इंसान



कंधा

अर्थ जीते जी तो लोग नजर चुराते हैं, उंगली उठाने में खोए रहते हैं और मरते ही लोग कंधा देने चले आते हैं। चार का रिवाज कम सा हो रहा है। क्योंकि अब के इंसान का शरीर बेदम हो गया है। सिर्फ मुंह में जुबान और हाथ में कमान रह गई है। घरों से कई तानें बाने में बुनी चारपाई हट गई है। जिस पर बैठ लोग कितनी ही बात



सबक..!

आज वह फिर खड़ा है ,कठघरे में ,दोषी बन!वह ,जिसनेइंसान के बड़े से बड़े घाव पर मरहम लगाया। आज उसी के आरोपों से घायल यहाँ आया । कहता है – मैंने हँसाया या रुलाया, हर बार,तुझे सबक ही सिखाया । अनुभव भी दिए, आगे बढ्ने का हुनर भी बताया । ये तो तूने मेरी कद्र नहीं की, अपनी नासमझियों के लिए, मुझे ही दोषी ठहराया



08 अप्रैल 2020

दूर ही रहना

प्यारे देशवासियों,आप सभी जानते हैं इन दिनों हमारा देश कोरोना वायरस जैसी महामारी से जूझ रहा है। यह एक ऐसी भयानक बीमारी है जो एक इंसान से दूसरे में और धीरे-धीरे समाज में फैलती है। आपस में ज़्यादा मिलने जुलने और संपर्क बढ़ने से इसका वायरस बहुत तेजी से फैलता है। सिर्फ एहतियात बरतकर ही इस बीमारी से बचा जा



ब्रह्म ज्ञान

लिखा ओंकार ने कभीबैठकर इक दिन सच में मानव तूँ इक दिन हैरान होगारुकेंगी बसें विमान ट्राम और रेलें बंद पलों मेंसारा सामान होगालिखा ओंकार ने कभी बैठकर इक दिन सच में मानव तूँइक दिन हैरान होगापक्षी चहकेंगे सुखी साँस होगा प्रदूषण रहित तबसारा संसार होगापाताल धरती पानी आकाश पर काबज कैद घर में इक दिनइंसान हो



इंसान की जुबान से

इंसान की जुबान से बड़ी उलझन हैं धर्म,जातिवादमे, नहीं हैं उलझन इंसान मे। हरि,अल्लाह ने मिलकर हर वर्ग मे, नर और नार बनाया।जिससे चलता जग संसार हैं,कर, कर्म माया मोह कमाया।फस इंसान जगत मे,कर्म, माया और मोह से ज्ञान बनाया।कर ज्ञान की परिकल्पना से,वेद,रामायण, संविधान बनाया।जब न चलते बना इंसान से,कार्यपालि



है,जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है! क्या .... यही हिंदोस्तान है ?

है,जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है! क्या .... यही हिंदोस्तान है ? पकड़ो, पकड़ो , .... मारो ,मारो , की आवाज़ों से वहकांप रहा था । एकाएक आवाज़ें नजदीक आने लगी । उसे कुछ समझ नहीं आ रहाथा। वह जड़ खड़ा था, तभीकिसी ने झपट कर उसे खींच लिया और छिपा लिया अपने आँचल में.....थोड़ी दूर का मंजर देखकर वह छटपटाने ल



है, जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है=, ..... क्या , यही हिंदोस्तान है ?

है, जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है .....क्या .... यही हिंदोस्तान है ? पकड़ो, पकड़ो , .... मारो ,मारो , की आवाज़ों से वहकांप रहा था । एकाएक आवाज़ें नजदीक आने लगी । उसे कुछ समझ नहीं आ रहाथा। वह जड़ खड़ा था, तभीकिसी ने झपट कर उसे खींच लिया और छिपा लिया अपने आँचल में.....थोड़ी दूर का मंजर देखकर वह छटपट



जांवरीयत

इंसान में इंसानियत होती है और जानवरों में? कोई कहता है हैवानियत तो कोई कहता है वहशियत जबकि ये सब कुछ इंसानों में ही होती है. इंसानियत, वहशियत और हैवानियत. जानवरों में होती है जांवरीयत जो इंसानियत से कही बेहतर है. जानवरों में लोभ नहीं होता, जानवरों में ब



EK AWAJ (एक आवाज) | The voice of all rape victims

एक आवाजवो जान सी अनजान,वो रोती रही आज,वो मांगे कई माफ़ी,वो लड़ती रही आज,हर इक साँस,कस्ती हुयी,आँखे बंद,ढलती हुयी,पर न ख़तम हुयी आस,वो न शांत,हर इक जान की आवाज,वो भी कह रही आज,



अपने आप को किसी से छोटा न समझे

नमस्ते ,दोस्तों भगवान ने हम सभी को एक जैसा बनाया हे,इंसान बड़ा या छोटा अपने कर्मो से होता हे या फिर कही न कही उसकी काबिलियत में कुछ कमी होती हे तो वह अपने आप को दुसरो से छोटा समझने लगते पर अपनी कमियों को दूर नहीं करते और निराश हो ज



एक अच्छे इंसान की परिभाषा क्या है?

