कविता



सुर मेरे..

सुर मेरे...सुर मेरे ! उपहार बन जा जिसे पा न सका जीवन में सुन , मेरा वो प्यार बन जा फिर न पुकारे हमें कोई तू ही वह दुलार बन जा खो गये हैं स्वप्न हमारे दर्द की पहचान बन जा न कर रूदन, मौन हो अब सुर, मेरा वैराग्य बन जा जीवन की तू धार बन जा राधा का घनश्याम बन तू प्रह्लाद का विश्वास बन ना ध



28 सितम्बर 2019

अपराजिता

भागीरथी की धार सी,कल्पांत तक मैं बहूँगीअपराजिता ही थी सदाअपराजिता ही रहूँगी।वंचना विषपान करना हीमेरी नियति में है,पर मेरा विश्वास निशिदिनप्रेम की प्रगति में है।संवेदना की बूँद बन मैं,हर नयन में रहूँगी !अपराजिता ही थी सदाअपराजिता ही रहूँ



प्रिये

भागते-भागते जब तुम पहुँच जाओ श्रेष्ठता के शिखर पर,पा लो ब्रह्मज्ञान का आशीष ,पहुँच जाओ कला के उच्चतम बिंदु पर,जान लो विज्ञानं के सारे रहस्यबन जाओ विश्व विजेता,प्रिये, तब कुछ देर रुकना तुम उस शिखर पर और सोचना ....तुम हार गए एक प्रेमी का मन।



दो नयन अपनी भाषा में जो कह गए

नेत्र भर आए और होंठ हँसते रहे,प्रेम अभिनय से तुमको,कहाँ छ्ल सका?दो नयन अपनी



कुछ मशविरा ऐसा भी दो

मेरे बुझने पे जो तुम हंसने लगेचिराग हूँ, फिर जल जाऊंकुछ मशविरा ऐसा भी दो तो जानेमेरे मुरझाने पे जो तुम हंसने लगेफूल हूँ, फिर खिल जाऊंकुछ मशविरा ऐसा भी दो तो जानेमेरे टूटने पे जो तुम हंसने लगे शीशा हूँ , फिर जुड़ जाऊंकुछ मशविरा ऐसा भी दो तो जाने



Archana Ki Rachna: Preview " मैं बदनाम "

ऐसा क्या है जो तुम मुझसेकहने में डरते हो पर मेरे पीछे मेरी बातें करते हो मैं जो कह दूँ कुछ तुमसे तुम उसमें तीन से पांचगढ़ते होऔर उसे चटकारे ले करदूसरों से साँझा करते होमैं तो हूँ खुली किताबबेहद हिम्मती और बेबाक़रोज़ आईने में नज़रमिलाता हूँ अपने भीतर झाँक, फिरऐसा क्या है जो



थम जाये पहिया समय का....!

थम जाये पहिया समय का....!_______________________________बोल दो प्रिये कुछ मधुर साकि थम जाये पहिया समय कासाँसों में सरगम भर जाती हो हरपलधड़कन में वीणा बजाती हो हर क्षणपलकों तले आके गुनगुनाती हो हरदमवो स्वप्न-गीत गा दो मधुर साकि थम जाये पहिया समय काबोल दो प्रिये कुछ मधु



Archana Ki Rachna: Preview "देखो फिर आई दीपावली"

देखो फिर आई दीपावली, देखो फिर आई दीपावलीअन्धकार पर प्रकाश पर्व की दीपावली नयी उमीदों नयी खुशियों की दीपावली हमारी संस्कृति और धरोहर की पहचान दीपावली जिसे बना दिया हमने "दिवाली"जो कभी थी दीपों की आवलीजब श्री राम पधारे अयोघ्या नगरीलंका पर विजय पाने के बादउनके मार्ग में अँ



लहरों को बाँधे आँचल में तुम....!

लहरों को बाँधे आँचल में तुम....!_______________________________लहरों को बाँधे आँचल में तुमसागर उमड़ने को है अकुलाया प्यासा भटकेगा युग-युग सावन बूँदों को तूने ना लौटायालहरों को बाँधे आँचल में तुमसागर उमड़ने को है अकुलाया गजरे को बाँधे बालों में तुमगुलशन सँवरने को है बौरायायूँ हीं तड़पेंगे काँटे बेचार



25 सितम्बर 2019

दम तोड़ती आशा

न्याय की आशाहर ओर हताशाप्रक्रिया है ढीलीडगर पथरीलीभटकते हैं दर-दरनहीं मिलता न्यायबांधे आंखों पर पट्टीखड़ी न्याय की देवीबाहुबल,धनबल काद्वारपाल है न्यायसूनी आंखें देखें सपनेबीतेंगे सदियां टूटे सपनेन्याय है स्वप्न इस व्यवस्था मेंअन्याय छुपा न्याय केमुखौटों मेंन्याय हार जाता हैअन्याय जीत जाता हैधूल चाटत



जिंदगी

कल मिलुँगा मैं तुझे,किस हाल में (?)कोई कहीं लिखा पढ़-कह नहीं सकता।नसीब के संग जुटा हूँ-ओ' मेरे अहबाब,अहल-ए-तदबीर में मगर,कोताही कर नहीं सकता।।के. के.



