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यह कैसा नियम है ? ( ईद मुबारक के अवसर पर संसमरण )

यह कैसा नियम है ?(ईद मुबारक के अवसर पर संसमरण)डॉ शोभा भारद्वाज विदेश में रहने वाले भारतीयों एवं पाकिस्तानियों के बीच अच्छे सम्बन्ध बन जाते है कारण भाषा एक से सुख दुःख | ईरान के प्रांत खुर्दिस्तान की राजधानी सनंदाज में पठान डाक्टर हुनरगुल उनकी पत्नी सूफिया के साथ



कब तक सामने आते रहेंगे प्यारेमियाँ जैसे चरित्र ?

कब तक सामने आते रहेंगे प्यारेमियाँ जैसे चरित्र ? “हरचेहरेपर नकाबहै यहाँबेनकाबकोई चेहरानहींहर दामनमें दागहै यहाँबेदागकोई दामननहीं।यह अजीबशहर हैजहाँऔरत बेपर्दाकर दीजाती हैलेकिनसफेदपोशोंके नकाबकायम हैंयहाँ” मध्यप्रदेशकीराजधानीएकबारफिरकलंकितहुई।एकबारफिरसाबितहुआकिहमएकसभ्यसमाजहोनेकाकितनाभीढोंगकरेंलेकिनसत



चीन ईरान के बढ़ते सम्बन्ध , कारण ट्रम्प सरकार द्वारा लगाये आर्थिक प्रतिबन्ध

चीन ईरान के बढ़ते सम्बन्ध , कारण ट्रम्प सरकार द्वारा लगाये आर्थिक प्रतिबन्ध डॉ शोभा भारद्वाज क्रूड आयल काला सोना एवं गैस का भंडार होने के बाद भी आर्थिक मोर्चे पर ईरान पिछड़ता चला गया देश में पूरी तरह सस्ते राशन की व्यवस्था की गयी आवश्यकता का सामान कार्ड पर शिरकतों ( स



‘‘फेक’’ ‘‘एनकाउंटर’’ को ‘‘वैध‘‘ बनाने के लिए ‘‘कानून‘ क्यों नहीं बना देना जाना चाहिए?

‘‘विकास दुबे एनकाउंटर’’ (मुठभेड़) पूरे देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चित है। यह घटना न केवल स्वयं ‘‘सवालों में सवाल’’ लिये हुये है, बल्कि उपरोक्त ‘‘शीर्षक’’ प्रश्न भी पुनः उत्पन्न करता है। लगभग हर ‘एनकाउंटर’ के बाद उस पर हमेशा प्रश्नचिन्ह अवश्य लगते रहे हैं। उक्त ‘प्रश्नचिन्ह’ क



शहर रौशन है तो गांवों के लोगो ने क्या जुर्म कर दिया!

शहर रौशन है तो गांवों के लोगो ने क्या जुर्म कर दिया!मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएं हैं- रोटी,क पड़ा,मकान, हवा,पानी,ओैर रौशनी इनमें से एक भी न मिले तो इंसान का जीना दूबर हो जाता है. अगर यह बात देश में आने-जाने वाली हर सरकार पिछले तेहत्तर चौहत्तर सालों में भी समझ जाती तो शायद आज हमारे देश के गांवों की



कोरोना तो करोना, सांप भी पीछे नहीं!

कोरोना तो करोना, सांप भी पीछे नहीं!इस समय कोरोना ही नहीं सर्प भी लोगों का दुश्मन बना हुआ है. देश में इस समय मानसून और कोराना का दौर चल रहा है.कोरोना और सर्प का विष दोनो ही मनुष्य पर हावी है. कोरोना से मौत का सिलसिला हमारे देश में इस साल शुरू हुआ किन्तु पिछले बीस सालों में सांप के काटने से तकरीबन



‘विकसित’’ यूपी में ‘‘विकास‘‘ ‘‘राज‘‘ के साथ ‘‘ अराजकता राज‘‘ भी चल रहा है!

