बस इसलिए

सो गया है देश मेरा कि सब आलस से ग्रस्त हैं शायद इसीलिए अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है एक जवान खड़ा सरहद पर जान की बाजी लगा रहा लेकिन देश का नेता बस चुनाव की महफिल सजा रहा सारी अर्थव्यवस्था क्यों बताओ पस्त है शायद इसीलिए अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है जब वो सीख गए सीने पर ख



अपना राष्ट्र बचाना है ....!

धैर्य और अनुशासन से, अपना राष्ट्र बचाना है ....! देखा नहीं था हमने कभी ,आज़ादी के परवानों को ,जो कफ़न बाँध कर निकले थे …… शहीद हुए , पर, आने वाली नस्लों को वे आज़ाद हवा देकर वे गए । सोचो , हम सब में भी तो भगत सिंह , राजगुरु, सुखदेव है खड़ा ,आज देश पर ही नहीं, मानवता पर सं



अद्भुत है तिरुपति बालाजी का इतिहास | Tirupati Balaji History

भारत में बहुत सारे ऐतिहासिक मंदिर हैं जिनकी अपनी अलग ही कहानी है। इन्हीं मंदिरों में एक हैं तिरुपति बालाजी है जिसकी मान्यता कुछ ऐसी है, जहां जाने से लोगों की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमाला की



जिंदगी को सफल बनाने वाले स्वामी विवेकानंद के 25 सर्वश्रेष्ठ विचार

भारत में बहुत से ऐसे महापुरुष हुए जिनके बताए मार्ग पर चलकर हम सभी एक बेहतर जिंदगी को मुकाम दे सकते हैं। उनमें से एक स्वामी विवेकानंद जी थे जिन्होंने लोगों को हमेशा अच्छाई के रास्ते पर चलना सिखाया। उन्होंने लोगों को जिंदगी जीने का सही तरीका बताया और देख के लिए भी हमेशा



कौन था करिश्माई विद्रोही बिरसा मुंडा? | Birsa Munda Biography Hindi

Birsa Munda एक ऐसा नाम जो भारत के आदिवासी स्वसंत्रता सेनानी के रूप में जाना जाता है। वे एक लोकनायक थे जिनकी ख्याती अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में काफी लोकप्रिय हुए थे। उनके द्वारा चलाए जाने वाले सहस्त्राब्दवादी आंदोलन ने बिहार और झारखंड में लोगों पर खूब प्र



दुनिया के सबसे ताकतवर सेनापति नेपोलियन के अनमोल विचार

दुनिया के महान सेनापतियों में एक नेपोलियन बोनापार्ट का नाम भी आता है। जिन्होंने फ्रांसीसी क्रांतिकरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्होंने कुशलता, बुद्धिमता और कूटनातिज्ञ के चलते यूरोप का नक्शा बदल कर रख दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने अनपी विवेकशीलता के चलते फ्रांस की जर्जर सेना को आधुनिक और शक्ति



क्यों मनाते हैं Indian Army Day? जानिए भारतीय सेना से जुड़ी 15 महत्वपूर्णं बातें

भारतीय आर्मी का नाम सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि सेना के जवान देश की रक्षा करने के लिए अपनी जान की परवाह भी नहीं करते हैं। इस साल देश अपना 18वां सेना दिवस यानी Indian Army Day 2020 मना रहा है और इस खास अवसर पर सैन्य परेडों, सैन्य प्रदर्शनियों व दूसरे कई कार्



Mahatma Gandhi:'बापू' की पुण्यतिथि के दिन क्यों मनाया जाता है 'बलिदान दिवस'?

17वीं शताब्दी के अंत में अंग्रेज व्यापार करने के बहाने भारत में घुसे और पूरे देश पर धीरे-धीरे कब्जा कर लिया। ब्रिटिश सरकार की हुकुमत पूरे देश पर चलने लगी और इन्होंने कुछ साल नहीं बल्कि 200 साल से ज्यादा भारत को गुलाम बनाकर रखा। भारत की स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो गई थी और इस दौरान कुछ क्रांतिकारी लोग



विश्व के महान शासक नेपोलियन बोनापार्ट का जीवन-परिचय

अभी तक आपने भारत के कई महान योद्धाओं के बारे में जाना और पढ़ा होगा लेकिन दुनिया के जो महान शासक थे उनके बारे में शायद ही आपने सुना हो। इनका नाम नेपोलियन बोनापार्ट था जो फ्रांस के एक महान शासक थे। नेपोलियन ने कभी हारना सीखा ही नहीं था, उन्होंने अपने मजबूत इरादे और अटूट दृढ़संकल्पों के साथ दुनिया के ब



Sketches from Life: इतिहास के पन्ने - प्राचीन काल

इतिहास अगर क्लास में सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ना हो तो भारी लगता है सन और तारीखें भूल जाती हैं. पर फुर्सत में पढ़ें तो किस्से कहानी जैसा मज़ा आता है. रिटायर होने के बाद आजकल फुर्सत है और भारतीय इतिहास के पन्ने पलटने में आनंद आ रहा है. भारतीय उपमहाद्वीप का इतिहास बहुत बड़ा है, फ



