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Archana Ki Rachna: Preview " ज़िन्दगी का उपकार "

अपने कल की चिंता मेंमैं आज को जीना भूल गयाज़िन्दगी बहुत खूबसूरत हैमैं उसको जीना भूल गयाखूब गवाया मैंने चिंता करकेजो मुझे नहीं मिला उसका गम कर केअपने कल की चिंता मेंमैं अपनी चिंता भूल गयाज़िन्दगी बहुत खूबसूरत हैमैं उसको जीना भूल गयाजब तक मैं आज़ाद बच्चा थामुझे तेरी परवाह



Archana Ki Rachna: Preview "" चिकने घड़े" "

" चिकने घड़े"कुछ भी कह लोकुछ भी कर लोसब तुम पर से जाये फिसलक्योंकि तुम हो चिकने घड़ेबेशर्म बेहया और कहने कोहो रुतबे में बड़ेउफ्फ ये चिकने घड़ेबस दूसरों का ऐब ही देखता तुमकोअपनी खामियां न दिखती तुमकोपता नहीं कैसे आईने के सामने होपाते हो खड़ेक्योंकि तुम हो चिकने घड़ेदूसरों का



Archana Ki Rachna: Preview "आदत"

आदतन मोहब्बत नहीं हुई थी मुझकोआदतन उसका यूँ टकरा जाना याद आता रहाआदतन बेखौफ बढ़ता रहा मैं उसकी ओरआदतन वो मिलने का दस्तूर निभाता रहाआदतन मैं रेत पर घर बनाता रहाआदतन वो मेरा सब्र परखता रहाआदतन मैं ख्वाब बुनता रहाआदतन वो उनसे नज़रें चुराता र



Archana Ki Rachna: Preview "इस बार की नवरात्री "

इस बार घट स्थापना वो ही करेजिसने कोई बेटी रुलायी न होवरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश के दिखावे में जब तुम बेटी की हत्या करते हो अपने गंदे हाथों से तुम ,उसकी चुनर खींच लेते होइस बार माँ पर चुनर तब



मैं हारूँगा नहीं

थक चूका हूँ , पर हारा नहीं हूँमैं निरंतर चलता रहूँगाआगे बढ़ता रहूँगाउदास हूँ ,मायूस हूँपर मुझे जितना भी आज़मा लो ,मैं टूटूँगा नहीं ,मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा,पर अपनी तक़दीर को, तक़दीर केहवाले सौंप , हाथ बाँधबैठूंगा नहीं ,मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा ,अपनी तक़दीर को कोसूंगा



मेरा परिचय, मेरी कलम

मेरी कलम , जिससे कुछ ऐसा लिखूँके शब्दों में छुपे एहसास कोकागज़ पे उतार पाऊँऔर मरने के बाद भी अपनीकविता से पहचाना जाऊँमुझे शौक नहीं मशहूर होने काबस इतनी कोशिश है केवो लिखूं जो अपने चाहने वालोंको बेख़ौफ़ सुना पाऊँये सच है के मेरे हालातोंने मुझे कविता करना सीखा दियारहा तन्हा



तुम्हें माफ़ किया मैंने

जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेबस इतना सुकून हैजैसा तुमने कियावैसा नहीं किया मैंनेजाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेहाँ खुद से प्यार करती थीमैं ज़रूरपर जितना तुमसे कियाउस से ज़्यादा नहींतुम्हारी हर उलझनों कोअपना लिया था मैंनेजाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेतुम्हारी लाचारियाँ मज़बूरियाँसब स्वीकार थी मुझकोसिर्फ उस रिश्ते



उधार की ज़िन्दगी (एक व्यंग्य)

आओ दिखाऊं तुम्हें अपनी चमचमाती कारजिस के लिए ले रखा है मैंने उधार दिखावे और प्रतिस्पर्धा में घिर चूका हूँ ऐसे समझ में नहीं आता कब कहा और कैसे किसी के पास कुछ देख के लेने की ज़िद्द करता हूँ एक बच्चे के जैसे और फिर पूरा करता हूँ उधार के पैसे कटवा के अपना वेतन हर बार आओ



हिंदी हम तुझ से शर्मिंदा हैं

आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसेमहिलाओं के माथे से बिंदी जैसेकभी जो थोड़ा बहुत कह सुन लेते थे लोगअब उनकी शान में दाग हो हिंदी जैसेलगा है चसका जब से लोगों अंगरेजियत अपनाने काअपने संस्कारों को दे दी हो तिलांजलि जैसेअब तो हाय बाय के पीछे हिंदी मुँह छिपाती हैमात्र भाषा हो



