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गुलाश और पालिंका के देश हंगरी में कुछ दिन - दिनेश डाक्टर

छह साल बाद यात्रा संस्मरण लिखना न तो आसान है और न ही उत्साहपूर्ण । साढ़े तीन महीने से दुनिया भर में घूमने की पुरानी स्मृतियों के सहारे वक़्त काट रहा था कि पिछले हफ़्ते पुराने काग़ज़ खंगालते खंगालते एक नोट पैड हाथ आ गया । मैं भूल ही गया था कि हंगरी यात्रा के दौरान मैंने कुछ हल्के फुल्के नोट्स बनाए



चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को विस्तार वाद एवं बाजार दोनों चाहिए ?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को विस्तारवाद एवं बाजार दोनों चाहिए ?डॉ शोभा भारद्वाज राष्ट्रपति जिनपिंग की गिद्ध दृष्टि विश्व के बाजार पर हैं चीन आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न देश बन चुका है चीनी सामानों से बाजार पटे हुए हैं कारण चीनी सामान सस्ता है क्योकि चीनी सरकार कारखानों को कच्चे माल पर सब्सिडरी देती ह



चीन मोदी के संकेतों को समझ जाये तो ठीक!

चीन मोदी के संकेतों को समझ जाये तो ठीक!यह मानना बेमानी होगी कि चीन के रवैये में कोई बदलाव होगा. यह बात उसी समय साबित हो चुकी थी जब चीन के उस समय के राष्ट्राध्यक्ष ने भारत आकर हिन्दी-चीनी भाई भाई का नारा दिया था तथा चीन लौटने के तुरन्त बाद भारत पर हमला कर दिया था. चीन की मक्कारी ही उसकी कूटनीती है जो



chahat ke kisse

तू नज़्म सा दिल की धड़कन में सुनाइये देता है.... तेरा हर लब्ज़ बयां चाहत ही देता है..अगर साथ तेरे बैठे हैं बाज़मो में हम न कोई शिकवा न कोई ग़म... तू दिल की आशिकी का आशना है.... तू साँस साँस के दरिया में रखा फैसला है....



मिथिला

मिश्री जैसी मधुर है हमारी बोली हम प्रेमी पान मखान और आम के भगवती भी जहाँ अवतरित हुईं हम वासी हैं उस मिथिला धाम के संतानों को जगाने मिथिला की माएँ सूर्योदय से पूर्व गाती हैं प्रभाती सुनाकर कहानियाँ ज्ञानवर्धक मिथिला की दादी बच्चों को सुलाती प्रतिभा जन्म लेती है यहाँ पर कला और सौंदर्य का संसार है दिखत



दो सांपों की कहानी हिंदी और इंग्लिश में

आज का प्रेरक प्रसंगदो सांपों की कहानी*एक बार एक राजा था जिसका नाम था देवशक्ति वह अपने बेटे से बहुत निराश था, जो बहुत कमजोर था। वह दिन व दिन दुबला और कमजोर होता जा रहा था। दूर के स्थानों से प्रसिद्ध चिकित्सक भी उसे ठीक नहीं कर पा रहे थे। क्योंकि उसके पेट में साँप था। उन्होंने सभी तरह के उपचारों की को



*हमें हिचकी क्यों आती है -हिंदी और अंग्रेजी में

आज का विज्ञान हमें हिचकी क्यों आती है - *अक्सर देखा होगा कि अगर हम ज्यादा तीखा या तेजी से खाने से हमें हिचकी की परेशानी हो जाती है पर क्या आपने कभी सोचा है कि हमें हिचकी क्यों आती है हम आपको बता दें कि हमारे छाती और पेट के बीच डायाफ्राम (Diaphragm) एक माँसपेशी होती है जो हमारे फेफड़ों (Lung) में हव



चंद्रकांता देवकीनंदन खत्री कृत

चंद्रकांता। देवकीनंदन खत्री की कलम का विजयी शंखनाद।बाबू देवकीनंदन खत्री का जन्म 29 जून 1861 को मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत पूसा (बिहार) में हुआ था। उनके पिता का नाम लाला ईश्वरदास था। बाबू देवकीनंदन खत्री की प्रारम्भिक शिक्षा उर्दू-फारसी में हुई थी। बाद में उन्होंने हिंदी, संस्कृत एवं अंग्रेजी का भी अध्



पढे लिखे किसानों को सरकार देगी 20 लाख का लोन। जल्द करें आवेदन

भारत में किसानों के लिए रोज कोई ना कोई योजना की घोषणा होती रहती है। सबसे बड़ी समस्या होती है कि किसानों तक योजनाओं की जानकारी ही नहीं पहुंच पाती, क्योंकि जिनके पास जानकारी उपलब्ध होती है वहां किसान नहीं पहुंच पाते और जहां किसान होते हैं वहां जानकारी नहीं पहुंच पाती। तो किसानो और जानकारी के बीच के फा



अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ( संस्मरण )

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (संसमरण )डॉ शोभा भारद्वाजसिंगापूर के बाशिंदों को फिटनेस का बहुत शौक है वह हर वक्त लम्बी सैर करते या साईकिल चलाते नजर आते | कोरोना काल में भी उनका साइकिल चलता रहा मैं कुछ दिन सिंगा



