माँगें भगवान को :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से इस धराधाम पर भगवान की तपस्या करके भगवान से वरदान मांगने की परंपरा रही है | लोग कठिन से कठिन तपस्या करके अपने शरीर को तपा करके ईश्वर को प्रकट करके उनसे मनचाहा वरदान मांगते थे | वरदान पाकर के जहां आसुरी प्रवृति के लोग विध्वंसक हो जाते हैं वहीं दिव्य आत्मायें लोक कल्याणक कार्य करती हैं | भग



दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच

आप चाहे गांव या कस्बे के मध्यवर्गीय परिवार के पढ़े-लिखे व्यक्ति हों अथवा महानगर के किसी संपन्न कुलीन परिवार के सदस्य हों या फिर सामान्य आर्थिक स्तर के कोई अधिकारी अथवा व्यापारी, इस सत्य को मन-ही-मन स्वीकार कर लें कि दाम्पत्य जीवन की सफलत



क्या महिमा है मौन साधना की?

मौन की महिमा अपरंपार है, इसके महत्व को शब्दों के जरिए अभिव्यक्त करना संभव नहीं है।प्रकृति में सदैव मौन का साम्राज्य रहता है। पुष्प वाटिका से हमें कोई पुकारता नहीं, पर हम अनायास ही उस ओर खिंचते चले जाते हैं। बड़े से बड़े वृक्षों से लदे सघन वन भी मौन रहकर ही अपनी सुषमा से सारी वसुधा को सुशोभित करते है



मन की सुन्दरंता

एक राजा की दो पत्नियां थी। प्रथम पत्नि सांवली थी वह राजा को बिल्कुल पंसद नहीं थी वहीं दूसरी पत्नि बहुत सुंदर देह व आकर्षक थी। राजा हमेशा दूसरी पत्नि को अपने साथ रखता था। वह उसकी अचूक एवं आकर्षक सुन्दरता में डूबा रहता था प्रथम पत्नि सुशील एवं बहुत गुण थी लेकिन उसका रंग सावंला होने के कारण राजा उसे पस



दाम्पत्य जीवन का रहस्य

जिस प्रकार पौधा लगाने से पहले बीज आरोपित किया जाता है उसी प्रकार के युवा लड़के-लड़कियों के मन में दाम्पत्य जीवन के संबंधों के भावों को पैदा करने के लिए विवाह पूर्व ही अनेक संस्कार आरोपित किए जाते हैं। यद्यपि वे सारे के सारे विवाह के ही अंग माने जाते हैं। जैसे-हल्दी चढ़ाना, तैल चढ़ाना, कन्या पूजन, गाना ब



नींद से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

नींद व्यक्ति की सबसे ज्यादा आवश्यक है, बिना नींद या कम नींद के हम कई बीमारियों और समस्याओं के शिकार हो सकते हैं.जिस तरह पोषण के लिए आहार की जरुरत होती है उसी तरह थकान मिटने के लिए पर्याप्त नींद की जरुरत होती है, निद्रा के समय मस्तिष्क सर्वथा शान्त, निस्तब्ध या निष्क्रिय होता हो, सो बात नहीं। पाचन तं



विश्व का सबसे अच्छा इंसान कौन हैं जो क्वारा न मरा हो?

हम संत महात्मा - ब्रहम्म चारी की बात नहीं कर रहे हैं.हम बात गृहस्त जीवन की करते हैं .जिसे बहुत ही सुखमय जीवन कहा गया हैं .



अपमान एवं सम्मान :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *इस संसार में संपूर्ण धरा धाम पर मनुष्य एक दूसरे से जुड़ा हुआ है | मानव जीवन में शब्दों का बड़ा प्रभाव पड़ता है | ऐसे ही दो शब्द मानव जीवन की धारा को बदल देते हैं जिसे अपमान एवं सम्मान के नाम से जाना जाता है | मनुष्य मन के अधीन माना जाता है और मान शब्द मन से ही बना है



बुराई/निंदा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *मानव जीवन में कई पड़ाव आते हैं | सम्पूर्ण जीवनकाल कभी एक समान नहीं रहता है | यहाँ यदि मनुष्य की प्रशंसा होती है तो उसकी बुराई भी लोग करते रहते हैं | हालांकि संसार के लगभग सभी धर्म किसी की बुराई करना अनुचित मानते हैं परंतु मनुष्य अपनी आदत से मजबूर होकर ऐसा करता रहता है



