2.0 (4)

अब तक आपने पढ़ा वह रोबोट अपने मालिक के मौत का बदला ले रहा था बाकी सभी को वह मार चुका था अब बस एक ही बचा था वह उसे मारने के लिए बढ़ा और राकी के पास भी एक ही मौका था उसे पकड़ने के लिए, अब आगे....दया - मैं समझा नहीं सर !राकी - मतलब दया, उसे पकड़ने के लिए फार्मूला नंबर 42



2.0 (3)

अब तक आपने पढ़ा राकी को मारने एक अंजान चेहरा उसके कमरे में प्रवेश करता है अब आगे...राकी घर में सो रहा तभी वह अंजान चेहरा हथियार लेकर उसके तरफ बढ़ा और जैसे ही उसके पास गया तो राकी सतर्क था उसने बड़ी चालाकी से हथियार झीनकर उसके चेहरे से पर्दा उठाया।राकी - तूम, तूमने मुझ



2.0 (2

मंत्री जी का घरअरे राजु जल्दी से यह सारा सामान गाड़ी में रखो यहां किसी भी समय सीबीआई आती ही होगी अगर यह उनके हाथ लग गया हमारा पावर तो जाएगा ही जाएगा ऊपर से हम कंगाल भी हो जाएगी इतने सालों से जो घोटाला करके पैसा कमाया है हम उसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे जल्दी से इसे किसी



2.0

1.फुटपाथ पर बैठा एक बच्चा सड़क के लाइट के सहारे पढ़ने की कोशिश कर रहा था। वह दिखने में बहुत कमजोर लग रहा था जैसे उसने क‌ई दिनों से कुछ नहीं खाया हो। लेकिन उसके चेहरे पर एक जुनून था जो कुछ कर गुजरने का था।तभी एक बच्चा दौड़ते हुए उसके पा



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 11 (कलंक)

इस कहानी के पिछले 10 भाग प्रकाशित हो चुका हैअब तक आपने पढ़ा प्रेम और दिव्या अपने जान पर खेलकर जैसिका को दृष्टि से बचाते हैं और उस मायाजाल को भी नष्ट कर देते हैं फिर दृष्टि एक सवाल छोड़ जाती है जिसका जवाब जानने प्रेम सहस्त्रबाहु के पास जाता है। अब आगे......सूरजपुर, सुर



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 7

इस कहानी के पिछले छः भाग प्रकाशित हो चुका है इस भाग को समझने के लिए पिछले छः भागो को पढ़ें।अब तक.....दृष्टि जैसिका को मारने की कोशिश करती हैं लेकिन प्रेम उसे रोकने के लिए आगे बढ़ा लेकिन दृष्टि उसे मार मार कर अधमरा कर देती है और दिव्या भी उसे रोक नहीं पाई और फिर दृष्टि



30 जुलाई 2019

एक नकारात्मक व्यक्ति के साथ व्यवहार करने की स्वादिष्टता।

“यह रमणीय है, यह स्वादिष्ट है, यह प्यारा है।”-कोल पोर्टरहम सभी को अपने जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति के होने की निराशा महसूस हुई जो लगातार नकारात्मक लगता है – शिकायत करना, छोटी-छोटी बातों से नाराज होना, गुस्सा करना, निराशावादी होना।यह बहुत मुश्



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 5

इस कहानी के पिछले चार भाग प्रकाशित हो चुका है इस कहानी को समझने के लिए उन चारों भाग को पढ़ेअब तक.....प्रेम इंटरव्यू के लिए जाता है जाहा उसकी मुलाकात दिव्या से हुई फिर एक दिन अचानक दिव्या ने प्रेम को शादी करने के लिए मंदिर में बुलाया जहां शादी के समय एक और दिव्या आ जात



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 4

इस कहानी को अच्छे से समझने के लिए पिछले तीन भागों को पढ़ें.अब तक.....प्रेम के साथ हो रहे अजीब सी घटनाएं अब और भी बढ़ रहे थे इधर जैसिका प्रेम को सरप्राइज देती है वो उन दोनो की सगाई का फिर प्रेम घर आता है तो घर पर कोई साया होता है वह जैसिका के शरीर में घुसकर प्रेम से कह



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 3

इस कहानी को समझने के लिए इस कहानी के पहले और दूसरे भाग को पढ़े.अब तक...प्रेम के उपर पंखा गिरने वाला था लेकिन किसी अंजान शक्ति ने उसकी मदद की और फिर रात को अचानक कमरे में बदबू और घुटन फैलने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में बदबू की जगह फूलों की खुशबू कमरे में फैलने लगा। सुबह



