हीं



सीकचे

बहुत अच्छे है वे लोग जो सीकचो में है उनके हाथो और पैरो में बेड़िया है उन्हें पता है वे किस जुर्म की सजा भुगत रहे है .......पर वोजिनके सीकचे दिखाई नहीं देते और न ही दिखाई देती है उनके हाथो और पैरो की बेड़ियाउन्हें नहीं पता की उनकी सजा किस जुर्म की है......ता उम्र यही ढूँढती रहती है और उम्र कट जाती है .



जि

जिंदगी कभी रूकती नहीं हालत गंभीर होते है



हिंदी: सिर्फ मेरी नहीं

मेरी होती सिर्फ ये भाषा तो मैं चुप ही रहताखुद में ही सीमित रहता सबसे मैं न कहतासबसे पहले जान लो मैंने खुद से ही कहा हैतौल लूँ क्या हिंदी का ह्रदय में प्रतिमान रहा हैपाया है स्वर अपना मैंने इसी वेग में बहतामेरी होती सिर्फ ये भाषा तो मैं चुप ही रहतातुम भी जानो जब अंतर के भाव उमड़ हैं आतेनैनों का ये नीर



कहीं कविता तो नहीं...

तुम...सम्पूर्ण कल्पना भी नहीं,और ना ही तुम सम्पूर्ण सत्य ही हो । मस्तिष्क पटल पर शब्दों से खिंची,आड़ी-तिरछी स्पंदित रेखाओं की अनबुझी सी कोई मूरत हो ।सोंधी मिट्टी के लोंदे से बनी कोई अनजान सी स्वप्निल सूरत हो । सत्य और स्वप्न के बीच झूलत



भूकम्प से डरें नहीं

धरती के कम्पन यानि 'भूकम्प' से भयभीत न हों, बल्कि इससे निपटने के लिए सबसे पहले अपने मन को तैयार करें. ये कहने की आवश्यकता नहीं कि प्राकृतिक शक्तियों से लड़ना, कोई आसान काम नहीं होता. इस पर भी यदि लापरवाही बरती जाये तो क्षति स्वाभाविक है. उदाहरण के लिए, जब पहले-पहल धरती पर कम्पन महसूस होता है तो विशेष



प्यार की अभिव्यक्ति

मै तुझसे पयार नहीं करता पर सायद ऐसा कोई दिन है क्या जब याद टूजी तेरी बातो को सौ सौ बार नहीं करता



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