आगे बढ़ना काम हमारा..!

आगे बढ़ना काम हमाराजलने दो जलना है जिनकोआगे बढ़ना काम हमाराभारत मां के राष्ट्र यज्ञ मेंसमिधा का है स्थान हमारा ।। धृ ।।बाधाएं बाधक होने दोकस कस करसाधक होंगे हममुसीबतों को फिर आने दोजीवन अर्पित योद्धा होंगे हम ।। १ ।।भौतिकता के अंधियारों मेंजलने वाले दीपक होंगे हमस्वार्थता के भ्रष्ट प्रवाह मेंगंगा से



तुम्हारी याद

कवितातुम्हारी याद तुम यादों से विस्मृत हो जाओ सम्भव नहीं है ये ,तुम पटल से उतर जाओ स्वीकृत नहीं है ये । न करो याद तुमफ़र्क पड़ता है क्या ?न करो विश्वास तुमसमय रुकता है क्या ?श्वास तो चलते हैंहृदय भी धड़कता है दोनों ही के स्पंदन मेंध्वनि हो या प्रतिध्वनि तुमसे ही होकर आती



सफर यादों का

तेरा धरती से यूँ जाना, मेरा धरती में रह जाना ।अखरता है मुझे हर पल, तेरा मुझसे बिछुड़ जाना ।मेरी साँसों में तेरा नाम, मेरी धड़कन में तेरा नाम ।मेरे ख्वाबों में तू ही तू,



शोना बिंगो ( विश्व पशु दिवस )

शोना बिंगो ( विश्व पशू दिवस ) डॉ शोभा भारद्वाज हेनरिक जिमरमैन ,’मैन एंड डाग ‘ नाम की पत्रिका का प्रकाशन करते थे ताकि पशुओं के प्रति समाज को जागरूक किया जा सके . 1929 से 4 अक्टूबर को हर साल यह दिवस मनाया जाता है . झाँसी में मेरे पति नन्हें अल्सेशियन पपी को ल



गुरुकुल शिक्षा पद्धति

प्राचीन शिक्षा पद्धति का विलोपन, नवीन शिक्षा पद्धति का आगमन; ऋषि मुनियों द्वारा प्रदत्त शिक्षा ,गुरुकुल पद्धति वाली शिक्षा को नमन;आश्रम में रह कर गुरु और गुरुमाता की सेवा करते हुए शिष्यों का होता अध्ययन;किताबी ज्ञान के साथ साथ वास्तव में मिल



वह पुरानी किताब

धूल से पटी पड़ी एक किताब को झटक,उसके पुराने पन्नों को धीरे से पलटते रहा;अतीत को वर्तमान के झरोखे से झांकते रहा।मै पिछले कई वर्षों का हिसाब देखता रहा,अंधेरे में गुजारे कई दिनों को याद करता हुआ;सोचता रहा क्या ये उजियारा दिन हमेशा का हुआ।वक़्त ने मुझे अपने आप को तलाशने का मौका ना दिया,गुलाम भारत को स्व



कपड़ा कम

पीर बढ़ावे जब चोट करें अपने सखी साखा, चाकरी करें ना मिले, मान स्वाभिमान से ज्यादा। खुद की समझ से बढ़ावे पैर, नासमझी में उलझ समझदार से, कौन चाकर कमावे बैर ... अनपढ़ माली पाल‌‌ पोस कर बगिया, अनपढ़ हाली खेत जोत कर अन्न उपजाए बढ़िया... पढ़ें लिखे बाबू साहेब पेन की नोंक से कुचले, ज़मीनी दुनिया... पढ़ें



हिंदी साहित्य के धरोहर "मुंशी प्रेमचंद"

हिंदी साहित्य के धरोहर "मुंशी प्रेमचंद"जनमानस का लेखक, उपन्यासों का सम्राट और कलम का सिपाही बनना सबके बस की बात नहीं है। यह कारनामा सिर्फ मुंशी प्रेमचंद जी ने ही कर दिखाया। सादा जीवन उच्च विचार से ओतप्रोत ऐसा साहित्यकार जो साहित्य और ग्रामीण भारत की समस्याओं के ज्यादा करीब रहा। जबकि उस समय भी लिखने



मंगल बसेरा

अपनी अपनी सब कहें, दूजे की सुनें समझें ना। दूसरे को भी अपने से बढ़कर समझें, तो दुःख काहे का होए। अपने को दूसरों की नजरों में, अच्छा बनाने के सो जतन, पर खुद से वास्ता ना होए, औरों के लिए जीने से अच्छा, अपनों संग खुद का भी बेहतर जीवन होए। ना जोगी बन, ना संन्यासी बन.. गृहस्थ जीवन से बढ़कर, ना कर्म तप



दहेज या प्यार ?

