कविता



“आदमी”

“आदमी” आदमी हँस रहा है, आदमी डंस रहा है आदमी गा रहा है, आदमी खा रहा है जा रहा है आदमी, छा रहा है आदमी आदमी जी रहा है, आदमी मर रहा है।। आदमी बन रहा है, आदमी तन रहा है आदमी धुन रहा है, आदमी गुन रहा है कुढ़ रहा है आदमी, चिढ़ रहा है आदमी आदमी पिस रहा है, आदमी घिस रह



कुछ रंग

कुछ रंग तू भर दे स्याही में ,कुछ हवा दे दे अरमानों को, कलम भी तेरी कलाम भी तेरा, तू रुख बदल दे तूफानों के ...



जब से बदल गया है नोट

एक रात समाचार है आयापाँच सौ हज़ार की बदली माया५६ इंच का सीना बतलाकरजाने कितनो की मिटा दी छायावो भी अंदर से सहमा सहमापर बाहर से है अखरोटजब से बदल गया है नोट.... व्यापारी का मन डरा डरा हैउसने सोचा था भंडार भरा हैहर विधि से दौलत थी कमाईलगा हर सावन हरा भरा हैएक ही दिन मे देखो भैयाउसको कैसी दे गया चोटजब



बेटा जब बड़े हो जाओगे...(कद्र काव्य कॉमिक से)

Intro Poem Kadr Kavya Comicबेटा जब बड़े हो जाओगे….बेटा जब बड़े हो जाओगे ना……और कभी अपना प्रयास निरर्थक लगें, तो मुरझाये पत्तो की रेखाओं से चटख रंग का महत्त्व मांग लेना। जब जीवन कुछ सरल लगे,तो बरसात की तैयारी में मगन कीड़ो से चिंता जान लेना।बेटा जब बड़े हो जाओगे ना……और कभी दुख का पहाड़ टूट पड़े,तो कड़ी धूप



हर गुज़रते पल के साथ

तेरी नज़रें बिन बोले भी, बहुत कुछ कहती हैं हमसेहोती हो जब तुम ख़ुश, ब्यान करती हैं यहहोती हो जब उदास, बता देती हैं यहहोती है जब मिलने की आस, समझा देती हैं यहहोती हो बिछुड़ने को जब, ज़ाहिर कर देती हैं यह करती हो जब कोई नदानी, बोल देती हैं यहकरती को जब कोई शरारत, बता देती हैं यह छुपाती हो कभी जब दर्द



तूफान जला रखा था

दिल मे आग का तूफान जला रखा था, आंखो मे कुछ पाने को अरमान खिला रखा था, मालूम ना थी मंजिल का ठिकाना मगर, चाहत मे उसने जहाँ भुला रखा था। इंटरनेट पे कभी गुगल करता, अखबारो सेकभी मंजिल का पता पूछ्ता, दौर परता उम्मीदकी थोरी सी किरन देख, निराशा



मुस्कुराना सीख लिया हैं मैंने

मुस्कुराना सीख लिया है मैंने दिल का दर्द दबाने के लिए मुस्कुरा देता हूँ ग़मों को भुलाने के लिए मुस्कुरा देता हूँआँसुओं को छुपाने के लिए मुस्कुरा देता हूँ यादों को मिटाने के लिए मुस्कुरा देता हूँ मायूसी को छुपाने के लिए मुस्कुरा देता हूँ रंज को मिटाने के लिए मुस्कुरा देता



कैसा लगता है ?

कैसा लगता है ? जब दिन गुजरे गिनाते घड़ीयां - पल ,जब हो किसीका अंतहीन इंतज़ार ,ना वह आये और ना दे कोई सुराग ! तब कैसा लगता है ?जब लगने लगा आज आनेवाला है वह शुभ दिन,और वह ले आये मायूसी का पैगाम ,तरस रहे सुनने को हाँ पर सुनना पड़े नकार ! तब क



जीना सीख लिया है

दबे जस्बादों को उभार कर जीना सीख लिया है दिल के टुकड़ों को संजो कर जीना सीख लिया है ग़मों को हंसी में डुबोकर जीना सीख लिया है ज़ख्मों के साथ मुस्कुरा कर जीना सीख लिया है खुदगर्ज़ रिश्तों को दरकिनार कर जीना सीख लिया है हताशा में भी आशा की किरण ढूँढ़कर जीना सीख लिया है विफलत



क़लम ख़ुद बा ख़ुद चलने लगती है

तेरी याद आते ही क़लम ख़ुद बा ख़ुद चलने लगती है दिल के ज़स्बाद, लफ़्ज़ बन काग़ज़ पर उतर आते हैं मन की बातों को स्वर का मिल जाता है ख़्वाबों को अभिव्यक्ति का ज़रिया मिल जाता है तमन्नाओं को प्रकट होने का मौक़ा मिल जाता है इन कविताओं के ज़रिए तुझ से रूबरू होने का आभास हो जाता है तेरी याद आते ही, क़लम ख़



