बुद्ध की बात मानों और अपना दीपक स्वयं बनों....

अपना दीपक स्वयं बनोअपना दीपक स्वयं बनों…. कथन तो एकदम सरल है। पर सारगर्भित है। सोचिए जरा 'अपना दीपक स्वयं बनों ' कहने का तात्पर्य क्या है..? इस बात को अच्छी तरह से समझने के लिए चिंतन व मनन की आवश्यकता है। दीपक से रोशनी मिलती है, दीपक से अँधेरे का नाश होता है, दीपक से हमारा जीवन पथ प्रकाशित होता है,



किरायेदार

लघुकथाकिरायेदार" भैया ये छह पाईप हैं जो पास की दूकान पर ले चलने हैं , ले चलोगे ? " मैंने ई - रिक्शे वाले को रोककर कहा ।" जी, ले चलेंगे । "" बताओ किराया क्या लोगे ? " " सत्तर रुपए लगेंगे ।"" भैया , पचास लो । सत्तर का काम तो नहीं है । "" ठीक है , पचास दे दीजिएगा ।"" तो फिर लाद लो । "वो अपने काम पर



पथिक

(1)वो घर से निकला पीने को, मानो अंतिम पल जीने को।उसे अंतिम सत्य का बोध हुआ। मानो अंतिम घर से मोह हुआ।सोते बच्चों को जी भर देखा, सोती बीबी के गालों को चूमा,माँ-बाप को छूपकर देखा, चुपके सोते चरणों को पूजा।कुछ पैसे



जीवन का शाश्वत सत्य

हम सबने मानव जीवन पाया कुछ अच्छा कर दिखलाने को सब धर्म एक है ,एक ही शिक्षा फिर हम सब हैं इतने बेगाने क्यों जो दूसरों का है दुःख समझते दुःख रहता उनके पास नहीं औरों को हंसाने वाले रहते कभी उदास नहीं आचरण हमारा ही हम सबको हर ऊँचाई तक पहुंचाता है अगर यह दुराचरण बन जाये तो गर्त तक ले जाता है कष्ट उठाने स



हासिल

शीर्षक :- हासिलकभी – कभी बिन माँगें बहुत कुछ मिल जाता हैऔर कभी माँगा हुआ दरवाज़े पे दस्तक दे लौट जाता हैशायद इसी को ज़िन्दगी कहते हैंसब्र का दामन थाम कर यहाँ हर कोई यूं ही जिये जाता है …मिले न मिले ये मुकद्दर उसकाफिर भी कोशिश करना फ़र्ज़ है सबकाआगे उसकी रज़ा कि किसको क्या हासिल हो पाता है …कभी – कभी सब्र



जीवन दायिनी बारिश

खुशियों की बौछार,आनंद की फुहार लाती है ये बारिश;इंसान हो या पशु पक्षी, सभी में उत्साह का संचार करती ;पेड़ पौधों की मुस्कराहट,पर्वतों के झरने आबाद करती;पर्वतों पर फैली हरितिमा ,सब कुछ लाती है ये बारिश।चातक की लंबे समय से सूखे ,कंठ की प्यास बुझाती;मोर के नृत्य और कोयल क



जिंदगी को जिओ पर संजीदगी से....

जिंदगी जिओ पर संजीदगी से…….आजकल हम सब देखते हैं कि ज्यादातर लोगों में उत्साह और जोश की कमी दिखाई देती है। जिंदगी को लेकर काफी चिंतित, हताश, निराश और नकारात्मकता से भरे हुए होते हैं। ऐसे लोंगों में जीवन इच्छा की कमी सिर्फ जीवन में एक दो बार मिली असफलता के कारण आ जाती है। फिर ये हाथ पर हाथ रखकर बैठ जा



जीवित हो अगर, तो जियो जीभरकर...

जीवित हो अगर, तो जियो जीभरकर...जीते तो सभी हैं पर सभी का जीवन जीना सार्थक नहीं है। कुछ लोग तो जिये जा रहे हैं बस यों ही… उन्हें खुद को नहीं पता है कि वे क्यों जी रहे हैं? क्या उनका जीवन जीना सही मायनें में जीवन है। आओ सबसे पहले हम जीवन को समझे और इसकी आवश्यकता को। जिससे कि हम कह सकें कि जीवित हो अगर



तनाव मुक्त जीवन ही श्रेष्ठ है……

तनाव मुक्त जीवन ही श्रेष्ठ है……आए दिन हमें लोंगों की शिकायतें सुनने को मिलती है….... लोग प्रायः दुःखी होते हैं। वे उन चीजों के लिए दुःखी होते हैं जो कभी उनकी थी ही नहीं या यूँ कहें कि जिस पर उसका अधिकार नहीं है, जो उसके वश में नहीं है। कहने का मतलब यह है कि मनुष्य की आवश्यकतायें असीम हैं….… क्योंकि



उपदेश सूत्र

*श्रीमते रामानुजाय नमः**श्रीगोदम्बाय नमः**चीराणि किं पथि न सन्ति दिशन्ति भिक्षां* *नैवाङ्घ्रिपाः परभृतः सरितोऽप्यशुष्यन् ।**रुद्धा गुहाः किमजितोऽवति* *नोपसन्नान् कस्माद्भजन्ति कवयो धनदुर्मदान्धान्*पहनने को क्या रास्तों में चिथड़े नहीं हैं? रहने के लिए क्या पहाड़ो की गुफाएँ बंद कर दी गयी हैं? अरे भाई !



