कविता



तुम शेर बन अड़े रहो....

तुम शेर बन अड़े रहो....कोरोना अभी गया नहीं...शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहोशेरनी भी साथ हो, शावक भी पास होबाहर हवा ठीक नहीं, निकलना उचित नहींशेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो...।दूध की मांग हो या सब्जी की पुकार होभले राशन की कमी हो, तुम फिकर करो नहींतुम निडर खड़े रहो, बिल्कुल डरो नहींशेर बन अड़े रहो



दोस्ती



जीव और जगत

जीव तुझमें और जगत में, है फरक किस बात की,ज्यों थोड़ा सा फर्क शामिल,मेघ और बरसात की।वाटिका विस्तार सारा , फूल में बिखरा हुआ,त्यों वीणा का सार सारा, राग में निखरा हुआ।चाँदनी है क्या असल में , चाँद का प



प्रकृति रहस्य

🕉️🕉️🕉️🐚सृष्टि-रहस्य🐚🕉️🕉️🕉️नश्वर जगत् है- धारणा भ्रामक- त्रुटिपुर्ण हैब्रह्म सत्य है एवम् जगत् सापेक्षित सत्य हैवस्तु का रूप रंग आकार बदल सकता हैतरंग का खेल सारा नष्ट नहीं हो सकता हैमहाविध्वंस धातक सस्त्रादि बन सकते हैंमहल ढह मिट्टी का मलवा बन सकते हैंपंचतत्व का ये तन जल राख बन जाता हैसृ



बारामती का शेर....

बारामती का शेर....बारामती के लोंगों ने बस एक ही नाम को है पूजा शरद पवार नाम मान्यवर हर गली शहर में है गूँजासाहब महाराष्ट्र की धरती पर ऐसा नाम कहाँ है दूजाराजनीति गलियारे में भी वही नाम जाता है पूजा।बड़े महारथी पाँव चूमते झुक झुककर भाई जिसकेगाथा क्या गाऊँ मैं भाई उसके चरित्र की महिमा केबोल कभी बड़ बोलन



चलो तुम बताओ

प्यार तो तुमने भी मुझसे किया था मैं तो तुम्हारा प्यार लिखीचलो तुम बताओ...... झूठ ही सही मगर तुमने भी तो मेरी बेबफाई उससे सुनाई होगी मैं तो तुम्हारी यादों के अंक मेंआंसुओं से तकिये पर तुम्हारी तस्वीर बनाती हूँ चलो तुम बताओ......अपने दर-ओ



नसीब अपना अपना...

नसीब अपना-अपनाकिसी ने सच कहा है साहबदुनिया में सभी लेकर आते हैंनसीब अपना-अपना....।विधिना ने जो लिख दियातकदीर छठी की रात मिटाए से भी नहीं मिटतालकीर खींची जो हाथ....।नसीब में होता है तोबिना माँगे मोती मिल जाता हैनसीब में न होने परमाँगने से भीख भी नहीं मिलती है।ये तो नसीब का ही खेल हैरात का सपना सुबह स



एक मसीहा जग में आया....

एक मसीहा जग में आया....एक मसीहा जग में आयादलितों का भगवान बनाराजनीति मन को ना भायाज्ञानसाधना ही आधार बना।निर्धनता को धता बतायाछात्रवृत्ति से अरमान सजोयाकाला पलटन में स्थान मिलागुरू से पूरा सम्मान मिला।अर्थशास्त्र जो मन को भायाडॉक्टरेट की डिग्री दिलवायावर्णव्यवस्था थी मन में चुभतीशोध प्रबंध उस पर ही



गुम हूँ उसके याद में.....

गुम हूँ उसके याद में....गुम हूँ उसके याद में, जिसे चाहा था कभीगोदी में सुलाकर जिसने, दुलारा था कभीप्रसव-वेदना की पीड़ा से, जाया था कभीदुःख सहकर उसने, पाला-पोसा था कभीरात-रात भर जागकर, सुलाया था कभी।गुम हूँ उसके याद में, जिसने दुनिया में लाया था कभीअपने सपनों को तोड़-तोड़कर, जिलाया था कभीखुद भूखी रह-रहक



शामत मुझ पर ही आनी है....

शामत मुझ पर ही आनी है...शादी अपनों की होया किसी बेगाने कीखर्चा उतना ही है जीश्रीमतीजी के जाने की। जब देखो तब सुनाती रहती हैंखर्च ही क्या है? खर्च ही क्या है?सुन – सुनकर कान पक गयादुकानों के चक्कर काटते-काटतेसच मानों पूरा दिन बीत गया….जेब खाली होकर क्रेडिट पर आ गया। सोचा छोड़ो अब तो झंझट छूटातभी खनकती



मां

माँ! तुम्हारी बस इतनी सी कहानी।दर्द-दुख-सुख-बच्चे औ, कुर्बानी।जन्म देकर जननी जब तुम बन गई।मानो खुद की खुद से ही ठन गई।अपने सपने और शौक हुए पुराने।बच्चों के सुख-दुख निज तुमने माने।नौ माह कोख और जनन की पीड़ा।तुम सह गए समझ प्रिय-बाल-क्रीड़ा।



