Sweet Pagal Rap Song लेखक दीनदयाल सरोज

Sweet सा पागल हू ,मस्ती में रहता हु देख भाई तेरा अब वीडियो में रहता है ,पहले तो भाई तेरा isqa में रहता था ,जब भी कॉल आता बिजी बताता था ,दोस्त मेरे मुह पे गाली दे जाते थे जब मेरा Call Busy जो आता था लड़की थी Temu गांव उसकी भानु कहती थी Sweet



माँ के आशीष बिना जीत कहाँ होती है,I

माँजिस्म से रूह तक ,एक-एक रुआँ होती है,वो तो माँ है सारी, दुनियाँ से जुदा होती है, उसकी प्यारी सी, थपक आँख सुला देतीहै,माँ तो पलकों से, भर- भर के दुआ देती है ये जो दौलत है, बेखोफ़ जिगर, शौहरत, हैमाँ के आँचल की, हल्की सी हवा होतीहै I चाहे दुनियाँ ही, रुके, सांस भले थम जाये,माँ की मम



पाकिस्तान आज के युग में भी कुफ्र काफिर की मानसिकता से ग्रस्त है

पाकिस्तान आज केयुग में कुफ्र काफिर की मानसिकता से ग्रस्त है डॉ शोभा भारद्वाज मजहब के नाम पर पकिस्तान का निर्माण हुआ थायहाँ अल्पसंख्यको को पाकिस्तान में निरंतरनिशाना बनाया जाता रहा है .इस्लाम के सभीअनुयायी मुसलमान कहलाते हैं हैं लेकिन फिरभी वह कई पंथों में बंटे हैं अलग – अलग पन्थ के मुस्लिम भी सुर



आज सात जनवरी है , मेरा दर्द

आज सात जनवरी है मेरा दर्द डॉ शोभा भारद्वाज आन्दोलन के नाम पर शर्तेमनवाने के लिए सड़के रोक लेना कभी इस जाम में फंसी सीरियस रोगियों ,प्रसव पीड़ा सेतड़पती महिलाओं को ले जाती एम्बूलेंस , थ्रीव्हीलर या गाड़ियां जिनमें सीरियस मरीज निराशासे रास्ता रोके खड़े लोगों के सामने गिड़गिड़ाते स्वजन प्लीज रास्ता दे दीजिय



वैक्सीन पर सियासत क्यों ?

वैक्सीनपर सियासत क्यों?डॉशोभा भारद्वाज ईरानमें चाय पीने का अलग ढंग है घर में हर वक्त चाय हाजिर रहती है .वहाँ की चाय औरकहवा खाने मशहूर हैं शाम को कहवा खानों में किस्सा गोई चलती है घरों में भी ठंड केदिनों में अलादीन मिट्टी के तेल का स्टॉप जलता रहता है घर भी गर्म करता है उस परउबलने के लिए पानी रख देते



आशनाई मित्तल फ्रॉम हैदराबाद कॉल गर्ल्स विल एअसे योर टेंशन्स

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प्रजातंत्र का नया ट्रेंड .धरने , रेल, सड़के रोकना , डेरे डाल कर राजधानी घेरना

प्रजातंत्र का नयाट्रेंड , धरने, सडकें रोकना, डेरे डाल कर, राजधानी घेरना डॉ शोभा भारद्वाज कृषि कानून किसानोंके हित में है या नहीं यह विचारणीय विषय है लेकिन अनेक नेता अपनी राजनीतिक जमीनतलाशने के चक्कर में किसान नेताओं के साथ दिन में बैठे दिखाई देते हैं बेशकउन्होंने अपने घर गमले में धनिया या बैगन उग



देश में ‘‘लोकतंत्र‘‘ ‘‘खत्म’’ हो गया है! राहुल गांधी! सही!/?

महामहिम राष्ट्रपति को किसानों के मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसदों द्वारा अपने नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च कर ज्ञापन सौंपने की अनुमति देने के बजाए धारा 144 लागू किये जाने पर राहुल गांधी को यह कहना पड़ गया कि देश में ‘‘लोकतंत्र समाप्त‘‘ हो गया है। रात्रि की अंधकार की गहरा



‘‘गांधी‘‘ के ‘‘साथ‘‘व ‘‘गांधी‘‘ के ‘‘बिना‘‘ ही कांग्रेस का ‘‘अस्तित्व एवम नियति‘‘ है।

पूर्व में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की कांग्रेस हाई कमांड को लिखी गई ‘चिट्ठी’ पर सोनिया गांधी के ‘‘बुलावे’’ पर इन समस्त ‘‘तथाकथित असंतुष्टों‘‘ व नाराज नेताओं की एक चिंतन बैठक हुई। ‘चिंता’ की सीमा तक कांग्रेस की ‘‘चिंताजनक स्थिति‘‘ हो जाने के कारण बैठक को उपयोगी बनाने हेतु‘‘ चिंतन बैठक‘‘ का नाम देना तो



जम्मू कश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव परिणाम अमन शांति की और बढ़ते कदम हैं

जम्मूकश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव परिणाम अमन शांति की और बढ़ते कदम डॉ शोभाभारद्वाज जम्मूकश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव संसद द्वारा धारा 370 की समाप्ति के बाद हुएगुपतार गठ्बन्धन का चुनावों में हिस्सा लेना परोक्ष रूप से अनुच्छेद 370 कीसमाप्ति पर स्वीकृति थी 370 का काल गुजर गया . महबूबा



सरकार और किसान नेता क्या ‘‘दिशाहीन‘‘ होकर मुद्दे से ‘‘भटक गये‘‘ या ‘‘परस्पर भटका‘‘ रहे है?

