जानिए कब नहीं करते लोग मदद

हमें अपनी ज़िंदगी की जिम्मेदारियां खुद हीउठानी पड़ती है, लेकिन मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तो ऐसे में ये कहना कि वो हीअकेले सारे काम कर सकता है तो ये कहना गलत ही होगा। एक दूसरे के सहयोग से ही समाजआगे बढ़ता है लेकिन कब लोग मदद करने से मुंह फेर लेते है इसका उदाहरण बचपन



सिंदूर

"सिंदुर''ब्रह्मरंध नियंत्रण सिंदूर कापारा करता है।सुहागन का जीवनतनाव मुक्त करता है।।अनिद्रा मुक्त कर श्नायु तंत्र कोचैतन्य रखता है।।🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩परंपरा, धर्म जब ताखे पर रख डालाब्रह्मरंध्र का क्या दे फिर मित्र हवालानींद गई-सुख-चैन गया- झेलें तुर्राचित्त चंचल- स्वप्नों की हलचल 🌊🌊🌊🌊🌊🌊



माता पिता :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन देवता , दानव , यक्ष , गंधर्व आदि सबसे ही श्रेष्ठ कहा गया है | इस मानव जीवन को सभी योनियों में श्रेष्ठ इसलिए कहा गया है क्योंकि मनुष्य के समान कोई दूसरी योनि है ही नहीं | यह दुर्लभ मानव शरीर हमें माता-पिता के सहयोग से प्राप्त होता है यदि माता-पिता का सहयोग ना होता तो शायद यह दुर्लभ मानव



कैसा ये सभ्य समाज

इन्सानियत को हमने रुलाया है आज डर ने मुकाम दिल में बनाया है मंदिर से अधिक मधुशालाएं हैं ऐसा बदलाव अपने देश में आया है ये वस्त्रहीन सभ्यता अपने देश की नहीं पर्दा ही आज ,लाज पर से उठाया है बेकारी ,भूंख प्यास ने सबको रुलाया है भारत में यह कैसा अच्छा दिन आया है साहित्य से क्यों दूर हैं आज की पीढ़ियां इस



शिक्षक दिवस :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत विविधताओं का देश रहा है यहाँ समय समय पर समाज के सम्मानित पदों पर पदासीन महान आत्माओं को सम्मान देने के निमित्त एक विशेष दिवस मनाने की परम्परा रही है | इसी क्रम में आज अर्थात ५ सितम्बर को पूर्व राष्ट्रपति डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती "शिक्षक दिवस" के रूप में सम्पूर्ण भारत में मना



पुत्र एवं पुत्री :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार को गतिशील करने के लिए ब्रह्मा जी ने नर नारी का जोड़ा उत्पन्न करके मैथुनी सृष्टि की जिससे कि मानव की वंशबेल इस धराधाम पर विस्तारित हुई ! आदिकाल से ही एक धारणा मनुष्य के हृदय में बैठ गयी कि पुत्र होना आवश्यक है ! इतिहास / पुराण में अनेकों कथानक प्राप्त होते हैं जहाँ लोगों ने पुत्र प्राप्ति क



त्याग की मूर्ति नारी एवं हलछठ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की संकल्पना की थी इसलिए इसे पुरुष प्रधान समाज कहा जाने लगा परंतु ब्रह्मा जी जैसे आदि पुरुष भी बिना नारी का सृजन किये इस सृष्टि को गतिमान नहीं कर पाये | नारी त्याग , तपस्या एवं समर्पण की प्रतिमूर्ति बनकर इस धरा धाम पर अवतरित हुई | सनातन धर्म में प्रतिदिन कोई न कोई पर्व एवं त्



ममता का कर्ज उसने चुका दिया ?

ममता का कर्ज उसने चुका दिया ?डॉ शोभा भारद्वाज मैं इस संसमरण का निष्कर्ष नहीं निकाल सकी कुछ वर्ष पुरानी बात है मुस्लिम समाज के रोजे चल रहे थे ईद को अभी एक हफ्ता शेष था इन दिनों बाजारों की रौनक निराली होती हैं महिलाओं बच्चों के नये डिजाइन के रेडीमेड कपड़े आर्टिफिशियल ज्वेलरी चूड़ियां झूमर और न जाने क्



सदाचरण :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में व्रत , पूजन आदि करते रहने के विधान बताए गए हैं | उन सब का फल प्राप्त करने के लिए लोग तरह - तरह के अनुष्ठान करते हैं | इन अनुष्ठानों का एक ही उद्देश्य होता है -- परमात्मा की उपासना या परमात्मा को प्राप्त करने का उपाय कहा जा सकता है | यह सारे व्रत , सारे अनुष्ठान करने पर भी उसका फल मा



दस्तक

दस्तकफिर वही शोर .....बाहर भी और अंदर भी ....!अंतः करण में गूँजते शब्द दस्तक देने लगे ।विद्यालय में नए सत्र के कार्यों के लिए सबके नाम घोषित किए जा रहे थे ।अध्यापकों की भीड़ में बैठी …..कान अपने नाम को सुनने को आतुर थे ,मगर..... नाम, कहीं नहीं.....!क्यों...? बहुत से सवाल मन में आ रहे थे । आस -पास बह



