कविता

समय के साथ | दिव्यांश

https://diwyansh.wordpress.com/2015/06/26/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5/



बलदेव पाण्डेय जी की कविता

💐प्रसंग है एक नवयुवती छज्जे पर बैठी है, वह उदास है, उसकी मुख मुद्रा देखकर लग रहा है कि जैसे वह छत से कूदकर आत्महत्या करने वाली है। 💐 विभिन्न कवियों से अगर इस पर लिखने को कहा जाता तो वो कैसे लिखते 🌷मैथिली शरण गुप्त 🌷अट्टालिका पर एक रमिणी अनमनी सी है अहो किस वेदना के भार से संतप्त हो देवी कहो?



24 अगस्त 2015

कुछ गुनगुनाते पल, कुछ मुस्कराते पल !

कुछ गुनगुनाते पल, कुछ मुस्कराते पल,ख़ुशी का अहसास कराते है,बारिश की पहली बूँद जैसे मनभावन, ये पल बार-बार क्यों नहीं आते है,सोचती हूँ कभी तो उत्तर यही मिलता है,गर्मी के बिना बारिश का क्या है महत्व,दुःख के बिना सुख में क्या है तत्व,बस ऐसे पलों को संजोह लो तुम,जो गर्मी में भी शीतलता का एहसास दिलाते है,औ



"कतार से पूछों"

सुना, आतंक का कोई मजहब नहीं होता अर्थी और ताबूत का मातम नहीं होताजलती चिता कब्र की कतार से पूछों आग संग पानी का विवाद नहीं होता || फिर भी लोंग खूब लगाते है लकड़ी दूसरे के माथे की गिराते है पगड़ी सर सलामत तो पगडियां हजार हैं नौ हाथ बिया की एक हाथ ककड़ी ॥ महातम मिश्र



सखी री...

कुछ भूली बिसरी यादें कुछ खट्टे-मीठे पल वो हंसी के ठहाके वो बिन रुके बातें याद आती है सखी री और आँखें हो जाती हैं नम होठों पे होती है मुस्कान और दिल में ये ख़्वाहिश की फिर से हो मिलना तुमसे कभी किसी मोड़ पर फिर से बिताएँ संग खूबसूरत से कुछ पल



सीख

त्वरित करो तय जो करना है। अ-निर्णय की आशंका से, कर्महीन बन क्यों मरना है । असमंजस में समय गॅवाया, हाथ न कुछ आने वाला । पछतावा ही साथ रहेगा, फिरा न पल जाने वाला । निज जीवन के स्वप्न सुहाने व्यर्थ में फिर किससे डरना है.....। अपनी अनुभव की झोली में, चुन चुन कर मोती भर लो । मग के कंटक बीन परे क



बारिश

बारिश छम-छम बूँदें बारिश की सुनाती है संगीत नया चारों और हरियाली है लगता है एक गीत नया। मन को बहुत भाता है सावन आता है झूम-झूम आँगन त्योहारों की खुशियों सा लगता है एक गीत नया। हर खेतों मैं हरियाली है नदियाँ भी कल-कल



कलियुग की महिमा ( कविता )

हे कलियुग तेरी महिमा बड़ी अपारमानव ह्रदय कर दिया तूने तार-तारअब तो भाई , भाई से लड़ते हैंबाप भी माई से लड़ते हैंबेटी , जमाई से लड़ती हैसब रिश्तों में डाली तूने ऐसी दरारउजड़ गए न जाने कितने घर-परिवारहे कलियुग तेरी महिमा बड़ी अपार | अच्छाई को बुराई के सामने तूनेघुटने टेकने पर मजबूर कियाअपने , सपनों से कित



कविता

'कविता' साहित्य भाषा के माध्यम से जीवन की मार्मिक अनुभूतियों की कलात्मक अभिव्यक्ति है। इस अभिव्यंजना के दो माध्यम माने गए हैं---गद्य और पद्य। छंदबद्ध, लयबद्ध, तुकान्त पंक्ति ही पद्य मानी जाती है जिसमें विशिष्ट प्रकार का भाव-सौंदर्य, सरसता और कल्पना का पुट होता है। मात्र छंदबद्ध रचना तब तक कविता नहीं



शिक्षा की कविता

पापा लाएवन पिजनमम्मी लाईटू डॉग्सथ्री कैट्स देख मगर शिक्षाने मचाया शोर,फोर बजे से लगीचिल्लाने डैड वॉक कराओ नहीं तो मेरे लिए कहीं से फाइव टैडी लेआओ ...सिक्स बजने पर नानी अम्मा सेवन चॉकलेट लाई,ऐट बजे तक शिक्षाजी ने बहुत इंटरेस्ट ले खाईंनौ दिन तक बूढ़े दादा ने हिंदी रोज सिखाई,हुई परीक्षा शिक्षा दस में द



कहीं कविता तो नहीं...

