कविता

हाँ मत करो बात मुझसे

हाँ मत करो बात मुझसेतुम्हारी मर्जी।अपनो को क्या देना पडेबार-बार माफी की अर्जी।हाँ मानता हूं मैं हो जाती है गलतिया अक्सरइंसान है हम खुदा तो नहीं।जरा सी बात पर इतने दिन तक रूठे रहनाऐसी भी क्या हो खुदगर्जी।हाँ मत करो बात मुझसेतुम्हारी मर्जी।एक पल में ही भूल गएतुम वो सारी बातेंवो कसमे-वादेवो सब मुलाकाते



दिल मेरा एक मंदिर है ,इसकी पुजा हो तुम

जिसे लब्ज़ ब्यां न कर सके ,वो जज्बात हो तुम , दिल मेरा एक मंदिर



गीत चतुर्वेदी की कवितायेँ - काया - Kaya - Hindi poem by Geet Chaturvedi

तुम इतनी देर तक घूरते रह अँधेरे को कि तुम्हारी पुतलियों का रंग काला हो गया किताबों को ओढ़ा इस तरह कि शरीर कागज़ हो गया कहते रहे मौत आये तो इस तरह जैसे पानी को आती है वो बदल जाता है भांप में आती है पेड़ को तो दरवाज़ा बन जाता है जैसे आती है आग को वह राख बन जाती है तुम गाय का थन बन जाना दूध बनक



गीत

मैं तो ऐसा दीप कि जिसको , झंझावातों में जलना है | मुझे दिया अभिशापकिसी ने , जीवन भर ज



हृदय दान

हृदय दान पर बड़े हल्के फुल्के अन्दाज में लिखी गयी ये हास्य कविता है। यहाँ पर एक कायर व्यक्ति अपने हृदय का दान करने से डरता है और वो बड़े हस्यदपक तरीके से अपने हृदय दान नहीं करने की वजह बताता है। हृदय दान के पक्ष में नेता,बाँट रहे थे ज्ञा



#MeeToo मी टू सैलाब ( वर्ण पिरामिड )

येमी टू ले आया रज़ामंदी दोगलापन बीमार ज़ेहन मंज़र-ए-आम पे !वो मर्द मासूम कैसे होगा छीनता हक़ कुचलता रूह दफ़्नकर ज़मीर !क्यों इश्क़ रोमांस बदनाम मी टू सैलाब लाया है लगाम ज़बरदस्ती को "न"न मानो सामान औरत को रूह से रूह करो महसूस है ज़ाती दिलचस्पी। है चढ़ी सभ्यता दो सीढ़ियाँ दिल ह



वकील

जो कर न सके कोई वो काम कर जाएगा,ये वकील दुनिया में नाम कर जाएगा।फेकेगा दाना , फैलाएगा जाल,सोचे कि करे कैसे मुर्गे हलाल।आये समझ में ना , शकुनी को जो भी,चाल शतरंजी तमाम चल जायेगा .ये वकील दुनिया में नाम कर जायेगा।चक्कर कटवाएगा धंधे के नाम पे,सालो लगवाएगा महीनों के काम पे।ना



" बस चितवन से पलभर निहारा उन्हें "

कविता मेरी कलम सेतुम जो आए तो आई चमन में बहारसुप्त कलियाँ भी अंगड़ाई लेने लगींचूस मकरंद गुलों के मस्त भ्रमरे हुएकूक कोयल की अमराई गूंजने लगीं ।फिर महकने लगी ये बेरंग ज़िन्दगीजब से ख़ुश्बू तेरी मिल गई साथ हैहरसू लगने लगीं अब तन्हाईयाँ भीज



दूर नैन से भी हो जुदा,वे दिल से कब हुए

ऐ सिरफिरी हवा ले आ,उनकी कुछ खबरबिखरा खुश्बू ऐसे कि,महक जाए ये शहरया हवा दे आ मेरा,कुछ हाल या पता उन्हेंसुनके दास्तां वे सिहर,जायें ऐसा हो असरऐ सिरफिरी हवा ले आ,उनकी कुछ खबर बिखरा खुश्बू ........। जा कह दिलवर से क्या,दिल पे गुजरती हैकि र



साढू पुराण : भजन अनूप के, ग़ज़ल जगजीत की, सबको मिलाकर मैनें गाई भी कव्वालियाँ

बोतल को खोलकर, शाम उसमे घोलकर,करने लगा पुरानी यादो की जुगालियाँभजन अनूप के, ग़ज़ल जगजीत की, सबको मिलाकर मैनें गाई भी कव्वालियाँयाद आई शादी, अपनी बरबादी तो मुझे,आज तक के सभी किस्सें याद आ गयें सपना था शादी कर बन जाउंगा मैं राजा,करता हूँ आजकल बीवी की हम्मालियाँलेकर बारात जब पहुँचा ससुर द्वारे, सारे



