जीवन में हर कार्य महत्त्वपूर्ण

जीवन में हर कार्य महत्त्वपूर्ण होता है | कोई भी कार्य छोटा या बड़ानहीं होता | किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए योग्यता केसाथ साथ आत्म विश्वास भी अत्यन्त आवश्यक है | और आत्मविश्वासकहीं बाहर से नहीं प्राप्त किया जा सकता | इसे स्वयं ही केप्रयास से अपने भीतर विकसित करना पड़ता है |सफलता प्राप्ति के लिए क



सनातन को गले लगाओ-कोरोना को दूर भगाओ

सामयिक साहित्य____🖊महामारी / पैंडेमिक से बचने के लिये हमारे शास्त्रों में कतिपय (करणीय) निर्देशन उपलब्ध हैं:---मेरे सद् गुरु नियम दिए "सोड्ष विधि", जिसके अंतरगत् 'व्यापक सौच'★ और 'सौच मंजुषा'★★सर्वोपरी हैं।【1】 लवणं व्यञ्जनं चैव घृतं तैलं तथैव च।लेह्यं पेयं च विविधं हस्तदत्तं न भक्षयेत्।।धर्मसिन्ध



Sketches from Life: झाड़ू झाड़न

कोरोना के कीटाणु तूने कहाँ लाके मारा रे!उधर लॉकडाउन की घोषणा हुई इधर हमारी सोसाइटी का मेन गेट भी बंद हो गया. आप बाहर नहीं जाओगे और फलां-फलां अंदर नहीं आएगा. फलां-फलां की लिस्ट में से काम वाली को तो बिलकुल नहीं आने दी जाएगी. इस पर पैंसठ जन्मदिन पार कर चुकी श्रीमती को क्रोध



श्यामा की वापसी

श्यामा नाम था उसका, ठीक उसके श्वेत रंग केविपरीत, हर दिन हमारे घर के सामने आ खड़ी होती। ऐसा उसने करीब 10 दिन तक किया,हमने कहा ये तो अब पराए घर जा चुकी है फिर यहां क्यों आती है तो घर वालों ने कहाकि ये गाय है इंसान नहीं जो किसी को इतनी जल्दी भूल जाए, भूलना तो इंसानी फ़ितरतहै



देवाधिदेव

★★★★★देवाधिदेव ★★★★★"परम पुरुष" के बाहर कुछ भी नहीं।वे हीं देव हैं जो ब्रह्माण्डीय कार्यकीके कारण हैं। ब्रह्म रंध्र वा विश्व नाभिसे उत्सर्जित अभिव्यक्त महापँचभूत तरंगें हीं देवता हैं जो देव स्वरूपपरम पुरुष की सृष्टि नियंत्रित करते हैं।यहीं महाशक्ति ब्रह्माण्ड के अनवरतताण्डव का कारण है जिसक



डा नन्द किशोर नवल जी की यादें

डा0 नन्द किशोर नवल जी की यादेंविजय कुमार तिवारीपरमादरणीय मित्र,प्रख्यात आलोचक और साहित्यकार डा.नन्द किशोर नवल जी नहीं रहे।मेरा तबादला धनबाद से पटना हुआ था।9अप्रैल 1984 की शाम में बी,एम.दास रोड स्थित मैत्री-शान्ति भवन में प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से"राहुल सांकृत्यायन-जयन्ती"का आयोजन था।भाई अरुण कमल,ड



*****नागरिक एकजुटता से ही हारेगी महामारी *****

आज कोरोना आपदा वैश्विक आधार ले चुकी है। दुनिया भर में मौतों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। शक्तिशाली देश इस वायरस के आगे लाचार दिखते हैं। आगे क्या होगा, यह कहना बहुत कठिन है कोरोना ने मानव के विकास की पांच मौलिक आवश्यकताओं - स्वास्थ्य, शिक्षा, सुपोषण, सम्पोषण एवं संप्रेषण को एकदम ठप कर दिया है



टूटी सौंगध

“खाओ मेरी कसम ना शराब को हाथ लगाओगे ना किसी लड़की के चक्कर में पड़ोगे जब तक तुम्हारी पढ़ाई पूरी ना होगी और मुझसे कुछ भी ना छिपाओगे” अपूर्व को बार बार अपनी मां की सौगंध याद आ रही थी, जब वो नाशिक से पुणे पहुंचा था इकोनॉमिक्स की पढ़ाई करने, ग



वासना गद्दारो और नशेड़ियों का देश

वासना,गद्दारों और नशेड़ियों से भरा देशविजय कुमार तिवारीवासना,गद्दारी या नशे में डूबे रहना यह सब मनुष्य के अधःपतन का द्योतक है और आज की स्थिति देखकर लगता है कि हमारे देश में बहुतायत ऐसे ही लोग हैं।मैं मानता हूँ कि हमे निराश नहीं होना चाहिए परन्तु ये परिदृश्य कोई दूसरी कहानी तो नहीं कह रहे।कल देश में



