कविता



..........तभी कम्बख्त ससुराली ,

थी कातिल में कहाँ हिम्मत ,मुझे वो क़त्ल कर देता , अगर मैं अपने हाथों से ,न खंजर उसको दे देता ................................................................................वो बढ़ जाए भले आगे ,लिए तलवार हाथों में ,मिले न जिस्म मेरा ये ,क़त्ल वो किसको कर लेता ......



बात क्या करें

मुहब्बत ना हो जब बीच में तो फिर बात क्या करेंतड़पे ना जो मिलन को उससे मुलाक़ात क्या करेंदिन ही जब इस शहर में मुश्किलों से गुज़रता होवहां किस के सहारे जी लें और कहो रात क्या करेंठंडी ओस की बूँदें भी चमक जाती हैं मोतियन सीअगर संग ही वो ना ठहरें तो फक़त पात क्या करेंजहाँ पत्थर के सनम हैं वहां खुशियां नहीं



हमनें तो नहीं बनाया...!

वो खौफ का सरमाया,हमनें तो नहीं बनाया...लोगों ने ही सिखलाया,डर में भी फर्क बतलाया,जिसके जी में जो आया,सबने खौफ का इल्म पढ़ाया...मजहब, फिर खुदा से डराया,प्रेम ने लुभाया, तो डराया,जात-पात, धर्म समझाया,भलाई की कीमत तुलवाया,चतुराई का मर्म बतलाया,जी फिर भी न भर पाया,जन्नत और दोजख बनाया...ये क्यूं कर नहीं ब



मेरी हिंदी माँ

मेरी हिंदी माँमेरी तो हर सांसे तेरी वजह से है,फिर तेरे नाम एक दिन क्यों माँ,मेरी हिंदी माँ।मेरी तो हर रग रग में तुम ही समायी हो,फिर तुम्हे एक ही दिन क्यों मनाऊ माँ,मेरी हिंदी माँ।मेरे जन्म से मरण तक तुम ही मेरी आत्मा हो,फिर तुम्हारे लिए एक ही दिन क्यों माँमेरी हिंदी माँ।मेरी तो ले



बातें कुछ अनकही सी...........: चर्चे तेरे ही होंगे,ये कोई और नहीं

इश्क़ ऐसा हुआ कि मैं खो गया लोगों ने ढूँढा पर मिला नहीं इश्क़ की चाशनी को तेरे लबों से उठाया मिठास ऐसी की अब तक घुला नहीं तूने नाक पर नथुनी को सजा ऐसे दिया चाँद को खुले आसमान में जैसे देखा नहीं ये जो आँखों के तले जो काजल तूने लगाया अँधेरे में ऐसा डूबा की उठा नहीं तेरी चूड़िय



बेनूर जिंदगियां इसी को तरसे हैं...

रंग बरसे...आदतन... इरादतन... फितरतन!... या फिर, यूं ही ... बेसबब... ... गैरइंतखाबी सुर बरसे,नामुकम्मल मेहरबानियां भी,आंधियां भी रंगो-शबाब से बरसीं,अरमानों के रंग तो बहुत थे मगर,सूखी हथेलियों से पूछिये क्यूं नहीं बरसीं! ... मासूमियत पिस के जो हिना हुईंतो आसनाई बदरंग हो गयीं...फिर खुसूशियत स्याह हो चल



गजबे बा इ देश

गजबे बा इ देश रे भइया खल खल के गीत गावेला । सत्य बुद्ध के कहाँ गइल उपनिषद के शांति कहाँ गइल राष्ट्रपिता के अहिंसा कहाँ भगत के क्रांति गइल । उज्जर झक खादी के ऊपर छलिया दाग लगावेला । पंचयत के चौपालन पर पांचाली के चीर हराता लाशन के टीला प



हमार गांव

हमर गऊआं गजब अलबेलाउदास कभी होखे ना देला । ओहि मोरा गऊआं में बलवां बधरियाधानी चुनरिया में लागे बहुरिया डोल्हा पाती ओहिजे जमेलाउदास कभी होखे ना देला । ओहि मोरा गऊआं में चाना के पुलिया मछरी फँसावे ला लागेला जलियाओकर पीपर त लागे झुमेला उदा



चंदा के ले आव ना

ए कोइलरी! आव ना। मिसिरी जस गीत सुनाव ना ॥ तरवाईल तन के उजास मन के मिठास मरुआईल बा।अंदर तक खालीपन पसरलसाख पाँख लरुआईल बा । तितली रानी! आव ना ।अपना संगे उड़ाव ना ॥ बाबूजी भइलन मरियाठी माई माँस के गठरी ।बिकी



गजब हो गइल

माई घरे तोरा कहयिनी सासु घरे रउरा गजब हो गइलभइनी गउरी से गउरागजब हो गइल। कनियाँ बनके ससुरा अइनीसासु खूब खिअवली पुहुट बनावे खातिर हमके खुबे दूध पियवली देखते देखत हो गइनी हम गरइ से सउरागजब हो गइल। चूल्हा मिलल चउका मिलल मिलल चाभी तालारिन करज के बोझा मिलल मिलल छान्ही के जाला कुछे दिन में हो गइनी हम कठेल