वक़्त का तराजू

वक़्त का तराजूवक़्त वह तराजू है साहबजो बुरे वक़्त में अपनों का वजन बता देता हैपराये को साथ लाकर खड़ा कर देता हैवक़्त ही वह मरहम है साहबजो गहरे से गहरे घाव को भी फौरन भर देता हैऔर भरे हुए घाव को कुरेदकर हरा कर देता हैवक़्त ही सबसे बड़ा गुरू है साहबजटिल पाठ को भी पल भर में समझा देता हैमूर्ख को भी विद्वता का



अबला की चाह

अबला की चाहचाह नहीं मैं अनपढ़ गँवार रहअनजान के माथे थोपी जाऊँबस चाह नहीं मैं बीज की तरहजब जहाँ चाहे वहाँ बोयी जाऊँचाह नहीं सूत्र बंधन की भीबंधि दहेज प्रथा की बलि चढ़ी जाऊँबस चाह नहीं है इस जग मेंअधिकारों से वंचित रह जाऊँ....!चाह मेरी बस इतनी सी है...बाला बनकर जनमूं जग मेंजीने का हो अधिकार मेरादादा-दाद



प्यार

एक छोटा सा टुकड़ा प्यार का भर जाता अक्सर जीने का उत्साह दिल में महक से हो जाता गुलजार ये संसार भी निश्छल प्यार मेंकौन कहता है कि प्यार बुरा होता है जीने की उम्मीद जगा जाता दिल में ।फना हो जाती है अक्सर मोहब्बत मोह्हबत के इंतजार में रुसबा हो जाता है दिल किसी के इकरार में कौन कहता है कि प्यार बुरा होता



सवेरे सवेरे उठकर देखा

सवेरे - सवेरे उठकर देखासुनहरी किरण छिटके देखाचिड़िया अभी-अभी थी आईनव सृष्टि की गीत सुनाई।मन भी उमंग जोश से भराहर पल लगता था सुनहरासुगंधित संगीतमय वातावरणअंधकार के पट का अनावरण।मैंने किरणों से कहा,मुझे थोड़ी सी ऊर्जा दोगीचिड़िया से कहा,गाने का तजुर्बा दोगीनव किसलय दल से कहा,जीवन स्नेह से भर दोगीफूलों की



सामयिक आह्वान

★☆सामयिक आह्वान☆★विकल्प नहीं है कोईइस भयावह विषाणु से बचने कासात्विक आहार-विचार-व्यवहार दुनिया को गहने का'भैक्सिन' वा 'दवा' का प्रलाप हैमात्र कहने- .सुनने काआई सी यू - भेंटिलेटर मेंरह बच निकलना- कहने कामाया द्विप चल रहा १नंबर पर-भ्रामक समाचार है पढ़ने कासारे भारत को जाँचें-१०करोड़ पोजिटिव निश्चय मिलने



कहानी दिवस और निशा की

जीवन में सुख और दुःख ये दोनोंचक्रनेमि क्रम से आते जाते ही रहते हैं... उसी प्रकार जैसे दिवस के बाद सन्ध्या काआगमन होता है... उसके बाद निशा का... और पुनः दिवस का... चलता रहता है यही क्रम...तो क्यों किसी भी कष्ट की अथवा विपरीत घड़ी में चिन्तित होकर बैठा जाए...? क्यों नप्रयास किया जाए पुनः आगे बढ़ने का...



"सामान"

मेरी एकादशोत्तरशत काव्य रचना (My One Hundred eleventh Poem)"सामान"“घर-घर सामान भरा पड़ा हैहद से ज्यादा भरा पड़ा हैखरीद-खरीद के बटुआ खालीखाली दिमाग में सामान भरा पड़ा है -१हर दूसरे दिन बाहर जाना हैनयी-नयी चीजें लाना हैजरूरत है एक सामान कीढोकर हजार सामान लाना है-२अपने घर में जो रखा हैउसकी खुशी न करना



श्री राम चरित मानस पाठ

‼️ भगवत्कृपा हि केवलं‼️ओम् नमो भगवते वासुदेवाय श्री राम चरित मानस 🌻अयोध्याकाँड🌻गतांक से आगे... चौपाई-एक कलस भरि आनहिं पानी।अँचइअ नाथ कहहिं मृदु बानी।।सुनि प्रिय बचन प्रीति अति देखी।राम कृपाल सुसील बिसेषी।।जानी श्रमित सीय मन माहीं।घरिक बिलंबु कीन्ह बट छाहीं।।मुदित नारि नर दे



अनमोल वचन ➖ 5

अनमोल वचन ➖ 5दीप से दीप की ज्योति जलाई, दिवाली की ये रीति निभाईएक कतार में रखि के सजाई, फिर सब कुशल क्षेम मनाई।पाँच दिनों का त्योहार अनोखा, भाऊबीज तक सजे झरोखापकवानों का खुशबू हो चोखा, हर कोई रखता है लेखा-जोखा।धनतेरस की बात निराली, करते हैं सब अपनी जेबें खालीकोई खरीदे सोना-चाँदी तो, कोई बर्तन शुभ दि



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