गीता और देहान्तरप्राप्ति

गीता औरदेहान्तरप्राप्तिश्राद्ध पक्ष में श्रद्धा के प्रतीक श्राद्ध पर्व काआयोजन प्रायः हर हिन्दू परिवार में होता है | पितृविसर्जनीअमावस्या के साथ इसका समापन होता है और तभी से माँ दुर्गा की उपासना के साथ त्यौहारोंकी श्रृंखला आरम्भ हो जाती है – नवरात्र पर्व, विजयादशमी,शरद पूर्णिमा आदि करते करते माँ लक्



मानव जीवन का परम लाभ?

मानव जीवन का परम लाभ?--------------------------------य एकोsवर्णो बहुधा शक्ति योगाद्व्नाननेकन्निहितार्थों दधाति|वि चैति चांते विश्वमादौ स देव :स नो बुदध्या शुभया सन्युनक्तु |सृष्टि के आरंभ मेनम जो एक और निर्विशेष होकर भी अपनी शक्ति के द्वारा विना किसी प्रयोजन के ही नाना प्रकार के अनेकों वर्ण (विशेष



Sketches from life: पेंशनर और बीमा

भारत में उन पेंशनर की संख्या कितनी है जो अपने पूर्व एम्प्लायर से पेंशन लेते हैं? कुल मिला के कितने लोग नौकरी के बाद पेंशन ले रहे हैं? ये आंकड़े इन्टरनेट में खोजने की कोशिश की पर पता नहीं लग पाया. यूरोपियन यूनियन की एक साईट में 2005 से 2050 तक के आंकड़े और भविष्य के ग्राफ वग



"श्रीराम मंदिर निर्माण और क्षेत्रीय विकास"

"श्रीराम मंदिर निर्माण और क्षेत्रीय विकास"श्री राम मंदिर निर्माण शुरु हो गया । राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ अयोध्या के विकास पर भी सरकार प्रतिबद्ध है।अयोध्या नगरी में देश का बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बने और धार्मिक पर्यटन स्थलों की योजना पर सरकार कार्य कर रही है।काव्य प्रभाकर के रचयिता जगन्नाथ प्रसाद



जानिए कब नहीं करते लोग मदद

हमें अपनी ज़िंदगी की जिम्मेदारियां खुद हीउठानी पड़ती है, लेकिन मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तो ऐसे में ये कहना कि वो हीअकेले सारे काम कर सकता है तो ये कहना गलत ही होगा। एक दूसरे के सहयोग से ही समाजआगे बढ़ता है लेकिन कब लोग मदद करने से मुंह फेर लेते है इसका उदाहरण बचपन



पितृविसर्जनी अमावस्या महालया

पितृविसर्जनी अमावस्या – महालयाकल यानी 17 सितम्बर को भाद्रपदअमावस्या है – पितृपक्ष की अमावस्या – पन्द्रह दिवसीय पितृपक्ष के उत्सव का अन्तिमश्राद्ध - आज रात्रि 7:58 के लगभग साध्ययोग और चतुष्पद करण में अमावस्या तिथि का आगमन होगा जो कल सायं साढ़े चार बजे तकविद्यमान रहेगी | “उत्सव” इसलिए क्योंकि ये पन्द्र



खुदको बदल पाओगी

मै जानता हूँ सब बदल जायेगा। आज जान हो कल अंजान हो जाओगी। मेरे घर के हर कमरे की मान थी, अब मेहमान कहलाओगी। मै जानता हूँ सब बदल जायेगा, क्या खुद को बदल पाओगी। आज अम्बर धरती झील नदिया सब पूछते है जहाँ कल तक दोनो का नाम दिखाया करती थी, क्या अब उनकी भी खबर रख पाओगी। मै जानता हूँ सब बदल जायेगा, क्या रिश्त



भारतीय संस्कृति का प्रतीक हिमालय

संस्कृत साहित्य में हिमालय- भारतीयसंस्कृति का प्रतीककुछदिवस पूर्व “हिमालय - अदम्य साधना की सिद्धि का प्रतीक” शीर्षक से एक लेख सुधीजनोंके समक्ष प्रस्तुत किया था | आप सभी से प्राप्त प्रोत्साहन के कारण आज उसी लेख कोकुछ विस्तार देने का प्रयास रहे हैं जिसका भाव यही है कि ह



कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने की जरुरत है - अनिल विश्वकर्मा

कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने की जरुरत है - अनिल विश्वकर्मा मुम्बई - प्रेमा देवी एजुकेशनल ट्रस्ट के चेयरमैन अनिल विश्वकर्मा पिछले कई वर्षो से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे है अपनी संस्था के माध्यम से वह नालासोपारा और पालघर जिले के अंतर्गत आने वाले सभी स्लम में अपनी संस्था '' प्रेमा देवी एजुकेशनल ट्र



प्राचीन विदेशी यात्री

अल बेरुनी प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप में ज्ञान, विज्ञान, व्यापार, धर्म और अध्यात्म का बहुत विकास हुआ. इस विकास की ख़बरें मौखिक रूप में व्यापारियों के माध्यम से फारस, ग्रीस, रोम तक पहुँच जाती थी. इसकी वजह से व्यापारी, पर्यटक, बौद्ध भिक्खु तो आते ही थे बहुत से हमलावर