अस्त व्यस्तजीवन

प्लेटफार्म मन ही मन सोचता है मेर जीवन भी क्या जीवन है। हर आती जाती रेल मुझे कोसती है। किसका सगा हूँ ये प्रश्न पूछती है। रेलों का शोर है, हजारों की भीड़ है लेकिन मन में सन्नाटा क्यों है? बाहर इतनी रौनक,लेकिन मन में ये चुभता सा कौन है? रेल तो जीवन भर मुझ तक आएगी मुझसे कभी वो कुछ नहीं पायेग



11 जनवरी 2019

खुशी के तीन राज़।

हम सभी जानते हैं कि पैसा खुशी नहीं खरीद सकता है ... लेकिन कई बार हम ऐसा कार्य करते हैं जैसे कि हम थोड़े अधिक पैसे के साथ खुश हैं। हम अमीर बनने के लिए इच्छुक हैं (जब हम जानते हैं कि अमीर खुश नहीं हैं या तो); हमें उस नवीनतम गैजेट या शैली को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। हम अधिक पैसा कमा



आपको कई बीमारियों से दूर कर देंगे दादी माँ के ये 5 दमदार नुस्खे

आजकल का जमाना काफी बदल चुका है और जमाने के साथ साथ लोगों की जीवनशैली भी बदल चुकी है यदि व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कोई शारीरिक परेशानी होती है तो वह अंग्रेजी दवाइयों पर निर्भर रहता है हर बीमारी के लिए वह अंग्रेजी दवाइयों का सेवन करता है परंतु भारत में पहले ऐसा नहीं



कुछ कुछ - किस्त तीसरी ( व्याकरण - भाषा की, जीवन की : मैं और हम )

***** कुछ कुछ - किस्त तीसरी ***** *** व्याकरण - भाषा की, जीवन की *** ** मैं और हम *



मेरे लिए पर्याप्त है ( लघु )

मेरे लिए पर्याप्त है ( लघु ) पूरा रास्ता,नहीं मालूम;वांछनीय गंतव्य, जहां जाना है, नहीं मालूम; एक बार में,



"मुक्त काव्य" जीवन शरण जीवन मरण है अटल सच दिनकर किरण

शीर्षक- जीवन, मरण ,मोक्ष ,अटल और सत्य"मुक्त काव्य" जीवन शरण जीवन मरणहै अटल सच दिनकर किरणमाया भरम तारक मरणवन घूमता स्वर्णिम हिरणमातु सीता का हरणक्या देख पाया राम नेजिसके लिए जीवन लियादर-बदर नित भ्रमणन कियाचोला बदलता रह गयाक्या रोक पाया चाँद नेउस चाँदनी का पथ छरणऋतु साथ आती पतझड़ीफिर शाख पर किसकी कड़ी



जीवन यात्रा

जीवन यात्रा कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापे की ओर।. . . . जवानी से बुढ़ापे की ओर।। जीवन में आते हैं, कुछ ऐसे क्षण;शादी, सेवनिवृत्ती हैं, कुछ ऐसे ही क्षण। जब बदल जाती है जिंदगी, एकदम से;. . . . एकदम से;सिर्फ एक कदम च



नजरिया और जीवन

भूमिका : हम देखते हैं, पाते हैं कि अलग अलग व्यक्ति अलग अलग ढ़ंग से, अपने अपने ढ़ंग से ही जीवन जी रहे हैं। बहुत मौटे तौर पर, हम इसको 3 श्रेणी में रख सकते हैं या 3 संभावनाओं के रूप में देख सकते हैं। हरेक के जीवन में हर प्रकार के क्षण आते हैं, उतार चढ़ाव आते हैं, पर कुल मि



मैं भटकता रहा

*गहराई की छिपी वर्जनाओं के स्वर*( "स्वयं पर स्वयं" से )मैं भटकता रहामैं भटकता रहा; समय, यूं ही निकलता रहा;मैं भटकता रहा। उथला जीवन जीता रहा;तंग हाथ किये, जीवन जीता रहा।न किसी को, दिल खोल कर अपना सका;न किसी का, खुला दिल स्वीकार कर सका;न आपस की, दूरी मिटा सका;न सब कुछ दे सक



क्या चाहिए जीवन केलिए

क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में



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