'दादी' के आते ही घर-आंगन से रूठा वसंत लौट आया ...

हम चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे निचले वाले माले में रहते हैं। यूँ तो सरकारी मकानों में सबसे निचले वाले घर की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वाले लागों के जब-तब घर-भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते कूड़ेदान सी बनी रहती है, फिर भी यहाँ एक सुकून वाली बात जरूर है कि बागवानी के लिए पर्याप्त जगह न



अटल बिहारी वाजपेयी बनने की राह पर मुलायम

- संजय अमान भारत का ईतिहास गवाह है सत्ता के लिए किसी भी हद तक चले जाना राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा ही नहीं ज़रूरत भी होता है परन्तु इनसब से ऊपर राष्ट्र हीत की चिंता बहुत ही कम राजनीतिज्ञों को करते हुए देखा गया है वर्त्तमान में यही दृश्य देखने को मिलता है। अब वह दिन नहीं रहे या सिर्फ क़िताबों में या पु



Valentine Day 2019: कपड़ों के रंग से जानें इंगेज्ड, सिंगल आदि रिलेशनशिप स्टेटस

वेलेन्टाइन डे के दिन यदि आप कॉलेज़, ऑफिस या बाहर जाने के लिए सोच रहे हैं तो जरा अपने आउटफिट्स के रंग पर गौर कर लें क्योंकि इस दिन पहने जाने वाले कलर्स आपका रिलेशनशिप स्टेटस बताते हैं कि आप इंगेज़्ड हैं या सिंगल ? साथ ही इस वेलेन्टाइन डे पर आपको एक ऐसी ट्रिक बतायेंगे जिससे



दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच

आप चाहे गांव या कस्बे के मध्यवर्गीय परिवार के पढ़े-लिखे व्यक्ति हों अथवा महानगर के किसी संपन्न कुलीन परिवार के सदस्य हों या फिर सामान्य आर्थिक स्तर के कोई अधिकारी अथवा व्यापारी, इस सत्य को मन-ही-मन स्वीकार कर लें कि दाम्पत्य जीवन की सफलत



कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था। नार्थ ईस्ट का राज्य नागालैंड विकास के पथ पर

कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था। नार्थ ईस्ट का राज्य नागालैंड विकास के पथ पर - संजय अमानज्यो -ज्यो लोकसभा चुनाव के दिन नजदीक आते जा रहे है चुनावी सरगर्मिया बढ़ती जा रही है तरह -तरह के आरोप राजनीतिक पार्टिया एक दूसरे पर लगा रही है यैसे मे



चुनाव 2019

चुनाव-2019विजय कुमार तिवारीहम वोट देने वाले हैं।वोट देना हमारा अधिकार है और कर्तव्य भी।यह बहुत संयम, धैर्य और विचार का विषय है।आज से पहले शायद कभी भी हमने इस तरह नहीं सोचा।चुनाव आयोग और हमारे संविधान ने इस विषय में बहुत से दिशा-निर्देश जारी किये हैं।हम सभी सामान्य वोटर को बहुत कुछ पता भी नहीं है।कई



अपनी प्रतिभा को कैसे पहचानें, यह आपकी रचनात्मकता को बढ़ाने में कैसे सहायक है?

प्राणी जगत में सभी लोग एक जैसे गुण वाले नहीं होते हैं। सभी की कुछ ना कुछ अलग विशेषता होती है, जो उन्हें एक दूसरे से अलग करती है। ठीक उसी तरह सभी लोगों में कुछ विशेष प्रतिभा होती है। इसी प्रतिभा विशेष को पहचानकर और इसे अपने जीवन शैली में शामिल कर कुछ लोग अपने कार्य क्षेत्र



प्रेम का मौसम

प्रेम का मौसमविजय कुमार तिवारीप्रेम का मौसम चल रहा है और बहुत से युवा,वयस्क और स्वयं को जवान मानने वाले वृद्ध खूब मस्ती में हैं।इनकी व्यस्तता देखते बनती है और इनकी दुनिया में खूब भाग-दौड़ है।प्रयास यही है कि कुछ छूट न जाय और दिल के भीतर की बातें सही ढंग से उस दिल तक पहुँच



पुरानी यादे

पुरानी यादेंविजय कुमार तिवारी1983 में 4 सितम्बर को लिखा-डायरी मेरे हाथ में है और कुछ लिखने का मन हो रहा है। आज का दिन लगभग अच्छा ही गुजरा है।ऐसी बहुत सी बातें हैं जो मुझे खुश भी करना चाहती हैं और कुछ त्रस्त भी।जब भी हमारी सक्रियता कम होगी,हम चौकन्ना नहीं होंगे तो निश्चित मानिये-हमारी हानि होगी।जब हम



अन्तर्यात्रा का रहस्य

अन्तर्यात्रा का रहस्यविजय कुमार तिवारीकर सको तो प्रेम करो।यही एक मार्ग है जिससे हमारा संसार भी सुव्यवस्थित होता है और परमार्थ भी।संसार के सारे झमेले रहेंगे।हमें स्वयं उससे निकलने का तरीका खोजना होगा।किसी का दिल हम भी दुखाये होंगे और कोई हमारा।हम तब उतना सावधान नहीं होते जब हम किसी के दुखी होने का का



भूख की आग…………

बहुत पहले की बात है किसी राज्य मे एक राजा रहता था ! राजा बहुत ही बहादुर,पराकर्मी होने के साथ-साथ घमंडी और दुष्ट प्रवृति का भी था ! उसने बहुत से राजाओं को हराकर उनके राज्य पर कब्जा कर लिया ! उसके बहादुरी और दुष्टता के किस्से दूर-दूर तक फैला हुआ था ! वो किसी भी साधु-महात्मा



वो बूढ़ी औरत…..

