मर्ज़

मर्ज़ कोई ले गया चुराकर ऐसा मैं बीमार हुआ। शुमार नहीं था किस्मत में जोक्यों उसका दीदार हुआ।। 💔



प्रेमगीत

*है मुझे स्मरण... जाने जाना जानेमन !*है मुझे स्मरण... जाने जाना जानेमन !वो पल वो क्षणहमारे नयनों का मिलनजब था मूक मेरा जीवनतब हुआ था तेरा आगमनकलियों में हुआ प्रस्फुटनभंवरों ने किया गुंजनहै मुझे स्मरण... जाने जाना जानेमन !तेरा रूप तेरा यौवनजैसे खिला हुआ चमनचांद सा रौशन आननचांदनी में नहाया बदनझूम के ब



सुरक्षा कवच

बचपन में खेलते, दौड़ते ठोकर लग कर गिर जाने पर भैया का मुझे हाथ पकड़ कर उठाना,भीड़ भरे रास्तों पर, फूल-सा सहेज कर अँगुली पकड़ स्कूल तक ले जाना,और आधी छुट्टी में माँ का दिया खानामिल-बाँट कर खाना, याद आता है। बहुत-बहुत याद आता है। सर्कस और सिनेमा देखते समय हँसना - खिलखिलाना,बे-बात रूठना-मनाना,फिर देर रात त



मैं और मेरा प्रियतम

दूर कहीं अम्बर के नीचे,गहरा बिखरा झुटपुट हो। वहीं सलोनी नदिया-झरना झिलमिल जल का सम्पुट हो। नीरव का स्पंदन हो केवल छितराता सा बादल हो। तरुवर की छाया सा फैला सहज निशा का काजल हो। दूर दिशा से कर्ण - उतरती बंसी की मीठी धुन हो। प्राणों में



नमन न्यायपालिका

नमन न्यायपालिका के -सम्पूर्ण अधिकार की शक्ति को,न्याय मिला , भले देर हुई , वन्दन इस द्वार शक्ति को !समय बढ़ गया आगे,लिख सौहार्द की नई परिभाषा; प्यार जीता नफरत हारी , बो हर दिल में नयी आशा ;हर कोई अपलक देख रहा -इस प्यार की शक्ति को !समभाव भरी ये पुण्यधरा .गीता भी



लडके लड़किया दोस्त नहीं by नीतेश शाक्य

लडके लड़कियां प्रेमी प्रेमिका बन सकते दोस्त नहीं प्रेम बासना कर सकते स्नेह नहीं, लड़कियां कहती एक या उससे अधिक दोस्त है, मेरे अनुभव के अनुसार यह बात अपने परिवार वालों से झूठ बोलती है| जबकि यह सच है कि हमने लडके लड़कियों पर मनोविज्ञानिकी अध्ययन किया उससे यह बात बिल्कुल हकीकत सिद्ध होती | हमारे लेख पड़ने



अन्नकूट पर्यावरण प्रेम ,एवं मिल बाँट कर खाने का अनुपम पर्व

अन्नकूट पर्यावरण प्रेम, एवं मिल बाँट कर खाने का अनुपम पर्व डॉ शोभा भारद्वाज वर्षा ऋतू समाप्त चुकी थी हर तरफ हरियालीही हरियाली थी गोकुल में घर घर उत्सव कीतैयारी चल रही थी कान्हा ग्वाल बालों के साथ संध्या को घर लौटे सोच मग्न इधर उधर



वो बॉलीवुड फ़िल्में जिनमें हिंदी साहित्य बना प्रेरणा

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तुमने ऐसा क्यों किया ?

यह कविता मेरी दूसरी पुस्तक " क़यामत की रात " से है . इसमें प्रेम औ रदाम्पत्य जीवन के उतार-चढ़ाव पर जीवनसाथी द्वारा साथ छोड़ देने पर उत्पन्न हुए दुःख का वर्णन है .तुमने ऐसा क्यों किया जीवन की इस फुलवारी में, इस उम्र की चारदीवारी में।आकर वसंत भी चले गये, पतझड़ भी आकर चले गय



Archana Ki Rachna: Preview "मनमर्ज़ियाँ"

चलो थोड़ी मनमर्ज़ियाँ करते हैं पंख लगा कही उड़ आते हैंयूँ तो ज़रूरतें रास्ता रोके रखेंगी हमेशापर उन ज़रूरतों को पीछे छोड़थोड़ा चादर के बाहर पैर फैलाते हैंपंख लगा कही उड़ आते हैंये जो शर्मों हया का बंधनबेड़ियाँ बन रोक लेता हैमेरी परवाज़ों कोचलो उसे सागर में कही डूबा आते हैंपंख लगा



हे माँ, तुझे समर्पण ...

