कविता



नारी आदिशक्ति

हम लाए नए जीवन को और कराए स्तनपानहम हैं नारी शक्ति और हम चाहे हक समानहम किसी आदमी से अब डरना नहीं चाहतेहम अपनी मां के गर्भ में अब मरना नहीं चाहतेहम भी करना चाहेंगे अपने खर्चों का भुगतानहम हैं नारी शक्ति और हम चाहे हक समानहम भी आगे बढ़ेंगे तो काम आगे बढ़ेगाहम आपके साथ मिल जाए तो देश का नाम आगे बढ़ेगा



क्योंकि मैं सत्य हूं

मैं कल भी अकेला थाआज भी अकेला हूं और संघर्ष पथ पर हमेशा अकेला ही रहूंगा मैं किसी धर्म का नहीं मैं किसी दल का नहीं सम्मुख आने से मेरे भयभीत होते सभी जानते हैं सब मुझको परंतु स्वीकार करना चाहते नहीं मैं तो सबका हूं किंतु कोई मेरा नहीं फिर



सपने

सपनेसुहावने सपनों के बाद सुहानी भोर आएगीफिर वहीं शाम आ कर सपने नए सजाएगीकौन जानता है (?) कल दस्तख़ दे उठाएगीदिन में शौहरत पाँव चूम कर गले लगाएगीकर दिया है जब खुद को- हवाले मालिक कोबिधना अपनी जादुगरी क्याकर (?)दिखाएगीडॉ. कवि कुमार निर्मल



न्याय या मजाक

बेटियों की जान सस्ती होती है ,ये कानून ने भी समझा दिया ।मार दी जाती हैं निर्ममता से ,वहशियों को दिलासा दे दिया ।क्यूँ नहीं खौलता खून तुम्हारा ,बेहयाई की हद देखकर भी ।क्या छोड़ देते तुम कसूरवारों को ,गर निर्भया तुम्हारी बेटी होती ।कैसे मासूम हो सकते हैं वो ,जिन्हें एक प



भूमिका

फूलों की बाग में,सुरों की राग में।शिक्षा की किताब में,खुशबू की गुलाब में।जो है भूमिका,वही तेरी मेरे जीवन में है!!मूर्ति की मंदिर में,आस्था की प्रार्थना में।विश्वास की मन में,आत्मा की तन में।जो है भूमिका,वही तेरी मेरे जीवन में है!!सूरज की दिन में,चंदा की रैन में।तारों की गगन में,मेघों की बरसात में।जो



A Hindi poetry on International women day - क्यों ; अर्चना की रचना

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हिंदी कविता क्यों क्यों एक बेटी की विदाई तक ही एक पिता उसका जवाबदार है ?क्यों किस्मत के सहारे छोड़ कर उसको कोई न ज़िम्मेदार है?क्यों घर बैठे एक निकम्मे लड़के पर वंश का दामोदर है ?क्यों भीड़ चीरती अपना आप खुद लिखती ए



पिता

💖💖💖पिता💖💖💖एषणाओं के भंवरजाल मेंउलझ व्यर्थ हीं,व्यथित हो इहजगत् कोन बँधु झुठलाओ।तुममें है हुनर एवम्है अदम्य सामर्थ्य,अजपाजप गह'सबका मालिक एककह नित महोत्सव मनाओ।।हर साल "फादर्स डे" मना एक दिन३६४ भूल जाते आखिर क्यों (?) तुम!"पित्रि यज्ञ महामंत्र" नित्य उचर कर,आशीर्वाद भरपूर बटोर करसदगति रे मन पा



सफलता

कभी मत रहो आश्रित किस्मत पर केवलकरो तुम मेहनत, तभी होंगे तुम सफलपहले तुम्हारे काम अटकते हुए दिखेंगेपहले तुम्हारे मार्ग भटकते हुए दिखेंगेकुछ समझ में न आए तभी जब तुम्हेंमन से ताकत खिसकते हुए दिखेंगेधीरे - धीरे बाद में तुम जाओगे संभलकरो तुम मेहनत, तभी होंगे तुम सफलछांव धूप से तुम्हे डराती हुई आयेगीसुस्



अब तो हँसने में भी

अब तो हँसने में भी कोई गम छलक जाता है देखते हैं यह दर्द कहाँ तलक जाता है।



बेटी

बेटीबेटे से बाप का बटवारायुगों से होता चला आया है!माँ को बाप से विलगा- शपीड़ा तक भी बटवाया है!!उसर कोख का ताना लेकोर्ट का चक्कर मर्द लगता है!कपाल क्रिया कर वहआधे का हक सहज पा जाता है!!बेटी सिंदूर लगवाएक साड़ी में लिपट साथ हो लेती है!माँ-बाप का दु:ख सुनते हींवह दौड़ी चली आती है!!मरने पर वह साथ न हो