तुम...सम्पूर्ण कल्पना भी नहीं,और ना ही तुम सम्पूर्ण सत्य ही हो । मस्तिष्क पटल पर शब्दों से खिंची,आड़ी-तिरछी स्पंदित रेखाओं की अनबुझी सी कोई मूरत हो ।सोंधी मिट्टी के लोंदे से बनी कोई अनजान सी स्वप्निल सूरत हो । सत्य और स्वप्न के बीच झूलत



मानव (कविता)

मानव अब मानव नहीं रहा। मानव अब दानव बन रहा। हमेशा अपनी तृप्ति के लिए, बुरे कर्मों को जगह दे रहा। राक्षसी वृत्ति इनके अन्दर। हृदय में स्थान बनाकर । विचरण चारों दिशाओं में, दुष्ट प्रवृत्ति को अपनाकर। कहीं कर रहे हैं लुट-पाट।कहीं जीवों का काट-झाट। करतें रहते बुराई का पाठ, यही बुनते -रहते सांठ-गाँठ। य



बेटी मेरी तेरी दुश्मन ,तेरी माँ है कभी नहीं ,

बेटी मेरी तेरी दुश्मन ,तेरी माँ है कभी नहीं , तुझको खो दूँ ऐसी इच्छा ,मेरी न है कभी नहीं . ...................................................................... नौ महीने कोख में रखा ,सपने देखे रोज़ नए , तुझको लेकर मेरे मन में ,भेद नहीं है कभी नहीं . ....................................



दिख रहीं किरणें सुबह की।

इस संसार में वर्तमान के निराशा के क्षण में आशा का दीपक ही सुबह की किरणें है।



05 अप्रैल 2015

main khoju tujhko yha

main khoju tujhko yha- vha, sb se tera pta puchta, hr kshn tujhe khojta hu ,tu kha hai mere rachiyata. tu ek anokha hai ,tu "ansh" usi ka hai, vo nirvikar hai tere bhitr , tu swapna usi ka hai. main khoya hu khud se khud me, trsta hua apne mn se, jb-tb vyakul ho peeda se, tujhe khojta hu is van me.



प्यारी दीदी की विदाई

प्यारी बहना की विदाईपूर्व संचित पुण्यों से यह शुभ घड़ी आई हैहमारे द्वार पर आपकीपदधूलि समाई है ।जश्न में नहीं है शब्द स्वागत केजुबां लड़खड़ाई हैस्वयं गंगा हमारे द्वार परबह कर के आई है ।नीलाम्बर सा उस घर कायह उगता शुक्र तारा हैहमारे घर से ये चांदनीअब यूं करती किनारा है



पैसा ( कविता )

बड़े गज़ब की चीज होती है पैसा पैसे का गुण कुछ होता है ऐसा |कभी घोटाला तो कभी हवाला भी करवाता है ये पैसा |कभी गले में माला तो कभी मुँह काला भी करवाता पैसा |झूठ को सच और सच को झूठ बनाने में भी देर नहीं लगाता पैसा |अपनों से ही अपनों का भी गला दबाने से बाज़ नहीं आता पैसा |दोस्तों को दुश्मन ,दुश्मनों को दोस



बस एक बार

बस एक बार मुड़ कर देंखे वो बचपन के अल्हड दिन बस एक बार मुड़ कर देंखे वो बचपन की किलकारी हंसी बस एक बार मुड़ कर देंखे वो बचपन में आसमान छूते छोटे छोटे हाथ बस एक बार मुड़ कर देंखे वो बचपन की मस्तियां नादानियां बस एक बार मुड़ कर देंखे वो छोटे हाथों का कबूतर बिल्लियों के पीछे भागना बस एक बार फिर मु



रौशन

करें दिल हम रौशन भुला दें हम दिलों के अंतर गिले शिकवों में क्या रखा है करें दिल हम रौशन करें दिल हम रौशन न समझे किसी को छोटा बड़ा सब हैं प्यार के काबिल करें दिल हम रौशन करें दिल हम रौशन क्या कोई गरीब अमीर दिल है सबका एक सा करें दिल हम रौशन करें दिल हम रौशन एक सा सबका धड़कता है दि



दिल

इस दिल को संभाल कर रखिये हर बात पर मचल जाता है। नादान है यह दिल हर बात पर रूठ जाता है। बात ना मानो इस दिल की जोर से धड़कने लग जाता है। जब कहते है इसको नादान भाग कर कोपभवन चला जाता है। जब मानते हैं इसकी बात खुश होकर हंसता जाता है। जब मुस्कुरा कर मिलते हैं दो हसीन चेहरे दिल दिल से मिल जाता ह



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