कविता



वो चलता हुआ नींद में कहाँ जाता है

वो चलता हुआ नींद में कहाँ जाता है ऐसा लगता है दूर से उसे कोई बुलाता है !! माँ को ढूंढ़ती है शायद उसकी नज़र उसीकी गोद में सर रख के सोना चाहता है !!अब नहीं भूक से बिलख के वो रोता है ना जाने इतना सब्र अब कहाँ से लाता है !!हर बात की ज़िद करते देखा था उसे अब तो हर बात में ख़ुशी मनाता है !!अश्मीरा 18/8/19 11:



लिख दो कुछ शब्द --

लिख दो ! कुछ शब्दनाम मेरे , अपने होकर ना यूँ - बन बेगाने रहो तुम ! हो दूर भले - पास मेरे .इनके ही बहाने रहो तुम ! कोरे कागज पर उतर कर . ये अमर हो जायेंगे ; जब भी छन्दो में ढलेंगे , गीत मधुर



परिचय

नित नए परिचय ओं के बाद भी... हम अपने ही स्वजनों से अपरिचित हैं... पास की बाधाओं से अनभिज्ञ, दूर की बाधाओं से आशंकित! हम समय को अपनी आवश्यकताओं का पुलिंदा बनाते जा रहे हैं.... हम उसे खोलते हुए डरते हैं लेकिन एक दिन अपने आप ही खुल जाएगा.... उसे देख हम अपने आप को पहचान लेंगे



एहसास है मुझे

एहसास है मुझे,वह दर्द जो तूने जिया...वह जख्म जो तुझे ,दुनिया ने दिया।एहसास है मुझे,उस अकेलेपन का..उस तड़पते दिल का..जिसे चाह थी,बूंद भर प्यार की..परिवार के दुलार की..!एहसास है मुझे,उन आंसुओं का..जो तेरी आंख से बहे..उस टूटे हृदय का..उस वेदना का..उस तड़प का..।तेरा एहसास,जो दर्द बनकर,जख्म के रूप में जि



बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगे - गोपाल सिंह नेपाली | Gopal Singh Nepali Poems In Hindi

Baharen Aayengi - Gopal Singh Nepali Poems In Hindiबहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगेसितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे!सितारों को मालूम था छिटकेगी चाँदनीसजेगा साज प्यार का बजेगी पैंजनी;बसोगे मन में तुम तो मन के तार बजेंगेसितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे!मिला



मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ - गोपाल सिंह नेपाली | Gopal Singh Nepali Poems In Hindi

Main Vidyut Mein Tumhein Niharu - Gopal Singh Nepali Poems In Hindiमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँनील गगन में पंख पसारूँ;दुःख है, तुमसे बिछड़ गया हूँ किन्तु तुम्हारी सुधि न बिसारूँ!उलझन में दुःख में वियोग मेंअब तुम याद बहुत आती हो;घनी घटा में तुमको खोजूँमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ!जब से बिछुड़



टिक - टाॅक के बाजार मे

मुजरा करते दिख रही है लड़कियाँटिक - टाॅक के बाजार मे यू ही बदनाम है हम लड़के इस संसार मेलड़कियाँ नाचती दिख रही है टिक - टाॅक के बाजार मे फर्क क्या है उसमे और तुममे जो कोठे पर नाचती है संसार मेआज बड़े घरो के बेटियाँ नाचती हैटिक - टाॅक के बाजार मे कोई नाचती है पैसा के लिए सरेआम इस संसार मेकोई लाइक और शेयर



तु भारत की शान है

तु भारत की शान है तु भारत की मान हैतु ही भारतवासी के लिए भगवान् हैहमारा भारतीय सेना महान है।जब जब देश मे खतरा मंडरायातु उठ खड़ा हुआ क्योंकि भारत मे बस एक तु ही महान है।बस एक तु ही भारत का जान है।तु भारत की शान है।जब जब कश्मीर पर कोई अत्याचार हुआतू उसका मुँह तोड़ जबाव दिया।इन्सान के रूप मे तु



"भारतीय शौर्य गाथा" - कश्मीर - युद्ध की पृष्ठ्भूमि पर आधारित प्रबंध-काव्य

"भारतीय शौर्य गाथा" - कश्मीर - युद्ध की पृष्ठ्भूमि पर आधारित प्रबंध-काव्य



"भारतीय शौर्य गाथा" - कश्मीर - युद्ध की पृष्ठ्भूमि पर आधारित प्रबंध-काव्य

"भारतीय शौर्य गाथा" - कश्मीर - युद्ध की पृष्ठ्भूमि पर आधारित प्रबंध-काव्यरचयिता - स्व. श्री दया शंकर द्विवेदी सम्पादक - श्रीमति आशा त्रिपाठी "क्षमा"



