क्या हिंदी ब्लॉग करना आसान है?

<!-- wp:zozuk/wphindi -->करना चाहो तो सब आसान है और न करना चाहो तो हर काम मुश्किल। सवाल ये होना चाहिए की क्या हिंदी ब्लॉग्गिंग करना फायदेमंद है । क्या 2021 में हिंदी ब्लॉग्गिंग का कोई भविष्य है?तो मैं कहूंगी जी हां! बहुत फयदेमंद है मै खुद एक हिंदी ब्लॉगर हूँ और अपने ह



चलो चले हम हिंदी सीखें

हिंदी पत्रकारिता के दिवस पर हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालती श्री मती मनीषा राम रक्खा की कविता ,इन्होने फिजी वासी ,भारतवंशियों को हिंदी का महत्व समझाने , हिंदी लिखने पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया एवं हिंदी साहित्य के शिक्षण का महत्व पूर्ण कार्य किया आज भी वह हिंदी विकास के लिए निरंतर प्रयत्न शील हैं



हिंदी

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कोरोना का एक वर्ष

जीवन को पुनर्जीवित कियाधन्यवाद तुमको कोरोना ।जीवन में महत्वपूर्ण क्या ?बताया तुमने कोरोना ।।1।।कैसे बढ़े प्रतिरोधक क्षमता ?सिखलाया तुमने कोरोना ।करो संघर्ष, पर डरो ना,पढ़ाया तुमने कोरोना ।।2।।तकनीक ने क्या दिया ?तकनीक की भूमिका क्या ?तकनीक का प्रयोग करके,आगे बढ़ो, कभी ठ्हरों ना ।।3।।घर बार हो कैसा?जीवन



हिंदी हिंदुस्तान की

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लिखना है अब हिंदी में

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वंदेमातरम

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ओ, सुदामा

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हिंदी वैज्ञानिक भाषा है

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पतझर

पतझड़ में सूखे पत्ते, यू बिखरे हैं,जिस तरह बिखर जाते हैं कभी,वह अपने ||



नयी उम्मीदें

खुद ही से मैं नज़रें चुराने लगी हूं,उन यादों से दामन छुड़ाने लगी हूँ ।खुद ही से खुद ही का पता पूछती हूँ,न जाने कहाँ मैं विलीन हो चुकी हूँ ।अरमानों को अपने दबाने लगी हूँ,पहचान अपनी भुलाने लगी हूँ ।भटकने लगी राह मंज़िल की अपनी,कहूँ क्या किधर थी, किधर को चली हूँ । ....और पढ़ें



शब्दों की माला

शब्दों की मालाशब्दजब तक मुझको न था उचित ज्ञान,शब्दों के प्रयोग से थी मैं अनजान,न था इन पर मेरा तनिक ध्यान,न ही थी इनकी मैं कद्रदान।मंडराते थे ये मेरे आसपास,छोड़ते न थे कभी मेरा ये साथ,इनको मुझसे थी यही एक आस,कभी तो इनका मुझे होगा एहसास।धीरे से मुझे इनसे प्यार हुआ,इन शब्दों



मां

माँ! तुम्हारी बस इतनी सी कहानी।दर्द-दुख-सुख-बच्चे औ, कुर्बानी।जन्म देकर जननी जब तुम बन गई।मानो खुद की खुद से ही ठन गई।अपने सपने और शौक हुए पुराने।बच्चों के सुख-दुख निज तुमने माने।नौ माह कोख और जनन की पीड़ा।तुम सह गए समझ प्रिय-बाल-क्रीड़ा।



लगता है तुम्हारा भूत उतारना ही पड़ेगा / जोक्स

ऑफिस में मेरे दोस्त ने सलाह दी कि बीवी से बहस में कभी नहीं जीता जा सकता है। इसलिए, बीवी की किसी भी बहस वाली बात पे हल्का सा मुस्कुरा दिया करो ! घर में कभी अशांति नहीं रहेगी



उठो बहना शमशीर उठा लो....

"उठो बहना शमशीर उठा लो..."उठो बहना शमशीर उठा लोसोयी सरकार न जागेगीहर घर में है दुःशासन बैठाऔर कब तक तू भागेगी...?समय आ गया फिर बन जाओतुम झाँसी की रानीशमशीर उठाकर लिख डालोएकदम नई कहानीमरते दम तक याद रहेसबको एकदम जुबानी....।उठो बहना शमशीर उठा लोबन जाओ तुम मरदानीकोई नज़र



बहुत याद आता है.. वो गुजरा जमाना

बहुत याद आता है..वो गुजरा जमाना...बहुत याद आता है, वो गुजरा जमानावो बीता बचपन, हरकतें बचकानाआपस में लड़ना, फिर रूठना-मनानाचंदा मामा का आना, खाना खिलानासुबह का कलेवा, वो बासी खानाजिसके बिना दिन, लागे सूना-सूना।दादा-दादी के पास, नित होता था सोनानीदिया रानी का आना, चुपके से सुलानापरियों की कहानी का, नित



विशुद्ध किसान गुदड़ी के लाल

विशुद्ध किसान गुदड़ी के लालहम किसान हमें खेती प्याराहम कुछ भी उगा सकते हैंइस जग में दूजा काम नहीं जो मेरे मन को भा सकते हैं।हम उस किसान के बेटे हैंसंभव है तुझको याद नहींजय जवान जय किसान का नाराबिल्कुल तुझको है याद नहीं।ईमानदारी जिसके रग-रग में समायाबेमिसाल ऐसा इनसान कहाँसादा जीवन और उच्च विचार होमिलत



हे कवि मन हिंदी की जय बोल

हे कवि मन, हिंदी की जय बोलजिसने निजभाषा का मान बढ़ायाहिंदी को जन - जन तक पहुँचायाराजभाषा का दर्जा भी दिलवायाहे कवि मन, हिंदी की जय बोल।जो घर-घर में बोली जाती हैजो सबके मन को हरसाती हैसभी जाति धरम को भाती हैहे कवि मन हिंदी की जय बोल।जिसके बावन अक्षर होते हमारेकवि जिससे प्रकृति को चितारेजो जनमानस के भा



रिज़वी महाविद्यालय में हिंदी काव्य-पाठ का आयोजन संपन्न

रिज़वी महाविद्यालय में ऑनलाइन मंच के माध्यम से दो दिवसीय 'हिंदी काव्य-पाठ समारोह' सम्पन्नरिज़वी महाविद्यालय कला, विज्ञान एवं वाणिज्य के कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी विभाग के तत्वाधान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में दो दिवसीय 'हिंदी काव्य-पाठ समारोह' का आयोजन संपन्न हुआ। दोनों दिन समारोह का शुभारंभ सरस्वती



हिंदुस्तान के युव हिंदी अब कहते भी शर्माते हैं

हिंदी दिवस पर विशेष___ *प्रतियोगिता हेतु* *मातृभाषा,हिन्दी* *हास्य,कविता* 🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦 देश हमारा उन्नति पर है, सब अंग्रेजी बतलाते हैं ।हिंदुस्तान के युवा हिंदी, अब कहते भी शर्माते है ।🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷कविता हो या छन्द-वन्दना,



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