नारी



गंदी पुरुष सोच पर भारी नारी पवित्रता

राजनीति का सुनहरा आकाश हो या बिजनेस का चमकीला गगन ,अंतरिक्ष का वैज्ञानिक सफर हो या खेत -खलिहान का हरा-भरा आँगन ,हर जगह आज की नारी अपनी चमक बिखेर रही है ,अपनी सफलता का परचम लहरा रही है .आज घर की दहलीज को पार कर बाहर निकल अपनी काबिलियत का लोहा मनवाने वाली महिलाओं की संख्



आज की नारी

आज की नारीअपनी सोच को विराम न दूँगी , पंखों को आराम न दूँगी । इनकी शक्ति तो उड़ान है ,बुलंदियों को पाना ही मेरी पहचान है । हर पल बाधाएँ ही तो मिली थीं ,कुछ अपनों ने दी , कुछ समाज ने पर क्या मेरे सपनों को विराम लगा सके ? मंजूर नहीं , हर बार अपने अस्तित्व को यूँ कसौटी पर कसना !कहा था, बहुत ऊँची उड़ान क



A Hindi poetry on International women day - क्यों ; अर्चना की रचना

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हिंदी कविता क्यों क्यों एक बेटी की विदाई तक ही एक पिता उसका जवाबदार है ?क्यों किस्मत के सहारे छोड़ कर उसको कोई न ज़िम्मेदार है?क्यों घर बैठे एक निकम्मे लड़के पर वंश का दामोदर है ?क्यों भीड़ चीरती अपना आप खुद लिखती ए



पत्नी

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में जब से आयी है बहुत से क्रांतिकारी बदलाव लेकर आयी है और अब उन्हीं बदलावों में एक और वृद्धि करने जा रही है यहां की पीड़ित महिलाओं या यूं कहें कि पीड़ित पत्नियों के लिए, तो ज्यादा उचित रहेगा, एक सुकून भरे जीवन की शुरुआत और वह यह है -मतलब यह है कि प्रदेश में तीन तलाक पीड़ि



नारायणी

स्वीकृति / अस्वीकृति के बीचकेवलएक 'अ' का नहीं,अपितुअसमान विचार-धाराओं का,सोच का,भावनाओं का गहन अंतर होता है। इन दोनों के बीच,पैंडुलम सा झूलता मनव्यक्तिगत संस्कारोंऔर धारणाओं के आधार पर हीनिजी फ़ैसले करता है। आज,भ्रमित-मानसिकता के कारणभयमिष्रित ऊहापोह में भटकते हुएहमभ्र



वेदना

हर सांस कीअपनी कीमत है..स्वेद रक्त काअपना मोल lमिट्टी का कणकण जुड़ता है..तब निर्मित होता भूगोल lनारी कोआग लगा देते है..नहीं छोड़ते बेबस बस को lधिक्कार हैउनके यौवन को..कर न सके जो वश में हवस को lकलम मेरीअब चीख रही है..कलम करो उनके सर को lशैतानी भी कांप उठे..सीख मिले सारे नर को ------विवेक शुक्ल 'बा



भारत में “मी टू” आंदोलन की प्रासंगिकता

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अब महिला सम्मान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ।

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#क्या वाकई निर्भया?

जो दिखाई देता है, हम सभी जानते हैं कि वह हमेशा सत्य नहीं होता है किन्तु फिर भी हम कुछ ऐसी मिट्टी के बने हुए हैं कि तथ्यों की जांच परख किए बगैर दिखाए जा रहे परिदृश्य पर ही यकीन करते हैं और इसका फायदा भले ही कोई भी उठाता हो लेकिन हम अपनी भावुकतावश नुकसान में ही रहते है



नौकरी गुजारे भत्ते में बाधा नहीं

घरेलू हिंसा एक ऐसी वजह है जिसे देखते हुए बहुत सी सहनशील महिलाओं को भी अपने पति से, ससुराल से अलग होना पड़ता है और पति या ससुराल द्वारा ख़र्चे के न मिलने के कारण या फिर खुद पढे लिखे होने या किसी और हुनर में पारंगत होने के कारण नारी अपने लिए व अपने बच्चों के लिए अपनी हिम्मत से बढ़कर कार्य करती है, कमा



मैं किसी से कम थोड़े ही हूँ.

