मेदार क पर्यावरणपर्यावरण पर्यावरण अर्सलन के लिए ज़िम्मेदार कौन

हमारे देश में बढ़ता पर्यावरण आसनसोल वास्तव में ग्रामीण और नगर वासियों की एक दूसरे की परवाह न कर के प्राकृतिक दोहन जिम्मेदार है एक तरफ शहरों में मशीनीकरण के नाम पर ढूंगा और तापमान लगातार बढ़ रहा है जबकि अनियंत्रित औद्योगिकीकरण पर्यावरण असंतुलन को पैदा करता है लेकिन शहरों के उद्योगपति सोचते हैं कि



एक चिट्ठी ,भाई के नाम

भाई तुम्हे याद है जब तुम महज 11 साल के थे और मैं 13 साल की ा तुम बहूत बीमार थे ा तुम्हारा ऑपरेशन हुआ था ा ऑपरेशन के बाद मैं तुम्हे देखने तुम्हारे वार्ड में गयी ा उस टाइम पर भी तुम पर दवाइओं का असर था और तुम ढंग से होश में नहीं आये थे ा मैं तुम्हे देखकर वार्ड से बाहर आ रही थी तो तुमने कसकर मेरा ह



सावन के महीने का महत्व

सावन का नाम ध्यान में आते ही बरसात के 80 महीने की छवि उभरती है जिसमें बरसात की छोटी-छोटी बूंदें रिमझिम करती हुई साकार होती है सावन मानसून के मई मौसम का दूसरा महीना है इसलिए इस महीने में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आती है इसलिए इस पूरे महीने में त्यौहार मनाए जाते हैं सनातन धर्म में भगवान शि



रक्षाबंधन -" कमजोर धागे का मजबूत बंधन "

सावन का रिमझिम महीना हिन्दुओ के लिए पवन महीना होता है। आखिर हो भी क्यों न ये देवो के देव महादेव का महीना जो होता है। और इसी महीने के आखिरी दिन यानि पूर्णिमा को रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाता है। रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम को अभिवयक्त करने का एक जश्न है। जिसे आम बोल चाल में राखी कहते है। सुबह सुबह



महिला जागरूकता

आधुनिक समय में महिला जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है एक समय था जब महिलाएं अपने किसी भी प्रकार के फैसले को लेने के लिए अपने परिवार और संरक्षण पर निर्भर थी आज वह सभी प्रकार के फैसले खुद ले रही हैं शिक्षा में भी वह पुरुषों से आगे ही हैं आधुनिक युग में महिलाओं का हर क्षेत्र में दखल है वह सामान्य



महिलाएं बनाम स्वतंत्रता



सावन की सुहानी यादें -- लेख -

सावन के महीने का हम महिलाओं के लिए विशेष महत्व होता है | फागुन के बाद ये दूसरा महीना है जिसमे हर शादीशुदा नारी को मायका याद ना आये .ये हो नहीं सकता | मायके से बेटियों का जुड़ाव सनातन है | मायके के आंगन की यादें कभी मन से ओझल नहीं होती | भारत में प्रायः हर जगह



प्रणाम का महत्व



स्वतंत्रता दिवस -" एक त्यौहार "

15 ऑगस्त " स्वतंत्रता दिवस " यानि हमारी आज़ादी का दिन .हां ,सालो गुलामी का दंस झेलने के बाद ,लाखो लोगो के कुर्बानियो के फ़लस्वरुप हमे ये दिन देखने नसीब हुए .हम हिन्दुस्तानियो के लिए हर त्यौहार से बड़ा सबसे पवन त्यौहार है ये . यकीनन होली, दिवाली



भारतीय उच्च शिक्षा की समस्याएं

जब टाइम्स हायर एजुकेशन( जो लगभग 1,000 वैश्विक संस्थानों को रेट करती है) ने मई में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग जारी की थी तो इसमें एक भी भारतीय संस्थान शीर्ष 100 में शामिल नहीं थी, हालांकि भारतीय विज्ञान संस्



एम करुणानिधि- तमिलनाडु की राजनीति का एक बड़ा चेहरा

करुणानिधि का जन्म 3 जून, 1924 को थिरुक्कुलाई में हुआ था, जिनका प्रारम्भिक नाम दक्षिणमोर्थी था । बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर करुणानिधि रख लिय



अनुच्छेद 35 ए क्या है और यह इतने विवादों में क्यों है ?

सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 35 ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनावाई कर रहा है , जिसमें राज्य में भूमि खरीदने से जम्मू-कश्मी



अन्य तकनीकी दिग्गजों के अपेक्षा ऐप्पल चीन में कैसे सफल हुआ?

ऐप्पल (AAPL) के बारे में इतना खास क्या है? जब कंपनी ने पहली अमेरिकी सूचीबद्ध कंपनी बनकर गुरुवार को 1 ट्रिलियन डॉलर का मूल्य बनकर इतिहास बनाया, त



अनुशासन का महत्व:क्या और



अनुशासन का महत्व:क्या और



शिव अवतार

भगवान् शिव के कई अवतार हुए उनके 1 हजार नाम भी है अक्सर लोग उनको देवी पार्वती के पति के रूप में जानते है या गणेश भगवान् के पिताजी के रूप में ! कुछ लोग देवी सती के पति के रूप में उनके अवतार को देवी पार्वती के पति वाला अवतार मान लेते है जबकि देवी



हर पल सिखाती ज़िंदगी

दोस्तों,मैं कोई शायरा,लेखिका या कवित्री नहीं हूँ। मैंने जवानी के दिनों में डायरी के अलावा कभी कुछ नहीं लिखा। हां, बचपन से कुछ लिखने की चाह जरूर थी। लेकिन किस्मत कुछ ऐसी रही कि छोटी उम्र से ही जो पारिवारिक जिमेदारियो में उलझी तो उलझी ही रह गई। उम्र के तीसरे पड़ाव में आ



प्रकृति और इंसान

नदी,सागर ,झील या झरने ये सारे जल के स्त्रोत है. यही हमारे जीवन के आधार भी है. ये सब जानते और मानते भी है कि " जल ही जीवन है." जीवन से हमारा तातपर्य सिर्फ मानव जीवन से नहीं है. जीवन अर्थात " प्रकृति " अगर प्रकृति है तो हम है .लेकिन सोचने वाली बात है कि क्या हम है



व्याकुल पथिक

इन रस्मों को इन क़समों को इन रिश्ते नातों को सुबह दो घंटे अखबार वितरण और फिर पूरे पांच घंटे मोबाइल के स्क्रीन पर नजर टिकाये आज समाचार टाइप करता रहा। वैसे, तो अमूमन चार घंटे में अपना यह न्यूज टाइप वाला काम पूरा कर लेता हूं, परंतु आज घटनाएं अधिक रहीं । ऊपर से प्रधानमंत्री के दौरे पर भी कुछ खास तो ल



महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण आज के समय में एक ऐसा शब्द है जिसे हम आये दिन अखबारों, टेलीविजन इत्यादि में देखते तथा सुनते रहते है|पर क्या आजादी के 70 साल पूरे होने के बाद भी देश को महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता है? क्या महिला सशक्तिकरण आज के समय में बस एक र



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