कविता



जीवन की रामकहानी

जीवन की रामकहानी कितने ही दिन मास वर्ष युग कल्प थक गए कहते कहते पर जीवन की रामकहानी कहते कहते अभी शेष है || हर क्षण देखो घटता जाता साँसों का यह कोष मनुज का और उधर बढ़ता जाता है वह देखो व्यापार मरण का ||सागर सरिता सूखे जाते, चाँद सितारे टूटे जाते पर पथराई आँखों में कुछ बहता पानी अभी शेष है ||एक ईं



"जय हो"

जय हो- अमर सृजन होदग्ध मानवता- रक्षित होअष्टपाश- सट् ऋपु मुर्छित हों''नवचक्र'' आह्वाहन जागृत होंकीर्तित्व उजागर - बर्धित होंशंखनाद् प्रचण्ड, कुण्डल शोभित होंकवि का हृदयांचल अजर - अमर होजय हो! 'वीणा वादनी' की जय हो!! 🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏



💞💞 तुम्हारी यादें 💞💞

💞💞 सुनो ................................💞💞जब जब तुम्हारी यादें !!मन के भीतर नृत्य करती है !!मैं रंग जाती हूँ !!तुम्हारे रंग में !!मैं झूम उठती हूँ ख़ुशी से !!तुम्हारे एहसासों को गले लगा कर !!फ़िर क़दमों तले ज़मीन नहीं होती मेरे !!आसमान की सैर पे निकल जाते है जज़्बात !!तोड़ लाते है वो अनमोल तारों को वह



भरी भीड़ में मन बेचारा

पितृपक्ष चल रहा है | सभी हिन्दू धर्मावलम्बी अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धासुमन समर्पित कर रहे हैं | हमने भी प्रतिपदा को माँ का श्राद्ध किया और अब दशमी कोपिताजी का करेंगे | कुछ पंक्तियाँ इस अवसर पर अनायास ही प्रस्फुटित हो गईं... सुधीपाठकों के लिए समर्पित हैं...भरी भीड़ में मन बेचारा खड़ा हुआ कुछ



हिन्दी दिवस के अवसर पर

हिंदी दिवस के अवसर पर :-"ह" से "ह्रदय" ह्रदय से "हिंदी", हिंदी दिल में रखता हूँ,"नुक्ता"लेता हूँ "उर्दू" से, हिन्दी उर्दू कहता हूँ..शब्द हो अंग्रेज़ी या अरबी, या कि फारसी, तुर्की हो,वाक्य बना कर हिन्दी में, हिन्दी धारा में बहता हूँ..हिंदी-ह्रदय विशाल बहुत है, हर भाषा के शब्द समेटे,शुरू कहीं से करूं



एक लड़की

लड़की हैं वोह कोई खिलौना नहीं जज़्बात हैं उसकी भी कोई मज़ाक नहीं जताने के लिए वोह कोई हक़ नहीं इंसान हैं वह कोई अमानत नहीं



ख़ामोश होने से पहले

ख़ामोश होने से पहले **************** ख़ामोश होने से पहले हमने देखा है दोस्त, टूटते अरमानों और दिलों को, सर्द निगाहों को सिसकियों भरे कंपकपाते लबों को और फिर उस आखिरी पुकार को रहम के लिये गिड़गिड़ाते जुबां को बदले में मिले उ



पिंजरे का पंछी

मैं जीना चाहूं बचपन अपना,पर कैसे उसको फिर जी पाऊं!मैं उड़ना चाहूं ऊंचे आकाश,पर कैसे उड़ान मैं भर पाऊं!मैं चाहूं दिल से हंसना,पर जख्म न दिल के छिपा पाऊं।मैं चाहूं सबको खुश रखना,पर खुद को खुश न रख पाऊं।न जाने कैसी प्यास है जीवन में,कोशिश करके भी न बुझा पाऊं।इस चक्रव्यूह से जीवन में,मैं उलझी और उलझती ह



एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ ...

मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं



तलाश

तलाश हैं उन राहों कि जो मंज़िल तक पहुंचा सकती हैंतलाश हैं उस रौशनी कि जो अँधेरे को मिटा सकती हैं तलाश हैं उस हकीकत कि जो सपनों को सच बना सकती हैं तलाश हैं उन पलों कि जो ज़िंदगी को पूरी कर सकती



तुम अच्छी हो

तुम अच्छी हो – श्रेष्ठ औरों सेसीमितहै मेरा संसार, एक छोटे से अन्धकारपूर्ण कक्ष तक...जब नहीं होता समाधान किसी समस्या का मेरे पासबैठ जाती हूँ अपने इसी अँधेरे कक्ष मेंआँसू की गर्म बूँदें ढुलक आती हैं मेरेगालों परमेरी छाती पर, मेरेहृदय पर...जानती हूँ मैं, कोईनहीं है वहाँ मेरे लियेजानती हूँ मैं, कोईमहत्व



