सेल्फी - खुद को देखने का नया तरीका

पुराने जमाने में राजा राजवाडे  किसी चित्रकार    से अपनी तस्वीरें  बनवाया करते थे l फिर  कैमरे आए , तस्वीरें  चित्रकार की जगह कैमरे  बनाने लगी, तब भी कोई अगर आपकी फोटो खींचता था ,तब जाकर आपको आपकी तस्वीर  मिल पाती थी । पर अब जमाना बदल चुका है । आज इस 21वी सदी में  जहाँ इंसान को हर तरह की आज़ादी देने क



जीवनएक अमूल्य धरोहर हैं

 जिंदगी तमाम अजब - अनूठे कारनामों से भरी हैं .ईन्सान अपनी तमाम भरपूर कोशिशों के बाबजूद भी उस पर सवार होकर अपनी मनमर्जी से जिन्दगीं नहीं जी पाता .वह अपनी ईच्छानुसार मोडकर उस पर सवारी नहीं कर सकता .क्योकि जिन्दगीं कुदरत का एक घोडा हैं अर्थात जिन्दगीं की लगाम कुदरत के हाथों में हैं जिस पर उसके सिवाय कि



तुलना

आज का सुवचन 



तराजू सम जीवन

म्हारा जीवन तराजू समान हैं जिसमें सुख और दुःख रूपी दो पल्लें हैं और डंडी जीवन को बोझ उठाने वाली सीमा पट्टी हें .काँटा जीवन चक्र के घटने वाले समयों का हिजाफा देता हैं .सुख दुःख के किसी भी पल्ले का बोझ कम या अधिक होनें पर कांटा डगमगाने लगता हैं सुख दुःख रूपी पल्लों की जुडी लारियां उसके किय कर्मो की सू



कसूरवार कौन ?

बात तब की है जब मै सिर्फ १२ साल का था | मै अपने जन्म स्थान, उत्तरप्रदेश के भदोही जिले में अपने माता-पिता के साथ रहता था | वही भदोही जो अपने कालीन निर्यात के लिए विश्व विख्यात है | मेरा परिवार एक संयुक्त परिवार है, जहाँ मेरे दादाजी अपने दो भाइयों और उनके पुरे परिवार के साथ रहते है | और मै खुद को इसील



जीत-हार दोनों अच्छे

आज का सुवचन 



यादो का घर !

मोबाइल पर नेट ऑन करते ही 'व्हाट्सएप ' पर एक मैसेज आया I''राहुल पाण्डेय ' तु चंद दिनों के दोस्तों को बर्थ डे विश कर रहा है Iलेकिन बचपन के दोस्त का जन्मदिन याद नहीं ''पहले तो मै चिंहुक गया के कौन है ये ? फिर देखा तो मेरे बचपन का सहपाठी था Iमैंने समझाया 'अरे भाई मै किसी के जन्मदिन याद थोड़े ही रखता हु ,



जिन्दगी का गडित

जिंदगी गडित के एक सवाल की तरह हैं जिसमें सम विषम संख्यायों की तरह सुलझें - अनसुलझें साल हैं .हमारी दुनियां वृत की तरह गोल हैं जिस पर हम परिधि की तरह गोल गोल घूमतें रहते हैं .आपसी अंतर भेद को व् जीवन में आपसी सामंजस्य बिठाने के लिए  कभी हम जोड़ - वाकी करते हैं तो कभी हम गुणा भाग करते हैं .लेकिन फिर भी



रचनात्मकता

व्यक्ति की रचनात्मक प्रवृत्ति तब अधिक निखर कर आती है जब वह मुक्त होकर सोचता है। मुक्त सोच के अनुसार कुछ नया करने का प्रयास करने पर भी रचनात्मकता आती है। अपनी मुक्त सोच को अपनी रचनात्मक रुचि के अनुसार विकसित करें। ऐसा करने से आपके कार्य में नवीनता होगी और लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करने में भी 



