न्याय के लिए क्या मरना ज़रूरी है ....?

यह कौन -सा विकास हो रहा है ...? जहाँ ,गलत को सही ,और ,सही को दबा देने का प्रयास हो रहा है !वे कहते हैं ,साक्षरता बढ़ रही है । समाज की कुंठित सोच तो आज भी पनप रही है ।औरत आज भी है ,मात्र हाड़ -माँस की कहानी , शरीर की भूख मिटा , जिसे रौंद कर मिटा देने में है आसानी!हाँ ,यह लोकतंत्र है ...!अंधा क़ानून सबूत



‘‘फेक’’ ‘‘एनकाउंटर’’ को ‘‘वैध‘‘ बनाने के लिए ‘‘कानून‘ क्यों नहीं बना देना जाना चाहिए?

‘‘विकास दुबे एनकाउंटर’’ (मुठभेड़) पूरे देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चित है। यह घटना न केवल स्वयं ‘‘सवालों में सवाल’’ लिये हुये है, बल्कि उपरोक्त ‘‘शीर्षक’’ प्रश्न भी पुनः उत्पन्न करता है। लगभग हर ‘एनकाउंटर’ के बाद उस पर हमेशा प्रश्नचिन्ह अवश्य लगते रहे हैं। उक्त ‘प्रश्नचिन्ह’ क



गोबर के बदले पैसे देगी सरकार , गौधन न्याय योजना शुरू

छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते सोमवार को गोधन योजना नाम से एक योजना लांच की है जिसके तहत पशुपालको से गोबर की खरीद की जाएगी । बताते चलें कि इस गोबर का इस्तेमाल जैविक खाद के उत्पादन के लिए किया जाएगा ।इस योजना के अनुसार, सरकार पंजीकृत पशुपालकों से 2 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गाय का गोबर खरीदेगी और इस



*खुद्दारी*

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आखिर! ‘न्याय’-‘इंसाफ’! इंसानियत एवं ‘न्यायप्रिय’ तरीके से ‘कैसे’ व ‘कब’ मिलेगा। ‘‘जन भावनाओं’’ से ‘‘न्याय व्यवस्था’’ नहीं ‘‘लोकतंत्र’’ चलता है।

6 दिसम्बर सुबह जैसे ही टीव्ही पर हैदराबाद की रेप पीडि़ता ‘‘दिशा’’ की वीभत्स हत्या के चारों अभियुक्तों के एनकाउंटर में मारे जाने की खबर आयी, लगभग पूरे देश में एक अजीब सी खुशी का माहौल पसर गया। तब से चारांे तरफ अधिकांश खुशी ही खुशी व्यक्त करते हुये एक ही आवाज आ रही है कि ‘‘इंसाफ’’ मिल गया है। देश में



सच रो रहा

सच रो रहाशिक्षित प्रशिक्षितधरना और जेल मे।नेता अभिनेतासंसद और बुलट ट्रेन मे।एमेड बीएडतले पकोड़ा खेतवा की मेड़ मे।योगी संत महत्मासेलफ़ी लेवे गंगा की धार मे।बोले जो हककी बात वह भी जिला कारागार मे।बोले जो झूठमूठ वह बैठे सरकारी जैगुआर मे।कर ज़ोर जबरदसतीन्याय को खा जाएंगे।की अगर हककी बात तो लाठी डंडा खा जाएं



चुनावी समर

इस चुनावी समर का हथियार नया है। खत्म करना था मगर विस्तार किया है। जिन्न आरक्षण का एक दिन जाएगा निगल, फिलहाल इसने सबपे जादू झार दिया है। अब लगा सवर्ण को भी तुष्ट होना चाहिए। न्याय की सद्भावना को पुष्ट होना चाहिए। घूम फिर कर हम वहीं आते हैं बार बार, सँख्यानुसार पदों को संतु



अलीपुर बम केस

श्री अरविन्द अलीपुर बम केस में एक आरोपी थे. अपनीपुस्तक, ‘टेल्स ऑफ़ प्रिज़न लाइफ’, में उन्होंने इस मुक़दमे का एक संक्षिप्त वृत्तांतलिखा है. यह वृत्तांत लिखते समय उन्होंने ब्रिटिश कानून प्रणाली पर एक महत्वपूर्णटिपण्णी की है.उन्होंने लिखा है कि इस कानून प्रणाली का असली उद्देश्ययह नहीं है की वादी-प्रतिवादि



स्वाति बरूआ : असम की पहली और देश की तीसरी जज जिन्होंने LGBT समुदाय को……

न्यायपालिका प्रजातंत्र के चार स्तम्भों में से एक है। न्यायपालिका ही वो जगह है जहाँ हर किसी को इंसाफ मिलता है और अपने हक़ मिलते है। आज उसी न्यायपालिका में अपने हक़ की लड़ाई हमेशा लड़ती आ रहीं ट्रांसजेंडर स्वाति बरूआ न्याय की कुर्सी पर बैठ के न्याय करेंगी।बता दें कि 26 वर्षीय स्वाति अब असम की पहली और देश



‘‘उच्चतम् न्यायालय का ‘‘निर्णय’’ कितना प्रभावी ‘‘कितना औचित्यपूर्ण’’?