ज़िंदगी तूने क्या किया

ज़िदगी तूने क्या किया*****************( जीवन की पाठशाला से )जीने की बात न कर लोग यहाँ दग़ा देते हैं।जब सपने टूटते हैंतब वो हँसा करते हैं। कोई शिकवा नहीं,मालिक ! क्या दिया क्या नहीं तूने।कली फूल बन के अब यूँ ही झड़ने को है।तेरी बगिया में हम ऐसे क्यों तड़पा करते हैं ?ऐ



ज़ख्म दिल के

ज़ख्म दिल के************(जीवन की पाठशाला)कांटों पे खिलने की चाहत थी तुझमें,राह जैसी भी रही हो चला करते थे ।न मिली मंज़िल ,हर मोड़ पर फिरभी अपनी पहचान तुम बनाया करते थे।है विकल क्यों ये हृदय अब बोल तेरादर्द ऐसा नहीं कोई जिसे तुमने न सहा।ज़ख्म जो भी मिले इस जग से तुझेसमझ,ये पाठशाला है तेरे जीवन की।शुक्रिय



पल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगी ...

धूल कभी जो आँधी बन के आएगीपल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगीअक्षत मन तो स्वप्न नए सन्जोयेगाबीज नई आशा के मन में बोयेगाखींच लिए जायेंगे जब अवसर साधनसपनों की मृत्यु उस पल हो जायेगीपल दो पल फिर ...बादल बूँदा बाँदी कर उड़ जाएँगेचिप चिप कपडे जिस्मों से जुड़ जाएँगेचाट के ठेले जब



वो पिता है

ऊँगली पकड़कर जो हमें चलना सिखाते है,लड़खड़ाने पर सबसे पहले सँभालने वही आते हैप्यार तो करते है पर जताते कभी नहीं हम पे मरते है पर बताते कभी नहींहमारी खुशियों के लिए जो खुद को जलाते हैतकलीफ में तो होते है पर अपना दर्द छुपाते हैहमारा पेट भरने के लिए खुद भूखे सो जाते है ख



"कथा- सार "

कथा- सार " --------------कथा -सार तुम्हें आज यहाँ सुनाने आया हूँ मैं शुकदेव -परीक्षित का संवाद बताने आया हूँ इंद्रिय शक्ति अगर चाहो तो इन्द्र का पूजन करो ब्रह्म तेज की चाह अगर वृहस्पति- कृपा भरो लक्ष्मी को खुश करने वाले देवी माया को जपो तेज की हो चाह



बड़ा सुनसान अन्दर हो गया है...

जवाँ आँखों का मंज़र खो गया हैहर एक अहसास खंज़र हो गया है...तमन्ना थी खिले बाग़-ए-चमन कीमग़र दिल एक बंज़र हो गया है...तृप्ति की इक बूँद पाने की ललक मेंसमूचा मन समन्दर हो गया है...न जाने कौन सा मोती लुटा है बड़ा सुनसान अन्दर हो गया है....!..............✍💔✍..…..........



ज़रूरी है

मेरा तुझसे रूठ जाना फिर मुझे यूँ मनाना ज़रूरी है मेरा टूट जाना तेरा फिर भी न मनाना ज़रूरी है थोड़ी सी बेखुदी थोड़ी सी बेरुखी ज़रूरी है तुझसे मिलना अकेलेफिर भीड़ मैं खो जाना ज़रूरी है फिर तेरा मुस्कुराना मेरा आंसू बहाना ज़रूरी है मैं खो जाऊं तू ढूंढ ना पाए तू ढूंढ भी लाये



वो चलता हुआ नींद में कहाँ जाता है

वो चलता हुआ नींद में कहाँ जाता है ऐसा लगता है दूर से उसे कोई बुलाता है !! माँ को ढूंढ़ती है शायद उसकी नज़र उसीकी गोद में सर रख के सोना चाहता है !!अब नहीं भूक से बिलख के वो रोता है ना जाने इतना सब्र अब कहाँ से लाता है !!हर बात की ज़िद करते देखा था उसे अब तो हर बात में ख़ुशी मनाता है !!अश्मीरा 18/8/19 11:



लिख दो कुछ शब्द --

लिख दो ! कुछ शब्दनाम मेरे , अपने होकर ना यूँ - बन बेगाने रहो तुम ! हो दूर भले - पास मेरे .इनके ही बहाने रहो तुम ! कोरे कागज पर उतर कर . ये अमर हो जायेंगे ; जब भी छन्दो में ढलेंगे , गीत मधुर



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