कविता



उठो नारी प्रहार करो

है कँहा लिखा काजल भर नेत्रों में श्रृंगार करो फूलो से महकते गजरे में लिपटी कोई नार बनो भुजा में जोर तुम्हारे भी कभी तो स्वीकार करो नरभक्षी पिशाचों की गर्दन पर तुम तलवार धरो है कँहा लिखा काजल भर नेत्रों में श्रृंगार करो फूलो से महकते गजरे में लिपटी कोई नार बनो गुड़ियों के ब्याह में यूँ



आचरण मौन का

आज दो अक्टूबर है - राष्ट्रपिता महात्मागाँधी और जय जवान जय किसान का नारा देने वाले श्री लाल बहादुर शास्त्री जी काजन्मदिवस... गाँधी जी और शास्त्री जी दोनों ही मौन के समर्थक और साधक थे... बापूके तो कहना था मौन एक ईश्वरीय अनुकम्पा है, उससे मुझे आन्तरिक आनन्द प्राप्त होता है...वास्तव में सब कुछ मौन हो नि



कविता :मोहनदास करमचन्द गांधी

दुनियां में हैं शख्स लाख ,पर दिल के पास हैं गाँधी अहिंसा ,सत्य ,समता शांति की तलवार हैं गाँधी अटल ,अविजेय ,अविचल ,वज्र की दीवार हैं गाँधी अडिग विश्वास ,जीवन का उमड़ता ज्वार हैं गाँधी उमड़ता कोटि प्राणों का ,पुलकमय प्यार हैं गाँधी मनुजता के अमर आदर्श की झंकार हैं गाँधी सूर्य सम कांतिमयी दीप्तिमान हैं



कवयित्री संगोष्ठी

नमस्कार... स्वागत है आज आप सबका WOW India के आओ कुछबात करें कार्यक्रम में... आज एक बार फिर से एक छोटी सी काव्य गोष्ठी... अभी तीनदिन पूर्व बिटिया दिवस था... हमारी कुछ सदस्यों ने बिटिया और नारी के विविध रूपोंपर कुछ रचनाएँ रचीं और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग्स हमें भेजीं,जिन्हें हमने काव्य गोष्ठी के रूप में



नारी

हार गई वह नारी अपराधों के बोझ से मेरा अपना कौन है इस खोज से किस पर विश्वास करूं किस पर नहीं इस सोच से बस नारी पैदा हुई इस दोष से घर और समाज के शोषण से असमानता के कुपोषण से विज्ञापनों में उपभोग कि वस्तु बना देने से न्याय नहीं मिल पाने से बुरे को अच्छा समझने की भूल से हार गई वह नारी अपराधों के बोझ स



श्रिंगार से भक्ति तक

■■■■■■■■■■■■■■■■■■📿📿📿📿सोलह श्रिंगार📿📿📿🌱🌲🌳🌴🌾🌿🌾🌴🌳🌲🌱कोई है आगे, कोई चला पीछे फिलहाल पौधों को हम सींचेसोए खाट पर आँख को मीचे काव्य चक्र को न कोई खींचे💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐दो दाना चने का खा,करे वह संतोषि माँ व्रत।सात समन्दर पार बसे,लिख पाए ना ईक खत।।🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇दी



मैं आपके समाज का भाग हूँ

मैं आपके समाज का भाग हूँ आपके शब्दों का मैं राग हूँ रूप देखकर रिश्ता ना तोड़ो भावनाओं से रिश्ता तुम जोड़ो सात बहनों की पुत्री हूँ उस दुःख से मैं गुजरी हूँ गलत हमको कहते हो तमीज से नहीं रहते हो भेदभाव क्यों करते हो मार पिट कर लहू लुहान करते हो हमको देख कर घूरते हो चीनी समझ कर फेफुरते हो क्यों हमें दिल



रह जाता कोई मोल नहीं

रह जाता कोई मोल नहींजब जीवन की आपाधापी सेटूट चुका हो मानव मनफिर आशा की किरणों कारह जाता कोई मोल नहीं।जब मन तानों से आहत होदिल भी छलनी हो जाएफिर मधुर प्रिय वचनों कारह जाता कोई मोल नहीं।जब सुख-सुविधाओं का खान होपर काया रोगों से घिरा होफिर पास पड़े धन दौलत कारह जाता कोई मोल नहीं।जब धरती तपती हो कड़ी धूप



तू कभी न दुर्बल हो सकती

आज Daughter’s day है, यानी बिटिया दिवस... सर्वप्रथम सभी को Daughter’s day की बधाई... आज एक बार अपनी उलझी सुलझी सी बातों के साथ आपके सामने हैं...हमारी आज की रचना का शीर्षक है तू कभी न दुर्बल हो सकती... अपनी आज की रचनाप्रस्तुत करें उससे पहले दो बातें... हमारी प्रकृति वास्तव में नारी रूपा है...जाने कित



क्यों फांसी पर लटक जाता ?

