हीं

“चतुष्पदी”सुना था कल की नीरज नहीं रहे।

सादर नमन साहित्य के महान सपूत गोपाल दास ‘नीरज’ जी को। ॐ शांति। “चतुष्पदी”सुना था कल की नीरज नहीं रहे। अजी साहित्य के धीरज नहीं रहे। गोपाल कभी छोड़ते क्या दास को- रस छंद गीत के हीरज नहीं रहे॥महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



मृगतृष्णा का जाल बनता गया.........

भावनाओं का चक्रव्यूह तोड़ स्मृतियों के मकड़जाल से निकल कच्ची छोड़,पक्की डगर पकड़ लालसाओं के खुवाओं से घिराभ्रमित मन का रचित संसार लिए.....रेगिस्तान में कड़ी धूप की जलधारा की भांति सपनें पूरे करने......चल पड़ा एक ऐसी डगर.......अनजानी राहें,नए- लोग चकाचौंध की मायावी दुनियां ऊँची-ऊँची इमारतों जैसे ख्वाब हकीक



सर्वोच्च निर्णय! कोई सर्वोच्च नहीं!

माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध दिल्ली सरकार की अपील पर माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देकर जो व्यवस्था की, उसका घोषित प्रभाव यह हुआ कि संवैधानिक रूप से दिल्ली में न तो मुख्यमंत्री ही और न ही उपराज्यपाल सर्वोच्च है। उच्चतम न्यायालय ने चुनी हुई सरकार के महत्व को स्थाप



क्यों नहीं मिलता पूजा पाठ का फल ?

धर्म गुरु श्री राज कृष्ण शर्मा जी +91 9216111690 गुरु जी प्रतिदिन सुबह 7:15 बजे You Tube Channel, INC MEDIA ASSOCIATES ( https://www.youtube.com/channel/UCyAq... ) पर लाइव रहेंगे नमस्कार दर्शकों, आज के इस वीडियो में बताय



अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रम्प एवं उत्तरी कोरियन तानाशाह किम जोंग

अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रम्प एवं उत्तरी कोरिया के तानाशाह किम जोंग डॉ शोभा भारद्वाज नदी के दो किनारे मिलना असम्भव है लेकिन राजनीति में सब कुछ सम्भव | लगभग एक



प्यार

प्यार एक ऐसा शब्द है जो सुनते ही मन खिल उठता है.......प्यार से प्यारा इस दुनिया में कुछ भी नहीं है. .....प्यार दो दिलो की दास्ताँ है .....प्यार दो दिलो का संगम है .........प्यार के बिना ज़िन्दगी अधूरी है .........प्यार के बिना जीवन अधूरा है .........लेकिन प्यार में



संकळप

आज हम ऐसे समाज में रह रहे है , जहां हम ये नही कह सकते की ये काम मुझे से नहीं हो पायेगा | सिर्फ हम लोगो लोगों को एक संकल्प लेके चलना पङेगा की कुछ भी हो जाये हम रुकेंगे नहीं | कोई भी काम बिना संकळप के पूरा नही हो सकता चाहे काम



डाॅक्टर बनने की राह आसान बनाने हेतु एक सार्वजनिक अपील

माउंटेन मैन के नाम से विख्यात दशरथ मांझी को आज दुनिया भर के लोग जानते हैं। वे बिहार जिले के गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे, जिन्होंने अकेले अपनी दृ़ढ़ इच्छा शक्ति के बूते अत्री व वजीरगंज की 55 किलोमीटर की लम्बी दूरी को 22 वर्ष के कठोर परिश्



अंक नहीं जीवन का आधार

12वीं कक्षा के समस्त विद्यार्थियों को परीक्षा मैं उत्तीर्ण होने की हृदय तल से बधाई । लेख **अंक नहीं जीवन का आधार** अक्सर देखा गया है कि 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों में परीक्षा परिणाम को लेकर बहुत भय रहता है । परीक्षा का परिणाम



“गीतिका”

“गीतिका”रात की यह कालिमा प्रहरी नहीं दिन उजाले में डगर ठहरी नहींआज वो भी छुप गए सुबहा हुई जो जगाते समय को पहरी नहीं॥ रोशनी है ले उड़ी इस रात को तब जगाती पकड़ दोपहरी नहीं॥चाहतें उठ कर बुलाती शाम कोगीत स्वर को समझना तहरी नहीं॥ताल जाती बहक बस इक भूल परज़ोर ठुमका कदम कद महरी नही



“गज़ल” नज़ाकत गरज पर सुहाती नहीं है॥

“गज़ल”गज़ल की पजल मुझको आती नहीं है मगर चाह लिखने की जाती नहीं है करूँ क्या मनन शेर जगकर खड़ा जब बहर स्वर काफ़िया अपनी थाती नहीं हैं॥ लिखने की चाहत जगी भावना में कभी वह भी मुखड़ा छुपाती नहीं है॥सुनते कहाँ हैं शब्द अर्था अनेका बचपने की यादें भुलाती नहीं हैं॥ लगा हूँ तेरी आस



