Archana Ki Rachna: Preview "मनमर्ज़ियाँ"

चलो थोड़ी मनमर्ज़ियाँ करते हैं पंख लगा कही उड़ आते हैंयूँ तो ज़रूरतें रास्ता रोके रखेंगी हमेशापर उन ज़रूरतों को पीछे छोड़थोड़ा चादर के बाहर पैर फैलाते हैंपंख लगा कही उड़ आते हैंये जो शर्मों हया का बंधनबेड़ियाँ बन रोक लेता हैमेरी परवाज़ों कोचलो उसे सागर में कही डूबा आते हैंपंख लगा



हे माँ, तुझे समर्पण ...

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प्रिये

भागते-भागते जब तुम पहुँच जाओ श्रेष्ठता के शिखर पर,पा लो ब्रह्मज्ञान का आशीष ,पहुँच जाओ कला के उच्चतम बिंदु पर,जान लो विज्ञानं के सारे रहस्यबन जाओ विश्व विजेता,प्रिये, तब कुछ देर रुकना तुम उस शिखर पर और सोचना ....तुम हार गए एक प्रेमी का मन।



नज़र कुछ कह ना सकी,...

नज़र कुछ कह ना सकी,...नज़र कुछ कह ना सकी, सितारों के बीच,चाँद जो अपने मुखड़े को, ली थी सींच,एक झलक, तो मिल ही गयी मुझे दूर,मानो जैसे, बन गयी, मेरे आँखों की नूर,कुछ गरम साँसे, छू कर निकल गयी पास,लगा ऐसे, तुम मेरी हो कितनी ख़ास,मूड के देखा, बैठी थी तुम, लिए आँखों में अंग्रा



Archana Ki Rachna: Preview "मुझमे भी जीवन है"

हाँ मैं तुम जैसा नहींतो क्या हुआ ?मुझमे भी जीवन हैमुझे क्यों आहत करते हो ?? हमें संज्ञा दे कर पशुओं कीखुद पशुओं से कृत्य करते होकल जब तुम ले जा रहे थेमेरी माँ कोमैं फूट फूट कर रोया थामैं छोटा सा एक बच्चा थामैंने अपनी माँ को खोया थामैं लाचार



लघुकथा- अल्पायु

अपने स्कूल के आम के पेड़ के नजदीक खड़ा थी तन्वी, ये वही पेड़ था जिस पर वो आम तोड़ने जा चढ़ी थी। नन्ही तन्वी जो बमुश्किल १० साल की थी.जैसे तैसे चढ़ तो गई लेकिन उतरना जैसे टेढ़ी खीर बन गया।पेड़ के नजदीक से गुजर



प्रेम के भूख

प्रेम की भूखविजय कुमार तिवारीसभी प्रेम के भूखे हैं।सभी को प्रेम चाहिए।दुखद यह है कि कोई प्रेम देना नहीं चाहता।सभी को प्रेम बिना शर्त चाहिए परन्तु प्रेम देते समय लोग नाना शर्ते लगाते हैं।प्रेम में स्वार्थ हो तो वह प्रेम नहीं है।हम सभी स्वार्थ के साथ प्रेम करते हैं।प्रेम कर



लिख दो कुछ शब्द --

लिख दो ! कुछ शब्दनाम मेरे , अपने होकर ना यूँ - बन बेगाने रहो तुम ! हो दूर भले - पास मेरे .इनके ही बहाने रहो तुम ! कोरे कागज पर उतर कर . ये अमर हो जायेंगे ; जब भी छन्दो में ढलेंगे , गीत मधुर



2.0 (4)

अब तक आपने पढ़ा वह रोबोट अपने मालिक के मौत का बदला ले रहा था बाकी सभी को वह मार चुका था अब बस एक ही बचा था वह उसे मारने के लिए बढ़ा और राकी के पास भी एक ही मौका था उसे पकड़ने के लिए, अब आगे....दया - मैं समझा नहीं सर !राकी - मतलब दया, उसे पकड़ने के लिए फार्मूला नंबर 42



2.0 (3)

अब तक आपने पढ़ा राकी को मारने एक अंजान चेहरा उसके कमरे में प्रवेश करता है अब आगे...राकी घर में सो रहा तभी वह अंजान चेहरा हथियार लेकर उसके तरफ बढ़ा और जैसे ही उसके पास गया तो राकी सतर्क था उसने बड़ी चालाकी से हथियार झीनकर उसके चेहरे से पर्दा उठाया।राकी - तूम, तूमने मुझ



