कहानी



कलाम के नाम का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए पार्टी

महान इंसान मरने के बाद भी काम का रहता है. अच्छे लोगों के लिए उसकी बातें जिंदगी का सबक बन जाती हैं. बुरे लोगों के लिए उसका नाम ‘इस्तेमाल’ करने के काम आता है. राजनीति के लिए. अपने फायदे के लिए. पूर्व प्रेसिडेंट एपीजे अब्दुल कलाम अब इस दुनिया में नहीं हैं. लेकिन उनका नाम है. तो बस कुछ लोग कर रहे हैं इस



पहिली पानी



बीजेपी की हीरोइन जो हेलिकॉप्टर क्रैश में मर गई

देश में 2004 के लोकसभा चुनावों की गूंज थी. साथ में कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव भी हो रहे थे. इनमें से एक था आंध्र प्रदेश. यहां टीडीपी के नेता और मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के मंसूबे पाले थे. उनके राज्य की एक सीट थी करीमनगर. इस लोकसभा सीट से बीजेपी के वरिष्ठ नेता



बाबा रामदेव के छह सच, जो गूगल नहीं बताएगा

बाबा रामदेवबाबा रामदेव. पतंजलि वाले. रात दिन टीवी पर आते हैं. कभी ऊटपटांग बयान. कभी फिल्म वालों संग डांस. कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस. और जब ये सब नहीं तो उनके ऐड. बाबा रामदेव. गूगल पर खूब खोजे जाते हैं. पर उनके और उनके साथी बालकृष्ण के बारे में कुछ चीजें अभी इंटरनेट पर नहीं आई हैं. हमें पता चल गई हैं. बरा



आचार्य बालकृष्ण की पर्सनल कहानी सामने आई

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्णरामदेव का नाम तब रामकिशुन होता था. किशोरावस्था में वह परिवार को बिना बताए खानपुर के गुरुकुल में भर्ती हो गए. संस्कृत की पढ़ाई के वास्ते. यहीं पर साल 1987 में उनकी मुलाकात बालकृष्ण से हुई. यानी आज से 30 साल पहले. तब से दोनों साथ हैं. आज रा



साध्वी

शहरके दूसरे छोर पर खाली पड़े मैदान की एक अलग पहचान थी. उसमें उगेपेड़ों की छाँव और वहां का शांत वातावरण हर किसी को लुभाता था. यहाँ से गुजरते हुए लोगों को उन पेड़ों की छाँव में नर्म घास पर लेटे,बैठे और खड़े प्रेमी जोड़ों के दर्शन बड़े आराम से हो जाते थे. येवो लोग थे जो घर वाल



"कहानी" “धान रोपाई”

"कहानी" “धान रोपाई” धान पान अरु केरा, ई तीनों पानी के चेरा, बहुत पुरानी एक देशज कहावत है। यूँ तो पानी ही जीवन है, जलचर, थलचर और नभचर सभी इसी के सहारे हरे भरे रहते हैं। जीव- जंतु, जानवर, वनस्पति, पेड़- पौध, लता- पता इत्यादि से लेकर मानव तक की प्यास बुझाने वाला यह पानी, कुद



बहाव के विरुद्ध

एक गायन टीवी शो के दौरान चयनित प्रतिभागी को समझते हुए एक निर्णायक, मेंटर बोला। "अपनी कला पर ध्यान दो, तुम्हारा फोकस कहाँ है? मैं नहीं चाहता कि तुम इस जेनरेशन के सुरजीत चौहान या देविका नंदानी कहलाये जाओ। क्या तुम्हे अपने माँ-बाप का सिर श



कलरब्लाइंड साजन (कहानी) #ज़हन

Color Blind Lover (Hindi Story)"देखना ये सही शेड बना है? आना ज़रा...""मैं नहीं आ रही! जब कोई काम कर रही होती हूँ तभी तुम्हे बुलाना होता है।"अपने कलाकार पति आशीष को ताना मारती हुई और दो पल पहले कही अपनी ही बात ना मानती हुई रूही, उसके कैनव



मासूमीयत

शर्मा जी अभी-अभी रेलवे स्टेशन पर पहुँचे ही थे। शर्मा जी पेशे से मुंबई मे रेलवे मे ही स्टेशन मास्टर थे। गर्मी की छुट्टी चल रही थी इसलिए वह शिमला घूमने जा रहे थे, उनके साथ उनकी धर्मपत्नी मंजू और बेटी प्रतीक्षा भी थी। ट्रेन के आने मे अभी समय था।तभी सामने एक महिला अपने पाँच स



