काश कमीना काम न होता

अपने प्रेमी के संग स्वच्छंद रंगरेलियां मनाने की हवस में अंधी, एक कलयुगी माँ द्वारा ,अपने मासूम बच्चों की तकिये से गला घोंट कर निर्मम हत्या करने की खबर से आहत होकर लिखी गयी और खरे कटु सत्य को उजागर करती कविता -*******************************************@@@@@@@ काश कमीना काम न होता @@@@@@@************



काम करो ,कुछ नाम करो

@@@@@ काम करो , कुछ नाम करो @@@@@ ********************************************************** काम करो ,कुछ नाम करो ,पर नहीं देश बदनाम करो | भय को दूर भगाओ तुम ,जमीर को जगाओ तुम | दुखियों का तुम दुःख हरो | काम करो ,कुछ नाम करो ,पर नहीं देश बदनाम करो || धन खूब कमाओ तुम ,पर पूरा कर चुकाओ तुम | ईमान से त



हम होंगे कामयाब

हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाबहम होंगे कामयाब एक दिन ओ हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास,हम होंगे कामयाब एक दिन॥हम चलेंगे साथ-साथ, डाल हाथों में हाथहम चलेंगे साथ-साथ एक दिनओ हो, मन में है विश्वास, पूरा है विश्वासहम चलेंगे साथ-साथ एक दिन॥होगी शांति चारों ओर, होगी शांति चारों ओरहोगी शांति चारों



व्यापारी

 जय श्री कृष्ण,,::::::::---||||••••|||||~__आर.के .श्री.मानवेंद्र जी मेरा आपको कोटि कोटि प्रणाम,,आप महान विचारक हैं,आपके। विचारों को में रोज पढ़ता हूँ,और अपने जीवन मे उतरता हूँ,लेकिन आपके एक विचार से मुझे तकरार हैं,क्योंकि मेरा भी व्यापार हैं,आज का मेरा यह लेख आप तक पहुँच



वैलंटाइन डे !

वेलनटाइन डे ! क्या है ? इसके क्या क्या रूप है भारतीय दर्शन में आप किसी घटना या प्रसंग किस प्रसंग से आप इसे जोड़ कर देखते है क्या यह प्यार की अनुभूति है अथवा वासना का प्रदर्शन क्या यह अदम /ह्वा से आदिशक्ति/आदिशिव राति/कामदेव राधा /कृष्ण  नेतिक/अनैतिक अथवा आधुनिक युग के प्रदर्शन मंच हॉलीवुड से बालीवुड



शिक्षित होने का अर्थ, नहीं होने का अनर्थ

गिरिजा नंद झाहम नाहक ही इस बात को ले कर हकलान होते रहे हैं कि यह देश निरक्षरों का देश है। अनपढ़ और गंवारों का देश है। देश को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि यहां के ‘उच्चतम’ शिक्षा प्राप्त नौजवानों में किसी काम के छोटे या बड़े होने में भेद नहीं करते। शिक्षा अपनी जगह और काम अपनी जगह। शिक्षा इंसान को समझ



शिक्षकों का ‘अकाल’ फिर भी शिक्षा का अधिकार

गिरिजा नंद झासबके लिए जरूरी होनी चाहिए शिक्षा। समझने में लगे साठ साल से ज़्यादा का वक़्त। मगर, मुसीबत अब भी अपनी जगह बरकरार। वज़ह, इन साठ सालों में हमने लोगों को पढ़ाया ही कितना कि पढ़ाने वाले को तैयार कर पाते। एक तो सबको शिक्षा मिली नहीं। जिन्हें मिली, उसमें से ज़्यादातर नाम पता लिखने के काबिल मात्



मुहावरा

जिसकी लाठी उसकी भैंस



काम-काज चुस्त, याददाश्त दुरुस्त

अक्सर हम अपना मोबाइल, किताबें, चाभियां या कोई और ज़रूरी चीज़ें भूल जाते हैं, और अफ़सोस करते हैं अपनी खराब याददास्त पर. कितना अच्छा हो यदि थोड़ी सी सावधानी और थोड़े से प्रयास हमारी याददास्त को बेहतर कर दें !एक सादे कागज़ पर अपनी पसंद के कोई भी तीन शब्द लिखें. उनका क्रम एक बार ध्यान से देख लें. अब उस कागज़ क



स्वाइनफ्लू से फीका न हो होली का रंग

मौसम के बदलते रंग और बारिश के साथ ठंड पलटने से स्वाइन का खतरा बढ़ गया है । इस होली अपने करीबियों को गले लगाकर होली की बधाई देने या होली के जश्न के लिए किसी रेन या पूल पार्टी का हिस्सा बनने से पहले एक बार जरूर सोच लें कि कहीं आपका त्यौहारों का यह खुमार आपको स्वाइन फ्लू की चपेट में तो नहीं ला रहा। इस



शब्दों की होली

तेरे संग खेली मैंने , अपने शब्दों की होली , यही बात अब तक मैंने , तुमसे नहीं है बोली ।। कोई रंग न बिखेरा , न गुलाल ही उड़ाया , सुन्दर यह रूप अपना , बस शब्दों से सजाया ।। अपनी कल्पना से सजा दो , अब शब्दों की रंगोली, लाए मंगल और सौभाग्य , सबके जीवन मे ये होली ।।



होली के रंग

अबकी होली, खेलो रंग इतना , अपनों संग मनाओ होली, जी चाहे जितना , छोटी छोटी बातें है , छोटी छोटी खुशियाँ , तुम भी ज़रा हँस लो आज, जब हस्ती है ये दुनिया, न बुरा सोचो किसी का , हर मन हो खुशियाँ समाई , करो कुछ ऐसा , की लगे प्रेम के रंग होली है लाई ।



शब्दनगरी की पहली होली

यह शब्दनगरी की आप सब के साथ पहली होली है । पूरे शब्दनगरी संगठन के लिए ये सौभाग्य और अत्यंत हर्ष का मौका है जब हम और आप, अपने शब्दो के रंगो से इस पावन पर्व पर एक दूसरे पर रंगो की बौछार करेंगे । होली बसंत व प्रेम-प्रणव का पर्व है । रंगो का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है। फाल्गुन मा



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