की



तृण धरि ओट कहती वैदेही

तृण धरी ओट कहती वैदेही डॉ शोभा भारद्वाज कोरोना काल में सभी भयभीत हैं ऐसे में संकट मोचन हनुमान ही सहारा हैं .रावण जगा उसने प्रभात के सूर्य को अपनी लाल आँखों से देखा सबसे पहले कैद में रखी गयी सीता का रुख किया उसके पीछे उसकी रानियाँ उंघती हुई आ रही थी , बगल में मन्दोदरी हीरों से जड़ित सोने के पात्र में



ओ निष्ठुर पहचानो अब तो मानवता की पीर :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आज की स्थिति पर मन की व्यथा एवं आह निकलकर काव्यरूप में परिवर्तित हो गयी:---*××××××××××××××××××××××××××××××××××*असहायों की चीत्कारें , दे रही हैं सीना चीर !**ओ निष्ठुर ! पहचानो अब तो , मानवता की पीर !!**बेबस मानव आहें आज भर रहा है !**असमय हो संक्रमित आज मर रहा है !!**



जरा दिल को थाम के

कोरोना बीमारी की दूसरी लहर ने पूरे देश मे कहर बरपाने के साथ साथ भातीय तंत्र की विफलता को जग जाहिर कर दिया है। चाहे केंद्र सरकार हो या की राज्य सरकारें, सारी की सारी एक दूसरे के उपर दोषरोपण में व्यस्त है। जनता की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव प्रचार हो गया है। दवाई, टीका, बेड आदि की कमी पूरे देश मे



आशा एवं धेर्य न छोड़ें :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में लगातार उतार - चढ़ाव , सुख - दुख देखने को मिलते रहते हैं | सुख दुख के इन झंझावातों के मध्य मानव जीवन व्यतीत होता रहता है | संकट की घड़ी में जब कोई भी सहायक नहीं होता तब मनुष्य का धैर्य उसको सम्बल प्रदान करता है | जिसने अपना धैर्य खो दिया वह दुख के अथाह समुद्र में डूब जाता है | मनुष्य क



संकट में भगवन्नाम का सहारा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर ने समस्त सृष्टि के साथ मनुष्य को भी प्रकट किया और साथ ही मनुष्य को असीमित शक्तियां भी प्रदान कर दीं | अपने बुद्धि एवं विवेक से मनुष्य निरंतर विकास करता गया | मनुष्य इस धरती का सर्वश्रेष्ठ प्राणी बनकर धरा पर राज्य करने लगा परंतु मनुष्य पर ऐसा भी समय आया जब वह दीन हीन एवं असहाय होकर भगवान की शर



संक्रमणरोधी हमारी मान्यतायें :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म की मान्यतायें एवं जड़ें इतनी मजबूत हैं कि यदि इनको ध्यान से देखा एवं समझा जाय तो मानव समाज को कभी कोई समस्या का सामना करना ही न पड़े | हमारी मान्यतायें प्राचीन भले ही हों परंतु मानवमात्र का कल्याण हमारी मान्यताओं में स्पष्ट देखने को मिलता है | मानव समाज को



प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ का बैलेंस ही महिलायों को अलग वर्ग में खड़ा करता है

प्रोकिसी भी प्रोफेशन में सफलता हासिल करने के लिए पूर्ण समर्पण और तन्मयता बेहद आवश्यक है। समाज में महिलायों की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है| इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि किसी भी परिवार के लिए महिला एक महत्वपूर्ण व्यक्ति है जो एक माँ, बहन, बेटी, पत्नी किसी भी रूप में हो सकती है | इस



नक्सलवाद का अंत सरकार की दृढ इच्छा शक्ति पर निर्भर है

नक्सल वाद का अंत सरकार की दृढ इच्छा शक्ति परनिर्भर है डॉ शोभाभारद्वाज नक्सलवाद से हम जूझ रहे हैं उसकी शुरूआत पश्चिमी बंगालके गावँ नक्सलबाड़ी में सशस्त्र आन्दोलन द्वारा क्रान्ति की विचार धारा से हुई थीयह कम्यूनिस्ट विचारधारा के बीच में पनपने वाला आन्दोलन है इनके थ



सुविचार

मनुष्य के कथनी और करनी में अन्तर नही होना चाहिए



प्रकृति का करें संरक्षण :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य जैसा कर्म करता उसको वैसा ही फल मिलता है | किसी के साथ मनुष्य के द्वारा जैसा व्यवहार किया जाता है उसको उस व्यक्ति के माध्यम से वैसा ही व्यवहार बदले में मिलता है , यदि किसी का सम्मान किया जाता है तो उसके द्वारा सम्मान प्राप्त होता है और किसी का अपमान करने पर उससे अपमान ही मिलेगा |



माँ अम्बे स्तुति

*माँ अम्बे स्तुति*पंचचामर छन्द121 212 12, 121 212 12नमामि मातु अम्बिके त्रिलोक लोक वासिनी!विशाल चक्षु मोहिनी पिशाच वंश नाशिनी!!समस्त कष्ट हारिणी सदा विभूति कारिणी!अनंत रूप धारिणी त्रिलोक देवि तारिणी!!सवार सिंह शेष पे महाबला कपर्दिनी!असीम शक्ति स्त्रोत मातु चण्ड मुण्ड मर्



अड़चने आएं तो क्या ?

