आभार शब्दनगरी

आज का दिन एक बार फिर बीती यादों की ओर लिए जा रहा है ।आज ही के तीन साल पहले शब्दनगरी पर टििप्पणी के लिए बनाये गए अकाउंट ने मेरी जिंदगी बदल दी थी। उन सभी पाठकों और सहयोगियों की ऋणी रहूँगी, जिन्होंने मेरी इस शानदार रचना यात्रा में मुझे अतुलनीय सहयोग दिया। आभार...आभार



विवेकानंद के बहाने

विवेकानन्द के बहानेविजय कुमार तिवारीस्वामी विवेकानन्द जी ने उद्घोष किया था,"उठो,जागो और तब तक नहीं रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये।"भारत के उन्हीं महान सपूत की आज जन्म-जयन्ती है।बहुत श्रद्धा पूर्वक याद करते हुए मैं उन्हें नमन करता हूँ।आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है और उनके चरणो में श्रद्धा-सुमन



ईशावास्योपनिषद के आलोक में

ईशावास्योपनिषद के आलोक मेंविजय कुमार तिवारीवेदान्त कहे जाने वाले उपनिषदों ने भारतीय जनमानस को बहुत प्रभावित किया है और हमारी चेतना जागृत की है।आज हमारे युवा पथ-भ्रमित और विध्वंसक हो रहे हैं,उन्हें अपने धर्म-ग्रन्थों विशेष रुप से वेदान्त के रुप में जाना जाने वाले उपनिषदों को पढ़ना और उनका अनुशीलन करन



खबरों से कहां गायब हो गया विकास ?

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ऐतरेय ब्राह्मण का व्याख्यान क्यों?

ब्राह्मण ग्रंथ ही वेद के सर्वाधिक निकट तथा उसे समझने के आधार ग्रंथ है।ऐतरेय ब्राह्मण सभी ब्राह्मण ग्रंथों में पुराना व जटिल ग्रंथ है।ब्राह्मण ग्रंथों के मिथ्या अर्थों के कारण संसार में पशुबलि नरबलि मांसाहार नशा आदि पापों का उदय हुआ और इन पापों के लिए वेदादि शास्त्रों



विचारों का रेला

वास्तव में धन्य हैं हमारे महर्षि गूगलानंद और माइक्रोसॉफ्ट जैसी परम्पराओंसे जुड़े आजकल के महान ऋषि मुनि... बहुत अच्छा लेख डॉ दिनेश शर्मा... विचारों का रैला - दिनेश डॉक्टरधन्य हैं कल युगकी नई ऋषि परंपरा जिसकी कृपा से आज वह भी हो रहा है जिसकी कल्पना भी कभी हमने बचपनमें नहीं की थी। फोन पर हज़ारों मील दूर



पशुओं से बलात्कार : एक मानसिक विकार

अगर मैं कहूं कि बलात्कार एक मानुषिक प्रवृत्ति है तो शायद आप इसे मनुष्य का अपमान समझेंगे। लेकिन अगर आप इसे पाशविक प्रवृत्ति कहेंगे तो यह पशु का अपमान होगा, क्योंकि कोई पशु बलात्कार नहीं करता।नवजातों से, नाबालिगों से, युवतियों से, वृद्धाओं से, यहां तक कि लाशों से बलात्कार की खबरें आती रही हैं। अभी हाल



मानव सेवा माधव सेवा

मानव सेवा ही वास्तविक माधव सेवाआज किन्हीं मित्र ने प्रश्न किया कि मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा क्यों कीजाती है | तो सबसे पहले तो इस शब्द में ही इसका उत्तर निहित है – प्राणों कीप्रतिष्ठा – प्राण फूँकना | कोई भी मूर्ति यदि किसी मन्दिर में रखी जाती है तो उससमय उसकी विधिवत पूजा की जाती है - जो प्राण प्र



छुटभैय्ये नेताओं की खंडित भारतीयता- दिनेश डॉक्टर

डॉ दिनेश शर्मा का वर्तमान विघटनकारी राजनीति पर एक यथार्थवादी लेख... सच्चाई यही है कि सत्ता के लालच मेंछुटभैय्ये नेताओं ने भारतीयता को खंडित खंडित कर ही दिया है... एक बार अवश्यपढ़ें... पढ़ने के लिए क्लिक करें:https://shabd.in/post/111585/-2609589



दिशाहीन छात्र राजनीति

*दिशाहीन छात्र राजनीति*राष्ट्र के रचनात्मक प्रयासों में किसी भी देश के छात्रों का अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान होता है। समाज के एक प्रमुख अंग और एक वर्ग के रूप में वे राष्ट्र की अनिवार्य शक्ति और आवश्यकता हैं। छात्र अपने राष्ट्र के कर्णधार हैं, उसकी आशाओं के सुमन हैं, उसकी आकांक्