2.0 (2

मंत्री जी का घरअरे राजु जल्दी से यह सारा सामान गाड़ी में रखो यहां किसी भी समय सीबीआई आती ही होगी अगर यह उनके हाथ लग गया हमारा पावर तो जाएगा ही जाएगा ऊपर से हम कंगाल भी हो जाएगी इतने सालों से जो घोटाला करके पैसा कमाया है हम उसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे जल्दी से इसे किसी



2.0

1.फुटपाथ पर बैठा एक बच्चा सड़क के लाइट के सहारे पढ़ने की कोशिश कर रहा था। वह दिखने में बहुत कमजोर लग रहा था जैसे उसने क‌ई दिनों से कुछ नहीं खाया हो। लेकिन उसके चेहरे पर एक जुनून था जो कुछ कर गुजरने का था।तभी एक बच्चा दौड़ते हुए उसके पा



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 11 (कलंक)

इस कहानी के पिछले 10 भाग प्रकाशित हो चुका हैअब तक आपने पढ़ा प्रेम और दिव्या अपने जान पर खेलकर जैसिका को दृष्टि से बचाते हैं और उस मायाजाल को भी नष्ट कर देते हैं फिर दृष्टि एक सवाल छोड़ जाती है जिसका जवाब जानने प्रेम सहस्त्रबाहु के पास जाता है। अब आगे......सूरजपुर, सुर



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 7

इस कहानी के पिछले छः भाग प्रकाशित हो चुका है इस भाग को समझने के लिए पिछले छः भागो को पढ़ें।अब तक.....दृष्टि जैसिका को मारने की कोशिश करती हैं लेकिन प्रेम उसे रोकने के लिए आगे बढ़ा लेकिन दृष्टि उसे मार मार कर अधमरा कर देती है और दिव्या भी उसे रोक नहीं पाई और फिर दृष्टि



30 जुलाई 2019

एक नकारात्मक व्यक्ति के साथ व्यवहार करने की स्वादिष्टता।

“यह रमणीय है, यह स्वादिष्ट है, यह प्यारा है।”-कोल पोर्टरहम सभी को अपने जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति के होने की निराशा महसूस हुई जो लगातार नकारात्मक लगता है – शिकायत करना, छोटी-छोटी बातों से नाराज होना, गुस्सा करना, निराशावादी होना।यह बहुत मुश्



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 5

इस कहानी के पिछले चार भाग प्रकाशित हो चुका है इस कहानी को समझने के लिए उन चारों भाग को पढ़ेअब तक.....प्रेम इंटरव्यू के लिए जाता है जाहा उसकी मुलाकात दिव्या से हुई फिर एक दिन अचानक दिव्या ने प्रेम को शादी करने के लिए मंदिर में बुलाया जहां शादी के समय एक और दिव्या आ जात



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 4

इस कहानी को अच्छे से समझने के लिए पिछले तीन भागों को पढ़ें.अब तक.....प्रेम के साथ हो रहे अजीब सी घटनाएं अब और भी बढ़ रहे थे इधर जैसिका प्रेम को सरप्राइज देती है वो उन दोनो की सगाई का फिर प्रेम घर आता है तो घर पर कोई साया होता है वह जैसिका के शरीर में घुसकर प्रेम से कह



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 3

इस कहानी को समझने के लिए इस कहानी के पहले और दूसरे भाग को पढ़े.अब तक...प्रेम के उपर पंखा गिरने वाला था लेकिन किसी अंजान शक्ति ने उसकी मदद की और फिर रात को अचानक कमरे में बदबू और घुटन फैलने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में बदबू की जगह फूलों की खुशबू कमरे में फैलने लगा। सुबह



दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 2

दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 2 इस कहानी को समझने के लिए पिछले भाग को पढ़ें।अब तक प्रेम बस में मरने से बाल बाल बचा और ऑफिस में उसकी मुलाकात जेसिका से हुई और अब उसके ऊपर एक और मुसीबत आ गई हैं उसके ऊपर पंखा गिरने वाला है और प्रेम को अनजान शक्ति कुर्सी पर बांध रखा है तभी पंखा



माँ



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