रिश्ते

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टूटते - बिखरते रिश्ते

आज कल के दौड के टूटते बिखरते रिश्तो को देख दिल बहुत वय्थित हो जाता है और सोचने पे मज़बूर हो जाता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?आखिर क्या थी पहले के रिश्तो की खुबिया और क्या है आज के टूटते बिखरते रिश्तो की वज़ह ? आज के इस व्यवसायिकता के दौड में रिश्ते



अभावों के होते हैं ख़ूबसूरत स्वभाव

आज एक चित्र देखा मासूम फटेहाल भाई-बहन किसी आसन्न आशंका से डरे हुए हैं और बहन अपने भाई की गोद में उसके चीथड़े



ममता की माँ, रिश्ते की बुआ

अभी अभी सुना कि एक और हृदयविशालिता की देवी बिछलाकर अपने ही आँगन में गिर गई। टूट गई उसकी वो पुरानी और मजबूत पसलियां जो पुरे जीवन दौड़ दौड़ कर घर से लेकर रिश्ते- नातों तक के हर हाथों को मजबूत करती रही है। आज तक वो जिन हाथों को चूमती रही, दुलारत



रिश्ते

जहाँ तक रिश्तों का प्रश्न है लोगो का आधा समय अंजान लोगो को इम्प्रेस करने में व्यतीत होता है ।आधा समय अपनों को इग्नोर करने में व्यतीत होता है ।





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