प्रेम और कृष्ण

💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓 कृष्ण 💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓महाभारत का पार्थ-सारथी नहीं,हमें तो ब्रज का कृष्ण चाहिए।राधा भाव से आह्लादितमित्रों का-साथ,चिर-परिचित लय-धुन-ताल चाहिए।।प्रेम की डोर तन कर,टूटी नहीं है कभी।अंत: युद्ध का,हमें दीर्ध विश्राम चाहिए।।।प्रेम सरिता में आप्लावन,अतिरेक प्या



“चिराग जलना चाहिए ”

“चिराग जलना चाहिए ” सिल गये हों होठ तो भी गुनगुनाना चाहिएअब पिटारी से कोई खुशबू निकलनी चाहिए |बदनुमा इस शहर की अब शाम ढलनी चाहिएखट्टे मीठे स्वाद को भी बदलना चाहिए |रहनुमा सारे किनारों को मचलना चाहिएठूठी सियासत बहुत बदरी अब सम्हलना चाहिए |विद



न बदल पाएगा.........

न बदल पायेगा तकदीर तेरी कोई और , तेरे हाथों में ही बसती है तेरी किस्मत की डोर , अगर चाहेगा तो पहुंचेगा तू बुलंदी पर तेरे जीवन में भी आएगा तरक्की का एक दौर .तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने , दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत , कल उनकी पीढियां



बिटिया तू हो चिर सुहागिनी

प्यारी बिटिया के विवाह पर बिटिया के लिए... बिटियाहो तू चिर सुहागिनी ||कम्पित कर से कम्पित स्वर से, झंकृत स्पन्दित तार तार सेमधुमय रसमय मनवीणा सेकोमल लय कोमल पुकार से गूँज रही ये मधुररागिनी |बिटिया हो तू चिर सुहागिनी ||स्वर्ण वर्ण से निर्झरिणी में, तुहिन बिन्दु से वनस्थली मेंसौरभ से अधखिली कली



भारत में

*भारत में*भारत में पूर्ण सत्य कोई नहीं लिखता अगर कभी किसी ने लिख दिया तो कहीं भी उसका प्रकाशन नहीं दिखता यदि पूर्ण सत्य को प्रकाशित करने की हो गई किसी की हिम्मत तो लोगों से बर्दाश्त नहीं होता और फिर चुकानी पड़ती है लेखक को सच लिखने की कीमत भारतीयों को मिथ्या प्रशंसा अत्यंत है भाता आख़िर करें क्या



मैं जब भी

कविताजब भी मैंमैं चुप बैठकर जब भी खुद से बात करता हूँ,मैं हर उस पल उसके साथ टहलता और विचरता हूँ।साथ मेरे दूर तक जाती है वीरान तन्हाईयां,फिर भी मैं उसकी बाहों में गर्म राहत महसूस करता हूँ।होता है सफर मेरा अधूरा दूर छीतिज तक, मैं फिर भी हर सफर में उसके साथ रहता हूँ।होती नहीं वो पास मेरे किसी भी पड़ा



कवि

कविमनन-चिंतन, पठन-पाठन में अग्रसारिता गह,बुद्धिजीवी कोई बन पाता है। तुकबंदी, कॉपी-एडिट वा कुछेक लकिरें उकेर,कवि कोई बन नहीं सकता है।। जन्मजात संस्कारों की पोटलीगर्भ से हीं कवि साथ लाता है। मानसिकत: परिपक्व हो मचल-उछल कर अभिव्यक्ति करता है।कवित्व स्वत: स्फुरित-स्फुटित हो,'रचनाकार' निखर उभरता है।। आलो



दिल की डायरी

💐💐💐💐💐💐 एक ख्याल आया जो मन में, डाल दिया तुमने उलझन में मिले जो तुम ऐसे डगर में, भूल गया सब पल भर में 💛💛💛💛💛💛 आसमान छूने की ललक थी



Hindi poetry on friends of benefits - मतलब की धूल; अर्चना की रचना

मतलबी दोस्ती पर आधारित हिंदी कविता मतलब की धूलवख्त की तेज़ धूप ने सब ज़ाहिर कर दिया है खरे सोने पर ऐसी बिखरी की उसकी चमक को काफ़ूर कर दिया है जब तक दाना डालते रहे चिड़िया उन्हें चुगती रही हुए जब हाथ खाली तो उसकी चोंच ने ज़ख़्मी कर दिया हैजब तक मेज़बान थे घर में रौनक लगी रही शाम



दधीचि

"ऋषि दधीचि" सम बन तुम देवों को तारो"चरैवेति-चरैवेति" का अमोध "मंत्र" उचारो"पूर्ण समर्पण" कर सर्वस्व अराध्य पर वारोबन जाओ तुम श्री कृष्ण सम--प्यारो-न्यारो"नीलकण्ठ" सम बन कर पीयो हलहल सारो**************************"देती रहती है नदी--मीठा जल होता हैलेता रहता ह



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x