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पीपल

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सविता अपने बचपन की सारी खुशीयों को अपने माँबाप के साथ नही बाँट पाई। गाँव को समझ नही पाई, चाँद तारों की छाव में उनकीठंडक को भाँप नही पाई, चन्द सवाल ही पूछ पाती कि चंदा मामा कितनीदूर है? गोरी कलाइयों में बंधे दूधिया तागे कमजोर पड़ गए थे| पैरो में पड़ी पाज़ेब की खनक छनक से अपने नानी नाना के दिल को मोहने ल

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हमारे देश में कुछ भी अजीबोग़रीब हो जाए तो उसे चमत्कार कहकर धर्म से जोड़ देना बहुत आम बात है. ताजा मामला है उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के रेउसा ब्लॉक का. यहां के सुरेठा गांव में ज़मीन पर पड़ा हुआ एक पीपल का पेड़ अपने आप खड़ा हो गया. धीरे-धीरे लोगों को इसके बारे में पता चला और

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