समाज सुधारक राजा राममोहन राय

समाज सुधारक राजा राम मोहन रायडॉ० शोभा भारद्वाजचिता से अर्श तकवैदिक काल के प्रारम्भ से अनेक महान स्त्रियाँ पुरुषों के समान विद्वान रही हैं | कन्या को विवाह के लिए वर चुनने की पूरी स्वतन्त्रता थी यहाँ तक परिवार एवं पति की सहमती से नियोग द्वारा उत्पन्न सन्तान को कुल का नाम मिलता था युवक युवती की सहमती



बेबात की जलन

🔥🔥 बेबात जलन 🔥🔥ब्याह किये मुझसे,माँ-बाप के संग बैठ समय-जाया करते हो!माना आँचल पाया माँ का,मुझको अवहेलित तुम करते हो!!पिता ने पढ़ा-लिखा जॉब दिलाया,माँ को सैलरी भी देते हो!मेरी भी कुछ हैं जरुरते,मायके भी जाने नहीं मुझे देते हो!!माँ ने खीर जली बना लाई,चाट कर- कटोरी साफ करते हो!मैंने रोटी चुपड़ दाल सं



नारी प्रतारणा- एक प्रश्न चिन्ह

❓❓नारी प्रतारण❓❓दूध का कर्ज चुकाने वालों कोइतिहास के पन्नों में लिखा देखा हैपित्रिभक्त दैत्यगुरु परशुराम को- 'मातृहंता' होते भी देखा हैभुमिगत् होती सीता कोमर्यादा पुरुषोत्तम तक ने देखा हैभयाक्रांत बहन सुभद्रा पाषाण बनी, सहोदरा-मेला भी देखा हैभारत माँ की बेटियों को देश हेतु विधवा बनते युगों से देखा ह



सफाई कामगार समुदाय को उनके पुशतैनी कार्यो को छोड़ने की अपील करती हुई नरेन्द्र वाल्मीकि की कविता "छोड़ दो"

छोड़ दोआधुनिकता केदौर मेंनित नई-नईखोज हो रही है।कभी मंगल तोकभी चाँदपर बसने की टोह हो रही है।ये सबदेखते हुए भीतुम -नही सीख रहे हो,अभी भीजीवन ज



युवा कवि नरेन्द्र वाल्मीकि की समाज को प्रेरित करने वाली कविता "उजाले की ओर"

उजाले की ओर हमारे पूर्वजहमारा अभिमान है,हमारे पूर्वज इसदेश की मूल संतान हैं,हमारे पूर्वज कभीशासक हुआ करते थेइस देश के।हमारे पूर्वजों कोगुलाम बनाकरकराये गये घृणित कार्यअब समय आ गया हैइन कार्यों को छोड़ने काअपने पूर्वजों के गौरव कोआगे बढ़ान



अर्जुन के तीर

🔥⚜🔥⚜🔥⚜🔥⚜🌸⚜🔥 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹 *मनुष्य की पहचान उसके संस्कार से होती हैं ! मनुष्य को जैसे संस्कार मिले होते हैं उसकी वैसी ही मानसिकता भी हो जाती है | जहाँ सकारात्म मानसिकता मनुष्य को सच्चरित्रवान बनाती है वह



अर्जुन के तीर

🔥⚜🔥⚜🔥⚜🔥⚜🌸⚜🔥 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹 *इस संसार में वैसे तो एक से बढ़कर एक बलधारी हैं परंतु सबसे बलवान यदि कोई है तो वह है समय ! समय इतना बलवान है कि जब वह अपने पर आता है तो अच्छे - अच्छे बलधारी धूल चाटने लगते हैं



अर्जुन के तीर

🔥⚜🔥⚜🔥⚜🔥⚜🌸⚜🔥 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹 *विद्वता मनुष्य को विनयशील बनाती है , क्योंकि जिस डाली पर जितने फल होते हैं वह डाली उतनी ही ज्यादा झुकी रहती है | परंतु आज विद्वता का अर्थ ही बदलकर रह गया है आज विद्वानों में अ



प्रत्यक्ष देवी देवता हैं माता पिता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य जीवन भर अनेक प्रकार के क्रियाकलाप सम्पादित करता रहता है ! समय - समय पर नाना प्रकार की कामनायें हृदय में प्रकट होती रहती हैं इन कामनाओं की पूर्ति के लिए मनुष्य अनेक प्रकार के उपाय किया करता है | कुछ लोग कर्मवीर होते हैं जो अपनी प्रत्येक कामना अपनी कर्म कुशलता से



प्रायश्चित करना सीखें :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य को गलतियों का पुतला कहा जाता है , मानव जीवन में स्थान - स्थान पर मनुष्य जाने - अनजाने कोई न कोई भूल करता रहता है जिसके कारण उसके जीवन की दिशा एवं दशा भी परिवर्तित हो जाती है | यदि मनुष्य को गलतियों का पुतला कहा गया है तो उसे अपनी गलतियों का सुधार करने का अवसर प्रदान किया गया है



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