रात्रि

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जाने भगवान शिव से जुड़े वो रोचक तथ्य जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे......

"भगवान शिव का कोई माता-पिता नहीं हैं ! उन्हें अनादि माना गया है! मतलब, जो हमेशा से था, जिसके जन्म की कोई तिथि नही!" कथक, भरतनाट्यम करते वक्त भगवान शिव की जो मूर्ति रखी जाती है, उसे "नटराज" कहते है!" किसी भी देवी-देवता की टूटी हुई मूर्ति की पूजा नही होती! लेकिन शिवलिंग चाहे कितना भी टूट जाए फिर भी पू



महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि 2019कल फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी– महाशिवरात्रि पर्व | वर्ष में प्रत्येकमास की कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि मास शिवरात्रि कहलाती है |इनमें दो शिवरात्रि विशेष महत्त्व की मानी जाती हैं – फाल्गुन माह की शिवरात्रिजिसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है और इसे शिव-पार्वती के विवाह का प्रतीक मानाजाता है | और



अष्टमी-नवमी के दिन कन्या पूजन के समय अपनी राशि अनुसार करें दान, चमक जाएगा भाग्य

शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य सुख-समृद्धि व उन्नति का कारक बनता है। जीवन में शुख-शांति लाने के लिए हरेक व्यक्ति को अपने सामर्थय के अनुसार जरूरतमंद लोगों में दान अवश्य करना चाहिए। जो व्यक्ति दान करता है उस व्यक्ति के परिवार में हमेशा शुख समृद्धि बनी रहती है। यदि यही दान अ



नवरात्रि का सातवाँ दिन: बेहद खास होती है माँ कालरात्रि की पूजा शारदीय नवरात्रि में

माता कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है। इन्हें देवी पार्वती के समतुल्य माना गया है। देवी के नाम का अर्थ- काल अर्थात् मृत्यु/समय और रात्रि अर्थात् रात है। देवी के नाम का शाब्दिक अर्थ अंधेरे को ख़त्म करने वाली है।माता कालरात्रि का स्वरूपदेवी कालरात्रि कृष्



इस नवरात्री में 428 साल बाद बनने वाले संयोग से इन राशियों का होगा भाग्योदय

इस बार की नवरात्र में 428 साल एक अद्भुत संयोग बन रहा है। इसबार की नवरात्रि में देवी पूजा के नौ के बजाए 10 दिन मिलने वाले हैं। इस बार नवरात्रि के नौ के बजाय 10 दिन की है। ऐसा माना जा रहा है कि इससे पहले ये संयोग 1589 में बना था इसके बाद यह संयोग इस साल बन रहा है। इस साल के



शिव स्तुति

शिवस्तुति:आज श्रावण कृष्ण त्रयोदशी / चतुर्दशी को प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि कापावन पर्व है | हम सभी ने देखा काँवड़ में गंगाजल भर कर लाने वाले काँवड़यात्री शिवभक्तों का उत्साह | न जाने कहाँ कहाँ से आकर पूर्णश्रद्धा के साथ हरिद्वार ऋषिकेश तक की लम्बी यात्रा करके ये काँवड़



सावन: शिव की रात्रि

कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में पुरे वर्ष में कुल 12 शिवरात्रियां आती है जिनमे से सबसे मुख्य महाशिवरात्रि को माना जाता है। लेकिन इसके अलावा भी एक शिवरात्रि है जिसे हिन्दू धर्म में बहुत श्रद्धा के



नारी सृष्टि निर्माता के रूप में

आज के लेख की शुरुआत दुर्गा सप्तशती के इस श्लोक से करता हूँ इसमें कहा गया है...विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः, स्त्रियाः समस्ताः सकला जगत्सु।त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्, का ते स्तुतिः स्तव्यपरापरोक्तिः॥ - दुर्गा सप्तशती अर्थात्:- हे देवी! समस्त संसार की सब विद्याएँ तुम्हीं से निकली है तथा सब स्त्रियाँ तुम



आज से मंदिरों में गूंजेगा..या देवी सर्वभूतेषु...और बजेंगे घंट-घड़ियाल

देवी आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र गुरुवार से आंरभ हो रहा है। इसी के साथ मां भगवती के आगमन के साथ मंदिरों और घरों में कलश स्थापना और पूजा -अर्चना शुरू हो जाएगी। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा के लिए जिलेभर के सभी मंदिर सजाए जा चुके हैं।  नवरात्र के पहले दिन से ही देवी मंदिरों में श्रद्धालु



शिब और शिबरात्रि (धार्मिक मान्यताएँ )

 कविता ,आलेख और मैं : शिब और शिबरात्रि (धार्मिक मान्यताएँ )



शिव है भोले

मैं इस साल शिवरात्रि में विशेष पूजा आयोजित करवा रहा हूँ , आप सब आमंत्रित है . #शिवरात्रि 





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