रंगदार हो गईल

रंगदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू. ठेलठाल के इंटर कइलसबीए हो गइल फेल रमकलिया के रेप केस में भोगलस कुछ दिन जेल असरदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू. खादी के कुरूता पयजामामाथे पगड़ी लाल मुंह में पान गिलौरी दबलेचले गजब के चाल ठेकेदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू. पंचायत चुनाव में कइलस नव परपंच समरसता में आग लगव



चलीं अपना गांव

चलीं अपना गाँवतनि सा घूम आईं. पत्थल के एह नगरिया मेंपथरा गइलीसन आँखटुटल डाढ़ी अस गिरल बानीकटल परल मोर पाँख लागल बा चोट कुठाँवत कइसे धूम मचाईं. खिसियाइल दुपहरिया मेंतिल तिल के तन जरतानोनिआइल देवालिन मेंनोनी जस मन झरता ओहिजे मिली नीम छाँवत



कमाई दिहलस पपुआ

पढ़ि लिखि के का कइलभईया पढ़वैयाकमाइ दिहलस पपुआखांचा भर रुपैया. मंत्री बिधायकजी केखास भइल बड़ुएगऊआं के लफुआन केबॉस भइल बड़ुएआ मुखिया जी के कांख केभइल बा अँठईया. मुंशी पटवारीजी केकरेला दलालीमुंहवा में पान लेकेकरेला जुगालीआ भोरहिं से लाग जालाफांसे में चिरईयाँ. हिंदी अंगरेजीभोजपुरी बोलि लेलाबनब त बन हरेसरओक



हमार जान ह भोजपुरी

हमार सान हहमार पहचान ह भोजपुरीहमार मतारी हहमार जान ह भोजपुरी. इहे ह खेत,इहे खरिहान हइहे ह सोखा,इहे सिवान हहमार सुरुज हहमार चान ह भोजपुरी. बचपन बुढ़ापा ह,इहे जवानीचूल्हा के आगि ह,अदहन के पानीहमार साँझ ह,हमार बिहान ह भोजपुरी. ओढिला इहे,इहे बिछाइलाकुटिला इहे,इहे पिसाइलाहमार चाउर हहमार पिसान ह भोजपुरी इह



तुलसीदास ओ तुलसीदास

तुलसीदास ओ तुलसीदास तुम भी प्रेम पाश में सारी हदें लांघ गये थेरजनी के तम में जली जो विरह अगन उर मेंतुम लाश को नाव और सर्प को रस्सी समझ बैठे थेतुलसीदास ओ तुलसीदासतुम भी प्रिये की आस मेंभटके थे वन वन किसी की तलाश मेंसच सच बतलाना रत्नावली के दमक से तुम भी कुछ देर जले थे तुलसीदास ओ तुलसीदासपाकर अपनी मूर



जिस्म के सौदागर

तुम देखते हो एक औरत में आंखों की लंबाई होठों की चिकनाईस्तनों का आकार नितंबों की मोटाई तुम निहायतीजिस्म के सौदागर हो !तुम चूक कर देते हो !एक औरत के दिल में देखने मेंप्रेम और ममता की अथाह गहराई आंखों में लाज का काजलहोठों पर रहनुमाईदूध से



खाता नम्बर

ग़ौर से देखो गुलशन में बयाबान का साया है ,ज़ाहिर-सी बात है आज फ़ज़ा ने जताया है। इक दिन मदहोश हवाऐं कानों में कहती गुज़र गयीं, उम्मीद-ओ-ख़्वाब का दिया हमने ही बुझाया है। आपने अपना खाता नम्बर विश्वास में किसी को बताया है,



परिचय

मेरा इश्क़ मेरा दर्द मेरा रोग लिखता हूँज़ीवन के सारे अनुभवों का योग लिखता हूँसंयोग से संयोग हुआ इस कदर मेराक़ि बिछड़न में अब तलक मैं वियोग लिखता हूँ



हम मजबूरों की एक और मजबूरी -बाल मजदूरी

बचपन आज देखो किस कदर है खो रहा खुद को , उठे न बोझ खुद का भी उठाये रोड़ी ,सीमेंट को .” ........................................................................ ”लोहा ,प्लास्टिक ,रद्दी आकर बेच लो हमको , हमारे देश के सपने कबाड़ी कहते हैं खुद को .” .........................................................



पहले कौन उठता है...

कुछ वक्त गये, दुपैसियल बाजार से फनां हो गये... फिर तीन, पांच, दस और बीसपैसियल भी साथ हो लिए,चवन्नी की बिसात क्या, अब अठन्नी भी पाकिट छोड़ गये, न जाने कितने, ताबो-बिसात वाले यूं ही बेखास हो गये।इसी दुपैसियल से तिलंगी, लेमचूस और खट्टा पाचक जुटाये थे... बामुश्किल जुगाड़े थे दसपैसियल तो भाई संग फुलप्लेट



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