किसान आंदोलन के 22 दिन हो गये है। लेकिन अभी तक दोनों पक्षों के अंतिम निष्कर्ष व निर्णय पर पंहुच न सकने के कारण स्थिति रबड़ के समान खिंच कर वापिस न आने के कारण पूर्वतः दो विपरीत छोरों पर (दिल्ली सीमा के दोनों पार) रुकी हुई है। लेकिन इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि इन 21 दिनों में कुछ भी सकारात्मक व नका



बिना विचार जो करे सो पाछे पछताए (कहानी)

रसीला एक किसान था जो खेती के साथ गाय, मुर्गी और बकरिओं को पालता था | वह एक आम इंसान था जो हर रोज़ आपने खेत के फसलों को देखता | रसीला की महीने की कमाई पूरी तरह से इस्तेमाल हो जाती थी, और बाकि के काम के लिए कुछ बचता नहीं था - उसका हमेशा मन था के एअक बड़ा घर बनाले



कनाडा के प्रधान मंत्री टूडो की वोट बैंक की नीति

कनाडा केप्रधान मंत्री टूडो की वोट बैंक साधने की राजनीति डॉ शोभा भारद्वाज पंजाब केबाशिंदों में कनाडा जाने की इच्छा प्रबल रहती है .वहाँ की कुल जनसंख्या मेंभारतीयों की संख्या 16 लाख से भी अधिक है .इन प्रवासियों की संख्या में सिखों कीसंख्या सबसे ज्यादा है . कनाडा में सिख समुदाय बेहद मज़बूत हैं वह उ



किसान आंदोलन! उत्पन्न ‘‘आशंका के परसेप्शन‘‘ को दूर करने के लिए सरकार को ‘‘कदम उठाने‘‘ ही होंगे।

अभी हाल में ही मैंने बिहार विधानसभा के आम चुनाव और मध्य प्रदेश के उपचुनावों के संबंध में यह लिखा था कि ‘‘अंकगणित की जीत‘‘ के साथ ही उससे उत्पन्न ‘‘परसेप्शन‘‘ को जीतने पर ही ‘‘जीत पूर्ण‘‘ कहलाती है। किसान आंदोलन को देखते हुए परसेप्शन का उक्त सिद्धांत संसद एवं सरकार द्वारा लागू अधिनियम एवं लि



सत्ता माँ की गोद नहीं है

सत्ता माँ की गोद नहीं है डॉ शोभा भारद्वाज 26 / 11 तीन दिनों तक चला आतंकी हमला इसका मास्टर माईंड हाफिज सईद था ,हमले में देश विदेश के अनेक लोग ,पुलिस कर्मी शहीद हुए उन शहीदों को ‘नमन’ 300 घायल थे . अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पुस्तक में 26 /11 के आतंकी हमले का जिक्र करते हुए लिखा ह



गुपतार डिक्लरेशन , आर्टिकल 370 की बहाली का गठबंध

गुपतार डिक्लरेशन, आर्टिकल 370 की बहाली का गठबंधन?डॉ शोभा भारद्वाज पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती का का झुकाव सदैव पाकिस्तान की तरफ रहा है उनकी भाषा बदलती रहती है जब वह सत्ता में रहती हैउनकी भाषा अलग होती है सत्ता से हटते ही अलग तेवर दिखाती है .अब पाकिस्तान कमजोर पड़ता जा रहा है आये दिन पाकिस्तान की



कविता क्या है?

कविता क्या है?सुबह के सूर्य से लेकर, निशा का चाँद है कविताभरे रस छन्द हो जिसमें, वही इक स्वाद है कविताविरह की वेदना संवेदना श्रंगार है कविताभरी जो भावना उर में, वही उद्गार है कवितालिखी जो पन्त दिनकर ने, ह्रदय का प्यार है कविताभरे जो दर्द घावों को, वही उपचार है कविताकड़ी सी धूप में मिलती, वही इक छांव



भगवान

होड़ लगी है भगवान तेरे दर पर सीष झुकाने की माँ बाप से लड़कर ही सही जल्दी है तेरे दर पर आने की होड़ लगी है भगवन..... भूके को एक रोटी न दे पर जल्दी है तेरा भोग लगाने की होड़ लगी है भगवन ........ प्या



‘‘न्यूटन के गति‘‘ का नियम क्या ‘‘अपराधिक राजनीति पर भी लागू होता है?

‘‘न्यूटन‘‘ क्या भारतीय राजनीति को ‘‘न्यूट्रल‘‘ कर देगें?मैं विज्ञान का छात्र रहा हूं। बचपन में मैंने पढ़ा है कि ‘‘न्यूटन के गति‘‘ के तीसरे नियम के अनुसार ‘‘हर क्रिया के बराबर (समान) और विपरीत प्रतिक्रिया होती है‘‘। प्रसिध्द वैज्ञानिक ‘‘न्यूटन‘‘ ने अपनी पुस्तक ‘‘प्रिंसीपिया मैथमैटिका‘‘ (वर्ष 1687) के



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