मम्मी

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संवरना

सजना, संवरना से जुड़ा कैसे है। यह मालूम न था। रोज रोज एक ही चेहरा आंखों के सामने आता था। मन उसे देखकर खिलखिलाता था। देख ले एकबार, वो मुझे गौर से और ठहर जाये उसकी नजर सिर्फ मुझपे, दिल यही चाहता था। उम्र है छोटी, इसमें यह सब खेल से ज्यादा भाने लगा था। रोज सुबह से शाम



मम्मी सुबह हों गई।

मम्मी सुबह हों गई।उठो मम्मी अब आंखे खोलो, किचन मे जाकर बर्तन धोलो ।बीती रात एफबी, वट्सेप, ट्यूटर से चाइटिंग करने मे।उठो मम्मी सुबह का नाशता बनाओ, हमे नहलाओं।साफ़सुथरा ड्रेस पहनाओ लांच लगा कर बस्ता सजाओ।पापा भी बेड मे सो रहे हैं, तुम भी अभी अलसाई हों । उठो मम्मी अब आंखे खोलो, किचन मे जाकर बर्तन धोलो



माँ

वो थकी हारी जब आती है काम से ,और फिर भी खुश है जीवन के इनाम से | बिना किसी फल के करती रहती है वो श्रम, माँ कहते है लोग जिसे नाम से | ममता की देवी , त्याग की मूरत ,करुणामयी लगती है देखने मै जिसकी सूरत | खुद ना खाये पर





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