कही हम बदल न जाये

गिरते-संभलते जैसे तैसे जीवन मे चलना सीखा था,खुदा ईशवर बस नाम ही सुनाये कभी कहा दिखा था।बचपन से माँ की ममता देखते पले बड़े,आज भी ममता के आंचल के कारण है खड़े।ईश्वर की माया देखी जो मा मिली है।जिसके कारण जिंदगी आज खिली खिली है।जन्म से जिसकी सूरत देखी,जिसको सबसे पहले पहचाना,लगता नही आज भी मैंनेउसे भले ढं



मानव, तुम्हारा धर्म क्या है ?

धर्म चिड़िया का,खुशी के गीत गाना !धर्म नदिया का,तृषा सबकी बुझाना ।धर्म दीपक का,हवाओं से ना डरना !धर्म चंदा का,सभी का ताप हरना ।।किंतु हे मानव !तुम्हारा धर्म क्या है ?धर्म तारों का,तिमिर में जगमगाना !धर्म बाती का,स्वयं जल,तम मिटाना ।धर्म वृक्षों का,जुड़े रहना मृदा से !धर्म फूलों का,सुरभि अपनी लुटाना ।



विश्व शांति दिवस पर

बीत गये दिन शांति पाठ के,तुमुल युद्ध के बज उठे नगाड़े।विश्व प्रेम से ओत - प्रोत आजपश्चिम उत्तर से वीर दहाड़े।।विश्व बंधुत्व महालक्ष्य हमारा,नहीं बचे एक भी सर्वहारा।जातिवादिता और आरक्षण हटाओ।यह चक्रव्यूह तोड़ मानवता लाओ।।हर घर तक अन्न पहुचाँ कर हीं,हे मानववादियों! अन्न खाओ।।शांति तो श्मशान में हीं होती



प्रार्थना

मेरे जीवन का पल-पलप्रभु तेरा पूजन हो जाए,श्वास-श्वास में मधुर नामभौंरे-सा गुंजन हो जाए।जब भी नयन खुलें तो देखूँतेरी मोहिनी मूरत को,मेरा मन हो अमराईतू कोकिल-कूजन हो जाए।जग में मिले भुजंग अनगिनतउनके दंशो की क्या गिनती?वह दुःख भी अच्छा है



सजदा

सजदा*******न कभी सजदा कियाना दुआ करते हैं हम दिल से दिल को मिलाया बोलो,ये इबादत क्या कम है। दर्द जो भी मिला ख़ुदा ! तेरी दुनियाँ से कोई शिकवा न किया बोलो,ये बंदगी क्या कम है ।कांटों के हार को समझ नियति का उपहारहर चोट पे मुस्कुरायाबोलो,ये सब्र क्या कम है।अपनों से मिले ज़ख्म पे ग़ैरों ने लगाया



Archana Ki Rachna: Preview "मैं हूँ नीर "

मैं हूँ नीर, आज की समस्या गंभीरमैं सुनाने को अपनी मनोवेदनाहूँ बहुत अधीर , मैं हूँ नीरजब मैं निकली श्री शिव की जटाओं से ,मैं थी धवल, मैं थी निश्चलमुझे माना तुमने अति पवित्रमैं खलखल बहती जा रही थीतुम लोगों के पापों को धोती जा रही थीपर तुमने मेरा सम्मान न बनाये रक्खाऔर मुझे



वक़्त

वक़्त में छुपा हैं एक अनोखा राज़ ढूंढा तोह मिला नै वह कल आज पुछा में ने उस से वह बात उसने कहा में ही दर्द का मरहम भी और उसके साथ जीने की वजह भी .



Archana Ki Rachna: Preview "इस बार की नवरात्री "

इस बार घट स्थापना वो ही करेजिसने कोई बेटी रुलायी न होवरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश के दिखावे में जब तुम बेटी की हत्या करते हो अपने गंदे हाथों से तुम ,उसकी चुनर खींच लेते होइस बार माँ पर चुनर तब



एषणा और उपलब्धि



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x