कविता

कन्धों पर सरहद के जाँबाज़ प्रहरी आ गये

मातम का माहौल है कन्धों पर सरहद केजाँबाज़ प्रहरी आ गये देश में शब्दाडम्बर के उन्मादी बादल छा गये रणबाँकुरों का रक्त सड़कों पर बहा भारत ने आतंक का ख़ूनी ज़ख़्म सहा बदला! बदला!!आज पुकारे देश हमारागूँज रहा है गली-चौराहे पर बस यही नारा बदला हम लेंगे फिर वे लेंगे.... बदला हम लेंगे फिर वे लेंगे....हम.... फिर



पीड़ा की लहरें

शहीदों की चिताओं पर उठी पीड़ा के लहरें हैं मगर सोचो ज़रा हम ही तो असली अंधे बहरे हैसोचते रहते हैं एक दिन शेर भी घास खाएगाजेहादी बुद्ध बन सबके दिलों के पास आएगाअरे कश्मीर में गर तुमने बाकी देश ना भेजाकभी भूभाग तुमसे जाएगा न ये फिर तो सहेजाकत्ल तुम लाखों द्रोहियों का यूँ ही कर नहीं सकतेये अलगाव के नारे



वीर सिपाही

हो वीरता का संचार तुम , इस मातृभूमि का लाल तुम ,तुम गूंजते हो खुले आसमान में ,तुम दहाड़ते हो युद्ध के मैदान में ,कभी रुकते नहीं कदम तुम्हारे ,थकते नहीं बदन तुम्हारे ,हो क्रांति का एक मिशाल तुम ,शेरनी माँ का शेर औलाद तुम ,जो सर कटाए दे



दर्द

दर्द जाने क्या दर्द से मेरा रिश्ता है!?!जब भी मिलता है बड़ी फ़ुर्सत से मिलता है||



दूसरा तो दूसरा ही होता है

।। दूसरा तो दूसरा ही होता है।। संबंध तो वही है;जिसमें तोड़ने का विकल्प होता ही नहीं। रिश्ता तो वही है; जिसमें छोड़ने का विकल्प होता ही नहीं।।चलो बात करें, चलो कुछ बात करें;एकदम ही निजी रिश्ते की;एकदम ही अंतरंग रिश्ते की;एकदम ही पूरे पूरे व्यक्तिगत संबंध कीचलो बात करें, चलो कुछ बात करें।।( दूसरा से य



इबादत सी मुहब्बत

चाह तुझसे मिलन की जब तलक सीने में जिंदा हैबड़ा बेचैन सा रहता मेरे मन का परिंदा हैमुहब्बत को बनाया पर सही ना साथ मिल पायापरेशां इस जमीं पर देख लो हर इक बाशिंदा हैचोट सीने पे लग जाए बिखर जाती हैं खुशियां भी कोई बनता है फिर साधू कोई बनता दरिंदा हैप्रेम होता नहीं सबको प्रेम की बातें हैं सारी हर इक रिश्त



पुलवामा के अमर शहीदों को शत शत नमन

आज चाहूँ देखनापुलवामा की घटना वास्तव में मन को क्षुब्ध करतीहै… सच में बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ है ये... और हमारे ये शहीद किसीप्रत्यक्ष युद्ध की भेंट नहीं चढ़े हैं, आतंकवादियों ने बड़े कायरतापूर्ण तरीक़े से इन पर हमला किया है... हमारे इन वीरशहीदों को वास्तव में गर्व के साथ शत शत नमन... ये सिर्फ अपने



जीवन ऊर्जा

जीवन ऊर्जा तो एक हीं है, ये तुमपे कैसे खर्च करो।या जीवन में अर्थ भरो या,यूँ हीं इसको व्यर्थ करो।तुम मन में रखो हीन भाव,और ईक्क्षित औरों पे प्रभाव,भागो बंगला गाड़ी पीछे ,कभी ओहदा कुर्सी के नीचे,जीवन को खाली व्यर्थ करो, जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,ये तुमपे कैसे खर्च करो।या म



हश्र

नज़रें चुरा ली आपने देख कर ना जाने क्योंमन में हम बसते हैं तेरे बात अब ये माने क्यों जानते थे जब ज़माना ख़ुदगर्ज होता है बहुत चल पड़े तेरी मुहब्बत फिर यहाँ हम पाने क्यों कुछ हश्र देखा है बुरा चाहत का इतना दोस्तोंसोचते हैं ये ह



ज़िंदगी की राह

था मुकद्दर सामने पर भूल हम से हो गईज़िंदगी की राह भटके मुस्कुराहट खो गई झूठ का पहने लबादा साथ में वो आ गया मन में मेरे बात उसकी बस ज़हर सा बो गई रोशन करेंगे रास्ता सोचा जली मशाल सेइस शमा की रोशनी भी ज़िंदगी से लो गई साथ आएगा कोई तो कुछ नया होगा



पास हो तुम

पास हो तुम दिल के इतने कैसे मैं तुमको छोड़ दूँजिसमें हैं बस छवियां तेरी वो आईना क्यों तोड़ दूँअविरल धार स्नेह की जो बहती है जानिब तेरेइसका रुख क्यों गैरों के मैं कहने भर से मोड़ दूँ प्रेम का रिश्ता ये हरगिज़ ख़त्म हो ना पाएगातू कहे तो एक नाम देकर सम्बन्ध अपना जोड़ दूँहाथ कोई गर तुझे छूने की हिम्मत भ