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 2

दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 2 इस कहानी को समझने के लिए पिछले भाग को पढ़ें।अब तक प्रेम बस में मरने से बाल बाल बचा और ऑफिस में उसकी मुलाकात जेसिका से हुई और अब उसके ऊपर एक और मुसीबत आ गई हैं उसके ऊपर पंखा गिरने वाला है और प्रेम को अनजान शक्ति कुर्सी पर बांध रखा है तभी पंखा



माँ



याद तुम्हारी -- नवगीत

मन कंटक वन में-याद तुम्हारी -खिली फूल सीजब -जब महकीहर दुविधा -उड़ चली धूल सी!!रूह से लिपटी जाय-तनिक विलग ना होती,रखूं इसे संभाल -जैसे सीप में मोती ;सिमटी इसके बीच -दर्द हर चली भूल सी !!होऊँ जरा उदासमुझे हँस बहलाएहो जो इसका साथतो कोई साथ न भाये -जाए पल भर ये दूर -हिया में चुभे शूल सी !!तुम नहीं हो जो



कहां जायेंगे

जब लोगों को अपने पन से तकलीफ होने लगें, आपकी बातें उन्हें ताने लगनी लगे, तो कहां जाओगे? उन्हें कब तक अपना समझ, समझाओगे, मनाओगे? जिसके दिल की जगहें संकुचित होने लगे। प्रेम और समझ ,शक में सिमटने, सिकुड़ने लगे। समाज जंजीर बन जकड़ने लगे। आपका विश्वास (साथी)आपसे अकड़ने लगे। तो दूरी के सिवा क्या दवा है।



तुम मिले कोहिनूर से

भीगे एकांत में बरबस -पुकार लेती हूँ तुम्हे सौंप अपनी वेदना - सब भार दे देती हूँ तुम्हे ! जब -तब हो जाती हूँ विचलित कहीं खो ना दूँ तुम्हेक्या रहेगा जिन्दगी मेंजो हार देती हूँ तुम्हे ! सब से छुपा कर मन में बसाया है तुम्हे जब भी जी चाहे तब निहार लेती हूँ तुम्हे बिखर ना जाए कहीं रखना इस



मुंशी प्रेमचंद

हर आवाज के पीछे एक आवाज होती है, सुन सके जो वो ही सच्चा इंसान होता है. झूठ दुनियां में है इतने हर कोई सच समझ बैठा है, ख़ुद को ख़ुदा और सब को गुलाम समझ बैठा है.तोड़ जिसने दी है ज़ंज़ीर गुलामी की,उसको ही मुल्क का गद्दार कहता है. बिग



उस फागुन की होली में

जीना चाहूं वो लम्हे बार बार जब तुमसे जुड़े थे मन के तारजाने उसमें क्या जादू था ? ना रहा जो खुद पे काबू था कभी गीत बन कर हुआ मुखर हंसी में घुल कभी गया बिखर प्राणों में मकरंद घोल गया बिन कहे ही सब कुछ बोल गया इस धूल को बना गय



देशप्रेम-राष्ट्रभक्ति-राष्ट्रवाद को ढूढ़ता मेरा प्यारा देश!

इस लेख का ‘‘शीर्षक’’ देख कर बहुत से लोगों को हैरानी अवश्य होगी और आश्चर्य होना भी चाहिये। पर बहुत से लोग इस पर आखें भी तरेर सकते है। यदि वास्तव में ऐसा हो सका तो, मेरे लेख लिखने का उद्देश्य भी सफल हो जायेगा। एक नागरिक, बल्कि यह कहना ज्यादा उचित होगा एक भारतीय पैदाईशी ही स्वभावगतः देशप्रेमी होता है।



अभिनंदन

ओ अभिनंदन है अभिनंदनआज महके हैं माटी और चंदन पराक्रम की लिख इबारत लौट आये अपने भारत राजा पौरुष की तरह याद किये जाओगे भावी पीढ़ियों को सैनिक पर गर्व कराओगेमिले कामयाबी की मंज़िल-दर-मंज़िल सजती रहेगी अब आपकी शौर्य-गाथा से महफ़िल भारत की मा



फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या के पिता राज कुमार बड़जात्या का निधन

मुम्बई में राजश्री प्रोडक्शन के राजकुमार बड़जात्या का देहांत हो गयाअधिक जानकारी के लिए: https://hindi.iwmbuzz.com/television/news/filmmaker-sooraj-barjatyas-father-raj-kumar-barjatya-passes-away-2/2019/02/21



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