॉ. विक्रम साराभाई : एक स्वप्नद्रष्टा वैज्ञानिक

डॉ. विक्रम साराभाई की ९६ वी वर्ष-गाँठ पर विशेष डॉ. विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता । यह जग प्रसिध्द है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया । लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य



Sixth Sense

परमात्मा को किसी परिभाषा किसी जाति या किसी समय सीमा मे नही बाधा जा सकता है। बह कही खोया नही जो ढूढा जाय। उसे सिर्फ अनुभव किया जा सकता ओर अनुभव मे अनेको महानतम पुरुषो के आया है। परमात्मा को शब्द परिभाषा सिद्धांत शास्त्र मे मत खोजो यह तो मार्ग है मंजिल नही। उसे पुकारो ,प्रार्थना करो बह अन्तर



07 अगस्त 2015

"अहंकार बडा सूक्ष्म होता है"

अहंकार बडा सूक्ष्म होता है ओर बडा कुशल होता है। ओर अपने महत्व को सिध्द करने के लिये कोई न कोइ रास्ता खोज लेता है । अंहकार ऐसा परिधान पहन लेता है कि उसको पहचानना कठीन हो जाता है। अंहकार बडा भारी बहुरूपिया है। तथा धार्मिक यात्रा के मार्ग का सबसे बड़ा बाधक। यही वो शैतान है जो मन के आधार पर कई र



06 अगस्त 2015

मानव जीवन का लक्ष्य क्या है?

मनुष्य जीवन का अधिकांश भाग आहार, निद्रा, भय और भोग में व्यतीत हो जाता है। शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति में समय और शक्तियों का अधिकांश भाग लग जाता है। विचार करना चाहिए कि क्या इतने छोटे कार्यक्रम में लगे रहना ही मानव जीवन का लक्ष्य है? यह सब तो पशु भी करते हैं। यदि मनुष्य इसी मर्यादा के अंतर्ग



भुट्टा, पॉप-कॉर्न और गणित, विज्ञान

दिल्ली के बाराखंबा पर अख़बार के एक दफ्तर में शाम को बैठने जाता हूँ. मेट्रो के गेट न. 5 से निकलने पर वहां बाहर एक भुट्टे वाला, भुट्टे उबालकर बेचता है. हालाँकि, भुट्टे तो बचपन से खाता रहा हूँ, लेकिन सच कहूँ तो उबले भुट्टे मैंने पहले नहीं खाए थे. एक दिन टेस्ट किया तो बेहद स्वादिष्ट लगा, नींबू और काला नम



सम्मोहन विद्या के 10 रहस्य, जानिए

सम्मोहन को अंग्रेजी में हिप्नोटिज्म कहते हैं। इस प्राचीन विद्या का एक ओर जहां दुरुपयोग हुआ और हो रहा है, वहीं इस विद्या के माध्यम से लोगों का भला ‍भी किया जा रहा है। भला करने वालों का अपना स्वार्थ भी उसमें शामिल है। सम्मोहन के बारे में हर कोई जानना चाहता है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में वह इसे समझ



योग और ध्यान

दस साल तक बिल्कुल मासूमफिर भी पहले वर्ष से ही बस्ते में गुमबीस साल तक पढ़ाई,बाद बीस के पढ़ाई को पूर्णविरामऔर सुरक्षित भविष्य को जद्दोजहद 25 वर्ष तक शादी की आसकालसैंटरों ने किया लेकिन बहुत बुरा हालतीस वर्ष तक जब-तब काम की तलाशइंजीनियरिंग के बाद भी अर्धबेकारऑनरोड़ कनौपी लगाने की थमें न तलाशचालीस वर्ष



नेपाल में भूकंप आया तो किसी के लिए बिप्पत लाया तो किसी के लिए धन का बरसा हुवा I

दोस्तों आज भूकंप के बाद नेपाल का परिस्थिति को देखने पर मुझे दो चीजो का ख्याल आता है ई पहला तो ये की यहाँ के जो पहाड़ी मूल के नेता लोग है वो लोग अपने आप को बहुत बड़े भाग्यशाली समझते है, क्युकी इनको जिन काम के लिए यहाँ पे भेजा गया था संबिधान बनाने के लिए वह काम तो अब भूल गया या इनकी नियत उलट गयी I अब तो



अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर भारत

टी.वी, रेडियो, दूरसंचार, मौसम की भविष्यवाणी करने, अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन संवादों, सुरक्षा उपायों, जासूसी करने, दूरस्थ ग्रह-नक्षत्रों का अध्ययन करने के लिए कृत्रिम अपग्रह अंतरिक्ष में भेजे जाते हैं। संसार का पहला उपग्रह स्पुतनिक-1 था। इसे 4 अक्तूबर, 1957 को सोवियत संघ से अंतरिक्ष में छोड़ा गया था। आज



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