मुस्कुराना सीख लिया है मैंने

मुस्कुराना सीख लिया है मैंने दिल का दर्द दबाने को मुस्कुरा देता हूँ ग़मों को भुलाने के लिए मुस्कुरा देता हूँआँसुओं को छुपाने के लिए मुस्कुरा देता हूँ यादों को मिटाने के लिए मुस्कुरा देता हूँ मायूसी को छुपाने को मुस्कुरा देता हूँ रंज को मिटाने को मुस्कुरा देता हूँरोष को दबाने को मुस्कुरा देता हूँ रिश



घर तक तो तेरे पहुँच गए

घर तक तो तेरे पहुँच गए दहलीज़ मगर पार कर ना पाए दिल से बहुत चाहा तुझेज़ुबान से मगर बता ना पाए आँखों से आँखें मिली कई बारउन में बसी तेरी मूर्त मगर दिखा ना पाए लिखे तेरे नाम ख़त कई, तुझ तक मगर, पहुँचा ना पाए बनाई कई तस्वीरें तेरीजान उन में मगर डाल ना पाए प्यार तुझ से किया ख़ुद से ज़्यादाप्यार मगर तेरा



किसे में असली समझू

किसे में असली समझू... तेरे उन बेबाक़ शब्दों को.. या उन चुप होंटो को, तेरे उन शोर मचाते झगड़ो को.. या उन गुपचूप से मासूम आँसुओ को, किसे में असली समझू ...तेरे बार-बार नाराज होने को..या तेरे भेजे उन रोमांटिक गानों को,किसे में असली समझू.



तुझ से बिछड़ कर जाना, आसान नहीं है जीना

तुझ से बिछड़ कर जाना आसान नहीं है जीना वो सब छोटी छोटी बातें जिनका मोल समझता नहीं था आज पता लगा कितनी अनमोल हैं वोसुबह आज भी होती है मगर तेरी मुस्कुराती सूरत दिखती नहींरात आज भी होती हैमगर सुकून की नींद जो तुझे पकड़ कर आती थी, वो अब आती नहीं फ़ोन की घंटी आज भी बजती हैपर द



जलंधर

आज जलंधर फिर आया है हाहाकार मचाने को अट्टहास



अपना उधार ले जाना! (नज़्म) #मोहितपन

अपना उधार ले जाना!तेरी औकात पूछने वालो का जहां, सीरत पर ज़ीनत रखने वाले रहते जहाँ, अव्वल खूबसूरत होना तेरा गुनाह, उसपर पंखो को फड़फड़ाना क्यों चुना?अबकी आकर अपना उधार ले जाना!पत्थर को पिघलाती ज़ख्मी आहें,आँचल में बच्चो को सहलाती बाहें,तेरे दामन के दाग का हिसाब माँगती वो चलती-फिरती लाशें। किस हक़ से देखा



अप्रैल -फूल

भारत सरकार ने8 नवम्बर 2016 को रात 8 बजे हज़ार पांच सौ के नोटों को अमान्य किये जाने की घोषणा कीअगले चार घंटों में देश एटीएम के आगे कतारों में खड़ा हो गयासयाने लोग सोना खरीदते



ऐसी कतारें...

करेंसी बैन ने जीवन परिवर्तन कर दिया। 10-12 दिन से जहाँ देखो वहाँ बस कतारें ही नज़र आ रही है। यह स्थिति किसी के लिए बड़ी दर्द दायीं है तो कोई इस हाल का लुत्फ़ उठा रहा है। मैंने अपनी समझ के हिसाब से इसे शब्द देने की कोशीश की... लगी है ऐसी कतारें



भस्मासुर गा रहा है

एक देश में कई देश देखालाइन में खड़ा दरवेश देखाजड़ खोदकर फल इतरा रहा हैकिसकी ज़मीन खा रहा हैभस्मासुर गा रहा हैगंगाजल बेचकरनमामि गंगे गा रहा हैलक्ष्मी के दरबार मेंश्रीहीनता का दौर हैदिवंगत धन के बोझ सेनिजात पा कर पेट खाली हैदुरभिसंधि की जुगा



इंदिरा गांधी जी के 100 वें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

अदा रखती थी मुख्तलिफ ,इरादे नेक रखती थी , वतन की खातिर मिटने को सदा तैयार रहती थी . .............................................................................. मोम की गुड़िया की जैसी ,वे नेता वानर दल की थी ,,



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