प्राकृतिक आपदाएं : कितनी प्राकृतिक, कितनी मानवीय

प्राकृतिक आपदाएं:- कितनी प्राकृतिक कितनी मानवीय सभी आपदा मनुष्य द्वारा उत्पन्न माने जा सकते हैं। क्योंकि कोई भी खतरा विनाश में परिवर्तित हो, इससे पहले मनुष्य उसे रोक सकता है। सभी आपदाएं मानवीय असफलता के परिणाम हैं। मानवीय कार्य से निर्मित आपदा लापरवाही, भूल या व्यवस्था की असफलता मानव-निर्मित आपदा क



पाँव भर जलेबी - डॉ दिनेश शर्मा

डॉ दिनेश शर्मा का एक और नया लेख... पढ़कर समझने का प्रयास अवश्य कीजिए...दरअसल जो सुख हमें किसी वस्तु के द्वारा मिलता है वो असल मेंसुख नही सुविधा है । असली सुख या आनंद दरअसल वो है जो हमें अपने खुद के किये हुएकाम से मिलता है - चाहे वो कुछ अच्छा लिखना हो, या पेंटिंग बनाना , यानृत्य संगीत के द



पथिक! काहे न धीर धरे

पथिक! काहे न धीर धरे( जीवन की पाठशाला )----आत्म उद्बोधन---- ज़िदगी में ग़म है ग़मों में दर्द है दर्द में मज़ा है मज़े में हम है.. वर्ष 2019 का समापन मैं कुछ इसी तरह के अध्यात्मिक चिंतन संग कर रहा हूँ , परंतु ऐसा भी नहीं है कि इस ज्ञानसूत्र से मेरा हृदय आलोकित हो उठा है। असत्य बोल कर क्यों कथन



खीज

डॉ दिनेश शर्मा का लेख - गिरगिट की तरह रंग बदलते राजनेताओं पर एक व्यंग्य... खीज - दिनेश डॉक्टर सामने झक्क सफेद कलफदार कुर्ते पायजामें नेता जी बैठेथे । इंडिया किंग्स की सिगरेट की डब्बी सामने मेज पर पड़ी थी । शाम का वक्त था ।स्कॉच की बोतल आधी हो चुकी थी । वो बोल रहे थे और मैं



Sketches from Life: बुद्ध का मार्ग - 7

दस प्रश्न गौतम बुद्ध अपने उपदेशों के दौरान उठाए गए सवालों का जवाब भी देते थे. सवाल किसी के भी हों शिष्य के, साधू-संत के, व्यापारी के, यात्री के या फिर किसी राजा के. वे सभी को यथा योग्य उत्तर देते थे. फिर भी कुछ प्रश्न ऐसे थे जिनका बुद्ध ने



सब कुछ लुटाके होश में आए तो क्या किया

अभी डॉ दिनेश शर्मा का लेख “सब कुछ लुटाके होशमें आए तो क्या किया...” पढ़ा | डॉ शर्मा ने इस लेख में वाक़ई बहुत सही बात लिखी है...ध्यान से पढ़ेंगे तो बहुत कुछ समझ में आ सकता है... वास्तव में आम आदमी के ज़हन मेंनफ़रतों का ज़हर घोलने वाले लोग हिन्दू या मुसलमान या किसी भी दूसरे मज़हब को माननेवाले लोग तो हो सकते



विश्व में हिंदी का महत्व

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सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना

आज सदी की सबसे खूबसूरत खगोलीय घटना।सूर्यग्रहण।अगर आप अपने बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करना चाहते हैं तो इस सौरमंडल में चन्द्रमा द्वारा सूर्य के प्रकाश को ढकने की घटना को दिखाएं समझाएं । डराए नहीं।भारत में पिछले हजार साल तक विभिन्न तर्क देकर अंधविश्वास और भ



हमें अपने "हिन्दुस्तानी" होने पर गर्व होना चाहिए

हमें अपने “हिन्दुस्तानी”होने पर गर्व होना चाहिए हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमाराकल 25 दिसम्बर की तारीख थी – हमारे ईसाई भाई बहनों के उल्लासमय पर्व क्रिसमस कापर्व | हमने भी और हमारे साथ साथ और भी बहुत से लोगों ने किसी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय से ऊपर उठकर क्रिसमस की शुभकामनाएँ अपने परिचितों को



हानि लाभ, जन्म मृत्यु, मान अपमान , बीमारी दुर्घटना को किसी ग्रहण से मत जोड़ें

डॉ दिनेश शर्माने आज ग्रहण से डरने वालों के लिए बड़ा ही सारगर्भित लेख लिखा है जो हम यहाँप्रस्तुत कर रहे हैं | हम जानते हैं अपने लाभ हानि से डरने वाले लोग ग्रहण केअंधविश्वास से बाहर नहीं निकल सकते । लेकिन विश्वास कीजिये ये खूबसूरत खगोलीय घटनाडरने के लिए नहीं है, बल्कि इसे देखकर इसके सौन्दर्य का सम्मान



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