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार ‘‘उच्चतम् न्यायालय’’ के समस्त निर्णय न्यायिक और बंधनकारी होते है। लेकिन इसके बावजूद हमेशा ही उच्चतम् न्यायालय के निर्णयांे के औचित्य पर बहस होती रही है और यह स्वस्थ्य व मजबूत लोकतंात्रिक न्याय व्यवस्था का एक श्रेष्ठ उदाहरण है। आरोपित नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से



हो सके तो मुझे माफ़ करना नम्बी!

समाचार आया है -"इसरो के वैज्ञानिक को मिला 24 साल बाद न्याय"न्याय के लिये दुरूह संघर्ष नम्बी नारायण लड़ते रहे चौबीस वर्ष इसरो जासूसी-काण्ड में पचास दिन जेल में रहे पुलिसिया यातनाओं के थर्ड डिग्री टॉर्चर भी सहे सत्ता और सियासत के खेल में प



विश्व न्याय दिवस

विश्व अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस जिसे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय या अंतर्राष्ट्



विभीषण अब भी हैं

देश में इस वक़्त चारों तरफ एक मुद्दा गर्म है और वह है लोकतंत्र में खतरे का और खतरा कैसा? वैसा ही जैसा हमारे माननीय चार न्याधीशों ने हमें बताया है ,चलिए मान लेते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है और मानना सामान्यतः थोड़े ही है विशेष रूप से क्योंकि संविधान ने हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट को लोकतंत्र



सरकारी बंद लिफ़ाफ़ा

एक एनजीओ की याचिका परमाननीय सर्वोच्च न्यायालय नेभारत सरकार को आदेश दिया केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने कल 105 क़ानून बनाने वाले आदरणी



“न्यायपालिका में भ्रष्टाचार या अवहेलना न्यायालय की”? - उत्कर्ष श्रीवास्तव

न्याय का अर्थ है नीति-संगत बात अर्थात उचित अनुचित का विवेक | वात्स्यायन ने न्याय सूत्र में लिखा है- “प्रमाणैर्थपरीक्षणं न्यायः“ अर्थात प्रमाणों द्वारा अर्थ का परिक्षण ही न्याय है | भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान किय



उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति

प्रश्न-हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उच्चतम न्यायालय में कितने न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी प्रदान की



भारत में चल रही अंग्रेजी कानून व्यवस्था By: Rajiv Dixit Ji

आज गम्भीर बातें नहीं हो रही हैं न समाज में न संसद में | जिनको देश को दिशा देनी चाहिये वो दिशाहीन हो गये हैं | दिशाहीन लोग समाज को दिशा नहीं दे पाते | मेरे जैसे आदमी को इस काम में लगना पड़ा ये मैं खुशी से नहीं लगा, देश की परिस्थितियाँ, देश के हालात, बढ़ते हुए अंतर्राष्ट्री



गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाये। गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाये।

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाये।आज ऐसा बहुत से देशवासी अपनी वाल पर पोस्ट करेंगे और बोलेंगे और . . . . . . . . . .. . . . . . . . . . . . . . . .फिर से लग जायेंगे अपने - अपने दैनिक कार्यो में.... निवेदन है...... सभी से की गणतंत्र दिवस रोज मनाये और देश की उन्नति में प



मैं वापिस आऊंगा - सूरज बड़त्या

मैं वापिस आऊंगा - सूरज बड़त्या जब समूची कायनातऔर पूरी सयानात की फ़ौजखाकी निक्कर बदल पेंट पहन आपकी खिलाफत को उठ-बैठ करती-फिरती होअफगानी-फ़रमानी फिजाओं के जंगल मेंभेडिये मनु-माफिक दहाड़ी-हुंकार भरे....आदमखोर आत्माएं, इंसानी शक्लों में सरे-राह, क़त्ल-गाह खोद रहे होंसुनहले सपनों की केसरिया-दरियाबाजू खोल बुला



क्या आपको लगता है कि हिंदी न्याय की भाषा बन पायी है ?

'न्यायपालिका एवं हिंदी ' इस सन्दर्भ में आपकी क्या राय है ? क्या आपको लगता है कि हिंदी न्याय की भाषा बन पायीहै ? विषय के तमाम पहलुओं पर अगर आप रूचि रखते है



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