लहर

हौसला होता नहीं, जुटाना पड़ता है। पैर उठता नहीं, उठाना पड़ता है। दुनियां जरूरत की है, बिन जरूरत के बोल मिलता नहीं, मिलाना पड़ता है। काम, नाम होता नहीं, मेहनत से बनाया जाता है। हमेशा अच्छा मिलता नहीं, समझौता करना पड़ता है। मुश्किल वक्त जब भी आता है। चहेतों के सच्चे चेहरे लेकर आता है। आशियाना बनता नही



तदपि विरोध माने जहँ कोई :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में अनेक प्रकार के क्रियाकलाप ऐसे होते हैं जिसके कारण मनुष्य के चारों ओर उसके जाने अनजाने अनेकों समर्थक एवं विरोधी तथा पैदा हो जाते हैं | कभी-कभी तो मनुष्य जान भी नहीं पाता है कि आखिर मेरा विरोध क्यों हो रहा है , और वह व्यक्ति अनजाने में विरोधियों के कुचक्र का शिकार हो जाता है | मनुष्य का



जीवन



लक्ष्मण चरित्र भाग - २१ :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🐍🏹 *लक्ष्मण* 🏹🐍 🌹 *भाग - २१* 🌹🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸*➖➖➖ गतांक से आगे ➖➖➖**लक्ष्मण जी* ज्ञानवान होकर भी आज एक साधारण मनुष्य की भाँति अपने बल का बखान करने लगे | अपने बल का बखान करने पर जो परशुराम जी क



परशुराम

।।🙏परशुराम🙏।।कन्नौज-सम्राट गाधि की थीअत्यंत रूपवती सुकन्या!सत्यवती भृगुनन्दन ऋषीकके जीवन से बंध रमना!!भृगु ऋषि से पुत्रवधू नेपुत्र प्राप्ति का किया प्रणय निवेदनतथास्तु! कह भृगु मार्ग बताएगूलर-वृक्ष का आलिंगन करचरु-पान से गर्भ वह पाएपात्र माँ ने लोभवशछल से पात्र बदलाब्राह्मण पुत्र 'जमदग्नि'क्षत्रिय



जीवन: आरंभ या शून्य

ज़िन्दगी मुश्किल कब होती है? क्या तब जब आप जीवन के संघर्षो से लड़ते - लड़ते थक जाते है? या तब जब सारी मुश्किलें जाले की तरह साथ में आपको फांस लेती है?या फिर तब जब जीवन में आपके साथ कोई नहीं होता और आपको अपनी लड़ाई खुद लड़नी होती है? मेरे ख्याल से नहीं; इन सारी दुविधाओं से



सकारात्मक जीवन की कला

सकारात्मक जीवन कीकला आज की ताजा ख़बरक्या है? टीवी के समाचार चैनलों पर हम क्या ढूंढ रहे हैं?समाचार पत्रोंकी शीर्ष पंक्ति में हमें किसकी तलाश है?आखिर किसी बुरी ख़बर की हमें अपेक्षाक्यों है? क्या समाज में नकारात्मकता बढ़ रही है. अगर यह सच है तोइसके लिए जिम्मेदार कौन है?क्या सोशल मीडिया,समाचार के दृश्य-श्र



बहुत देर

बहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूनेमेरे दर पे आने मेंहम तो कब से लगे थेतुझे मनाने मेंअब तो न वो प्यास हैन वो तलाश है ,मानोंखुद को पा लिए हमनेकिसी के रूठ जाने मेंबहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूनेमेरे दर पे आने मेंतेज़ हवा में जलाया चिरागक्यों बार बार बुझ जाता हैजब की कोई कसर नहीं छोड़



ईश्वरीय अनुदान को समझें :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार का सृजन करने वाले परमपिता परमात्मा ने मनुष्य को सब कुछ दिया है , ईश्वर समदर्शी है उसने न किसी को कम दिया है और न किसी को ज्यादा | इस सृष्टि में मनुष्य के पास जो भी है ईश्वर का ही प्रदान किया हुआ है , भले ही लोग यह कहते हो कि हमारे पास जो संपत्ति है उसका हमने अपने श्रम और बुद्धि से प्राप्त



Hindi poetry on life - मैं कुछ भूलता नहीं ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित हिंदी कविता मैं कुछ भूलता नहीं मैं कुछ भूलता नहीं ,मुझे सब याद रहता है अजी, अपनों से मिला गम, कहाँ भरता हैसुना है, वख्त हर ज़ख़्म का इलाज है पर कभी-२ कम्बख्त वख्त भी कहाँ गुज़रता है मैं अब बेख़ौफ़ गैरों पे भरोसा कर लेता हूँ जिसने सहा हो अपनों का वार सीने पे , वो



विजेथुआ धाम

Vijethuwa dhamजय श्री बजरंग बली, हनुमानजी🙏🙏_बिजेथुआ_धाम_🙏🙏 सुलतानपुर जिले की कादीपुर तहसील में सूरापुर बाजार के दक्षिण लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर बिजेथुआ नामक स्थान पर स्थित हनुमान जी का वह मंदिर, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहीं महाबीर बजरंगबली श्री हनुमानजी ने कालनेमि का वध किया था।



है, जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है=, ..... क्या , यही हिंदोस्तान है ?

है, जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है .....क्या .... यही हिंदोस्तान है ? पकड़ो, पकड़ो , .... मारो ,मारो , की आवाज़ों से वहकांप रहा था । एकाएक आवाज़ें नजदीक आने लगी । उसे कुछ समझ नहीं आ रहाथा। वह जड़ खड़ा था, तभीकिसी ने झपट कर उसे खींच लिया और छिपा लिया अपने आँचल में.....थोड़ी दूर का मंजर देखकर वह छटपट



युवा रचनाकार आलोक कौशिक की संक्षिप्त जीवनी

आलोक कौशिक एक युवा रचनाकार एवं पत्रकार हैं। इनका जन्म 20 जून 1989 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम पुण्यानंद ठाकुर एवं माता का नाम सुधा देवी है। मूलतः बिहार राज्य अन्तर्गत अररिया जिले के फतेहपुर गांव निवासी आलोक कौशिक ने स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) तक की पढाई बेगूसराय (बिहार) से की



युवा रचनाकार आलोक कौशिक की संक्षिप्त जीवनी

आलोक कौशिक एक युवा रचनाकार एवं पत्रकार हैं। इनका जन्म 20 जून 1989 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम पुण्यानंद ठाकुर एवं माता का नाम सुधा देवी है। मूलतः बिहार राज्य अन्तर्गत अररिया जिले के फतेहपुर गांव निवासी आलोक कौशिक ने स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) तक की पढाई बेगूसराय (बिहार) से की



मेरे जीवन की दर्दनाक घटना

प्रिय स्नेही मित्रों जय श्रीकृष्णा *14/07/2019 की सुबह06 बजे मैं घर के बाहर गाय का दूध निकाल रहा था। ऊपर से विजली का तार टूटकर मेरे सिर पर गिर गया। सिर से जब मेरी पीठ पर गिरा तो मैं आआआआआ करते हुए पीछे की तरफ गिर गया , जबकि दिमाग काम कर रहा है कि कोई हमे हाथ से न छूए अन्यथा उसे भी खतरा ह



बोलने की कला :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*चौरासी लाख योनियों में मानव जीवन को दुर्लभ कहां गया है क्योंकि यह मानव शरीर अनेक जन्मों तक कठोर तपस्या करने के बाद प्राप्त होता है | इस शरीर को पा करके मनुष्य अपने क्रियाकलाप एवं व्यवहार के द्वारा लोगों में प्रिय तो बनता ही है साथ ही मोक्ष भी प्राप्त कर सकता है | अपने संपूर्ण जीवन काल में प्रत्येक



जीवन का संयोजन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन यदि देखा जाय तो बहुत ही सरल एवं कठिन दोनों है | इस जीवन के रहस्य को वही जान पाता है जो जीवन को एक कुशल प्रबंधक की तरह प्रबंधित करता है | मानव जीवन में भूतकाल , वर्तमानकाल एवं भविष्यकाल का बहुत ही महत्व है इन्हीं तीनों कालों पर संपूर्ण मानव जीवन टिका हुआ होता है , जो इनके रहस्यों को जान जा



हे राम तीस जनवरी की शाम बापू के अंतिम शब्द

“हे राम” तीसजनवरी 1948की शाम राष्ट्रपितामहात्मा गांधी के अंतिम शब्द <!--[if !supportLineBreakNewLine]--><!--[endif]-->डॉ शोभाभारद्वाज<!--[if !supportLineBreakNewLine]--><!--[endif]-->संयुक्त भारत दोटुकड़ों में बार चुका था भारत एवं पश्चिमी ,पूर्वी पाकिस्तान (1971 में पाकिस्तानसे अलग बना बंगलादेश ) अफ़स



विचारों की शक्ति असीम है :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में विचारों का बड़ा महत्व है | विचारों की शक्ति असीम होती है | यहां व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है क्योंकि उसके द्वारा हृदय में जैसे विचार किए जाते हैं उसी प्रकार कर्म भी संपादित होने लगते हैं क्योंकि विचार ही कर्म के बीज हैं , व्यवहार के प्रेरक हैं | जब मनुष्य व्यस्त होता है तो



सम्बन्धों को सहेजना भी एक कला है :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है , किसी परिवार में जन्म लेकर मनुष्य समाज में स्थापित होता है | इस जीवन क्रम में परिवार से लेकर समाज तक मनुष्य अनेको संबंध स्थापित करता है इन संबंधों का पालन बहुत ही कुशलता पूर्वक करना चाहिए | जिस प्रकार किसी भी विषय में सफलता के उच्च शिखर को प्राप्त कर लेने की अपेक्षा उस



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