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गुरु पूर्णिमा ( संस्मरण )

गुरु पूर्णिमा डॉ शोभा भारद्वाज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बचपन की स्मृतियाँ मन पर छाने लगती हैं | जिन्हें भूलना आसान नहीं हैं हमारा बचपन प्रयागराज में बीता हमारे घर के साथ एक गली थी उसके साथ चार मंजिल का मकान था उस समय के हिसाब से बहुत आलिशान घर यहाँ महाजन परिवार रहता था वह आढ़ती थे घर का मालिक गं



वृद्धाश्रम

वृद्धाश्रम.....पहले तो होते नहीं थे क्यूंकि पहले के वृद्ध खुद को वृद्ध समझते थे। आज के वृद्ध पहले जैसे नहीं रहे।पहले वृद्ध अपने नाती पोतों में व्यस्त होते थे।आज के बुजुर्ग फोन टीवी और लैपटॉप में।बदलाव आया है सबमें पहले के बुजुरगों को बच्चो की हर एक्टिविटी से मतलब होता था आज के बुज़ुर्ग को सिर्फ फोन



भेदियों से देश को कितना नुकसान!

भेदियों से देश को कितना नुकसान!अक्सर होता यह है कि किसी आपराधिक वारदात को रोकने पहले कोई एहतियाती कदम नहीं उठाये जाते किन्तु जब हो जाता है तो यह बवंडर बन जाता है तथा उसके पीछे जनता का पैसा इतना खर्च हो जाता है कि उसकी कोई सीमा नहीं रहती. उत्तर प्रदेश में भले ही छोटे मोटे अपराध को ज्यादा तबज्जो नहीं



चीन मोदी के संकेतों को समझ जाये तो ठीक!

चीन मोदी के संकेतों को समझ जाये तो ठीक!यह मानना बेमानी होगी कि चीन के रवैये में कोई बदलाव होगा. यह बात उसी समय साबित हो चुकी थी जब चीन के उस समय के राष्ट्राध्यक्ष ने भारत आकर हिन्दी-चीनी भाई भाई का नारा दिया था तथा चीन लौटने के तुरन्त बाद भारत पर हमला कर दिया था. चीन की मक्कारी ही उसकी कूटनीती है जो



कोरोना का सच भाग 1

कोरोना का नाम बहुत सुना था। लेकिन 25 मार्च के बाद हमें समझ में आया क्या चीज है आखिर वह। लॉक डाउन के बाद हम सभी एक दूसरे को शक की निगाह से देखने लगे। वॉट्सएप पर मैसेज डराने के लिए आने लगे।पुरानी फिल्मों के सीन दिखाकर बहुत डराया लोगों ने



एक जुलाई , डाक्टर्स डे प्रमुख कोरोना योद्धा

एक जुलाई ' डाक्टर्स डे ,प्रमुख कोरोना योद्धा' डॉ शोभा भारद्वाजएक जुलाई 1991 , भारत में डाक्टर्स डे की शुरुआत देश के महान चकित्सक भारत रत्न से सम्मानित पश्चिमी बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डा०बी .सीे राय को उनके जन्म दिवस के अवसर पर सम्मानं एवं श्रद्धांजली देने केलिए डाक्टर्स डे मनाया जाता है इनके



chahat ke kisse

तू नज़्म सा दिल की धड़कन में सुनाइये देता है.... तेरा हर लब्ज़ बयां चाहत ही देता है..अगर साथ तेरे बैठे हैं बाज़मो में हम न कोई शिकवा न कोई ग़म... तू दिल की आशिकी का आशना है.... तू साँस साँस के दरिया में रखा फैसला है....



ग्लास को नीचे रख दीजिये हिंदी और अंग्रेजी मे

आज का प्रेरक प्रसंग ग्लास को नीचे रख दीजिये-------------------------------------------------एक प्रोफ़ेसर ने अपने हाथ में पानी से भरा एक Glass पकड़ते हुए Class शुरू की . उन्होंने उसे ऊपर उठा कर सभी Students को दिखाया और पूछा , ” आपके हिसाब से Glass का वज़न कितना होगा?” ’50gm….100gm…125



क़िस्सा गिलहरी और कोरोना का - दिनेश डाक्टर

फुदकती फुदकतीमेरी खिड़की परफिर आ बैठी गिलहरीछोटी सी लीची कोकुतर कुतर छीलाफिर मुझसे पूछाक्या हुआ सब खैरियत तो हैदेखती हूँ कई महीनों सेकैद हो महज घर में न बाहर जाते होन किसी को बुलाते होबस उलझे उलझे उदास नज़र आते हो ? मैंने देखा उसकीचौकन्नी आंखों कोसफेद भूरीचमकती धारियों कोछोटे छोटे सुंदर पंजो कोपल पल ल



उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण सभी छात्रों को मैं बधाई

उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण सभी छात्रों को मैं बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ। आप सभी छात्र-छात्राओं को भारत का भविष्य निर्धारित करना है। आशा है आप अपने आगामी जीवन की सभी परीक्षाओं में अपना इसी प्रकार श्रेष्ठतम प्रदर्शन देगें। ‬‪जो छात्र इस वर्ष किसी कारणवश