रोज सुबह ड्यूटी पे जाना रोज शाम लौट के रूम पे आना,ये रूटीन सा बन गया था, मोहन के लिये ! हालाँकि रूम से फैक्ट्री ज़्यादा दूर नहीं था, तकरीबन१०-१५ मिनट का रास्ता है ! मोहन उत्तर प्रदेश का रहने वाला है,करीब २ सालों से यहाँ (नोएडा) मे एक प्राइवेट फैक्ट्री मे काम कर रहा है ! र



"9:45 की लोकल"

ऑटो स्टैंड से दौड़ता हुआ , मैं जैसे ही रेलवे स्टेशन पहुँचा, पता चला 9:45 की लोकल जा चुकी है !मेरे घर से तकरीबन 9 .कि.मि. दूर पर है रेलवे स्टेशन, छोटा सा स्टेशन है,लोकल ट्रेन के अलावा 1-2 एक्शप्रेस ट्रेन की भी स्टोपीज़ है, मैं स्टेशन मास्टर के पास गया और पूछा सर बनारस के लिए कोई ट्रेन है ! स्टेशन मास



"9:45 की लोकल"

ऑटो स्टैंड से दौड़ता हुआ , मैं जैसे ही रेलवे स्टेशन पहुँचा, पता चला 9:45 की लोकल जा चुकी है !मेरे घर से तकरीबन 9 .कि.मि. दूर पर है रेलवे स्टेशन, छोटा सा स्टेशन है,लोकल ट्रेन के अलावा 1-2 एक्शप्रेस ट्रेन की भी स्टोपीज़ है, मैं स्टेशन मास्टर के पास गया और पूछा सर बनारस के लिए कोई ट्रेन है ! स्ट



जीवन का अनमोल "अवॉर्ड "

" नववर्ष मंगलमय हो " " हमारा देश और समज नशामुक्त हो " नशा जो सुरसा बन हमारी युवा पीढ़ी को निगले जा रहा है ,



जीवन की वो तीन चीजें जो आपको रूकने नहीं देती

इंटरव्यू में आपसे एक सामान्य सवाल पूछा जाता है कि अन्य लोगों में आप सबसे महत्वपूर्ण बात क्या देखते हैं? जिसका सामान्य तौर पर उत्तर आता है: चरित्र विशेषता। इस सवाल का जवाब ईमानदारी, हास्य, आत्मविश्वास, करिश्मा आदि भी हो सकता है।इस लेख में ऐस



जीवन का उद्देश्य खुशी है या इसका उपयोगी होना?

बहुत सारे लोगों का मानना ​​है कि जीवन का मात्र एक ही उद्देश्य है और वो है खुश रहना। क्योंकि सभी लोग दर्द और कठिनाई से गुजरते हैं और सोचते हैं किसी भी तरह से खुशी हासिल करना है। वास्तव में, यदि आप अपने चारों ओर देखते हैं, तो पाते हैं कि अधिकांश लोग अपने जीवन में खुशियों का



भावनात्मक कौशल

निहित स्वार्थ वाले लोग किसी विश्वास को बनाने या कायम रखने के लिए एक ऐसा आवरण बनाते हैं, जिससे आप महसूस करते हैं कि किसी खास खास वस्तु या सेवा से आपके जीवन में रोचक परिवर्तन आ सकता है। मार्केटर्स हर साल आपको यह समझाने के लिए अरबों डॉलर खर्च करते हैं कि आप उनके इंडस्ट्री का



"ज़िंदगी का सबक सिखाता " - दिसम्बर और जनवरी का महीना

एक और साल अपने नियत अवधि को समाप्त कर जाने को है और एक नया साल दस्तक दे रहा है। बस, एक रात और कैलेंडर पर तारीखे बदल जायेगी। दिसम्बर और जनवरी महीने की कुछ अलग ही खासियत होती है। कहने को तो ये भी दो महीने ही तो है पर साल के सारे महीनो को बंधे रखते है। दोस



लेख, "वृद्धाश्रम की उपयोगिता: क्यों : कारण और निदान"

लेख, "वृद्धाश्रम की उपयोगिता: क्यों : कारण और निदान"भारतीय परिवेश और भारतीयता अपने दायित्व का निर्वहन करना बखूबी जानती है। जहाँ तक आश्रमों की बात है अनेकों आश्रम अपने वजूद पर निहित दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं जिसमेँ गृहस्ताश्रम, पथिकाश्रम, शिक्षाश्रम, बाल आश्रम, विधवा आश्रम, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्र



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