जिस बात की आशंका ‘‘गैंगस्टर’’ विकास दुबे की गिरफ्तारी के समय उत्पन्न हो रही थी व कतिपय क्षेत्रों में व्यक्ति भी की गई थी, वह अंततः चरितार्थ सही सिद्ध हुई। मुठभेड़ की घटना के पूर्व ही माननीय उच्चतम न्यायालय में एक वकील द्वारा दायर याचिका में भी उक्त आंशका व्यक्त की गई थी। यह आशंका भी व्यक्त की जा रही



गुलाश और पालिंका के देश हंगरी में कुछ दिन - दिनेश डाक्टर

छह साल बाद यात्रा संस्मरण लिखना न तो आसान है और न ही उत्साहपूर्ण । साढ़े तीन महीने से दुनिया भर में घूमने की पुरानी स्मृतियों के सहारे वक़्त काट रहा था कि पिछले हफ़्ते पुराने काग़ज़ खंगालते खंगालते एक नोट पैड हाथ आ गया । मैं भूल ही गया था कि हंगरी यात्रा के दौरान मैंने कुछ हल्के फुल्के नोट्स बनाए



गुम इंसान की आप बीती...

गुम इंसान की आप बीती...मानव तस्करों के जाल से ऐसे मुक्ति मिली दीपक को.....दीपक गवरे पिता प्रेमलाल गवरे नामक मजदूर अंतत: अपने परिवार में वापस तो आ गया लेकिन अपने गुम होने के करीब बीस -बाईस दिन उसने कैसे बितायें यह एक दिलचस्प कहानी है. गुम इंसान की खोज लाश दिखाकर-इस शीर्ष से इस साल के शुरू में दीपक



आदरणीय वरिष्ठ नागरिक गण आपकी वेबसाइट अब नये अवतार में

डीएलएस एल्डर सपोर्ट सर्विसेज की वेबसाइट अब नये अवतार में प्रस्तुत है। अब आप अपनी इसी वेबसाइट पर रेडियो सुन सकते हैं, टीवी चैनल देख सकते है, मेडिकल इमरजेन्सी के लिये फण्ड पा सकते है, ब्लाग लिख सकते हैं, सीनियर सिटिजन सम्बन्धी सेवायें पा सकते है। इसके अलावा और भी बहुत कुछ। आज ही विजिट करें। मित्रों पर



गुरु व शिष्य धर्म

*जय श्रीमन्नारायण**श्री यतिराजाय नमः*🥀🌷🥀🌷🥀🌷🥀🌷 *गुरु शिष्य के कर्तव्य*☘️🌿☘️🌿☘️🌿☘️🌿सभी मित्रों को पावन गुरु पूर्णिमा पर्व की व श्री व्यास जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं गुरु और शिष्य का मिलन ठीक उसी प्रकार है जैसे एक छोटा सा जलबिंदु अनंत सागर में जाकर के मिले आज का दिन वही अवसर



गुरु पूर्णिमा ( संस्मरण )

गुरु पूर्णिमा डॉ शोभा भारद्वाज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बचपन की स्मृतियाँ मन पर छाने लगती हैं | जिन्हें भूलना आसान नहीं हैं हमारा बचपन प्रयागराज में बीता हमारे घर के साथ एक गली थी उसके साथ चार मंजिल का मकान था उस समय के हिसाब से बहुत आलिशान घर यहाँ महाजन परिवार रहता था वह आढ़ती थे घर का मालिक गं



वृद्धाश्रम

वृद्धाश्रम.....पहले तो होते नहीं थे क्यूंकि पहले के वृद्ध खुद को वृद्ध समझते थे। आज के वृद्ध पहले जैसे नहीं रहे।पहले वृद्ध अपने नाती पोतों में व्यस्त होते थे।आज के बुजुर्ग फोन टीवी और लैपटॉप में।बदलाव आया है सबमें पहले के बुजुरगों को बच्चो की हर एक्टिविटी से मतलब होता था आज के बुज़ुर्ग को सिर्फ फोन



भेदियों से देश को कितना नुकसान!