विश्वास

जब व्यक्ति का अपनी सोच और उसे पूर्ण करने का पूर्ण विश्वास होता है तो वह अवश्य सफल होता है। प्रत्येक प्रयास सफल होने की सीख देता है और आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है। विश्वास से ही परिश्रम करने का साहस मिलता है और सफलता प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। विश्वास जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है



समय

आज का सुवचन 



मेरा घर

जैसा की मैंने आपको बताया, मेरा जन्म भदोही जिले के एक छोटे से गांव मोहनपुर में हुआ, जो बहुत ही सुंदर और प्रकृति से भरा है। मेरे गाँव की भौगोलिक संरचना कुछ ऐसी है की यह भदोही और इलाहबाद जिले के बिच में है | इलाहाबाद कुछ ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। यह जगह प्रयाग कुंभ मेला और कई  अन्य सांस्कृतिक विरास



मेरे दादाजी

मेरा पूरा गाँव मेरे परीवार के प्रत्येक सदस्य को सम्मान की दृष्टी से देखता था, अभी भी वह सम्मान बरकरार है या नहीं यह कहना थोड़ा मुश्किल है | लेकिन जो सम्मान मुझे भी मिलता आया है उसे मै अपनी बड़ी उपलब्धी मानता आया हूँ, (संभवतः अब यह भ्रम टूट गया है)| गाँव में सभी अपनो से बड़ो या छोटो को भी जिन्हें सम्मान



सफलता-असफलता

आज का सुवचन 



मेरा परिवार

आज बात करूंगा परिवार के कुछ सदस्यों के बारे में जिन्हें मै चाहकर भी भुला नहीं सकता मेरा परिवार जिसमे मै भारत देश की एकता और अखंडता को वीद्दमान पाता हूँ, मेरा परिवार एक संयुक्त परिवार है जो भारत में ख़त्म होने की कगार पर है, और मै भारत वर्ष के लोगो से इसके संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान करता हूँ | मेर



शब्‍द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 25

1. प्रेय/प्रेयस              क-अत्यधिक प्रिय              ख-प्रेम              ग-शत्रु                2. प्रोत्साहक         क-प्रेरणा           ख-उत्साह देने वाला            ग-उमंग              3. बड़का          क-सबसे बड़ा           ख-बहिन              ग-लड़का               4. बड़प्पन             



पवित्रता

तन की पवित्रता से अधिक मन की पवित्रता महत्त्वपूर्ण है। जो तन से पवित्र होते हैं और मन मैला होता है वे कुटिल होते हैं नाकि पवित्र। तन की पवित्रता स्वास्थ्यवर्धक है जबकि मन की पवित्रता परमार्थवर्धक है। दुःख में काम आने वाला मन से पवित्र होता है। जो दूजों के दुःख में काम नहीं आता है वह कभी मन से पवित



अच्छी आदत

आज का सुवचन 



मेरा गाँव

मेरा गाँव मोहनपुर, कालीन नगरी भदोही जनपद का एक छोटा सा गाँव है, क्षेत्रफल की दृष्टी से यह बड़ा तो नहीं है, लेकिन जनसँख्या की दृष्टी से बड़ा है | लेकिन अब नहीं रहा क्योकी आधी से ज्यादा आबादी तो रोजगार की आशा में मुंबई जैसे महानगरो की और पलायन कर चुका है | गाँव के बीचोबीच ही सारी आबादी बसी हुई है और चार



शब्‍द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 24

1. चौबारा            क-खिड़की             ख-दरवाजा             ग-चहुं ओर खिड़की दरवाजे वाला कमरा               2. चौरा        क-चार दिशाएं          ख-चबूतरा           ग-चोर             3. चौर्योन्‍माद         क-चोरी करने का चस्‍का          ख-चोर             ग-दस्‍यु              4. च्‍युति          



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