Archana Ki Rachna: Preview " मेरी ज़िन्दगी का रावण "

अपनी ज़िन्दगी के रावणअब मुझे जलाने हैंमान मर्यादा लोक लाजके बंधन अब मुझेभुलाने हैंमैं प्यारी और दुलारी थीजब तक अपनीउपेक्षा सेहती रहीतुम्हारे बेटा बेटी के दुर्भाव मेंमैं अपने अधिकार छोड़ती रहीतुम्हारी इस मानसिक सोचसे मुखौटे अब हटाने हैंअपनी ज़िन्दगी के रावणअब मुझे जलाने हैंतु



Archana Ki Rachna: Preview "मनमर्ज़ियाँ"

चलो थोड़ी मनमर्ज़ियाँ करते हैं पंख लगा कही उड़ आते हैंयूँ तो ज़रूरतें रास्ता रोके रखेंगी हमेशापर उन ज़रूरतों को पीछे छोड़थोड़ा चादर के बाहर पैर फैलाते हैंपंख लगा कही उड़ आते हैंये जो शर्मों हया का बंधनबेड़ियाँ बन रोक लेता हैमेरी परवाज़ों कोचलो उसे सागर में कही डूबा आते हैंपंख लगा



हिंदी भाषा का दबदबा कहां तक?

क्या हिंदी भाषा वैश्विक भाषा है या ये केवल भारत तक ही सिमित है?



मौजूदा लेखकों की चुनौतियां

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Scorpio Horoscope Today: Scorpio (वृश्चिक) Horoscope Today- 05-10-2019 (Friday)

पॉजिटिव:- वृश्चिक राशि वालो के लिए आज का दिन शुभ, फलदायी होगा। परिवार में भी आज ठीक और आपके अनुकूल परिस्थति रहेगी। परिवार के बड़ो के साथ कुछ समय निकले आपको आनंद महसूस होगा। लम्बी यात्रा का प्लान बन सकता है। आप जो भी कार्य कर रहे है उसमे सफलता मिल सकती है जिसके कारण आपकी आर्थिक स्थिति ठीक हो सकती है।



अब हिंदी में भी पसंद किया जा रहा है डिजिटल किताबों को।

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कुछ मशविरा ऐसा भी दो

मेरे बुझने पे जो तुम हंसने लगेचिराग हूँ, फिर जल जाऊंकुछ मशविरा ऐसा भी दो तो जानेमेरे मुरझाने पे जो तुम हंसने लगेफूल हूँ, फिर खिल जाऊंकुछ मशविरा ऐसा भी दो तो जानेमेरे टूटने पे जो तुम हंसने लगे शीशा हूँ , फिर जुड़ जाऊंकुछ मशविरा ऐसा भी दो तो जाने



Archana Ki Rachna: Preview " मैं बदनाम "

ऐसा क्या है जो तुम मुझसेकहने में डरते हो पर मेरे पीछे मेरी बातें करते हो मैं जो कह दूँ कुछ तुमसे तुम उसमें तीन से पांचगढ़ते होऔर उसे चटकारे ले करदूसरों से साँझा करते होमैं तो हूँ खुली किताबबेहद हिम्मती और बेबाक़रोज़ आईने में नज़रमिलाता हूँ अपने भीतर झाँक, फिरऐसा क्या है जो



Archana Ki Rachna: Preview "देखो फिर आई दीपावली"

देखो फिर आई दीपावली, देखो फिर आई दीपावलीअन्धकार पर प्रकाश पर्व की दीपावली नयी उमीदों नयी खुशियों की दीपावली हमारी संस्कृति और धरोहर की पहचान दीपावली जिसे बना दिया हमने "दिवाली"जो कभी थी दीपों की आवलीजब श्री राम पधारे अयोघ्या नगरीलंका पर विजय पाने के बादउनके मार्ग में अँ



कही हम बदल न जाये

गिरते-संभलते जैसे तैसे जीवन मे चलना सीखा था,खुदा ईशवर बस नाम ही सुनाये कभी कहा दिखा था।बचपन से माँ की ममता देखते पले बड़े,आज भी ममता के आंचल के कारण है खड़े।ईश्वर की माया देखी जो मा मिली है।जिसके कारण जिंदगी आज खिली खिली है।जन्म से जिसकी सूरत देखी,जिसको सबसे पहले पहचाना,लगता नही आज भी मैंनेउसे भले ढं



Archana Ki Rachna: Preview "मैं हूँ नीर "