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प्रिये

भागते-भागते जब तुम पहुँच जाओ श्रेष्ठता के शिखर पर,पा लो ब्रह्मज्ञान का आशीष ,पहुँच जाओ कला के उच्चतम बिंदु पर,जान लो विज्ञानं के सारे रहस्यबन जाओ विश्व विजेता,प्रिये, तब कुछ देर रुकना तुम उस शिखर पर और सोचना ....तुम हार गए एक प्रेमी का मन।



नज़र कुछ कह ना सकी,...

नज़र कुछ कह ना सकी,...नज़र कुछ कह ना सकी, सितारों के बीच,चाँद जो अपने मुखड़े को, ली थी सींच,एक झलक, तो मिल ही गयी मुझे दूर,मानो जैसे, बन गयी, मेरे आँखों की नूर,कुछ गरम साँसे, छू कर निकल गयी पास,लगा ऐसे, तुम मेरी हो कितनी ख़ास,मूड के देखा, बैठी थी तुम, लिए आँखों में अंग्रा



Archana Ki Rachna: Preview "मुझमे भी जीवन है"

हाँ मैं तुम जैसा नहींतो क्या हुआ ?मुझमे भी जीवन हैमुझे क्यों आहत करते हो ?? हमें संज्ञा दे कर पशुओं कीखुद पशुओं से कृत्य करते होकल जब तुम ले जा रहे थेमेरी माँ कोमैं फूट फूट कर रोया थामैं छोटा सा एक बच्चा थामैंने अपनी माँ को खोया थामैं लाचार



लघुकथा- अल्पायु

अपने स्कूल के आम के पेड़ के नजदीक खड़ा थी तन्वी, ये वही पेड़ था जिस पर वो आम तोड़ने जा चढ़ी थी। नन्ही तन्वी जो बमुश्किल १० साल की थी.जैसे तैसे चढ़ तो गई लेकिन उतरना जैसे टेढ़ी



प्रेम के भूख

प्रेम की भूखविजय कुमार तिवारीसभी प्रेम के भूखे हैं।सभी को प्रेम चाहिए।दुखद यह है कि कोई प्रेम देना नहीं चाहता।सभी को प्रेम बिना शर्त चाहिए परन्तु प्रेम देते समय लोग नाना शर्ते लगाते हैं।प्रेम में स्वार्थ हो तो वह प्रेम नहीं है।हम सभी स्वार्थ के साथ प्रेम करते हैं।प्रेम कर



लिख दो कुछ शब्द --

लिख दो ! कुछ शब्दनाम मेरे , अपने होकर ना यूँ - बन बेगाने रहो तुम ! हो दूर भले - पास मेरे .इनके ही बहाने रहो तुम ! कोरे कागज पर उतर कर . ये अमर हो जायेंगे ; जब भी छन्दो में ढलेंगे , गीत मधुर



30 जुलाई 2019

एक नकारात्मक व्यक्ति के साथ व्यवहार करने की स्वादिष्टता।

“यह रमणीय है, यह स्वादिष्ट है, यह प्यारा है।”-कोल पोर्टरहम सभी को अपने जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति के होने की निराशा महसूस हुई जो लगातार नकारात्मक लगता है – शिकायत करना, छोटी-छोटी बातों से नाराज होना, गुस्सा करना, निराशावादी होना।यह बहुत मुश्



माँ



याद तुम्हारी -- नवगीत

मन कंटक वन में-याद तुम्हारी -खिली फूल सीजब -जब महकीहर दुविधा -उड़ चली धूल सी!!रूह से लिपटी जाय-तनिक विलग ना होती,रखूं इसे संभाल -जैसे सीप में मोती ;सिमटी इसके बीच -दर्द हर चली भूल सी !!होऊँ जरा उदासमुझे हँस बहलाएहो जो इसका साथतो कोई साथ न भाये -जाए पल भर ये दूर -हिया में चुभे शूल सी !!तुम नहीं हो जो



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