हम न संत बन सके

माँ की छाया ढ़ूंढने में सर्वस्व लुटाने वाले एक बंजारे का दर्द --( जीवन की पाठशाला )--------------------------------------हम न संत बन सके***************शब्द शूल से चुभे , हृदय चीर निकल गये दर्द जो न सह स



मंज़िल

ख्वाहिशों की मंज़िल बहुत मुश्किल हैं हिम्मत के रास्ते से चलना हैं रहे कुले हैं बस आज़माने की देरी हैं



दिल की बात

जो लफ़्ज़ों से होती नहीं बयान उन्हें आँखे जाती हैं आंखो से नहीं पद्सकें तो मेरी खामोशी को पहचान लो दिल से दिल तक बात पहुंचाने के बहुत रास्ते हैं बस सुनने और समझने की ही देरी हैं



इस जीवन को

आज भगवान् श्री कृष्ण काजन्म महोत्सव है | देश के सभी मन्दिर और भगवान् की मूर्तियों को सजाकर झूले लगाएगए हैं | न जाने क्यों,इस अवसर पर अपनी एक पुरानी रचना यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं, क्योंकि हमारे विचार सेमानव में ही समस्त चराचर का साथी बन जाने की अपार सम्भावनाएँ निहित हैं, और यही युग प्रवर्तक परम पुरुष



खा जाओ इसको तल के

शैतानियों के बल पे,दिखाओ बच्चों चल के,ये देश जो हमारा, खा जाओ इसको तल के।किताब की जो पाठे तुझको पढ़ाई जाती,जीवन में सारी बातें कुछ काम हीं ना आती।गिरोगे हर कदम तुम सीखोगे सच जो कहना,मक्कारी सोना चांदी और झूठ हीं है गहना।जो भी रहा है सीधा जीता है गल ही गल के,चापलूस हीं चल



जाने कब.............

जाने कब नज़र बदल जाए, जो आज अपने हैं वो पराए बन जाएं। आईना भी संभल कर देखना , जाने कब अपनी ही नजर लग जाये। ख्वाबो को दामन मे सहेज कर रखना , जाने कब किस्मत के सितारे बदल जाएं ।दर्द को भी निगाहों मे छिपा कर रखना , जाने कब दर्द ही दवा बन जाये। हवाओं से भी शर्त लगा लेना , जाने कब हम हवाओं से भी आगे निकल



रस्म ए उल्फ़त

चलो यूं निभाते हैं रस्म ए उल्फ़त हम दोनोंमैं हर दुआ में तुम्हारा नाम लूँहर बार तुम आमीन कह देनामेरा हर सजदा हो आगे तुम्हारेतुम हर बार मेरा काबा बन जानामेरी उँगलियों पे तुम तस्बीह की तरहइश्क़ की आयत लिख जानादोहराती रहूँ बार बार तुम्हें हीमेरे लबों का तुम कलमा बन जानाअश्मीरा 19/8/19 05:10 PM



नशेमन

निर्माण नशेमन का नित करती, वह नन्हीं चिड़िया ज़िद करती। तिनके अब बहुत दूर-दूर मिलते, मोहब्बत के नक़्श-ए-क़दम नहीं मिलते।ख़ामोशियों में डूबी चिड़िया उदास नहीं, दरिया-ए-ग़म का किनारा भी पास नहीं। दिल में ख़लिश ता-उम्र सब्र का साथ लिये, गुज़रना है ख़ामोशी से हाथ में हाथ लिये। शजर



स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये !!

एक वर्ष और स्वतंत्रता का.. आकर चला गया.. महँगाई..भ्रष्टाचार और अनगिनत रेप के बीच, इस स्वतंत्र धरती के.. खुले आकाश में.. दम घुँट रहा है.. बस शरीर जीवित है, कोई सरकार पर आरोप लगा रहा है.. सरकार विपक्ष पर.. विपक्ष सरकार की टांग खींच रहा है.. और जनता भूखी मर रही है, जिन वस्तुओं की जरुरत नहीं है.. वो सस्



माँ तुझे ढ़ूंढता रहा अपनों में

जन्म दिन पर एक बालक की अपनी माँ से प्रार्थना है कि वह अपने उस स्नेह को उसकी स्मृति से हटा ले ,जिसकी तलाश में उसे तिरस्कृत एवं अपमानित होना पड़ता है। ------------------------------------------------माँ तुझे ढ़ूंढता रहा अपनों में***********



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