पर



प्रेम आशीष

घर में परिवार हुए एकल, मानव बड़े बूढों की छांव बिना, परछाई से नाता जोड़े हैं। अब बड़े बुजुर्ग पलक पसारे, अखियां रस्ता देखे हैं। अब आंगन में नीम, शीशम की छांव नहीं, आंगन भी अब सीमेंट से छाए हैं। बरामदे का दे नाम, दो गमले नीचे रख, कुछ छोटे गमले लटकाये है। बड़ा बूढ़ा दाढ़ी वाला बरगद पूजे का मिले नहीं



Hindi poetry on childhood life - अजूबी  बचपन ; अर्चना की रचना

बचपन की यादों आधारित हिंदी कविता अजूबी बचपन आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है बचपन की अजूबी कहानियों में खोना चाहता है जीनी जो अलादिन की हर ख्वाहिश मिनटों में पूरी कर देता था,उसे फिर क्या हुक्म मेरे आका कहते देखना चाहता है आज दिल फिर बच्चा होना चाहता हैमोगली जो जंगल में बघ



कोरोना का कहर

मनुष्य पर छाई है छिपी अंधेरा, रूप धारण कर वाईरस कोरोना ।इसका अर्थ है मनुष्य पर भारी , क्योंकि है ये महामारी ।अब मानव की दशा क्या होगी ?क्या कोरोना की विदाई होगी ?देख दृश्य मन विचलित हो उठता, क्या यही है सभ्य की कृपा ।क्या यह , मानव जीवन सिहर उठेगा ?या संसार पुनः हिलस उठेगा ?



मातृ दिवस :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*जब परमात्मा ने इस सृष्टि की रचना की तो सबसे पहले नर - नारी के जोड़े को उत्पन्न किया | नर - नारी की सृष्टि करने के बाद मैथुनी सृष्टि की आधारशिला रखते हुए परमात्मा ने सृष्टि को गतिमान किया | पुरुष को पिता एवं नारी का माँ की संज्ञा दी गयी | जब प्रथम जीव उस माँ के गर्भ में आया तब उसने ईश्वर से प्रार्थन



Hindi poetry on women empowerment - आज की नारी ; अर्चना की रचना

महिला सशक्तिकरण पर हिंदी कविता आज की नारी मैं आज की नारी हूँ न अबला न बेचारी हूँ कोई विशिष्ठ स्थानन मिले चलता है फिर भी आत्म सम्मान बना रहा ये कामना दिल रखता है न ही खेला कभी women कार्ड मुश्किलें आयी हो चाहे हज़ार फिर भी कोई मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाये तो अच्छा लगता है



प्रिय कोरोना,

चार दिन के मेहमान, कहा ठहरे? तुमने तो जीना मुहाल कर दिया, कब छोड़ोगे हमारा साथ?दिल बेबस होकर पूछे ये सवाल। घरबंदी कर दी तुमने हमारी, दोस्तों से दूरियां बढ़ा दी, हमने तुम्हारा अत्याचार बढ़ता पाया, बाहर का खाना भी तुमने छुड़वाया। तेरे नाम का ख़ौफ़ दूर-दूर तक फैला, तेरे कारन रुक गई हैं सबकी ज़िंदगियाँ, व्



Hindi poetry on patriotism and love - शूरवीर ; अर्चना की रचना

देशभक्ति प्रेम पर हिंदी कविता शूरवीर आज फिर गूँज उठा कश्मीर सुन कर ये खबरदिल सहम गया और घबरा कर हाथ रिमोट पर गया खबर ऐसी थी की दिल गया चीर हैडलाइन थी आज फिर गूँज उठा कश्मीर फ़ोन उठा कर देखा तो उनको भेजा आखिरी मेसेज अब तक unread था न ही पहले के मेसेज पर blue tick था ऑनला



साधुओं की हत्या

वीर भूमि पर संतों की निर्मम हत्या के हृदय विदारक कुकृत्य पर इनके परशुराम व दुर्वासा जैसे रौद्र स्वरूप का आह्वान करता हूँ ताकि इन नीच प्रवृत्तियों के दानवों का संहार हो सके !! नियति इन क्रूर पापियों को उनके कृत्यों की प्रबल यातना से भी दुष्कर दंड दे व ईश्वर जूना अखाडे के दिवंगत साधुओं को अपने श्रीचरण



ताज महल

नाकाम मोहब्बत की निशानीताज महल ज़रूरी हैजो लोगो को ये बतलाये केमोहब्बत का कीमती होना नहींबल्कि दिलों का वाबस्ता होना ज़रूरी हैदे कर संगमरमर की कब्रगाहकोई दुनिया को ये जतला गयाके मरने के बाद भीमोहब्बत का सांस लेते रहना ज़रूरी हैवो लोग और थे शायद, जोतैरना न आता हो तो भीदरि



मेरे शिव

ओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठीसबने कहा , क्या मिलेगा मुझेउस योगी के संगजिसका कोई आवास नहींवो फिरता रहता हैबंजारों साजिसका कोई एक स्थान नहींसब अनसुना अनदेखा कर दिया मैंनेअपने मन मंदिर में तुमको स्थापित कर बैठीओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठीसबने समझाया , उसका साथ है भूतो और पिशा



