🚩महाआश्चर्य!

🚩भारतवासी,1 जनवरी को #देश की आजादी के लिए #शहीद होने वाले अमर वीर गोकुल सिंह को भूल गए..!!!पर #गुलाम बनाने वाले #अंगेजों के #नववर्ष को याद रखे..!🚩1669 की क्रान्ति के जननायक, परतंत्र #भारत में असहयोग आन्दोलन के जन्मदाता, #राष्ट्रधर्म र



लक्ष्य

आज का सुवचन



नववर्ष मंगलमय हो!

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं



नववर्ष पर संदेश

नववर्ष की आप सबको शुभकामनाएं ....



अवसर

आज का सुवचन



सोनिया-मुलायम :राजनीति के आदर्श

''जो भरा नहीं है भावों से , बहती जिसमे रसधार नहीं . वह ह्रदय नहीं है पत्थर है , जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं .'' बचपन से राष्ट्रप्रेम की ये पंक्तियाँ पढ़ते हुए ह्रदय में राष्ट्र भावना सर्वोपरि रही किन्तु आज के दो समाचार इस भावना में थोड़ा सा हेर-फेर कर गए और व



योजना

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अब और न मरेंगे मोदी जी

"कुछ लोगों को मनसब गूंगा बहरा कर देते हैं, रोटी मंहगी करने वाले जहर को सस्ता कर देते हैं." गुलजार देहलवी की ये पंक्तियाँ हमें रूबरू करा रही हैं उन परिस्थितियों से जो हमारे मीडिया द्वारा बनाये गये, अच्छे दिनों की सोच लाये गये नई - नई जैकिट, कुर्ते व सूट से सजाये



पूर्ण ध्यान

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टच-कीपैडकालीन लोग

कल अचानक ही शहर-भ्रमण करना पड़ा. बस के लिए दिन वाला पास बनवा लिया था. एक छोटी सी गलती या यूँ कहें हड़बड़ी से गलत बस में बैठ गया, जो पहुँचती तो वहीँ थी, पर बहुत ही घूम-फिरके. ये हड़बड़ी बड़ी ही बेतुकी थी, क्योंकि दरअसल मुझे कोई खास जल्दी थी नहीं. सो मै भी बस में बैठा रहा. बहुत दिनों बाद मुझे एक प्रिय काम क



समाधान

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हिन्दी कहानियाँ याद कराएंगी अँग्रेजी शब्द , 'निमोट्रिक्स' के जरिये

अब अँग्रेजी के कठिन शब्दोंको हिन्दी के सरल वाक्यों को तुकबंदी के साथ कंठस्थ कराने के इस नए तरीके से भी हमआपको अवगत कराना चाहते है । इस तकनीक से बैंकिंग, कैट,स्लेट, एनडीए व सीडीएस जैसी परीक्षाओं मे पूछे जाने वाले अँग्रेजी के साढ़ेतीन हज़ार से अधिक शब्दों को निमोट्रिक्स क



दृढ़ संकल्प

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सफलता

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गलतियां

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कलमवार से :: जानवरों के प्रति जागरूक हैं, तो फिर इंसानों से इतनी बेरुखी क्यों है, साहेब?-

जानवरों के प्रति जागरूक हैं, तो फिर इंसानों से इतनी बेरुखी क्यों है, साहेब?-किसी के दुख में शामिल होने से उसका दर्द दूर नहीं होता है. किसी केअर्थी को कंधा देने से उसके परिवार की कमी दूर नहीं होता है पर हां, विकट घड़ी मेंकिसी को भी सहारा देन



क्षमता

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कलमवार से :: एक और दानामांझी: सिंदूर तो दिया,अर्थी न दे पाया चंद्रमणी-

एक और दानामांझी: सिंदूर तो दिया,अर्थी न दे पाया चंद्रमणी-एक और दानामांझी: सिंदूर तो दिया,अर्थीन दे पाया चंद्रमणी-‘गरीब को नहीं मिलता/डोली को कंधा/अर्थी कौन उठाता है/जहां मिलता नहीं फायदा/वहां पर मुंह भी नहीं खुलता है/सिंदूर की किमत कम ना हो



आज

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ओड़िशा के चंद्रमणी बने दाना मांझी, नहीं मिली आग, मजबूरी में दफनाया पत्नी का शव | India View

इंडिया व्यू के लिए ओड़िशा से रवि कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।गांव हो या शहर कहीं भी यह कहने और सुनने को मिल जाता है कि जीवन की आखिरी यात्रा में दुश्मन भी साथ देता है। लेकिन, जब मानवता मर जाए, मानवीय संवेदना शून्य हो जाए। तो यह कहने और सुनने व



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