तपते सूरज में पसीने से नहाता किसान दुनिया का अन्नदाताभीख मांग कर क्यों बीज लाता?क्यों फांसी पर लटक जाता ?क्यों अन्नदाता को दो वक्त का अन्न नहीं मिलता क्यों इतनी जी तोड़ मेहनत के बाद चेहरा नहीं खिलता आखिर क्यों किसान का चेहरा एक सवाल होता उचित दाम के ने मिलने पर रोता क्यों किसान के सपने को मा



हे कवि मन हिंदी की जय बोल

हे कवि मन, हिंदी की जय बोलजिसने निजभाषा का मान बढ़ायाहिंदी को जन - जन तक पहुँचायाराजभाषा का दर्जा भी दिलवायाहे कवि मन, हिंदी की जय बोल।जो घर-घर में बोली जाती हैजो सबके मन को हरसाती हैसभी जाति धरम को भाती हैहे कवि मन हिंदी की जय बोल।जिसके बावन अक्षर होते हमारेकवि जिससे प्रकृति को चितारेजो जनमानस के भा



यह चिड़िया यह चेतक यह कोयल पुकारे इनकी दिल की बातों को दिल से लगा रे

यह अंबर यह बादल यह चमकते तारेजंगल में लगी है आग गगन इसे बुझा रे यह चिड़िया यह चेतक यह कोयल पुकारे इनकी दिल की बातों को दिल से लगा रे शब्दों के बाणों से मेरा लहू न बहा रे सपनों में सांझ को लोट आ रेमधुर और लघु तू गीत सुना रे है सीताराम इस गीत को गुन गुना रे तू मिलने झरने पर नदी के किनारे प्रेम की



यह चिड़िया यह चेतक यह कोयल पुकारे इनकी दिल की बातों को दिल से लगा रे। .

यह अंबर यह बादल यह चमकते तारेजंगल में लगी है आग गगन इसे बुझा रे यह चिड़िया यह चेतक यह कोयल पुकारे इनकी दिल की बातों को दिल से लगा रे शब्दों के बाणों से मेरा लहू न बहा रे सपनों में सांझ को लोट आ रेमधुर और लघु तू गीत सुना रे है सीताराम इस गीत को गुन गुना रे तू मिलने झरने पर नदी के किनारे प्रेम की



चले कदम तेरी और पहुँच नहीं हुआ भोर

चले कदम तेरी और पहुँच नहीं हुआ भोर तेरे पास जान से क्यों रुक जाते है पैर प्रेम से उनको क्या है बेर तेरा मुझसे होना दूरबताओ मेरा क्या था कसूर यह जिंदगी एक पहली है क्या यार प्रेम के दुश्मनों के हाथों में है तलवार आँखें यह तुझे ही ढूंढे हर जगहा हर बार तेरा भूत मुझे पर होने लगा है अब सवार पत्थर दिल क



तू मिला

तू मिला सब कुछ नष्ट हो गया है फिर भी एक दीप जला है बंजर भूमि में आशा का एक पेड़ खिला है डूबते को जैसे मिलता एक तिनके का सहारा वैसे ही मुझको तू मिला है ...



तुम जब भी मुझसे मिलने आओ तो साथी मेरा होकर आना।

जो अच्छा बुरा नहीं देखती विचारों से जो महकती उसने एक बार दिल लगाया था प्यार को दिल से निभाया था कहते है ना तेरे रास्ते में हम कांटे बिछाएंगे तेरे में ताकत हो तो चल ?उसी प्रकार उसका साथी बेवफा निकला तो उसकी अन्तरात्मा ने कहाँ हा वो बेवफ़ा है और तुझमें हिम्मत है तो तू यह प्यार निभाना उसकी यादों



रामकृष्ण शर्मा

हमेशा मुस्कुराते है ग़लती होने पर भी प्रेम से समझाते हैउनके बारे में क्या कहूँवो तो वह शख़्सियत है जो प्रकृति प्रेमी हैसारे जहाँ को अपना घर मानते है हर बच्चे की प्रतिभा को जानते है उनके दिल में हमेशा होती है माँ उन महापुरुष कानाम है रामकृष्ण शर्मा



हिंदी तक

मैं रोता हूँ तो साथ तुम होती हो मैं हंसता हूँ तो साथ तुम होती होमैं झूठ भी बोलू तो साथ होती हो मेरे विचारों में मेरे शब्दों में तुम जब तुझमें मिलतातो हो जाता हूँ गुम तुमसे मेरा प्रेम का रिश्ता हैनिर्मल भावों की जैसे सरिता है जो ना कभी रुकती है ना कभी थकती है जो पर्वत से लेकर घाटी तक जो घाटी से ले



दो फूल खिले है

दो फूल खिले है एक इस किनारे दूसरा उस किनारे बीच में नदी पड़ती है इसने उसको देखा नहीं उसने इसको देखा नहीं सपने में कल्पना करते है वो खुशबू वाला कौन है? रहता कहाँ है ?कैसा होगा ?क्या हम कभी मिल पाएंगे ?किनारा पार कर पाएंगे?यहाँ जीवन भर अपना प्रेम खुसबू से ही फैलाते रहेंगे



रखी खुशीयाँ है.

आँखो में तेरे नूर है जब से तुझे देखा है मेरे दिल में तेरा ही तेरा चढ़ा सुरूर है बड़ी बड़ी अखिया है रब ने तेरे होठों पर रखी खुशीयाँ है...



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x