गांव के प्रत्येक वर्ग के लोगों को जागरूक बनाना

अब तक हिंदी न्यूज़ /प्रजायगराज/मेजा/पट्टीनाथ राय गांव के प्रत्येक वर्ग के लोगों को जागरूक बनाना हमारी प्राथमिकता__ श्यामराज यादव अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी सिरसा मण्डलआज नेहरू युवा केंद्र प्रयागराज युवा खेल मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशन में मेजा के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक रविशंकर द्वारा निरंतर जन



कोरोना का काबू।

कोरोना का काबू।कोरोना --- कोई रोजगार नही।कोरोना --- कोई रोकथाम नही।कोरोना --- कोई रोए ना।कोरोना --- कोई रोकड़ा नही।कोरोना --- कोई रोल नही।कोरोना --- कोई रोको ना।



सफल जीवन

हमे अपने जीवन में होने वाली कई घटनाएं बहुत ही अचंभित कर जाती हैं। कुछ तो आनन्द से विभोर कर देती है, ऐसी घटनाओं के बारे में हम तुरंत अपनी प्रभावकारी शख्सीयत या फिर अपनी कुशलता को कारण मान कर खुश हो लेते है या फिर किसी व्यक्ति का आभार मान लेते हैं जिसकी वजह से ये आनन्द अनुभूति होती है।



कोविड-19 और ऑनलाइन शिक्षा

कोविड-19 और ऑनलाइन शिक्षा( समाचार पत्र में छापने के लिए )COVID-19 महामारी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिये लागू किये गए लॉकडाउन के कारण नौकरी, धंधा, कारोबार, व्यापार और व्यवसाय के साथ - साथ स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही है। विश



विश्व में ‘‘लाॅकडाउन की नीति’’ कहीं ‘गलत’ व ‘‘असफल’’ तो सिध्द नहीं हो रही है?

‘‘कोरोनावायरस’’ ‘‘(कोविड़-19)’’ के संक्रमण को रोकने के लिये कमोवेश पूरे विश्व में लाॅकडाउन की नीति अपनाई, जिसके परिणाम स्वरूप आज विश्व के लगभग 200 देशों की आधी से ज्यादा आबादी घर में कैद है, और आर्थिक रथ का चक्का जाम हो गया हैं। इसके बावजूद कमोवेश कुछ को छोड़कर प्रायः हर देश में संक्रमित मरीजों की संख



महामारी के बाद के विश्व में भारतीय विदेश नीति

कोरोना वायरस के प्रकोप से विश्व व्यवस्था व्यापक परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है। इन परिवर्तनों की व्यापकता सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक क्षेत्रों के साथ ही मानव के



कोरोना काल के कुछ तथ्य

लॉकडाउन के 22 March ,२० से 31 May ,२० के दौरान, इन 71 दिनों के कोरोना काल में कुछ तथ्य -1- भारत के 28 राज्यों व् 8 केंद्र शासित प्रदेशों में बसी 135 करोड़ जनसख्या मेंगावों से शहरों की ओर देश की कुल आबादी में से एक तिहाई ने अर्थात 45 करोड़आबादी ने अपने मूल स्थान से रोजगार या अन्य कारणों से पलायनकिया



वैश्विक पटल पर कोरोना द्वारा उत्पन्न जनवादी संघर्ष

कोरोना कोविड 19 वैश्विक महामारी जिसने आज भागती दुनिया के चक्र की गति को धीमा कर दिया है। इस गति के अनुपात को लिखना ठीक वैसे ही होगा जैसे किसी जटिल इतिहास को 'किताब में लिखना' अगर हम वर्तमान परिस्थितियों की तुलना पूर्व परिस्थितियों से करें तो आज हमें बदलावो के अनुपात में बढ़ोतरी दिखती है। निश्चित है ब



शहर तेरा, गाँव मेरा

शहर तेरा, गाँव मेरा"हम तेरे शहर में आए है मुसाफ़िर की तरह, कल तेरा शहर छोड़ जाएंगे साहिल की तरह, शहरों में सह मिलते है। गुलशन में गुल खिलते है। सारे शहर में आप जैसा कोई नही। दो दीवाने शहर में। सारे शहर के शराबी मेरे पीछे पड़े। सारे शहर में कैसा है बवाल। एक अकेला इस शहर में, मोहम्मद के शहर में, शहर की ल



अणु कोरोना हार चलेगा

हाहाकार मचा है जग मेंकैसे बेड़ा पार लगेगामन में आशा आस जगाएजीवन का ये पुष्प खिलेगालाशों के अंबार लगे हैंबिछड़ रहे अपनों से अपनेसाँसों की टूटी डोरी मेंटूट रहें हैं सपने कितनेबंदी जीवन भय का घेरालेकिन सुख का सूर्य उगेगामन में आशा आस जगाएजीवन का ये पुष्प खिलेगा।।काल कठोर भयंकर भारीनिर्धन को अब भूख निगल



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