गुरु हि सफलता का स्रोत

*श्री यतिराजाय नमः*🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺 *गुरु हि सफलता का स्रोत**भाग ५:-----**गतांक से आगे:----*गुरु के बारे में शास्त्र में कहा गया है--*गुरूर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः! गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः*अर्थात:- वास्तव में ही पूर्णता का दूसरा नाम गुरु है अष्ट महा सिद्धियां गुर



गुरु ही सफलता का स्रोत

*गुरु ही सफलता का स्रोत*🌲🥀🌲🥀🌲🥀🌲🥀 *जय श्रीमन्नारायण* *भाग:-२*☘️🌿☘️🌿☘️🌿☘️🌿इस दुनिया के लिए एक और शब्द है संसार संसार शब्द दो शब्दों के सहयोग से बना है सम सार इसका अर्थ है कि जो अवस्था मेरी प्रकृति के अनुरूप है वही संसार है इसलिए अगर मैं कामों को हूं तो सुंदर स्त्री को देखने में अ



गुरु ही सर्वस्व है

*जय श्रीमन्नारायण*🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *भाग:-१* *गुरु ही सफलता का स्रोत*🥀🌲🥀🌲🥀🌲🥀 गुरु चाहते हैं कि शिष्य दिव्यता के इस मार्ग पर अग्रसर हो और तुम इस पद पर पहुंच जाओगे तो तुम्हें अपने आप एहसास होगा तुम्हें संतोष होगा कि तुम इस पद पर खड़े हो औरों को तो इस पद का ज्ञान भी नहीं है वह पत्र जहां



सफलता के सूत्र :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर जन्म लेकर सुंदर मानव जीवन को प्राप्त करके प्रत्येक मनुष्य जीवन के अंतिम लक्ष्य अर्थात मोक्ष की कामना करता है | अपने इस उद्योग में वह अपने सद्गुरुओं से प्राप्त मार्गदर्शन का अनुसरण भी करने का प्रयास करता है परंतु कुछ ही दिनों में उसका मन उद्विग्न



वैराग्य शतकम् भाग २१ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - इक्कीसवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧



वैराग्य शतकम् भाग २० :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - बीसवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*अमीषां प्राणानां तुलितबिसि



वैराग्य शतकम् भाग १९ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - उन्नीसवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*भोगे रोगभयं कुले च्युति



वैराग्य शचकम् भाग १८ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - अठारहवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*परेषां चेतांसि प्रतिदिवस



वैराग्य शतकम् भाग १७ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - सत्रहवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*अर्थानामीशिषे त्वं वयमप



वैराग्य शतकम् भाग १६ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - सोलहवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*न नटा न विटा न गायना न प



वैराग्य शतकम् भाग् १५ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - पन्द्रहवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*त्वं राजा वयमप्युपासि



वैराग्य शतकम् -भाग १४ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - चौदहवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*विपुलहृदयैर्धन्यैः कैश्च



वैराग्य शतकम् - भाग १३ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - तेरहवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*आजानन्माहात्म्यं पततु शल



वैराग्य शतकम् - भाग १२ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️ *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *सनातन परिवार* 🚩 *की प्रस्तुति* 🌼 *वैराग्य शतकम्* 🌼 🌹 *भाग - बारहवाँ* 🌹🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧🎈💧*स्तनौ मांसग्रन्थि कनकलशा



अनर्गल जिज्ञासायें :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन सहज जिज्ञासु होता है ! मानव के विकास में उसकी जिज्ञासाओं का बहुत बड़ा योगदान है | यदि मनुष्य के हृदय में जिज्ञासायें न होतीं तो वह शायद स्वयं एवं संसार के विषय में जान ही नहीं पाता | सनातन धर्म के जितने भी ग्रन्थ हैं सब किसी न किसी की जिज्ञासा के समाधान के रूप में ही हैं | पूर्वकाल में हम



समय का नियोजन :- आचार्य अर्जन तिवारी

*इस धरा धाम पर आकर जीव अनेक योनियाँ प्राप्त करके अपना समय व्यतीत करता है | यहाँ प्रत्येक जीव को गिनती की साँसों के साथ एक निश्चित समय मिला हुआ है उसी समयावधि में वह जो चाहे वह कर ले | धरती पर जीवों का सिरमौर मनुष्य है | मानव जीवन पाकर हम जो चाहे वह कर रहे हैं परंतु यह ध्यान नहीं दे पा रहे हैं कि हमक



विचारों का प्रभाव :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में उसका जीवन किस दिशा में जाता है यह उसकी सोच पर निर्भर करता है | मनुष्य में दो प्रकार की सोच होती है पहली सकारात्मक और दूसरी नकारात्मक | मनुष्य जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है | इस तरह से मनुष्य की सोच ही उसके व्यक्तित्व के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है , क्योंकि



जब से घर से दूर रहने लगें है

जब से घर से दूर अकेले रहने लगें है मुश्किलों को भी हँसकर सहने लगें हैखुद से ही ढूंढ़ लेते अब तो जवाब हम सवाल भी कुछ अहमियत खोने लगें है कोई मनाता ही नहीं अब हमें खाने को न ही आवाज़ लगाता सुबह जगाने को खुद से ही खुद को सुला देते है रात में खुद से ही खुद को सुबह जगाने लगें है एक मज़बूत सा ताला इंतज़ार में



मेरी मंजिल कहां है ?

ना जाने मंजिल तो जमाने ने ही छीन ली है हम तो उस मंजिल की तलाश में हैं जहां अपनी ही मंजिल बन जाए दुनिया वालों ने हमें बहुत कुछ सिखा दिया पर दुश्मनों ने हमें जिंदा रहना सिखाया ।



रूठना एवं मनाना :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में अनेकों ग्रंथ मानव जीवन में मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं | इन्हीं ग्रंथों का मार्गदर्शन प्राप्त करके मनुष्य अपने सामाजिक , आध्यात्मिक एवं पारिवारिक जीवन का विस्तार करता है | वैसे तो सनातन धर्म का प्रत्येक ग्रंथ एक उदाहरण प्रस्तुत करता है परंतु इन सभी ग्रंथों में परमपूज्यपाद , कविकुलश



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