राजनीती



जैसा राजा वैसी प्रजा -अब तनाव कहाँ

नया ज़माना आ गया है आज हम वी आई पी दौर में हैं ,पहले हमारे प्रधानमंत्री महोदय साल में बच्चों से मिलने का एक दिन रखते थे और आज प्रधानमंत्री हर वक़्त देश के बच्चों को उपलब्ध हैं और वह भी उन विषयों और समस्याओं के लिए जिसे समझाने व् सुलझाने का काम बच्चों का स्वयं का



क्या तब भी ममता बनर्जी जैसे नेता ऐसे ही लोकतंत्र को खतरे में बताते

अभी हाल ही में देश में दो बड़ी घटनाएँ घटीं, एक घटना तब घटी जब माननीय सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस जे. चम्लेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने मीडिया के समक्ष कहा कि “हम चारों इस बात से सहमत हैं कि इस संस्थान को बचाया नहीं जा गया तो इस देश या



बताओ मोदीजी हमारा कसूर क्या था ?

दुनिया का सबसे बड़ा बोझ होता है बाप के कंधे पर जवान बेटे का जनाजा (अर्थी). जिस औलाद को जरा सा दुःख होने पर बाप की अंतरात्मा चीख उठती है, उसी बेटे को जब मुखाग्नि देनी पड़ती है तब देखने वालों का कलेजा भी मुहं को आ जाता है. बेटे की ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाने वाला बाप जब उसी बेटे के जनाजे को कंधे पर लेकर चल



दलित नहीं है संविधान __________

भारतीय जनता पार्टी जबसे मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र में सत्ता में आयी है तबसे हर ओर भारतीय जनता पार्टी का इतना नाम हो न हो पर मोदी जी छाये हुए थे किन्तु जबसे योगी जी भी भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व



लो ! इन्हें भी मौका मिल गया .

राजनीति एक ऐसी बला है जो सेर को सवा सेर बना देती है ,चमकने पर अगर आये तो कांच को हीरा दिखा देती है ,ये कहना मात्र एक मजाक नहीं सच्चाई है .ये राजनीति की ही आदत है जो आदमी को वो भी दिखा देती है जिसे देखने का ख्याल तक उसके गुमान में न



१८ प्रतिशत जनसंख्या कभी बादशाह नहीं बन सकती लेकिन...........

मेरा मानना है कि ताकत उसके पास होती है जिसके पास सत्ता होती है, और सत्ता उसके पास होती है जिसके पास बहुमत होता है. इस समय बीजेपी पूर्ण बहुमत से सत्ता में है और इसमें कोई दो राय नहीं है कि नरेंद्र मोदी एक बड़े समुदाय के हीरो बन चुके हैं या यूँ कहिये कि एक ऐसे वर्ग के सर्वमान्य नेता बन चुके हैं जिसके प



सुनवाई बीजेपी कंट्रोल के बाद

जब से बीजेपी सत्ता में आयी है तब से हमारा मीडिया तो पहले ही यह शुरू कर चुका है कि किसी भी तरकीब से कॉंग्रेस के किसी भी कदम को ,किसी भी नेता को उपहास की श्रेणी में लाया जाये .पप्पू नाम राहुल गाँधी के लिए इसी मीडिया की देन है और उपहास की ऐसी श्रेणी जिसकी इज़ाज़त भा



बंद मुठ्ठी लाख की खुली तो खाक की

मोदी युग के बाद राहुल युग. मतलब अच्छे दिन आने तय हैं. वजह साफ है राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस भाजपा और फिर कांग्रेस. भाजपा में भले ही समर्पण, त्याग और वफादारी की कमी हो



अरे ! घर तो छोड़ दो .