प्रीत के बिन

तुम्हारी प्रीत के बिन तो बड़ा मुश्किल ये जीना हैमुझे तो ज़िन्दगी का जाम नज़र से तेरी पीना हैना मेरे मर्ज को समझा ना मेरे दर्द को समझाबड़ी बेरहमी से तुमको उन्होंने मुझसे छीना हैदिन भी लम्बे हुए हैं कुछ और तू पास ना आए मेरे किस काम का खिलता बसन्ती ये महीना हैमेरी उजड़ी सी दुनिया देख वो ही मुस्कुराएगापतंग



जन्मों का नाता

कोई तो बात है तुझ में तू इतना याद आता है इक तेरा प्यार ही मुझ में उमंगों को जगाता है कई जन्मों का नाता है सदा मुझको लगे ऐसामुहब्बत वरना कोई इस तरह थोड़ी लुटाता हैमुझे महसूस होता है कोई ना झूठ है इस मेंअपनी पलकों पे तू ही फ़कत मुझको बिठाता हैमुहब्बत के सिवा मैं तो तुझे कुछ दे नहीं पाईमेरे नखरों को



रोज़ डे पर अपने साथी को तोहफे में भेजें ये बेहतरीन कविता होगी कबूल

रोज़ डे पर हम अपने पार्टनर को गुलाब देकर अपने रिश्तों में ताज़गी भरते हैं और अपने प्यार का इज़हार करते हैं। लेकिन एक कशमकश ये ज़रूर रहती है कि हम अपने पार्टनर को गिफ्ट में क्या दें जिससे वो ख़ुश हो जाए। वैसे तो आजकल कई तरह के तोहफे चलन मेें है लेकिन अगर आप कोई ख़ूबसूरत संदेश भेजते या सुनाते हैं तो य



दीवारें

दर्द ए दिल का मज़ा लेना है थोड़ी चोट तुम खा लो पास हो के भी जो बस दूर हो इक ऐसा सनम पा लोमुकद्दर साथ ना दे गर मुहब्बत मिल ना पाएगीप्रेम गीतों को अपने दिल से चाहे लाख तुम गा लोदीवारें मन में खिंच जाएं तो वो गिरती नहीं पल मेंलाख कोशिश करोगे चाहे तुम कि उनको अब ढा लोअगर खुल के ना बरसोगे बहारें कैसे आएंगी



तेरी आवाज़

तेरी आवाज़ को सुनना सुकूँ एक रूह को देता हैशिकायत है मगर मुझको ख़बर तू क्यों ना लेता हैप्यार बरसेगा जो तेरा चैन कुछ आ ही जाएगामेरे जीवन के आँगन में बिछा बस सूखा रेता हैसमय के साथ मेरी नाव तो बस बह रही है अबलाख कोशिश करी मांझी मगर ना इसको खेता हैप्यार को बाँटता है जो वही तो प्यार पाएगाबिना कारण ही तू



स्टोन क्रशर

पथरीले हठीले हरियाली से सजे पहाड़ ग़ाएब हो रहे हैं बसुंधरा के शृंगार खंडित हो रहे हैं एक अवसरवादी सर्वे के परिणाम पढ़कर जानकारों से मशवरा ले स्टोन क्रशर ख़रीदकर एक दल में शामिल हो गया चँदा भरपूर दिया संयोगवश / धाँधली करके हवा का रुख़ सुविधानुसार हुआ पत्थर खदान का ठेका मिला कारोबार में बरकत हुई कुछ और स्ट



आतंक

कविता(मौलिक)आतंकविजय कुमार तिवारीचलो, मुझे उस मोड़ तक छोड़ दो,सांझ होने को है,अंधियारे जाया नहीं जायेगा। न हो तो बीच वाले मन्दिर से लौट आना,या उस मस्जिद से,जहाँ सड़क पार चर्च है।अस्पताल तक तो पहुँचा ही देनाचला जाऊँगा उससे आगे। ऐसा नहीं कि हिन्दुओं से डरता हूँ,मुसलमानों से भी नहीं डरता,सिखों या किसी



फरेब

अब तुझको मेरे साथ की कोई ना आस हैतेरा काम तो निकल गया शक्ति भी पास हैतेरे आँसुओं के फेर में मैं फिर से लुट गया इक ये अदा तो हुस्न की सदियों से खास है उल्फ़त की राह में मिला मुझको फ़कत फरेबइसकी डगर न जाने क्यों आती ना रास हैमुझको सफ़र में ना



दूर वो सहर गई

बस तड़प तड़प में ही ये ज़िंदगी गुज़र गईदेने का वादा करा किस्मत मगर मुकर गईएक नशे में रह रहा था मैं तो पाल के स्वप्न असलियत से पर मेरी सारी चढ़ी उतर गईकोशिशें कितनी करीं हार तो ना बन सकामोतियों की माल हरदम टूट के बिखर गईज़िन्दगी की शाम में अब उम्मीदें क्या करेंकलियाँ खिलाती जो यहाँ दूर वो सहर



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