पूर्ण मनोयोग से किया गया कर्म सफलता की कुँजी

पूर्ण मनोयोग सेकिया गया कर्म सफलता की कुँजीजो व्यक्ति अपने कार्य को पूरी निष्ठा औरगम्भीरता के साथ पूर्ण करता है वह कभी भी असफल नहीं होता, ऐसे लोग सम्मान के पात्र होते हैं | कार्य के प्रतिनिष्ठा और गम्भीरता के साथ यदि विनम्रता और सरलता जैसे गुण भी मिल जाएँ तब तो जैसेसोने पे सुहागा |विनम्रता एक ऐसा गु



पुराने खंडहर का सच

माधव और अजीत नाम केदो भाई अर्जुननगर नाम के गांव में रहते थे। दोनों भाईयों में काफी प्यार था वोदोनों गेंहू का व्यापार किया करते थे, उनके खेतों में उगाया गया गेंहू दूर दूर तकमशहूर था लेकिन अभी भी वो दोनों मध्यवर्गीय स्थिती में ही थे और सोचा करते थे किखेतों में दिन रात पसीना



करारा जवाब

शीला देखने में काफी सुंदर है, बड़ी बड़ी आंखे,घुंघराले बाल और दूध सी दमकती त्वचा और साथ गुणवंती भी थी, उसके ससुर को वो देखतेही भा गई तो उसने अपनी बेटे मनोज का रिश्ता उसके साथ तय कर दिया, मनोज टॉप केकॉलेज से पढ़ा लिखा था और सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करना पसंद करता था, तो वहीशीला संस्कृत में एम ए पास थ



शीतयुद्ध का आग़ाज़

महाशक्तियों में टकराव :शीतयुद्ध की शुरुआतआज पुरा विश्व कोरोना वायरस जेसी महामारी से जुँझ रहा हे इसी बीच दो महाशक्तियों के बीच टकराव अमेरिका ओर चाइना के बिछदिनो दिन बढ़ते जा रहे हे । जेसा की सर्वविविध हे नोवल कोविड-19 चीन के वुहान शहर से अपने प्रकोप की शुरुआत की थी ओर आज ये पूरे विश्व में अपने पेरपसा



हमारी शादी की सैंतीसवी वर्षगाठ

हमारी शादी की सैंतीसवीं वर्षगांठविजय कुमार तिवारीआज 27 अप्रैल को हम अपनी शादी की सैंतीसवीं वर्षगांठ मना रहे हैं और सम्पूर्ण मानवता को बताना चाहते हैं कि परमात्मा के आशीर्वाद से,विगत सैंतीस वर्षों से चला आ रहा हमारा अटूट सम्बन्ध पूर्णतः उर्जावान और मधुर प्रेम से भरा हुआ है।आप सभी सुहृदजनों,सखा-सम्बन



महिलाओं को सॉफ्ट टारगेट बनाना छोड़िए....

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Sketches from Life: बैंक की छुट्टी कब होती है

बैंक की छुट्टी कब होती है भारत विविधताओं से भरा देश है और उसी तरह यहाँ बैंकों की विविधता भी कम नहीं है. केन्द्रीय बैंक - रिज़र्व बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ग्रामीण बैंक, प्राइवेट बैंक, लोकल एरिया बैंक, स्माल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और स



Sketches from Life: गिनती 108 की

गिनती 108 की 108 का आंकड़ा बड़ा रोचक और रहस्यमयी आंकड़ा है. इसे गणित में और बहुत सी धार्मिक मान्यताओं में काफी इस्तेमाल किया जाता है. जपने वाली माला ही लीजिये जिसमें 108 मनके होते हैं. इस तरह की माला हिन्दू, जैन, तिब्बती बौद्ध और जापान के ज़ेन बौद्ध के बहुत से अनुयायी इस्तेमा



Sketches from Life: समय

समय के बारे में सुनते रहते हैं कि समय बड़ा कीमती है. ये भी सुनते हैं कि समय पलट कर वापिस नहीं आता है. मतलब हम गुज़रे समय में वापिस नहीं जा सकते और आने वाले समय का भी पता नहीं भी केवल इन्तेज़ार ही कर सकते हैं. तो क्या केवल वर्तमान ही हमें समय उपलब्ध है ?प्राचीन समय से ही ऋषि,



विपत्ति में ही

विपत्ति में हीविजय कुमार तिवारीप्राचीन मुहावरा है,"विपत्ति में ही अच्छे-बुरे की पहचान होती है।"मानवता के सामने सबसे भयावह और संहारक परिस्थिति खड़ी हुई है।पूरी दुनिया बेबस और लाचार है।हमारे विकास के सारे तन्त्र धरे के धरे रह गये हैं।कुछ भी काम नहीं आ रहा है।स्थिति तो यह हो गयी है कि जो जितना विकसित ह



कोरोना से डेराने हैं।

कोरोना से डेराने हैं।अभी लेखक सभी हेराने हैं ... कही लिखते मिले तो भईया हमे बता दइयों। कोरोना मे अपने वजूद को भुलाने हैं।खोकर मीडिया के हो-हल्ला मे, सामाज को रचने वाले शब्द हेराने हैं... कवि, ब्यंग, शायर, गजल सभी बौराने हैं,खोज-खाज राजनीति के चुटकले उन्हे नही फैलाने हैं।सच कहने व लिखने से लेखक भी



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