“मुक्तक” सुर्ख गाल नहीं तकता

“मुक्तक”मचल रहा है चीन, गिन रहा अपना पौवा। ले पंख दूरबीन, चढ़ाई करता कौवा। काँव काँव कर नोंच, चोंच मारे है पगला- अंगुल भर की जीभ, हिलाये कचरा हौवा। धावा बोले मुर्ख, सुर्ख गाल नहीं तकता। कबसे लहूलुहान, हुआ है घायल वक्ता। झूठा उसका दं



जिंदगी के १० ऐसे सच जिसका साइंस के पास नहीं कोई जवाब

जिंदगी के १० ऐसे सच जिसका साइंस के पास नहीं कोई जवाब



"गीतिका" आज कहाँ गुम हुई री गुंजा झलक दिखलाती नहीं गलियारों में।।

"गीतिका"काश कोई मेरे साथ होता तो घूम आता बागों बहारों मेंबैठ कैसे गुजरे वक्त स्तब्ध हूँ झूम आता यादों इशारों में पसर जाता कंधे टेक देता बिछी है कुर्सी कहता हमारी हैराह कोई भी चलता नजर घूमती रहती खुशियाँ नजारों में॥प्यार करता उन दरख्तों को जो खुद ही अपनी पतझड़ी बुलाते हैं आ



“गीतिका” खेल खिलौना सुखद बिछौना नींद नहीं अधिकार की॥

“गीतिका”जाने कब धन भूख मरेगी, दौलत के संसार की शिक्षा भिक्षा दोनों पलते, अंतरमन व्यवहार कीइच्छा किसके बस में होती, क्यों बचपन बीमार है उम्र एक सी फर्क अनेका, क्या मरजी करतार की॥ भाग सरीखा नहीं सभी का, पर शैशव अंजान है खेल खिलौना सुखद बिछौना, नींद नहीं अधिकार की॥ उछल कूदना



कहीं दाग दे न जाए क्यूँ कर हिला दिया, गजल-गीतिका

"गीतिका-गज़ल"चाय की थी चाहत गुलशन खिला दिया सैर को निकले थे जबरन पिला दियाउड़ती हुई गुबार दिखी दो गिलास मेंतीजी खड़ी खली थी शाकी मिला दिया।।ताजगी भर झूमती रही तपी तपेलीसूखी थी पत्तियाँ रसमय शिला दिया।।रे मीठी नजाकत नमकीन हो गई तूँचटकार हुई प्याली चुस्की जिला दिया।।उबलती रही



"पराली- कोई चारा भी तो नहीं?"

"पराली- कोई चारा भी तो नहीं?" लगता है समय आ गया है पीछे मुड़कर देखने का। उन्हें याद करने का जिन्होंने मानव और मानवता को जीने का वैज्ञानिक तरीका तब निजाद किया था, जब न मानव मानव को जानता था न मानवता परिभाषित थी। लोग स्वतः विचरण करते थे और रहन- सहन, भूख-भरम, आमोद- प्रमोद, स



ऋतु बदली नहीं आप की साथियाँ॥ गजल

“गज़ल”आप के पास है आप की साखियाँ मत समझना इन्हें आप की दासियाँगैर होना इन्हें खूब आता सनम माप लीजे हुई आप की वादियाँ॥कुछ बुँदें पिघलती हैं बरफ की जमी पर दगा दे गई आप की खामियाँ॥दो कदम तुम बढ़ो दो कदम मैं बढूँइस कदम पर झुलाओ न तुम चाभियाँ॥मान लो मेरे मन को न बहमी बुझो देख



कुछ फायदा नहीं

कुछ फायदा नहींमैं सोचता हूँ, खुद को समझाऊँ बैठ कर एकदिनमगर, कुछ फायदा नहीं ||तुम क्या हो, हकीकत हो या ख़्वाब होकिसी दिन फुर्सत से सोचेंगे, अभी कुछ फायदा नहीं ||कभी छिपते है कभी निकल आते है, कितने मासूम है ये मेरे आँशुमैंने कभी पूछा नहीं किसके लिए गिर रहे हो तुमक्योकि कुछ फायदा नहींतुम पूछती मुझसे तो



देश मेरा बढ़ रहा है ( कुलदीप पाण्डेय आजाद )

देश मेरा बढ़ रहा | प्रगति सीढ़ी चढ़ रहा |देश के उत्थान में सब,साथ मिल अब चल रहे हैं |खून से सींचा जिसे था , हर सुमन अब खिल रहे हैं |कंटकों को आज देखो स्वम ही वह जल रहा है | देश मेरा बढ़ रहा |गोद में बैठे अभी तक ,



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x