संभवना

इससे फर्क नहीं पड़ता,तुम कितना खाते हो?फर्क इससे भी नहीं पड़ता,कि कितना कमाते हो?फर्क इससे भी नहीं पड़ता, कि कितना कमाया है?फर्क इससे भी नहीं पड़ता,कि क्या क्या गंवाया है?दबाया है कितनों को,कुछ पाने के लिए.जलाया है कितनों को,पहचान बनाने के लिए.फर्क इससे नहीं पड़ता,कि दूजों को



अगर पुरानी मम्मी होतीं...

https://amitnishchhal.blogspot.com/?m=1 मकरंदअगर पुरानी मम्मी होतीं... ✒️बैठी सोच रही है मुनिया, मम्मी की फटकार कोदुखी बहुत है कल संध्या से, क्या पाती दुत्कार वो?अगर पुरानी मम्मी होतीं...अगर पुरानी मम्मी होतींक्या वो ऐसे डाँट सुनातीं?बात-बात पर इक बाला कोकह के क्या वह बाँझ बुलातीं?पापा जो अब च



मेरे ही अंदर का उजड़ा हुआ बाग निकला

मैं अपने कमरे में बैठी हुई , खिड़की से बाहर देख रही थी ,बाहर कितना खालीपन और सन्नाटा था ,हवाओं में कोई हलचल नहीं ,न ही किसी पंछी का शोर था ,आसमा का चंचल नील नयन ,आज उदास बहुत था ,मालूम हो रहा था जैसे कोई तूफान आके ,इस गुलज़ार प्रकृति



हिन्दी कविता अमीर खुसरो | Amir Khusro Poems in Hindi

हिन्दी कविता अमीर खुसरो | Amir Khusro Poems in Hindi 1. सकल बन फूल रही सरसोंसकल बन फूल रही सरसों।बन बिन फूल रही सरसों।अम्बवा फूटे, टेसू फूले,कोयल बोले डार-डार,और गोरी करत सिंगार,मलनियाँ गेंदवा ले आईं कर सों,सकल बन फूल रही सरसों।तरह तरह के फूल खिलाए,ले गेंदवा हाथन में आए।निजामुदीन के दरवज़्ज़े पर,आव



दर्द-ए-महफिल सजा,अपने जख्मों को ताजा करती रही ा

दर्द-ए-महफिल सजा,अपने जख्मों को ताजा करती रही , किसी बेचैन दिल को नगमा सुना,मैं रोज मरहम बनती रहीअंदर-ही-अंदर जो टूटता रहा,वही नज्म मैं गुनगुनाती रही,नम आँखों के दर्द को समझे न मेरा महबूब ,अपने यार की दीवान



मै मीरा -सी दीवानी , तुमको कृष्णा बना लिया ा

आसमा से टूटकर ,एक सितारा जमीं पर गिरा , समझकर तुम्हारा दिल , मैंने दिल में छिपा लिया ,सजदे में जब भी हाथ उठा, लब पर तुम्हारा ही नाम आयाजान से भी ज्यादा अजीज हो मेरी जान ,मैं मीरा-सी दीवानी , तुमको कृष्णा बना लिया ा मेरे ही अंदर समाया है तू ,फिर भी ढूंढती



उलझन -- लघु कविता

इक मधुर एहसास है तुम संग - ये अल्हड लडकपन जीना , कभी सुलझाना ना चाहूं - वो मासूम सी उलझन जीना ! बीत ना मन का मौसम जाए - चाहूं समय यहीं थम जाए ; हों अटल ये पल -प्रणय के साथी - भय है, टूट ना ये भ्रम जाए संबल बन गया जीवन का - तुम संग ये नाता पावन जीना ! बांधूं अमर प्रीत- बंध मन के तुम सं



"मुक्तक"

"मुक्तक" सुखद आगमन आप का, माता महिमा प्यार।शारदीय नवरात में, सजा मातु दरबार।कीर्तन भजन व आरती, थाली पूजा फूल-नमन करूँ यश दायिनी, भजन करे परिवार।।-1मातु आगमन आप का, जल्दी हो इस बार।भक्त मंडली कर रही, माँ तेरा इंतजार।धूप दीप नैवेद्य है, अगर कपूरी थाल-हाथ-हाथ में कलश जल, और फूल का हार।।-2महातम मिश्र, ग



कलम हमारी

कौन सुने अब व्यथा हमारी, आज अकेली कलम हमारी,जो थी कभी पहचान हमारी, आज अकेली कलम हमारी।हाथों के स्पर्श मात्र से, पढ़ लेती थी हृदय की बाते,नैनों के कोरे पन्नों को, बतलाती थी मेरी यादें।कभी साथ जो देती थी, तम में, गम में, शरद शीत में,आज वही अनजान खड़ी है, इंतजार के मधुर प्रीत में।अभी शांत हू, व्याकुल भ



गजल

मेरी शायरी मुख्तलिफ है मेरे शेर अलग है अभी हासिल -ए -शोहरत मे देर अलग है ।अभी महफूज़ हूँ मै नाकामियों के साये में और मेरे हिस्से कि भी अन्धेर अलग है ।कोशिशों ने कामयाबियों से रिश्ता तोड़ लिया खुदा के



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