दिखावा और औरतें आज के समय में एक दूसरे के पर्याय बने हुए हैं. थे तो पहले से ही, पर आज कुछ ज्यादा ही हो गए हैं और ऐसा नहीं है कि ऐसा मैं किसी व्यक्तिगत चिढ़ की वजह से कह रही हूँ बल्कि मैंने आज की औरतों को देखा है और महसूस किया है कि महज दिखावे के लिए ये अपनी सारी जिंदगी तबाह कर लेती हैं. अभी कल ही कर



देह तक सिमटती आधुनिक नारी की सोच

सर्दियों का मौसम लगभग आरंभ हो गया है. सुबह और शाम को हल्की हल्की ठंड महसूस होने लगी है. रात को सोते समय पंखों का बंद होना भी शुरू हो गया है. सुबह के समय खेतों पर जाते हुए लोग गरम चादर ओढ़कर जाते हुए दिखने लगे हैं. मौसम परिवर्तन लोगों की वेषभूषा में बदलाव तो लाता ही है किन्तु जितना अधिक बदलाव पुरुषों



महिला मताधिकार की जनक : कामिनी रॉय (बांग्ला : য়ামিন রায়)

जी हां, कामिनी रॉय जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया था । आज 12 अक्टूबर को उनकी 155वीं जयंती है । कामिनी पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने ब्रिटिश इंडिया में ऑनर्स में ग्रेजुएशन की थी । कामिनी एक एक्टिविष्ट, शिक्षाविद् होने के साथ ही एक



नारी नहीं है बेचारी

दुष्कर्म आज ही नहीं सदियों से नारी जीवन के लिए त्रासदी रहा है .कभी इक्का-दुक्का ही सुनाई पड़ने वाली ये घटनाएँ आज सूचना-संचार क्रांति के कारण एक सुनामी की तरह नज़र आ रही हैं और नारी जीवन पर बरपाये कहर का वास्तविक परिदृश्य दिखा रही हैं .भारतीय दंड सहिंता में दुष्कर्म ये ह



हौंसला- 8 साल के बेटे को बेहतर जिंदगी देने के लिए 'लक्ष्मी' बनीं कुली

हम में से ना जाने ऐसे कितने ही लोग हैं जो अपने काम से खुश नहीं हैं क्योंकि उन्हें अपनी ड्रीम जॉब नहीं मिली। ऐसे में हम अक्सर सोचते हैं कि हम कितनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो ना सिर्फ अपने मुश्किल हालातों से



बेटे को पिता बनना चाहते थे IAS लेकिन बन नहीं पाए.. फिर बेटी पढ लिखकर बनी IAS, पूरा किया सपना

जरूरी नहीं कि एक बेटा ही पिता का सपना पूरा करता है बेटियों को मौका तो दीजिए बेटियां भी देशभर में पिता का नाम रौशन करती है। ऐसी ना जाने कितनी कहानियां हैं जिनमें बेटियों ने मां बाप का सिर गर्व से ऊंचा किया। आज एक ऐसी ही कहानी हम आपको बता रहे



फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां....

1.सोनल 33 साल की है. 7 साल हो गए शादी को. 5 साल का एक बेटा है. सोनल के पति इंटरनेट सर्विस कंपनी में काम करते हैं. सोनल हाउसवाइफ है. बेटा स्कूल से लौट आए उसके बाद सोनल की दोपहरें खाली होती हैं. छोटी बहन आई थी तो उसने सोनल का फेसबुक अकाउंट बना दिया. सोनल ने शादी की एल्बम बन



देश और समाज के विकास में महिलाओं का योगदान अहम्

-स्वाति आनंदनारी ईश्वर की उत्कृष्ट सृष्टि है । कहते है कि नारी को देवी का रूप मन जाता है।देश के सम्पूर्ण विकास में इस देवी की भागीदारी अनिवार्य है। किसी भी समाज या देश के विकास में नारी का योगदान महत्वपूर्ण होता है। किसी भी राष्ट्रनिर्माण या समाज के विकास में जब तक न



नेल्स बढ़ने का तरीका

हाथों के लंबे नाखूनों पर रंग-बिरंगी नेल पॉलिश की बात ही कुछ और होती है। हालांकि, कुछ महिलाओं के चाहते हुए भी नाखून लंबे नहीं होते और दूसरी महिलाओं के लंबे, मजबूत और खूबसूरत नाखून उन्हे उदास करते हैं। नेल्स बढ़ने का तरीका मगर हम में से कई महिलाओं को नाखून अ



जब दिल्ली IPS अफसर पति पर पत्नी ने लगाया मार पीट का आरोप, तो जनता का क्या

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक महिला ने अपने पति पर दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. महिला का नाम नम्रता है. खास बात ये है कि इनके पति आईपीएस अधिकारी हैं. नाम है अमित निगम. और दिल्ली में इनकी पोस्टिंग है.दोनों की शादी 27 नवंबर 2015 को हुई थी. साढ़े तीन साल हो चुके हैं शादी को. हमारे रिपोर्टर उस्मान चौधर



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