कविता



मेघ इठलाए रहे हैं

बरखा की सुहानी रुत में मेघों की बात न हो, उनकी प्रिय सखी दमयन्ती की बात न हो, प्रकृति के कण को में व्याप्त मादकता की बात न हो -ऐसा तो सम्भव ही नहीं... निश्चित रूप से कोई योगी या कोई विरह वियोगी ही होगा जोइस सबकी मादकता से अछूता रह जाएगा... तो प्रस्तुत है हमारी आज की रचना "मेघइठलाए रहे हैं"... सुनने



क़िस्सा गिलहरी और कोरोना का - दिनेश डाक्टर

फुदकती फुदकतीमेरी खिड़की परफिर आ बैठी गिलहरीछोटी सी लीची कोकुतर कुतर छीलाफिर मुझसे पूछाक्या हुआ सब खैरियत तो हैदेखती हूँ कई महीनों सेकैद हो महज घर में न बाहर जाते होन किसी को बुलाते होबस उलझे उलझे उदास नज़र आते हो ? मैंने देखा उसकीचौकन्नी आंखों कोसफेद भूरीचमकती धारियों कोछोटे छोटे सुंदर पंजो कोपल पल ल



मास्क स्तुति

कामदं मोक्षदं चैवॐकाराय नमो नमः🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏आज की है यही एक पुकारलबों से चिपकाओ बार- बारजरुरत हो तो लगा कर जाओजो भी शुद्ध मिले घर में खाओधूप में टाँग- रोजाना चमकाओमिस किए तो रुमाल लटकाओचाइनिज-प्लेट है, अभी हटाओ मास्क पहन कर अबकी आओडॉ. कवि कुमार निर्मल



माँ का व्रत

पूर्णिमा " तुम एक ही हफ्ते भर में चार दिन भूखी रह जाओगी, तो शरीर में ना मांस बचेगी ना खून " , हमेशा की तरह फिर से पिता जी ने भृकुटि को सिकोड़कर अपने पौरुषेय शैली में मां पर गुस्सा निकालना शुरु किया. "अगर दिन रात मैं खट कर तुम लोगों को मन पसंद खाना खिला सकती हूं, घर का



सपने वो होते हें!

सपने वो होते हें!जो सोने नही देते !! और अपने वो होते है ! जो रोने नही देते !! प्यार इंसान से करो उसकी आदत से नही रुठो उनकी बातो से मगर उनसे नही... भुलो उनकी गलतीया पर उन्हें नही क्योकि रिश्तों से बढकर कुछ भी नहीं।।



सच्ची कहानी मन की

🌺सच्ची कहानी मन की🌺नानी- दादी- माँ की कहानी सुन कर हीं,नींद कभी आती थीसपनों में कहानी हुबहू फिर आ कर हिया बहलाती थीपाठशाला के मेरे पण्डित जी मनहर-कहानी सुनाते थेविद्यालय के शिक्षक कहानी की अलग घंटी लगाते थेमाँ जब व्रत करती तो बैठा पौराणिक-कथा सुनाती थीपुस्तकालयों से बहना कहानी की पुस्तकें हीं लाती



जेठ की चिलचिलाती धूप

अभी बाहर बड़े अच्छे से आषाढ़ की बारिश हो रही है – आषाढ़ – जो अभीऔर सप्ताह के बाद समाप्त हो जाएगा और श्रावण माह का आरम्भ हो जाएगा झमाझम बारिश केसाथ | पेड़ पौधों से झरती बरखा की बूँदें सुरीला राग छेड़ती तन मन को गुदगुदा रहीहैं | अभी पिछले दिनों ज्येष्ठ माह में जब चिलचिलाती धूप ने सबको बेहाल किया हुआथा तब ह



भक्ति सर्वश्रेष्ठ धन है

भक्ति सर्वश्रेष्ठ धन🌹🌹🌹🌹🌹🌹मन है अति चंचल,आलोढ़ित चितवन,मन तो आखिर है मन-डोलेगा हीं, वो डोलेगामन अति आह्लादित-नयन हैं अश्रुप्लावितएक को ठहरा कर हीं-दूजा कुछ बोलेगाप्रसव-पीड़ा के आँसूजन्म के आँसूसुख के आँसूदुख के आँसूप्रतारणा के आँसूपठन-पाठन के आँसूधुयें के आँसूंप्रेम के आँसूभक्ति के आँसूआसक्ति



अथ पत्नी सोपानम्

🌺🌷अथ पत्नी सोपानम्🌷🌺 किसी भी श्रेष्ट कवि की लुगाई मसलन, शायर की हो वो मोहतरमाखासमखास को भलिभांति वह पहचानती है हर हर्फ- ओ'- लब्ज में, किसके लिए? कह कर पारा सौ पार उछालती है 😄🙂🙂बेचारा कवि🙂🙂😄मगन देख एन्ड्रॉयड में पतिदेव को!अनसुनी कर टीपते व्यस्त पतिदेव को!!जासुसी करने का अब फाइनल



