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साफ्ट कॉर्नर

लघुकथासाफ्ट कॉरनर " मैं जानती हूँ कि आपके दिल में मेरे लिये एक खास किस्म का साफ्ट कॉरनर है परन्तु मेरे लिये आप एक अच्छे और शायद सच्चे दोस्त हैं ,इसके अलावा कुछ नहीं । इसे ही मान लिजिये प्लीज क्योंकि उसी नाते मैं आपको ,अपनी कोई भी बात बड़ी बेबाकी से कह लेती हूँ । " शिखा ने अपनी चिर परिचित मासूमीयत



लघुकथा ...........स्विच आफ

किसी के प्रति आकर्षण कभी भी सम्मोहन में बदल सकता है ।रुचियां हमेशा हमसफर ढूँढ़ती रहती हैं । प्यार वो समुंदर है जिसमें हर उम्र समा जाती है ।प्यार शक्ति है तो कमजोरी भी यही बनता है ।______________________________________________________लघुकथास्विच आफ " इतने दिन से कहां थीं ? "" होना कहां है ,घर पर ही



जीवन में असफलता के 10 मुख्य कारण...

जीवन में असफलता के 10 मुख्य कारण... क्या आप बार-बार अपने जीवन में असफलता प्राप्त कर रहे हैं? क्या आप सोचने लगे हैं कि आपकी असफलता का मुख्य कारण आपका भाग्य है? अगर हाँ ! तो इस पोस्ट के द्वारा असफलता के 10 मुख्य कारण को पढ़ें और अपने जीवन में failure के सही कारणों को समझें। हो सकता



वैष्णव जन तो ते नर कहिये पीर पराई जान रे ( स्वच्छता अभियान )

वैष्णव जन तो ते नर कहिये पीरपराई जान रे (स्वच्छता अभियान ) डॉ शोभा भारद्वाज महात्मा गाँधी जी की 150 वींजयंती के अवसर पर सूर्या संस्थान नोएडा में आयोजित सर्वधर्म समभाव गोष्ठी के अवसरपर विभिन्न धर्म गुरु के भाव पूर्ण प्रवचनों को सुनने का अवसर मिला | सफाईकर्मचारियों द्वारा तैयार जलपान सबने गृहण किया



दोस्त का प्यार

ओ मेरे दोस्त मत रूठ जाना,ये शरीर बेजान हो जायेगा २ तू जिए हजारो साल मेरी उमर तुझे लग जाये ,पता नही मेरे मरने का तुफान कब आयेगा।



छोड़ेंगे न साथ।

छोड़ेंगे न साथ।परछाई ही हैं जो स्वयम के वजूद को और मजबूत करती हैं। बाकी तो सभी साथ छोड़ देते हैं। परछाई हर वक्त साथ रहती हैं। दिन हो तो आगे-पीछे अगल-बगल और जैसे ही ज़िंदगी मे अंधेरा होता हैं वह खुद मे समा जाती हैं पर साथ नहीं छोडती हैं। कभी आपसे आगे निकलती हैं और तो और वह आपसे बड़ी और मोटी भी हो जाती है



“गज़ल”जा मेरी रचना तू जा, मेले में जा के आ कभी

“गज़ल”जा मेरी रचना तू जा, मेले में जा के आ कभी घेरे रहती क्यूँ कलम को, गुल खिला के आ कभीपूछ लेना हाल उनका, जो मिले किरदार तुझको देख आना घर दुबारा, मिल मिला के आ कभी॥शब्द वो अनमोल थे, जो अर्थ को अर्था सके सुर भुनाने के लिए, डफली हिला के आ कभी॥छंद कह सकती नहीं तो, मुक्त हो



देश मेरा बढ़ रहा है ( कुलदीप पाण्डेय आजाद )

देश मेरा बढ़ रहा | प्रगति सीढ़ी चढ़ रहा |देश के उत्थान में सब,साथ मिल अब चल रहे हैं |खून से सींचा जिसे था , हर सुमन अब खिल रहे हैं |कंटकों को आज देखो स्वम ही वह जल रहा है | देश मेरा बढ़ रहा |गोद में बैठे अभी तक ,



कभी सोचता हूँ कि

कभी सोचता हूँ किकभी सोचता हूँ किजिंदगी की हर साँस जिसके नाम लिख दूँवो नाम इतना गुमनाम सा क्यों है ?कभी सोचता हूँ किहर दर्द हर शिकन में, हर ख़ुशी हर जलन मेंहर वादे-ए-जिंदगी में, हर हिज्र-ए -वहन मेंजोड़ दूँ जिसका नाम, इतना गुमनाम सा क्यों है ?कभी सोचता हूँ किसुबह है, खुली है अभी शायद आँखें मेरीलगता ह



सुना है उसे ? कभी सुनना ……।

कुछ कविता येँ,यूँ कह लें कुछ अभिव्यक्तियाँ,इतनी पूर्णता में होती हैं कि उन्हें नहीं चाहिए होती है किसी की प्रतिक्रिया अपने भीतर का पाठक उसे अनगिनत नज़रियों से पढता है कुछ मिटाता है कुछ जोड़ता है ...सत्य और कल्पना रक्त में पुरवा की तरह प्



कभी शून्य की देहरी पर जाओ, तो …मुझे पढ़ना

शून्य में टिकी मेरी आँखें हाथों में एक कलम देखती है और लिखती जाती है - काव्य-महाकाव्य ग्रन्थ-महाग्रंथ कभी शून्य की देहरी पर जाओ तो … पढ़ना उसे हुबहू समझने के लिए कोलाहल में मुझसे बातें करना जब सन्नाटा साँसें अवरुद्ध करने लगे तो लिखे हुए किसी शब्द को रेखांकित करना कई स्वर मुखरित हो उठेंगे !शून्य में म



कहीं भी कभी भी

मैं न यशोदा न देवकी मैं न राधा न रुक्मिणी न मीरा नहीं मैं सुदामा न कृष्ण न राम न अहिल्या न उर्मिला न सावित्री .......... मैं कर्ण भी नहीं नहीं किसी की सारथी न पितामह न एकलव्य न बुद्ध नहीं हूँ प्रहलाद ना गंगा न भगीरथ पर इनके स्पर्श से बनी मैं कुछ तो हूँ यदि नहीं - तो फिर क्यूँ लहराता है बोलता हुआ मौन



Guftugu: Niyat

नियतखामोश जबानों की भी खुद की भाषा होती है कभी अहदे - बफा के लिए ,कभी माहोल को काबिल बनाने के लिए मु.ज्तारिब क्या करु नियत नहीं . . दुसरे पर कीचड़ उछाल कर ख़ुद को कैसे साफ़ रखू। कभी खुद के घोसले ,कभी दुसरो के तिनके की पाकीज़गी बनाए रखने की नियत ,मुख्तलिफ़ होकर भी ख़ामोशी अपनी मश



कभी इसके नाम, कभी उसके नाम...

हर दिन उगता है सूरज,कभी इसके नाम, कभी उसके नाम; हर दिन गाते हैं पंछी, कभी इसके नाम, कभी उसके नाम. नदियां करती हैं कल-कल... भौंरे गाते हैं गुन-गुन, हवा बहे, कहे सुन-सुन-सुन, तू प्यार की मीठी-मीठी धुन, ये सोनी सुबह, सिन्दूरी शाम, कभी इसके नाम, कभी उसके नाम. बहुत हुआ,उठ, अब तू चल, बीत रहा है, एक-एक पल,



जि

जिंदगी कभी रूकती नहीं हालत गंभीर होते है





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