Sketches from Life: इतिहास के पन्ने - मध्य काल

भारतीय इतिहास का मध्य काल 700 ईस्वी से 1857 ईस्वी तक माना जाता है. इस युग को भी प्रारंभिक और उत्तर मध्य काल में बांटा जा सकता है. ये विभाजन आम तौर पर सभी इतिहासकारों को मान्य है पर कुछ 900 ईस्वी से मध्य युग का आरम्भ मानते हैं. फिलहाल हमारे सामान्य ज्ञान के लिए विभाजन सही



Sketches from Life: इतिहास के पन्ने - सिन्धु घाटी सभ्यता

आदि मानव पत्थरों के हथियार इस्तेमाल करते थे. शिकार करते और जड़ी बूटियाँ और फल खाते थे और एक जगह ना टिक कर ये घूमते रहते थे. धीरे धीरे खेती और पशु पालन की जानकारी बढ़ने के साथ बस्तियां बसनी शुरू हो गईं जो ज्यादातर घाटियों में नदी किनारे थीं. छोटे छोटे ग्रुप या समूह या कबीले



संस्कृति का सच और अश्लीलता पर हल्ला

(जो देश चांदतारों, मंगल पर पहुंच कर इठला रहे हैं,विज्ञान के नए-नए आविष्कार कर देश के लिए खुशियां समेट रहे हैं,उन की तुलना में हम कहां हैं ? पढ़ कर आप कीआंखें खुली की खुली रह जाएंगी ।)अधिकतरभारतीय जानते ही नहीं कि, संस्कृति है क्या ? जिसे वे अपनी संस्कृति बता रहेहैं, क



माँ शक्तिदादी मन्दिर कोटासर बीकानेर

माँ माना शक्ति दादी :- भारतवर्ष के राजस्थान राज्य में हर प्रान्त में दैविक शक्ति से सम्पन महापुरुष वीर,एवं भक्त हुए हैं जो धर्म रक्षक एवं जीव रक्षक रहें हैं जिनको राजस्थान के लोकदेवता के रूप में पूजा जाता हैं । जैसे रामदेवजी,जाम्भोज



लौह पुरुष सरदार पटेल ,सच्ची श्रद्धांजली धारा 370 ,35A की समाप्ति है

स्वर्गीय सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजली धारा 370, 35 a की समाप्ति है डॉ शोभा भारद्वाज 15 अगस्त 1947 देश आजाद हुआ अधिकाँश प्रांतीय कांग्रेस समितियों के सरदार पटेल के पक्ष में होने के बाद भी गांधी जी कीइच्छा का सम्मान करते हुए नेहरू जी देश के प्रधान मंत्री बनाया गया ,पटेल उपप्रधान मंत्री एवं गृह मं



इतिहास



'भारत रत्न' लाल बहादुर शास्त्री की मौत का रहस्य आज भी है क्यों कायम? जानिए इनका जीवन-परिचय

भारत देश यूही महान नहीं माना जाता, यहां पर कई वीर ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी की हर सांस देश के नाम कर दी थी। आजादी से पहले, आजादी के बाद या फिर आजादी के समय बहुत से ऐसे स्वंतत्रता सेनानी रहे हैं जिन्होंने देश के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया और आज उनका इतिहास में नाम है। उन्हीं स्वतंत्रता से



90 के दशक में पैदा होने वाले बच्चे इन दिलचस्प तस्वीरों को देखकर हुए हैं बड़े, आपकी भी कोई याद तो नही जुड़ी ?

Old is Gold...इस बारे में तो आपने सुना ही होगा ? पुरानी चीजों की कद्र एक समय के बाद होती है। 90 के दशक में बड़े होने वाले सभी बच्चों में एक खास तरह का उत्साह रहता था। उस दौर में बच्चों के पास क्रिएटिविटी करने के बहुत मौके हुआ करते थे। 90 के दशक के बच्चों को खाली समय में बहुत कुछ करने को होता था, जिस



सत्यनारायण की कथा तो होती है पर चापेकर बंधुओं को क्यों भूल गए ? हरि कुमार को भी याद रखिए स्कन्द पुराण का हिंदी अनुवाद !

आज अगर कोई कहे कि घर में पूजा है, तो ये माना जा सकता है कि “सत्यनारायण कथा” होने वाली है। ऐसा हमेशा से नहीं था। दो सौ साल पहले के दौर में घरों में होने वाली पूजा में सत्यनारायण कथा सुनाया जाना उतना आम नहीं था। हरि विनायक ने कभी 1890 के आस-पास स्कन्द पुराण में मौजूद इस संस्कृत कहानी का जिस रूप में अन



" खुदीराम बोस - 18 वर्ष ८ महिने 8 दिन और फ़ासी " क्या देश भूल गया इस वलिदान को ?

वह केवल 18 वर्ष का था, जब उसे 1908 में बिहार के मुजफ्फरपुर में एक हमले और तीन अंग्रेजों की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। एक सदी बीत चुकी है, फिर भी खुदीराम बोस का नाम परछाइयों में है।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांत



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