प्यार क्या है?

प्यार दो दिलो के बीचका एक गहरा स्नेह है। जो किसी दूसरी चिजो मे ना मिले वो सुखद एहसास है। गंगा की तरह पवित्र, यमुना की तरह सुंदर और हिमालय की तरह विशाल है, जिसे तोड़ना साधारण मानव के बस की बात नही। कुदरत का दिया हुआ वोतोहफा है जिसमे खुदा



हमारे त्यौहार और हमारी मानसिकता

रहम करे अपनी प्रकृति और अपने बच्चो पर , आप से बिनम्र निवेदन है ना मनाया ऐसी दिवाली गैस चैंबर बन चुकी दिल्ली को क्या कोई सरकार ,कानून या धर्म बताएगा कि " हमे पटाखे जलने चाहिए या नहीं?" क्या हमारी बुद्धि और विवेक बिलकुल मर चुकी है ? क्या हममे सोचने- समझने की शक्ति ही नहीं बची जो हम सम



दिमाग को कैसे विकसित करें?

यह लेख मन प्रबंधन कौशल से जुड़ी हुई जानकारियाँ पर आधारित हैं, जो कि आपके ब्रेन पावर को बढ़ाने में सहायक है। इसका उद्देश्य आपके दिमाग को प्रबंधित करने के तरीके में सुधार करना है, ताकि आप अपने दिमाग को विकास के रास्ते पर अधिक शक्तिशाली और सहयो



स्वास्थय

आज के समय मैं बहुत भाग्यवान हैं वो व्यक्ति जो शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण स्वस्थ हों| प्रदूषित वातावरण और आधुनिकीकरण की वजह से कहीं न कहीं हर इंसान पूरी तरह स्वस्थ नहीं है| हालाँकि हम योगा व्यायाम आदि की तरफ फिर से जागरूक हो रहे हैं, पर कितना? क्या व



दिल तो बच्चा है जी

ज़िंदगी हर पल एक चलचित्र की तरह अपना रंग रूप बदलती रहती है।है न , जैसे चलचित्र में एक पल सुख का होता है तो दुसरा पल दुःख का ,फिर अगले ही पल कुछ ऐसा जो हमे अचम्भित कर जाता है और एक पल के लिए हम सोचने पर मजबूर हो जाते है कि "क्या



कद

कद बढ़ा नहीं करते "ऐड़ियां"उठाने से*,*उचाइयां तो मिलती हैं "सर" झुकाने से*



प्रतिभाशाली गधे

आज दिल्ली में गर्मी आपने उफान पे थी। अपनी गाड़ी की सर्विस कराने के लिए मै ओखला सर्विस सेंटर गया था। गाड़ी छोड़ने के बाद वहां से लौटने के लिए ऑटो रिक्शा ढूंढने लगा। थोड़ी ही देर में एक ऑटो रिक्शा वाला मिल गया। मैंने उसे बदरपुर चलने को कहा। उसने कहा ठीक है साब कितना दे दो



भूली बिसरी पाती स्नेह भरी --[ विश्व डाक दिवस ]

विश्व डाक दिवस -- आज विश्व डाक दिवस है | इस दिन के बहाने से चिट्ठियों के उस भूले बिसरे संसार में झाँकने का मन हो आया है ,जो अब गौरवशाली अतीत बन गया है | भारत में राजा रजवाड़ों के समय में संदेशों का आदान - प्रदान विश्वसनीय सन्देशवाहकों के माध्यम से होता था जो पैदल या घोड़ों आदि के माध्यम से



जादूगर

एक होता है जादूगर और दूसरा जादू। हाँ तुम जादू हो जादू। कुछ भी इतना ख़ास पहले नहीं था जितना तुमसे बतियाने के बाद। तुमसे बातें करने पर ऐसा होता था जैसे ख़ुद को ही ख़ुद की ही बातें समझानी हो। पता है, तुम वो जादू हो जो दुनिया के सारे जादूगर सीखना चाहते हैं, पाना चाहते हैं पर सबके बस का नहीं है ये। तुमको



परिवार

जहां सूर्य की किरण हो वहीं प्रकाश होता है जहां भगवान के दर्शन हो वहीं भव पर होता है जहां संतो के वाणी हो वही उद्धार होता है जहां प्रेम की भाषा हो वहीं परिवार होता है



कामयाबी

जितना बड़ा सपना होगा उतनी बड़ी तकलीफ होगी और जितनी बड़ी तकलीफ होगी उतनी बड़ी कामयाबी होगी



पन्नों पर भी पहरे हैं

पन्नों पर भी पहरे हैं✒️ बैठ चुका हूँ लिखने को कुछ, शब्द दूर ही ठहरे हैं,ज़हन पड़ा है सूना-सूना, पन्नों पर भी पहरे हैं।प्रेम किया वर्णों सेभावों कलम डुबोयासींची संस्कृति अपनीपूरा परिचय बोया,झंकृत अब मानस हैचमक रही है स्याहीपद्य सृजन में ठहराभटका सा एक राही;उभरें नहीं विचार पृष्ठ पर, सोये वे भी गहरे



" बृद्धाआश्रम "बनाम "सेकेण्ड इनिंग होम "

" बृद्धाआश्रम "ये शब्द सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते है। कितना डरावना है ये शब्द और कितनी डरावनी है इस घर यानि "आश्रम" की कल्पना। अपनी भागती दौड़ती ज़िन्दगी में दो पल ढहरे और सोचे, आप भी 60 -65 साल के हो चुके है ,अपनी नौकरी और घर की ज़िम्मेदारियों से आज़ाद हो चुके है। आप के



हमारी प्यारी बेटियाँ

"बेटियाँ "कहते है बेटियाँ लक्ष्मी का रूप होती है ,घर की रौनक होती है। ये बात सतप्रतिस्त सही है। इसमें कोई दो मत नहीं हो सकता कि बेटियाँ ही इस संसार का मूल स्त



आत्मा से आत्मा का मिलान

आत्मा से आत्मा का मिलनविजय कुमार तिवारीभोर में जागने के बाद घर का दरवाजा खोल देना चाहिए। ऐसी धारणा परम्परा से चली आ रही है और हम सभी ऐसा करते हैं। मान्यता है कि भोर-भोर में देव-शक्तियाँ भ्रमण करती हैं और सभी के घरों में सुख-ऐश्वर्य दे जाती हैं। कभी-कभी देवात्मायें नाना र



आत्मा और पुनर्जन्म

आत्मा और पुनर्जन्मविजय कुमार तिवारी यह संसार मरणधर्मा है। जिसने जन्म लिया है,उसे एक न एक दिन मरना होगा। मृत्यु से कोई भी बच नहीं सकता। इसीलिए हर प्राणी मृत्यु से भयभीत रहता है। हमारे धर्मग्रन्थों में सौ वर्षो तक जीने की कामना की गयी है-जीवेम शरदः शतम। ईशोपनिषद में कहा गया है कि अपना कर्म करते हुए मन



परम पूज्य सचिन बाबा का जाना

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महिलाओं के प्रति अपराध

आजकल न्यूज़ पढ़ने और देखने में डर लगता है। न्यूज चैनलस खोलते ही बुरी खबरों की बारिश होने लगती हैं । नियमित आपराधिक खबरोंमें भीड़ द्वारा किसी की हत्या, सीमा पर आतंक वादियों का उत्पात, देश में कहीं न कहीं कोई गैंग रेप । और हर बात पर सरकार और विपक्ष का एकदूसरे पर हमला । और ये सब इतनी नियमितता से हो रहा है



उसने कभी निराश नहीं किया

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प्यासी लोमड़ी



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