भेदियों से देश को कितना नुकसान!अक्सर होता यह है कि किसी आपराधिक वारदात को रोकने पहले कोई एहतियाती कदम नहीं उठाये जाते किन्तु जब हो जाता है तो यह बवंडर बन जाता है तथा उसके पीछे जनता का पैसा इतना खर्च हो जाता है कि उसकी कोई सीमा नहीं रहती. उत्तर प्रदेश में भले ही छोटे मोटे अपराध को ज्यादा तबज्जो नहीं



चीन मोदी के संकेतों को समझ जाये तो ठीक!

चीन मोदी के संकेतों को समझ जाये तो ठीक!यह मानना बेमानी होगी कि चीन के रवैये में कोई बदलाव होगा. यह बात उसी समय साबित हो चुकी थी जब चीन के उस समय के राष्ट्राध्यक्ष ने भारत आकर हिन्दी-चीनी भाई भाई का नारा दिया था तथा चीन लौटने के तुरन्त बाद भारत पर हमला कर दिया था. चीन की मक्कारी ही उसकी कूटनीती है जो



भारतीय राजनीति में ‘सवालों’ के ‘जवाब’ के ‘उत्तर’ में क्या सिर्फ ‘सवाल’ ही रह गए हैं?

भारतीय राजनीति का एक स्वर्णिम युग रहा है। जब राजनीति के धूमकेतु डॉ राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी बाजपेई, बलराम मधोक, के. कामराज, भाई अशोक मेहता, आचार्य कृपलानी, जॉर्ज फर्नांडिस, हरकिशन सिंह सुरजीत, ई. नमबुरूदीपाद, मोरारजी भाई देसाई, ज्योति बसु, चंद्रशेखर, तारकेश्वरी सिन्हा जैसे अनेक हस्तियां रही है।



गांव के प्रत्येक वर्ग के लोगों को जागरूक बनाना

अब तक हिंदी न्यूज़ /प्रजायगराज/मेजा/पट्टीनाथ राय गांव के प्रत्येक वर्ग के लोगों को जागरूक बनाना हमारी प्राथमिकता__ श्यामराज यादव अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी सिरसा मण्डलआज नेहरू युवा केंद्र प्रयागराज युवा खेल मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशन में मेजा के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक रविशंकर द्वारा निरंतर जन



दूर

दुनिया में आए अकेले हैं। दुनिया से जाना अकेले हैं। दर्द भी सहना पड़ता अकेले हैं। लोग मतलब निकलते ही छोड़ देते अकेला है। तो फिर काहे की दुनियादारी, लोगों से दूर रहने में ही ठीक है। दर्द जब हद से गुजरता है तो गा लेते हैं। जिंदगी इम्तिहान लेती है। कभी इस पग में कभी उस पग में घुंघरू की तरह बजते ही रहें



ब्रज बिहारी

कुजंवन मैं बांसुरी के धुन मैं त्रीदश आनन्दित कृष्ण के लीला मैं कंस है दुःखित ।हय को भय हो तो न हो उसके आसन्न रेवतीरमण के साथ दुराचारी मातुल को , दिखाये मृत्यु के चरण ।।कोविद को देकर ज्ञान पार्थ को पढाये गिता भागवत



अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ( संस्मरण )

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (संसमरण )डॉ शोभा भारद्वाजसिंगापूर के बाशिंदों को फिटनेस का बहुत शौक है वह हर वक्त लम्बी सैर करते या साईकिल चलाते नजर आते | कोरोना काल में भी उनका साइकिल चलता रहा मैं कुछ दिन सिंगा



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