अड़चने भी अजीब होती हैं, हर बार सामने उत्पन्न खड़ी हो जाती हैं,कर्म योगी उनसे डटकर सामना करते हैं चाहे जो हो पर जीतने की जिद, अड़चनों को नेस्तनाबूत कर देती हैं,इसलिए किसी ने कहा है -"तू किसलिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की ओर,उस वक्त को सिर्फ



कुम्भ एवं अर्द्ध कुम्भ

कुभ एवं अर्द्ध कुम्भ आज 11 मार्च महा शिवरात्रि, हरिद्वार में कुंभ के अवसर पर शाही स्नान हुआ| डॉ शोभा भारद्वाज पुराणोंमें वर्णित पोराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं एवं दानवों ने मिल के समुद्र मंथनकिया था तय था समुद्र मंथन से जो रत्न निकलेंगे दोनों पक्ष मिल कर बाँट लेंगेमन



श्री मती ज्योति सक्सेना ,ॐ विश्रांति विचार प्रवाह की अध्यक्षा

श्री मती ज्योति सक्सेना, ॐ विश्रांति विचार प्रवाह की अध्यक्षा डॉ शोभा भारद्वाज आरडब्लूए सेक्टर 11 की महा सचिव ‘अंजनाभागी जी ने श्रीमती ज्योति सक्सेना जी के व्यक्तित्व से मेरा परिचय कराया एवं जनसमाज के प्रति उनकी लगन एवं कल्याणकारी कार्यों पर प्रकाश डाला मैं उनसे मिलीसादगी की मूर्ति समाज सेवा में सम



आत्मसम्मान - एक अधिकार

रोज की जिंदगी में हम लोग कई बार ऐसी परिस्थितियों से गुजरते हैं जब हमें समझौते करने पड़ते हैं , कभी रिश्तों में तो कभी अपने सपनों से । रोज ना जाने हम ना चाहते हुए भी जाने कितने समझौते कर लेते हैं सिर्फ यही सोच कर कि ठीक तो है ना । अगर मेरे ये करने से कोई रिश्ता बचता है तो ठीक तो है ना । अगर मेरे ये क



स्यापा (मातम ) क्या अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है ?

स्यापा ( मातम ) क्या अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रताहै ? डॉ शोभा भारद्वाज किस्सा पंजाब का है,पहले किसी सम्मानित वृद्ध की मृत्यू होती थी अपना वैभव व दुःख दिखाने के लिएरुदालिया बुलाई जाती इनकी बकायदा मंडलियाँ थीं इनके कई किस्से भी हैं.एक वृद्ध सेठ लालाजी के नाम से मशहूर था की मृत्यू हुई भरापूरा परिवार था ल



कवींन बी मेरी माँ

क्वीन बी मेरी माँ ( आज मेरी माँ का जन्म दिन है वह कितने वर्ष की हो गयी हैं हम जानना नहीं चाहते ) डॉ शोभा भारद्वाज मेरी माँ के पिता अर्थात मेरे जागीरदार नाना कालेज मेंप्रिंसिपल और जाने माने अंकगणित के माहिर थे . मेरी नानी अंग्रेजों के समय में विदेशीवस्तुओं का बहिष्कार ( पिकेटिंग



इंटरनेशनल मीडिया भारत की छवि खराब करता रहता है

इंटरनेशनल मीडियाभारत की छवि खराब करता रहता हैं डॉ शोभा भारद्वाज मेरी बेटी, अमेरिका की बेस्ट यूनिवर्सिटी मेंपढ़ी सिंगापूर में उच्च पदाधकारी ,मोटे –मोटे आंसू बहाती हुई सुबक रही थी . उसने सिंगापुर टाईम्स , गार्जियन, न्यूयार्कटाइम्स ,वाशिंगटन पोस्ट पढ़ी ,बीबीसी मेंखबरे देखीं घबरा गयी हमसे प्रार्थना कर



04 फरवरी 2021

रील लाइफ VS रियल लाइफ_3

रील लाइफ में एक सीरियल आता है छोटी सरदारनी जिसमें एक लड़की की शादी ऐसे लड़के से होती है जिसके एक बेटा होता है परम , वो लड़की उसकी सौतेली माँ होते हुए भी उसे सगी माँ सा प्यार और दुलार देती है , उस बच्चे को अपना समझती है और अपने बच्चे और सौतेले बच्चे में कोई फर्क नहीं करती हैं अब बात



31 जनवरी 2021

रील लाइफ VS रियल लाइफ_2

रील लाइफ में एक शो आता हैं अनोखी और शौर्य की कहानी जिसमें अनोखी पढ़ना चाहती हैं पंरतु उसके पिता उसे सपोर्ट नहीं करते क्युकी वो एक लड़की हैं , पर उसकी मेम उसे सपोर्ट करती हैं और उसे कॉलेज में प्रवेश मिल जाता हैं,अब बात करते हैं रीयल लाइफ कीअक्सर देखने में आता हैं कि कुछ घरों में बेटियां होती हैं तो उ



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