कविता

खिड़की

जब भीखुलती है खिड़कीदिखता है तेरा चेहराऔरहवा की लहर दौड़ आती है औरउन पर सवार आँगन के तुलसी कीताज़गी...... औरगुलाब की पत्तियों की खुशबू...उसके गुलाबी रंगों पर बिखरी हुई धूप से उभरती चमकप्रफुल्लता की सारगर्भित सोचऔरनई दिशाएं खोलती है ये खिड़कीजब भी खुलती है...तेरा चेहरा दिखता है औरखिड़की खुलती है तो भ



कौन सा पतझड़ मिले

गीत कौन सा पतझड़ मिले? विजय कुमार तिवारी और गा लूँ जिन्दगी की धून पर, कल न जाने प्रीति को मंजिल मिले? दर्द में उत्साह लेकर बढ़ रहा था रात-दिन, आह में संगीत संचय कर रहा था रात-दिन। आज सावन कह रहा है बार-बार, क्यों लिया बंधन स्व-मन से रात-दिन? सोचता हूँ चुम लूँ वह पंखुड़ी, कल न जाने कौन सी बेकल खिल



मुक्तक

मैं नहीं कहता कि सर्वस वर दूंगा। कदमों में तेरे चाँद-सूरज डाल दूंगा। कल्पना जितनी किया होगा प्रिये, उससे अधिक 'कक्का' मैं तुमको प्यार दूंगा।



अक्सर...

अक्सर... यूँ अक्सर जिंदगी सताती है.... कभी हसाती है, कभी रुलाती है... यूँ अक्सर जिंदगी सताती है... ये कुछ सिखाती... कुछ यह कहना चाहती है... कभी बनाती है, कभी बिगाड़ती है... यूँ अक्सर जिंदगी सताती है... ये कही कहा ले जाती है, ये क्यों उलझाती है... कभी रास्ते बिछड़ते है, कभी मंजिले रुस्वा होजाती है....



“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” कविता - “Beti Bachao Beti Padhao” Poems in Hindi

Beti Bachao Beti Padhao Poems in Hindi “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”- “Beti Bachao Beti Padhao” योजना भारत सरकार के द्वारा एक प्रयास है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर यह हिंदी कवितायेँ (poems) एक प्रयास है, जिससे समाज में फ़ैली कुरीतियां जैसे कन्याभ्रूण हत्या , बाल- विवाह इत्यादि को रोका जाए।ताकि बेटी को एक सुरक्षि



सुनहरी शाम

ये सुनहरी शाम और ये जाती हुयी सूरज की धूप,कितना खूबसूरत लगता है प्रकृति का ये अनमोल रूप।ये हवा की हसीन अदायें,कितनी जंचती हैं ये वादियों पे फिजायेंये कुदरत का नजारा मन मोह लेता हैराह चलते मुसाफिर के कदम,निहारने के लिए रोक लेता है।ये सूरज भी ना कितना इंतजार करवाता है,मगर जब अपने घर वापस जाता है।इस सु



निदा फ़ाज़ली -दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती In Hindi

Hindi poem -Nida Fazliदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलतीदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलतीख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलतीकुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी ख़फा हैंहर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलतीदेखा था जिसे मैंने कोई और था शायदवो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलतीहँसते हुए चेहरो



निदा फ़ाज़ली -नयी-नयी आँखें In Hindi

Hindi poem -Nida Fazliनयी-नयी आँखें नयी-नयी आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता हैकुछ दिन शहर में घूमे लेकिन, अब घर अच्छा लगता है ।मिलने-जुलनेवालों में तो सारे अपने जैसे हैंजिससे अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है ।मेरे आँगन में आये या तेरे सर पर चोट लगेसन्नाटों में बोलनेवाला पत्थर अच्छा लगता है ।च



निदा फ़ाज़ली -कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे In Hindi

Hindi poem -Nida Fazliकभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगेकभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगेवो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगेएक चुप चाप सी लड़की, न कहानी न ग़ज़लयाद जो आये



निदा फ़ाज़ली - कभी किसी को मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता In Hindi

Hindi poem -Nida Fazliकभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलताकभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलताकहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोलेये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलतातमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न होजहाँ उमीद हो सकी वहाँ नहीं मिलताकहाँ चिराग़ जलायें कहाँ गुलाब रखेंछतें