एक अच्छे इंसान की परिभाषा क्या है?एक अच्छा इंसान हमेशा इन बातों का ध्यान रखता है।जिसे हम परिभाषा भी कह सकते है।1 *उसमें ईमानदारी, इंसानियत, मनुष्यत्व , आदि गुण भी जरूर होंगे।2 *वह अपनी सोच मात्र अपने तक ही सीमित नही रखता। अर्थात वह स्वार्थ से दूरी बनाये रखता है। दुसरो के



लोकतंत्र .......?

कैसा है ये लोकतंत्र ?जहाँ जनता है, ओछी मानसिकता और भ्रष्ट राजनीति की शिकार !यहाँ हर दिन नया मुद्दा , मुद्दे पर बहस होती है ,मरती है तो केवल जनता , राजनीति आराम से सोती है। त्रस्त हो चुकी है जनता , अवसाद की शिकार, मासूम जल रहे हैं या जला दिए जा रहे हैं। इंसानियत को गिरता देखकर भी हम गूंगे , बहरे ब



राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर)

..... इंसानियत ही सबसे पहले धर्म है, इसके बाद ही पन्ना खोलो गीता और कुरान का......"जय हिन्द"



जान अभी बाकी हैं

जान अभी बाकी हैं | हरि को नहीं देखा इंसान बनाते हुए|इंसान को देख हैं हरि को बनाते हुए |अमीरों की लकड़ियाँ उनकी अस्थिमंजर हैं|उनकी अस्थिमंजर गरीबो की छत्र छाया हैं |गौर से देखा उनको चौक-चौराहो मे बैठे हुए|सवार ट्रक मे ढ़ोल लंगाड़ो मे रंग गुलाल उड़ाते हुए|जल समाधि की वजह से उनकी काया बदल गई|बची अस्थिमंजर



भारत में एक ऐसा भी मंदिर है जहां गजमुख नहीं इंसान रूप में विराज है भगवान गणेश

भारत का एकमात्र मंदिर जहां गजमुख की नहीं इंसान रूप की होती है पूजादेश में गणेश चतुर्थी बड़े धूम धाम से मनाते है. गणेश चतुर्थी का पर्व पुरे देश में मनाया जाता है यह पर्व १० दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. आपने हमेशा गणेश जी को गजराज मुख



कौन बनेगा इंसान (भाग 2 )

कथा वाचन एक बहुत बड़ी कला है और जो इस कला का माहिर है उसी का राज है. आप को अगर कथा वाचन नहीं आता तो आपकी सच्चाई भी झूठ है, और कथा वाचक की कथा में कुछ हो ना या हो पर भक्तों पर उसका असर ज़रूर पढ़ता है. भक्ति में सच्चाई को नहीं ढूंढा जाता यदि सच्चा



कौन बनेगा इंसान?

कुछ सवाल आप के नाम, इन सवालों का जवाब दे कर आप करोड़ पति तो नहीं बनेगे पर इंसान ज़रूर बनेगे. 1. अंगुलिमाल की कहानी के बारे में क्या जानते है? 2. महात्मा बुद्ध की हत्याओं का षड्यंत्र कब कब और किसने रचा था? 3. महाराजा हर्षवर्धन के बौद्ध समांगम पर हमला



कैसे समझाऊ?

कैसे समझाऊ?देश विकास कर रहा है, सोना आसमान छू रहा।किसी का आँख मुँह तिरछा ,यह सेल्फी कह रहा।पानी जमीन का घटा, पानी चाँद की गोद मे दिख रहा।मानव कर प्रकृति को बर्बाद, रहने चाँद में जा रहा।दिल्ली का जाम झेला नही जाता, हैलीकॉप्टर की बात सुन



गुलामी की जंजीर

गुलामी की जंजीरगुलामी की जंजीरों को न तोड़ पाए हैं, न तोड़ पाएंगे।पहले धरती गुलामी की जंजीरों से जकड़ी जा रही थी।और कोई न मिली फसल उगाने को तो नील उगाई जा रही थी।कोई उस वक्त को समझ न पाया, कोई बन्दी बनकर , कारागार की काल कोठरी में रात गुजर कर बहन बेटियों को बन्दी बना लेते, या प्यार के जाल में फसा कर अ



14 जुलाई 2019

अँधेरे में नहीं बल्कि अँधेरे से लड़ें ...

अन्धकार से लड़ना और अंधकार में लड़ना दोनों में ज़मीन आसमान का फ़र्क है. आज लोग अँधेरे से नहीं बल्कि अँधेरे में लड़ रहे है. आफ़ताब की रोशनी और चाँद की चाँदनी भी इस अंधकार को खत्म



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