हीरो

हर व्यक्ति अपनी जीवन का हीरो स्वयं होता है जीवन में कठिनाइयां न हो तो इंसान कि परख नहीं हो सकती अगर हम मुश्किलों से डर जाए और घबरा कर भाग्य को दोष देने लगें तो इससे उत्थान कैसे संभव है रावण के बिना राम राम न होते बिना कंस के आतंक के कृष्ण कृष्ण न होते



मानव जीवन क्या है...

जीवन क्या है..? या मृत्यु क्या है..? क्या कभी आपने इसे समझने की चेष्टा की है..? नहीं, जरूरत ही नहीं पड़ी। मनुष्य ऐसा ही है.. तो क्या सोच गलत है...जी बिल्कुल नहीं, ये तो मनुष्यगत स्वभाव है। जरा उनके बारे में सोचिए जिन्होंने हमें ज्ञान की बाते



जीवनसंगिनी

मेरी जीवन संगिनी,मेरी अर्द्धांगिनी, मेरे सपनों की पथगामिनी,प्रकृति के सानिध्य में रहने कीआकांक्षा लिए एक गृह स्वामिनी,प्रबंधन में व्यवस्थित एक गृ



गुरूपूर्णिमा विशेष

*श्रीमते रामानुजाय नमः**श्री यतिराजाय नमः*💐💐💐💐💐💐💐💐 *गुरुपूर्णिमा विशेष*--- *द्वितीय भाग*🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕 गुरुदेव की असीम कृपा उनकी दया प्रेम वात्सल्य उसी के फलस्वरूप हमें परम आराध्य श्री लक्ष्मीनारायण जी के चरणों का आश्रय मिलता है और परमात्मा से मिलाने का पावन कार्य सिर्फ और सिर्फ श्



सोचना - समय की मांग

आज माननीय प्रधानमंत्री जी ने अमुक घोषणा की है , आज हमें निम्न चीजो की खरीद करनी है , अगली छुटियो में हमें हमास द्वीप पर जाना है , आज पड़ोसी राम सिंह और कृष्ण सिंह लड़ गए आदि के बारे में ही बाते करते हुए हमारी ज़िंदगी गुजर रही है। आज की इस भाग दौड़ की दुनिया में किसी को ठहरने और सोचने का वक्त ही नही है।



सफल जीवन

हमे अपने जीवन में होने वाली कई घटनाएं बहुत ही अचंभित कर जाती हैं। कुछ तो आनन्द से विभोर कर देती है, ऐसी घटनाओं के बारे में हम तुरंत अपनी प्रभावकारी शख्सीयत या फिर अपनी कुशलता को कारण मान कर खुश हो लेते है या फिर किसी व्यक्ति का आभार मान लेते हैं जिसकी वजह से ये आनन्द अनुभूति होती है।



5 सर्वश्रेष्ठ कारण - लक्ष्य निर्धारण महत्वपूर्ण क्यों है:

1. लक्ष्य तुम ध्यान दोलक्ष्य या लक्ष्य को ध्यान में रखे बिना, जीवन व्यर्थ है और ऊर्जा और प्रयास की बर्बादी है। आपके पास दुनिया की सभी क्षमताएँ हो सकती हैं लेकिन ध्यान केंद्रित किए बिना, आपकी क्षमताएं और प्रतिभा बेकार है।क्योंकि दिन के अंत में लक्ष्य वे होते हैं जो आपको जीवन में दिशा प्रदान करते हैं।



लहर

हौसला होता नहीं, जुटाना पड़ता है। पैर उठता नहीं, उठाना पड़ता है। दुनियां जरूरत की है, बिन जरूरत के बोल मिलता नहीं, मिलाना पड़ता है। काम, नाम होता नहीं, मेहनत से बनाया जाता है। हमेशा अच्छा मिलता नहीं, समझौता करना पड़ता है। मुश्किल वक्त जब भी आता है। चहेतों के सच्चे चेहरे लेकर आता है। आशियाना बनता नही



तदपि विरोध माने जहँ कोई :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में अनेक प्रकार के क्रियाकलाप ऐसे होते हैं जिसके कारण मनुष्य के चारों ओर उसके जाने अनजाने अनेकों समर्थक एवं विरोधी तथा पैदा हो जाते हैं | कभी-कभी तो मनुष्य जान भी नहीं पाता है कि आखिर मेरा विरोध क्यों हो रहा है , और वह व्यक्ति अनजाने में विरोधियों के कुचक्र का शिकार हो जाता है | मनुष्य का



जीवन



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