जावेद अख़्तर - बहाना ढूंढते रहते हैं कोई रोने का Poem in Hindi

बहाना ढूंढते रहते हैं कोई रोने का - जावेद अख़्तर Poem in Hindi बहाना ढूंढ़ते रहते हैं कोई रोने का बहाना ढूंढ़ते रहते हैं कोई रोने का हमें ये शौक़ है क्या आस्तीन भिगोने का अगर पलक पर है मोती तो ये नहीं काफ़ी हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का जो फसल ख़्वाब की तैयार है तो ये जानो कि वक़्त आ गया फिर दर्द कोई



ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा - जावेद अख़्तर Poem in Hindi

ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा - जावेद अख़्तर Poem in Hindi ज़िंदा हो तुम - जावेद अख़्तर दिलों में अपनी बेताबियाँ ले कर चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम नज़र में ख्वाबों की बिजलियाँ ले कर चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम हवा के झोंकों के जैसे आज़ाद रहना सीखो तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो हर एक लम्हे से तुम मिलो खोल



ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा - जावेद अख़्तर Poem in Hindi

ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा - जावेद अख़्तर Poem in Hindi दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?जब जब दर्द का बादल छाया जब गम का साया लहराया जब आंसूं पलकों तक आये जब ये तन्हां दिल घबराया हमे दिल को यूँ समझाया दिल आखिर तू क्यूँ रोता है?दुनिया में यूँही हो



पल...

पल.... पल वो पल जो हर किसी के जिंदगी मैं आता है... कुछ पल जो सुनहरी यादें बन जाती है, तो वही कुछ पल जिंदगी के अंधेरे साएँ मैं रह जाते है.... ये पल बहोत अजीज है, इस पल में जी रहे है हम.... हम खुशनसीब है हर पल हमे कुछ सिखाता है... कभी हराता है, कभी जिताता है.... कभी ये



मैं भटकता रहा

*गहराई की छिपी वर्जनाओं के स्वर*( "स्वयं पर स्वयं" से )मैं भटकता रहामैं भटकता रहा; समय, यूं ही निकलता रहा;मैं भटकता रहा। उथला जीवन जीता रहा;तंग हाथ किये, जीवन जीता रहा।न किसी को, दिल खोल कर अपना सका;न किसी का, खुला दिल स्वीकार कर सका;न आपस की, दूरी मिटा सका;न सब कुछ दे सक



क्या चाहिए जीवन केलिए

क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में



तुज में खोया



हिंदी कविता | Best Hindi Poems | Hindi Poetry | Poems In Hindi | Hindi Kavitayein | हिंदी काव्य | Poets

हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कवितायेँ एवं गीत. Best Hindi Poems के इस संग्रह में हम लेकर आये है हिंदी कवितायेँ , हिंदी काव्य, हिंदी गीत, ग़ज़ल ।कविता एक ऐसी प्रयोजनीय वस्तु है जो संसार के सभ्य और असभ्य सभी जातियों में पाई जाती है. जब इतिहास न था, न विज्ञान था और न ही दर्शन तब भी कुछ थी तो वो थी कवितायेँ | कवि



रामधारी सिंह “दिनकर”-परिचय

Ramdhari Singh Dinkar - Hindi poem परिचय – रामधारी सिंह “दिनकर”सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैंस्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैंबँधा हूँ, स्वप्न हूँ, लघु वृत हूँ मैंनहीं तो व्योम का विस्तार हूँ मैंसमाना चाहता, जो बीन उर मेंविकल उस शून्य की झंकार हूँ मैंभटकता खोजता हूँ, ज्



रामधारी सिंह “दिनकर”- बालिका से वधू

Ramdhari Singh Dinkar - Hindi poem बालिका से वधू – रामधारी सिंह “दिनकर”माथे में सेंदूर पर छोटीदो बिंदी चमचम-सी,पपनी पर आँसू की बूँदेंमोती-सी, शबनम-सी।लदी हुई कलियों में मादकटहनी एक नरम-सी,यौवन की विनती-सी भोली,गुमसुम खड़ी शरम-सी।पीला चीर, कोर में जिसकेचकमक गोटा-जाली,चली पिया के गांव उमर केसोलह फूलों



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