मृत्यु

जीवन से मोह ही जीवन को जटिल बनाता है और मृत्यु का भय ही मृत्यु को भयावह मृत्यु तो विश्राम देती है अपनी गोद में आराम देती है मृत्यु ही सच्ची प्रेयसी है लेकिन यह तुम नहीं समझोगे क्योंकि तुम भ्रमित हो तुम्हें पता ही नहीं है कि सत्य क्या है जब मिट जायेगा भ्रम जान लोगे पूर्ण सत्य तब तुम्हें भी हो जायेगा



ग़ज़ल

मैं जानता हूँ कि अब तू ग़ैर है मुझे जीना भी तेरे बग़ैर है फिर भी मोहब्बत है तुझसे मेरे दिल को मुझसे ही बैर है बसा रखा है तुझे इन आँखों में मेरा मन ही बना मेरा दैर है रोज़ रुलाती हैं मुझे यादें तेरी जीने नहीं देती ऐसी ये मैर है तेरे दीदार को आज भी ये दिल करता तेरी गलियों की सैर है ✍️ आलोक कौशिक



विश्व में ‘‘लाॅकडाउन की नीति’’ कहीं ‘गलत’ व ‘‘असफल’’ तो सिध्द नहीं हो रही है?

‘‘कोरोनावायरस’’ ‘‘(कोविड़-19)’’ के संक्रमण को रोकने के लिये कमोवेश पूरे विश्व में लाॅकडाउन की नीति अपनाई, जिसके परिणाम स्वरूप आज विश्व के लगभग 200 देशों की आधी से ज्यादा आबादी घर में कैद है, और आर्थिक रथ का चक्का जाम हो गया हैं। इसके बावजूद कमोवेश कुछ को छोड़कर प्रायः हर देश में संक्रमित मरीजों की संख



सफलता

सन् दो हज़ार अठारह में प्रशासनिक सेवा हेतु बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा के अंतिम चरण का परिणाम आया था। मनीषा को सफलता प्राप्त हुई थी लेकिन मानव कुछ अंकों से असफल हो गया था। मनीषा और मानव अलग-अलग शहरों के रहने वाले थे किंतु दो वर्षों से दोनों पटना में रहते थे और एक ही कोचिंग इंस्टीट्यूट म



नर्तकी ( कहानी )

नर्तकी a अम्बुज जब तीन दिन के बादविभावरी के घर पंहुचा तो वह उससे बिलकुल नहीं बोली और मुँह फुलाये बैठी मेजपोशकाढती रही | वह पास ही कुर्सी पर बैठ गया और मेजपोशखींचते हुए बोला -`` पता है , मैं कल सुबह ही पूरे एक साल के लिए बनारस जारहा हूँ और तुम हो कि काढने से ह



और गांव की याद आई

एक रोग सारी दुनिया कीदिखलाता है सच्चाई।जिन शहरों को अपना मानाउनमें ही ठोकर खाई।ऐसे उसने पैर पसारेकाम-धाम सब बंद हुएलोगों ने तेवर दिखलाएरिश्ते सारे मंद हुए।और गांव के कच्चे घर कीहूक हृदय में लहराई।जिन शहरों को अपना मानाउनमें ही ठोकर खाई।प्रेम फला-फूला करता थागाँव गली-घर-आँ



क्या है बोवेन की बीमारी ? जाने इस बीमारी से बचने के कुछ तरिके!

बोवेन की बीमारी त्वचा कैंसर का एक बहुत ही प्रारंभिक रूप है



ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है - दिनेश डाक्टर

ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ? दिनेश डाक्टर बीते दिनों में एक विचार बार बार मन में उभरता रहा है कि आने वाली दुनिया पता नही अच्छी होगी या बुरी पर जीवन उतना अच्छा नही रहेगा । बहुत सारी बंदिशें होंगी, ढेर सारे डर होंगे, हर वक़्त लोगों को लेकर मन में वहम होंगे । ये खाऊं के न खाऊं, वहां जाऊं कि



गाँधी जी की प्रासंगिकता हिन्दुओं के लिए

#गांधी जी का #समाजवादी अभ्यास योगी आदित्यनाथ के द्वारा।हर हिन्दू के लिये आवश्यक।गाँधी गाँधी नही।आनन्द प्रभुजी।बहुत अच्छे योगीजीनवयुग का गांधी जी #योगी #आदित्यनाथ जी।संदर्भसभी राष्ट्रवादी नेता मोदी जी जैसे सहृदय और मूर्खताओं को अनदेखा करने वाले नहीं होते.......कुछ बाबा जी जैसे भी होते है..... हलक तक



#कोरोना त्रासदी । #मजदूरों का #पलायन #मोदी_सरकार_की_विफलता

#कोरोना त्रासदी । #मजदूरों का #पलायन#मोदी_सरकार_की_विफलता#निष्पक्ष व सटीक #विश्लेषणसंविधान की शक्तियों का उपयोग करें।नागरिकों की जान माल स्वास्थ्य व कोरोना की राष्ट्रीय त्रासदी में सुप्रीम कोर्ट व जनता कि नाराजगी कोई मोल लेने का दुस्साहस नहीं करेगा किंतु इच्छाशक्ति तो मोदी साहिब को ही दिखानी होगी।वि



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