परछाई

1


छोड़ेंगे न साथ।

छोड़ेंगे न साथ।परछाई ही हैं जो स्वयम के वजूद को और मजबूत करती हैं। बाकी तो सभी साथ छोड़ देते हैं। परछाई हर वक्त साथ रहती हैं। दिन हो तो आगे-पीछे अगल-बगल और जैसे ही ज़िंदगी मे अंधेरा होता हैं वह खुद मे समा जाती हैं पर साथ नहीं छोडती हैं। कभी आपसे आगे निकलती हैं और तो और वह आपसे बड़ी और मोटी भी हो जाती है



परछाई

जब रहता कोई नहीं संग तब भी संग रहती परछाई तन्हा जब सभी छोड़ देते फिर भी साथ रहती परछाई भोर से लेकर साँझ ढले तक साथ में रहती परछाई खुशी में तो साथ रहते सभी ,किन्तु धुप में साथ रहती केवल परछाई



मेरी परछाई जैसा है ये मेरा प्यार - शिखा

Meri parchhai jaisa hai ye mera pyar,yu to humesha raheta karib mere fir bhi hai vo mujse bahot door,Yu to humesha hota saath mere fir bhi raheta hai vo kahi ghum,Yu to humesha roshni bikherta huaFir bhi andhero mai bhatkta hua,Yu to humesha muskurata hua,Fir bhi ander se





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x