मैं हूँ नीर, आज की समस्या गंभीरमैं सुनाने को अपनी मनोवेदनाहूँ बहुत अधीर , मैं हूँ नीरजब मैं निकली श्री शिव की जटाओं से ,मैं थी धवल, मैं थी निश्चलमुझे माना तुमने अति पवित्रमैं खलखल बहती जा रही थीतुम लोगों के पापों को धोती जा रही थीपर तुमने मेरा सम्मान न बनाये रक्खाऔर मुझे



Archana Ki Rachna: Preview "इस बार की नवरात्री "

इस बार घट स्थापना वो ही करेजिसने कोई बेटी रुलायी न होवरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश के दिखावे में जब तुम बेटी की हत्या करते हो अपने गंदे हाथों से तुम ,उसकी चुनर खींच लेते होइस बार माँ पर चुनर तब



जीवन की रामकहानी

जीवन की रामकहानी कितने ही दिन मास वर्ष युग कल्प थक गए कहते कहते पर जीवन की रामकहानी कहते कहते अभी शेष है || हर क्षण देखो घटता जाता साँसों का यह कोष मनुज का और उधर बढ़ता जाता है वह देखो व्यापार मरण का ||सागर सरिता सूखे जाते, चाँद सितारे टूटे जाते पर पथराई आँखों में कुछ बहता पानी अभी शेष है ||एक ईं



हिंदी दिवस पर प्रस्तुत गीत

"गीत"हिंदी हिंद की जान है, आन बान और शान हैभारत के हर वासी का, युग-युग से पहचान हैहर बोली में लहजा हिंदी, हर माथे पर सोहे बिंदीघर-घर में इंसान है, आँगन मुख मुस्कान है.......लिखना रुचिकर पढ़ना रुचिकर, रुचिकर है आठो डाँड़ीहिंदी के हर शब्द में बहती, गंगा यमुना की नाड़ीस्वर व्यंजन की आरती, प्रिय प्रतीक माँ



भरी भीड़ में मन बेचारा

पितृपक्ष चल रहा है | सभी हिन्दू धर्मावलम्बी अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धासुमन समर्पित कर रहे हैं | हमने भी प्रतिपदा को माँ का श्राद्ध किया और अब दशमी कोपिताजी का करेंगे | कुछ पंक्तियाँ इस अवसर पर अनायास ही प्रस्फुटित हो गईं... सुधीपाठकों के लिए समर्पित हैं...भरी भीड़ में मन बेचारा खड़ा हुआ कुछ



ईरानी ( पर्शियन ) समाज में हिंदी भाषा का महत्व ( हिंदी दिवस के उपलक्ष में )

ईरानी (पर्शियन )समाज में हिंदी भाषा का महत्व डॉशोभा भारद्वाज मुझेकई वर्ष तक परिवार सहित ईरान में रहने का अनुभव रहा है | ईरान के शाह मोहम्मद रजापहलवी ,पहलवी राजवंश के आखिरी शाह थे उन्होंने शान शौकत के साथ आर्य मिहिर की उपाधिधारण की उनके खिलाफ क्रान्ति का ऐसा म



हिंदी दिवस

अनपढ़ नही हूँ साहब"हिंदी" में लिखना उतना ही अच्छा लगता हैजितना "माँ के हाथों का खाना"हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं



हिंदी दिवस कैसे मनाएं ...

https://duniaabhiabhi.com/how-do-we-celebrate-hindi-day/



हिंदी दिवस

हिंदी दिवस कीसभी को हार्दिक शुभकामनाएँआप सब सोचेंगे कि पूर्णिमा को अब स्मरण हुआ “हिंदी” दिवसका... पर व्यस्तता ही कुछ ऐसी थी... माँ के श्राद्ध का तर्पण... भोजन... ऊपर से“अतिथि देवो भव”... तो अब साँझ को इस सबसे अवकाश पाकर मोबाइल ऑन किया तो देखाहिंदी दिवस के उपलक्ष्य में अनगिनती शुभकामना सन्देश मेरी अभ



हम जुबां

हिंदी है हम वतन है। अपनी अभिव्यक्ति कहने का जतन है, अपनी संस्कृति का न हो पतन, बस यही जतन है। हिंदी है हम वतन है। जुबानें बेहिसाब है जहां में, हम वतन के, खुद के आजाद ख्यालात की, जुबान है हिंदी... अपनेपन का अहसास, खुद के शब्दों की परवाज़ है हिंदी, कोयल की जुबान है हिंदी। हिंदी है हम वतन है...



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