''सियासत को लहू पीने की लत है , वर्ना मुल्क में सब खैरियत है .'' महज शेर नहीं है ये ,असलियत है हमारी सियासत की ,जिसे दुनिया के किसी भी कोने में हो ,लहू पीने की ऐसी बुरी लत है कि उसके लिए यह सड़कों से लेकर चौराहों तक, राजमहलों से लेकर साधारण घरों



जर्मनी के इस नागरिक ने खुद को इंडियन बताकर तीन बार विधायकी के चुनाव जीत लिए

रमेश चेन्नामनेनी 1993 से ही जर्मनी के नागरिक हैं.अपने देश में एक आदमी है. रहने वाला जर्मनी का है. उसके पास पासपोर्ट भी जर्मनी का है. नाम है रमेश चेन्नामनेनी. मन में तो ये सवाल उठ ही रहा होगा कि एक जर्मन नागरिक के बारे में इतनी तफसील से क्यों बताया जा रहा है. आपको जवाब भी



“बिग-स्क्रीन” पर धर्म के नाम पाखण्ड

फिल्मेंसमाज का दर्पण होती है, अक्सर कहा जाता है । फिल्मों के माध्यम से समाज



हार की कगार पर कांग्रेस के 'चाणक्य'

…तो कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले अहमद पटेल का राजनैतिक भविष्य खतरे में है. आज सुबह 9 बजे गुजरात के विधायक राज्यसभा चुनाव के लिए वोट डालने निकल चुके हैं. शाम चार बजे तक वोटिंग होगी और इसके बाद अहमद पटेल के साथ ही कांग्रेस के भविष्य का भी आकलन शुरू हो जाएगा.बनता-बिगड़ता



पाकिस्तानी चाहते हैं शरीफ की जगह सुषमा स्वराज बनें उनकी प्रधानमंत्री! ये है वजह

पाकिस्तान में एक बार फिर सत्ता खिसकी है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा धक्का दिया कि नवाज शरीफ फिसल के जमीन पर आ गिरे।अब पाकिस्तान का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर चर्चा की जा रही है, हालांकि रेस में बहुत लोग आगे भाग रहे हैं जिसमें शरीफ साहब के भाई शाहबाज शरीफ सबसे आगे हैं लेकिन इस रेस में अचानक से सुषमा



टेढ़े चलने की आदत

आदत सबको कोई ना कोई अच्छी या बुरी होती ही है जैसे इस देश के नेताओ को है टेढ़े चलने की आप सोच रहे होंगे मै क्या बोल रहा हूँ आप खुद पढ़िए और बताइये इस देश का वास्तिकता में कोई भविष्य है ही नहीं क्योकि ये हमारा देश है जो हमारे द्वारा चुने गए नेता चलाते है औ



ऐतिहासिक

कुछ बातो मे कुछ निकल ही जाता है ।आप लोग ध्यान से पढ़ो ।भारत की महाभारत के नायको का मोह ।। देश और अपनों से ।।*दुर्योधन और राहुल गांधी* दोनों ही अयोग्य होने पर भी सिर्फ राजपरिवार में पैदा होने के कारन शासन पर अपना अधिकार समझते हैं।*भीष्म और आडवाणी* - कभी भी सत्तारूढ़ नही हो सके



I may be the Next Target of This Heroic Act --कृपया कोई पाठक इसका हिंदी अनुवाद करने की कृपा करें धन्यवाद सहित --- अभय

I may be the Next Target of This Heroic Act -- No answers of the burning issues of the common man--Just the opposite , just to divide and unethically and illegitimately spreading the conflicts that should keep on brewing for their entertainment .--So Pathetic===============अभय ===================असल



चुप है आसमां , चुप है धरती -- फिर भी मैं चुप नहीं हूँ -----

चुप है आसमां , चुप है धरती --फिर भी मैं चुप नहीं हूँ ----- जब जब धरती पर संकट आते हैं --तो भगवांन अवतार लेकर धरती को पाप मुक्त करवाने अवतार लेकर धरती पर आते हैं ---- हालाँकि मेरे जैसे मूढ़बाक को भगवान और अवतार की बातें गले से नहीं उतरती ---दिमाग में फिर कैसे



क्या यही है स्वर्णिम भारत ???

ब्राह्मण विरोधी राजनीति जिसकी जड़ 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ज्योतिबा फुले के सत्यशोधक समाज के रूप में रखा गया था, और जिसका राजनीतिक स्वरूप 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में जस्टिस पार्टी के द्वारा रखा गया था, वह आंदोलन अपने उतरार्द्ध



अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आज का समाज

मानवीय गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए #अभिव्यक्ति_की_स्वतंत्रता को ज़रूरी माना गया हैं. नागरिकों के नैसर्गिक अधिकारों के रूप में उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं को संरक्षित करना, ताकि मानव के व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास हो सके और उनके हितों की रक्षा हो सके, इसके लिए भारत सहित विश्व के



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