बहुत देर

बहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूनेमेरे दर पे आने मेंहम तो कब से लगे थेतुझे मनाने मेंअब तो न वो प्यास हैन वो तलाश है ,मानोंखुद को पा लिए हमनेकिसी के रूठ जाने मेंबहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूनेमेरे दर पे आने मेंतेज़ हवा में जलाया चिरागक्यों बार बार बुझ जाता हैजब की कोई कसर नहीं छोड़



काली काली रात में

काली काली रात में काले काले बादलों को देखकरकाला हो गया मैं अब काल देव भी काले रथ में आ रहे है काले काले बादलों को देखकर अब नजरो के सामने दोनों आ चुके है काले काले बादलों को देखकर ये भी काले मैं भी कालासारा जहां है काला काले काले बादलों को देखकरअब प्राण ले जा रहे है मे



भारत के संसाधनों पर मुस्लिमों का पहला हक़

पोस्टमार्टम सच्चर कमिटी या मुस्लिम कमेटी # 9 दिसंबर 2006 जन्मदिन Sonia Gandhi. Dec 09, 1946. Lusiana. Indian politicianमनमोहन सिंह तत्कालीन प्र्धानमंती का वक्तव्य की भारत के संसाधनों पर मुस्लिमों का पहला हक़ है धयान दीजिये अल्पसंखयक नहीं मात्र मुस्लिम इसकी



बच्चा बनने का मन है

खेलने का मन है, कूदने का मन हैआज फिर बच्चा बनने का मन हैदौड़ने का मन है चिखने चिल्लाने का मन हैबिना डरे जिंदगी जीने का मन हैक्योंकि आज मुझे जीने का मन है आज मुझे बच्चा बनने का मन हैये जीना भी क्या जीना था जिसमें ना भविष्य कि चिंता थीना भूतकाल के दुखो का रोना थाबस आज था और



Hindi poetry on life - मैं कुछ भूलता नहीं ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित हिंदी कविता मैं कुछ भूलता नहीं मैं कुछ भूलता नहीं ,मुझे सब याद रहता है अजी, अपनों से मिला गम, कहाँ भरता हैसुना है, वख्त हर ज़ख़्म का इलाज है पर कभी-२ कम्बख्त वख्त भी कहाँ गुज़रता है मैं अब बेख़ौफ़ गैरों पे भरोसा कर लेता हूँ जिसने सहा हो अपनों का वार सीने पे , वो



स्वर्गीय आशा रानी व्होरा जी की स्मृति को नमन

‘स्वर्गीय आशारानी व्होरा, जी की स्मृति को नमन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर परमेरे द्वारा लिखित लेख पाँचवाँ स्तम्भ की सम्पादकमहामहिम गोवा की राज्य पाल रहीं मृदुला जी की पत्रिका में छपा था|आशारानी व्होरा एक ऐसा नाम है जिनके स्मरण मात्र से मन सम्मान से भर जाता है | सूर्य संस्थान आशा रानी जी की कर



08 मार्च 2020

द्वादश माधव परिक्रमा: धरती की प्राचीनतम परिक्रमा 600 वर्षों के स्थगन के बाद पुन: प्रारम्भ

प्रयाग तीर्थों के राजा हैं! सनातन धर्म के अनुसार संसार के सारे तीर्थ प्रयाग से हे हैं, न कि अन्य तीर्थों से प्रयाग! भगवान् श्री ब्रह्मा जी ने सृष्टि का आरम्भ प्रयाग कि भूमि से ही किया था! सृष्टि के क्रम में सर्व प्रथम भगवान् श्री ब्रह्मा जी ने यज्ञ की उत्पत्ति की और यज्ञ



A Hindi poetry on International women day - क्यों ; अर्चना की रचना

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हिंदी कविता क्यों क्यों एक बेटी की विदाई तक ही एक पिता उसका जवाबदार है ?क्यों किस्मत के सहारे छोड़ कर उसको कोई न ज़िम्मेदार है?क्यों घर बैठे एक निकम्मे लड़के पर वंश का दामोदर है ?क्यों भीड़ चीरती अपना आप खुद लिखती ए



पत्रकारिता का चतुर्थ स्तंभ

स्वतंत्रता मिलने के बाद देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई। प्रकारांतर में अखबारों की भूमिका लोकतंत्र के प्रहरी की हो गई और इसे कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका के बाद लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ कहा जाने लगा। कालांतर में ऐसी स्थितियाँ बनीं कि खोजी खबरें अब होती



लाल गुलाब 'मरजानया ' से जीन जोग्या'' तक के नाम

लाल गुलाब ‘मरजानया’ से जीन जोग्या तक के नाम डॉ शोभा भारद्वाज वेलेंटाइन डे के मौके पर मुझे पाकिस्तानी इंजीनियर अहसान कीकहानी याद आई वह हमारे ईरान में प्रवासके दौरान परिचितभारतीय के साथ घूमने आया था | पाकिस



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