श्याम गहरे सांवले रंग का लड़का था जिसका कद 5फीट 8 इंच था और उसकी काठी मध्यम थी, शायद उसके सांवले सलौने और मनोहर रुप के चलते ही उसके माता-पिताने उसका ये नाम रखा था। वो अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की की तरफ काफी आकर्षित था,जो कि एक प्राइवेट अस्पताल में नर्स थी। मध्यम कद का



दो बादाम एक- एक अनोखी प्रेम कहानी

उसने उसके भिगोए हुएदो बादाम खा लिए, ये अब उसकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। वो हमेशाअस्वस्थ रहती थी, वो भी सिर्फ 23 साल की उम्र में जब उसका यौवन और सौंदर्य किसी कोभी प्रभावित कर सकता था लेकिन चांद में दाग की तरह कमजोरी के निशान उसके चेहरे परभी दिखाई देने लगे।उसके



इश्क़ का अब्सर

मेरे इश्क़ का अब्शर अब बहने दो ।इस जूनून में ख्वाबीदा अब हमें होने दो ।सब कहते है मुख्तलिफ है तेरे मेरे रास्ते,वो क्या जाने मेरा इख्लास तेरे वास्ते।।❤❤



प्रेम आशीष

घर में परिवार हुए एकल, मानव बड़े बूढों की छांव बिना, परछाई से नाता जोड़े हैं। अब बड़े बुजुर्ग पलक पसारे, अखियां रस्ता देखे हैं। अब आंगन में नीम, शीशम की छांव नहीं, आंगन भी अब सीमेंट से छाए हैं। बरामदे का दे नाम, दो गमले नीचे रख, कुछ छोटे गमले लटकाये है। बड़ा बूढ़ा दाढ़ी वाला बरगद पूजे का मिले नहीं



औरत का किरदार

अपने स्टील के डब्बेमें रखे कुछ गुलाब जामुन में से एक को निकालकर प्रीति ने अनिमेष के हाथ मेंजबर्दस्ती थमा दिया। उसके बाद अपने दो साल के बच्चें को खिलाने के बाद अपने पति केजबरन मुंह में ठूंस दिया। ऐसी मिठाई खाकर भी ख़ुश नहीं महसूस कर रहा था अ



प्रेम का आखिरी पड़ाव

शशांक ने कहा “हैलो स्मिता मैं बैंगलुरु पहुंच गयाहूं। यहां की एक फ़ार्मा कपंनी में मैनेज़र के तौर पर मेरा प्रमोशन हो गया है,30 साल का हो गया हूं। कोई अच्छी सी लड़की बताओं ना बिल्कुल तुम्हारीतरह”। “मैं क्या को



मातृशक्ति

जननी दर्द सहन कर सृष्टि करती है,जीवन संतति को समर्पित करती है।गृहस्थी के चुल्हे में ईंधन बनती है,जैसे यज्ञवेदी में समिधा जलती है।सुबह-शाम आग से वह खेलती है,तब हमें लजीज व्यंजन परोसती है।वह प्रेम पात्र तो बन जाती है,फिर भी विश्वास नहीं पाती है।अपना सर्वस्व न्यौछावर करती है,फिर भी इतना दुःख क्यों सहती



Hindi poetry on patriotism and love - शूरवीर ; अर्चना की रचना

देशभक्ति प्रेम पर हिंदी कविता शूरवीर आज फिर गूँज उठा कश्मीर सुन कर ये खबरदिल सहम गया और घबरा कर हाथ रिमोट पर गया खबर ऐसी थी की दिल गया चीर हैडलाइन थी आज फिर गूँज उठा कश्मीर फ़ोन उठा कर देखा तो उनको भेजा आखिरी मेसेज अब तक unread था न ही पहले के मेसेज पर blue tick था ऑनला



ताज महल

नाकाम मोहब्बत की निशानीताज महल ज़रूरी हैजो लोगो को ये बतलाये केमोहब्बत का कीमती होना नहींबल्कि दिलों का वाबस्ता होना ज़रूरी हैदे कर संगमरमर की कब्रगाहकोई दुनिया को ये जतला गयाके मरने के बाद भीमोहब्बत का सांस लेते रहना ज़रूरी हैवो लोग और थे शायद, जोतैरना न आता हो तो भीदरि



हसन मियाँ कुछ कीजिये

रामनाथ जी और हसन मियाँ , सदियों से साथ रह रहे हैं. एक ही धरती और एक ही देश में, बस चेहरा और जगह बदल जाया करती है. लेकिन किसी घटना को ले के दोनों के रवैये में बड़ा ही अंतर है.



रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)

रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)‘रश्मि के नाम कुछ खत...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है, जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है ल



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