भिखारिन अम्मा

बलवीर घर में चिंतामग्न बैठे हुएथे. बलवीर गाडी चलाने का काम करते थे लेकिन दो दिनपहले गाडी बुरी तरह से खराब हो गयी. जितना पैसा पास रखा थासब खर्च कर दिया लेकिन गाड़ी में अभी और सामान की जरूरत थी. आज उन्हें घर में बैठे दो दिन होचुके थे किन्त



काश हम प्रधान होते



कहानी - मिट्टी के मन

बहती नदी को रोकना मुश्किल कामहोता है. बहती हवा को रोकना और भी मुश्किल.जबकि बहते मन को तो रोका ही नही जा सकता. गाँवके बाहर वाले तालाब के किनारे खड़े आमों के बड़े बड़े पेड़ों के नीचे बैठा लड़का मिटटीके बर्तन बनाये जा रहा था. तालाब की तरफ से आने वाली ठंडीहवा जब इस लडके के सावले उघडे बदन से टकराती तो सर से प



चुन्नू

वो मुस्कुराता चेहरा, कई सारे ख्व़ाब, कई ख़्वाहिशें, कई हसरतें और कई अरमान. कैसा हो अगर उन सभी ख्वाहिशों और अरमानों को कुछ चुनिंदा लम्हे ज़ज्बे और होंसलों के रंगों से उस मुस्कुराते चेहरे पर बसी दो प्यारी आँखों में भर दे. कैसा हो अगर सिर्फ एक पल उसकी सारी दुनिया बदल दे. कैसा



झूठी शान : जो है उसी में खुश रहना सीखे |

एक दिन विध्यालय के कुछ छात्रों ने पिकनिक पर जाने की योजना बनाई | और तय किया की सभी अपने-अपने घर से खाने का सामान लेकर आएंगे |इनमें से जीतू बहुत गरीब था,जब जीतू घर पहुंचा तो उसने अपनी माँ को सब कुछ बता दिया |की मुझे पिकनिक पर जाना है और सभी दोस्त अपने घर से कुछ न कुछ खाने के सामान साथ लेकर आएंगे |बच्



सिर्फ तुजसे ही प्यार है - शिखा

Dil ko mere humesha se sirf tujse hi pyar hai,Par mere raj kumar ko ye baat Mai bataaun kaise.Jiski aane ki aahat hi dil ko betab kar jaati hai,Dil ki ye halat tujse ab chhupaun kaise.Jiski hansi se labo pe mere hansi chha jaati hai,Dil ka ye pagalpan tujko dikhaun kaise.Aaine mai jab dekhu to galo



दर्पण

बोले टूटकर बिखरा दर्पण , कितना किया कितनों को अर्पण,बेरंगों में रंग बिखेरा, गुनहगारों को किया समर्पण।देखा जैसा, उसको वैसा, उसका रूप दिखाया,रूप-कुरूप बने छैल-छवीले, सबको मैंने सिखाया,घर आया, दीवार सजाया, पर विधना की माया,पड़ूँ फर्श पर टुकड़े होकर, किस्मत में ये लिखाया।च



घमंडी सियार ---- ओमप्रकाश क्षत्रिय "प्रकाश"

घमंडी सियार ओमप्रकाश क्षत्रिय"प्रकाश" काननवन में एक सियाररहता था. उस का नाम था सेमलू. वह अपने साथियों में सब से तेज व चालाकी से दौड़ताथा. कोई उस की बराबरी नहीं कर पाता था. इस कारण उसे घमंड हो गया था," मै सियारों में सब से तेज व होशियार सियार हूँ." उस ने



मिट्टी के सपने.

सुबह के तकरीबन ६ बज रहे थे. मौसम में थोड़ी नमी थी और हवा भी हलके हलके बह रही थी. गाँव की एक छोटी सी झोपडी के एक कोने में मिट्टी के बिछोने पर शुभा दुनिया से बेख़बर मिट्टी के सपनों में खोई हुई थी. शुभा कहने क



बेटे की चाहत में,घर बर्बाद कब तक !

ये कैसी विडंबना है कि नारी का समाज में इतने योगदान के बाद भी वो सम्मान नहीं मिला, जितनी की वो हकदार है, इसके पीछे शायद नारी ही दोषी है, जब हम बेटी होते है तो अपने हक के लिए लड़ते है, शादी के बाद जब मां बनने वाले होते है तो ' बेटे की चाह ' रखते है, ऐसा क्यों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,



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