यादों की ज़ंजीर

यादों की ज़ंजीर(जीवन के रंग) रात्रि का दूसरा प्रहर बीत चुका था, किन्तु विभु आँखें बंद किये करवटें बदलता रहा। एकाकी जीवन में वर्षों के कठोर श्रम,असाध्य रोग और अपनों के तिरस्कार ने उसकी खुशियों पर वर्षों पूर्व वक्र-दृष्टि क्या डाली कि वह पुनः इस दर्द से उभर नहीं सका है। फ़िर भी इन बुझी हुई आशाओं,टूटे



अदम्य साधना की सिद्धि का प्रतीक हिमालय

हिमालय - अदम्य साधनाकी सिद्धि का प्रतीक आज देश भर में एक ही विषय पर सब लोग बात कर रहे हैं –सुशान्त सिंह मर्डर केस और कँगना रनौत तथा महाराष्ट्र सरकार के बीच वाद विवाद |सारे समाचार पत्रों और सारे न्यूज़ चैनल्स के पास केवल यही दो विषय अधिकाँश में रहगए हैं ऐसा जान पड़ता है | इन समाचारों को देखते सुनते पढ़त



समाज और देश के उत्थान में युवाओं की भूमिका

समाज और देश के उत्थान में युवाओं की भूमिकासमाज और देश के उत्थान में युवाओं की अहम भूमिका होती है। मैं युवाओं की बात को स्वामी विवेकानंद जी के उन विचारों के माध्यम से शुरू कर रहा हूँ जिनमें युवाओं को विशेष रूप से संबोधित किया गया है। स्वामीजी की मान्यता है कि भारतवर्ष का नवनिर्माण शारीरिक शक्ति से न



हिंदी अध्यापक संघ द्वारा आयोजित 'शिक्षक दिवस समारोह'

कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ द्वारा आयोजित 'शिक्षक दिवस समारोह'कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ मुंबई विभाग द्वारा ऑनलाइन वेबिनार के माध्यम से आयोजित 'शिक्षक दिवस समारोह' दिनांक 8 सितंबर, 2020 को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के दिन ही 'शिक्षक दिवस समारोह' का आयोजन



अधिक मास

पुरुषोत्तममास अथवा अधिक मास आज पितृपक्ष की पञ्चमी तिथि है | 17 सितम्बर को पितृविसर्जनी अमावस्याहै | हर वर्ष महालया से दूसरे दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रआरम्भ हो जाते हैं | किन्तु इस वर्ष ऐसा नहीं हो रहा है | इस वर्ष आश्विन मास मेंमल मास यानी अधिक मास हो रहा है | अर्थात 18 सितम्बर



इश्क़ में बहने लगा

वो मुझे कहने लगातेरे इश्क़ में बहने लगावक़्त की बात है फिर तुझसे हुई मुलाक़ात हैंकर लेंगे हम आहिस्ता आहिस्ता तुझ पर भी भरोसा अब जो उसका आश खोने लगाहम है तेरे लिए बेशक ग़ैर हैमगर हमें तो आज भी भरोसा है जैसे चाँद को तारों से इश्क़ होने लगा



शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवसकल पाँच सितम्बर है – शिक्षकदिवस से सम्बन्धित बैठकों, काव्य सन्ध्याओं, साहित्यसन्ध्याओं और अन्य प्रकार के कार्यक्रम आरम्भ हो चुके हैं | सर्वप्रथम सभी कोशिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ...जीवन में प्रगति पथ परअग्रसर होने और सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा के महत्त्व से कोई भी इन्कारनहीं कर सकता,



फेरीवाला

फेरीवाला **********(जीवन के रंग) वही अनबुझी-सी उदासी फिर से उसके मन पर छाने लगी थी। न मालूम कैसे यह उसके जीवन का हिस्सा बन गयी है कि दिन डूबते ही सताने चली आती है। बेचैनी बढ़ने पर मुसाफ़िरख़ाने से बाहर निकल वह भुनभुनाता है-- किस मनहूस घड़ी में उसका नाम रजनीश रख दिया गया है ,जबकि उसके खुद की ज़िदगी म



असहिष्णुता....

असहिष्णुता….मनुष्य के जीवन में उसके व्यक्तित्व और सोच-विचार पर खान-पान व रहन-सहन का बहुत असर पड़ता है। कहा जाता है जैसा खान-पान, वैसा अचार-विचार। अर्थात सादा जीवन, सादा भोजन - उच्च विचार। जिस तरह से फसल को समय-समय से सींचा जाता है, खाद-पानी दिया जाता है तो उसका समुचित विकास होता है। जिसका उचित देखभाल



श्राद्ध पक्ष में पाँच ग्रास निकालने का महत्त्व

श्राद्ध पक्ष में पाँच ग्रास निकालने का महत्त्वश्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ - जोश्रद्धापूर्वक किया जाए वह श्राद्ध है | यद्यपि इस वाक्य की व्याख्या बहुत विशद हो सकतीहै – क्योंकि श्रद्धा तो किसी भी के प्रति हो सकती है | किन्तु यहाँ हम श्राद्धपक्ष के सन्दर्भ में बात कर रहे हैं कि अपने दिवंगत पूर्वजों के निमि



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