कई बार हुआ है प्यार मुझे

हाँ ये सच है, कई बार हुआ है प्यार मुझेहर बार उसी शिद्दत से हर बार टूटा और सम्भ्ला उतनी ही दिक्कत से हर बार नया पन लिये आया सावन हर बार उमंगें नयी, उमीदें नयी पर मेरा समर्पण वहीं हर बार वही शिद्दत हर बार वही दिक्कत हाँ ये सच है, कई बार हुआ है प्यार मुझेहर बार सकारात्मक



एक शाम के इंतज़ार में

कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न होमुदत्तों भागते रहे खुद सेजो चाहा तुमने न कहा खुद सेतुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर लेने कोकोई शाम ऐसी भी तो होजब



नारी होना अच्छा है

नारी होना अच्छा है पर उतना आसान नहींमेरी ना मानो तो इतिहास गवाह है किस किस ने दिया यहाँ बलिदान नहीं जब लाज बचाने को द्रौपदी की खुद मुरलीधर को आना पड़ा सभा में बैठे दिग्गजों को



थोड़ा स्वार्थी होना चाहता हूँ मैं

कल्पनाओं में बहुत जी चूका मैंअब इस पल में जीना चाहता हूँ मैं हो असर जहाँ न कुछ पाने का न खोने का उस दौर में जीना चाहता हूँ मैं वो ख्वाब जो कभी पूरा हो न सका उनसे नज़र चुराना चाहता हूँ मैं तमाम उम्र देखी जिनकी राह हमने उन रास्तों से व



सिर्फ तुम्हारी

जब तुम आँखों से आस बन के बहते होउस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैंलड़खड़ाती गिरती और संभलती हुईसिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैंलोगो की नज़रो में अपनी बेफिक्री में मशगूल सीऔर भीतर तुम में मसरूफ खूद को पाती हूँ मैंवो दूरियां



मेरा स्वार्थ और उसका समर्पण

मैनें पूछा के फिर कब आओगे, उसने कहा मालूम नहींएक डर हमेशा रहता है , जब वो कहता है मालूम नहींचंद घडियॉ ही साथ जिए हम , उसके आगे मालूम नहींवो इस धरती का पहरेदार है, जिसे और कोई रिश्ता मालूम नहींउसके रग रग में बसा ये देश मेरा, और मेरा जीव



उड़ चला है “दिल “थोड़ा और जी लेने को

चंद अधूरीख्वाहिशें और बिखरे ख्वाब लिए उड़ चला है दिल कही दूरकुछ नयी हसरतें और फर्माइशें पूरी कर लेने को थोड़ा और जी लेने को यूं तोमायूस रहा अब तक चाहतों के बोझ तले पर अब न होगा येफिर कभी ये सोच उड़



प्रकृति मानव की

मेरी छाँव मे जो भी पथिक आयाथोडी देर ठहरा और सुस्तायामेरा मन पुलकित हुआ हर्षायामैं उसकी आवभगत में झूम झूम



ज़िन्दगी का शाही टुकड़ा

ज़िन्दगी मिली जुली धूप छाँव में घुली कभी नमक ज़्यादा तो चीनी कमपर शाही टुकड़े सी लगी दुख ने सुख को पहचाना इन दोनो का मेल पुराना क्या राजा क्या रंक केजिसकी झोली में ये जोड़ी ना मिलीज़िन्दगी मिली जुली धूप



"लाडली"

मैं बेटी हूँ नसीबवालो के घर जनम पाती हूँ कहीं "लाडली" तो कहीं उदासी का सबब बन जाती हूँ नाज़ुक से कंधोपे होता है बोझ बचपन सेकहीं मर्यादा और समाज के चलते अपनी दहलीज़ में सिमट के रह जाती हूँ और कहीं



कुल्फी कुमार बाजेवाला: कुल्फी ने सिकंदर के घर को छोड़ा | आई डब्लयू एम बज

गुल खान और निलांजना पुरकायस्थ द्वारा निर्मित लोकप्रिय स्टार प्लस शो कुल्फी कुमार बाजेवाला में एक नया चौंकाने वाला ट्रैक दिखाई देगा जिसमें कुल्फी (आकृति शर्मा) को लवली (अंजलि आनंद) के उसकी मां निमरत (श्रुति शर्मा) का हत्यारा होने का पता चलता है। हमने पहले ही हमने बताया था



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