नियम प्रकृति का

प्रकृति के समस्त कार्य नियमों में बंधेहोते हैं – एक लय में बंधे होते हैं | लेकिन इसके साथ ही प्रकृति का हर अंग अपनेशर्तों पर प्रवाहमान रहता है | इनका प्रवाह तभी बाधित होता है जब ये अपने चरम सेजा मिलते हैं | कुछ ऐसा ही भाव आज की रचना में है... “नियम प्रकृति का”...https://youtu.be/KshyF0oP6ic



ब्रज बिहारी

कुजंवन मैं बांसुरी के धुन मैं त्रीदश आनन्दित कृष्ण के लीला मैं कंस है दुःखित ।हय को भय हो तो न हो उसके आसन्न रेवतीरमण के साथ दुराचारी मातुल को , दिखाये मृत्यु के चरण ।।कोविद को देकर ज्ञान पार्थ को पढाये गिता भागवत



क्या योवो बच्चों के लिए सुरक्षित है?

क्या ये नया अप्प बच्चो के लिए सुरक्षित है?



आप योवो पर कैसे प्रसिद्ध होते हैं?

योवो अप्प पर जल्दी फेमस कैसे हो सकते है? इसका कोई ट्रिक बताइये



आधुनिकरण

आधुनिकरण (Modernisation) स्नान घर के दरवाजे, अब, स्विमिंगपूल पर जाकर , खुलते हैं ! मारे शर्म के घुघट , उतर गई है ------ स्विमिंग ड्रेस के सामने ! अब उन्हें इतना पर्याप्त , नहीं लगा !!! स्नान के लिए अब पहनना .. कुछ भी जरूरी नहीं , मीटिंग में . मांग रखा गया !! शायद वे ठीक ह



आत्मा हमारी अपनी चेतना

स्वयं प्रकाशस्वरूप एवं स्वयं प्रकाशित तथा नित्य शुद्ध बुद्ध चैतन्य स्वरूप हमारी अपनी आत्माको किसी अन्य स्रोत से चेतना अथवा प्रकाश पाने की आवश्यकता ही नहीं - और यही हैपरमात्मतत्व - परमात्मा - इसे पाने के लिए कहीं औरजाने की आवश्यकता ही नहीं - आवश्यकता हैतो अपने भीतर झाँकने की - पैठने की अपने भीतर - और



नकल नहीं अक़ल

नकल नहीं अक़ल''हैप्पी फादर्स डे"💕💕🙏💕💕भारतीय संस्कृतिके गाल पर रपटमहज़ यह कम्युनिटीसाइट्स परमचा हंगामा है।स्टेटस लगाना मतलब पिता कीइज्जत नहीं बढ़ना है।।१ का दिन हो-हल्ला मचाबाकी दिन गटक जाना है।।।पिता कोई घटना नही है किएक दिन हीं वह पूजा जाए।बाकी ३६५दिन उसका तिरिस्कार कर अवहेलित रखा जाए।।"वृद्धा



राष्ट्र भक्ति

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳जय भारत 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 देवाधिदेव का कैलाश मानसरोवरभी खो कर भी हम चुप बैठे थे।शांति प्रतीक कबुतर उड़ाया बहुत,आशान्वित हो हम बैठे थे।।बाजू के सागर में जंगी पोत उतारअपना रंग सबको दिखलाया।पड़ोसी नेपाल को तोड़ मनमानानक्



गीत

🎵🎶🎤गी🎧🎷🎸🎹🎺🎻त🥁🎵🎼सुरीले गीत बना दो- चारसुना तुझे रिझा पातापैंजनिया की झंकार सेअपनी ओर खींच पाताकण्ठ वैसा नहीं सधा हुआ और,न हीं गीतकार,मीठी चासनी में छान-जलेबियाँ खिला मैं पातालकिरें उकेर कुछेक-पढ़ सुना भर देता रे आज,जैसे भी हो- हृदयांचल मेंगुद्गुदी तो लगा पातासुरीले गीत बना दो- चारसुना तुझ



वीरों को शत शत नमन



वीरों को शत शत नमन

वीर शहीदों को शत शत नमन,उठो हमारे वीर सपूतो ये देश तुम्हें जगाता है देश का हर बच्चा बच्चा नमन तुम्हें करता है बलिदान तुम्हारा हम व्यर्थ नहीं जाने देंगे 17/6/20 वर्षा वार्ष्णेयये देश हमारा है हम इसका बदला लेंगे ।गालवन की घाटी हमारा ही तो हिस्सा है मत करो विवाद चीन तुम्हें नहीं लेने देंगे ।शांति का हम



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