अब महिला सम्मान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ।

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पहचानें मानवोचित कर्म :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर जन्म लेकर मनुष्य अपने जीवन में अनेकों क्रियाकलाप करता है परंतु इस मानव जीवन को उच्च शिखर पर ले जाने के लिए मनुष्य में दो आस्थायें प्रकट की जानी चाहिए प्रथम तो यह है कि अपने जीवन में विवेकवान , चरित्रवान सुसंस्कृत और प्रतिभावान बने | क्योंकि ऐसा करके ही मनुष्य सभ्य समुदाय का प्राणी गि



संस्कार विहीन समाज :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में इस संसार में उपस्थित समस्त पदार्थ किसी न किसी रूप में महत्वपूर्ण है परंतु यदि इनका सूक्ष्म आंकलन किया जाय तो सबसे महत्वपूर्ण हैं मनुष्य के संस्कार | इन्हीं संस्कारों को अपना करके मनुष्य पदार्थों से उचित अनुचित व्यवहार करने का ज्ञान प्राप्त करता है | हमारे देश भारत की संस्कृति संस्कार



बढ़ते यौन अपराध का कारण :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे देश की संस्कृति इतनी महान रही है कि समस्त विश्व ने हमारी संस्कृति को आत्मसात किया | सनातन ने सदैव नारी को शक्ति के रूप में प्रतिपादित / स्थापित करते हुए सम्माननीय एवं पूज्यनीय माना है | इस मान्यता के विपरीत जाकर जिसने भी नारियों के सम्मान के विपरीत जाकर उनसे व्यवहार करने का प्रयास किया है उसक



पशुता का करें त्याग :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर परमात्मा ने अनेकों प्रकार के पशु-पक्षियों , जीव - जंतुओं का सृजन किया साथ ही मनुष्य को बनाया | मनुष्य को परमात्मा का युवराज कहा जाता है | इस धराधाम पर सभी प्रकार के जीव एक साथ निवास करते हैं , जिसमें से सर्वाधिक निकटता मनुष्य एवं पशुओं की आदिकाल से ही रही है | जीवमात्र के ऊपर संगत का प



आज के रावण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मनुष्य इस धरा धाम पर जन्म लेकर के अपने कर्मों के अनुसार समाज में स्थान पाता है , यदि उसके कर्म एवं आचरण समाज के हित में है तो वह समाज में पूज्यनीय हो जाता है वही उच्च कुल में जन्म लेकर के यदि उसका आचरण निम्न स्तरीय तथा समाज एवं मर्यादा के विपरीत होता है तो वह समाज में स्थान स्थान पर निंदित तो होता



क्या आप भी है ओल्ड स्कूल लवर.....

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सुधार की कैसी चाह ?

है जुटे हुए कुछ लोगसुधार में.है जुटे कुछ लोग आधुनिकताकी दुहाई देकर पंरपराओं कोप्राचीन बताने में.तो कुछ पंरपराओं की आड़ लेकरबदलाव को ठुकराने में.है जुटे हुए कुछ लोगअपनी ही बात सही मनवाने में.उनकी इच्छाओं का नहीं कोईअंत, सिर्फ इसलिए जुटे है व



क्या सचमुच जो काम आप कर रहे है वो आपके स्वास्थ्य लिए सही है ?

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कहीं आप अपने बच्चों को भेड़चाल का हिस्सा तो नहीं बनाना चाहते है।

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बॉर्नवीटा लिटिल चैंप का छोटा पैकेट

कुछ घटनाएं आपको और हमें ऐसे कचोटती हैं की पुछिये मत! कल एक ऐसा ही वाकया हुआ। औनलाइन दवाइयाँ खरीदने का दौर अब जबकि शुरू हो चुका है, फिर भी मैं दवा की दुकान पर ही जाना पसंद करता हुँ। इसके कई कारण हैं, जिसको इस पटल पर बता पाना शायद संभव नहीं है। सो कल भी पूर्वी दिल्ली की एक दवा-दुकान पर चला गया। मेरी द



शिक्षा एवं दीक्षा :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में प्राय: दो शब्द सुनने को मिलते हैं शिक्षा एवं दीक्षा | शिक्षा एवं दीक्षा मानव जीवन की दिशा एवं दशा परिवर्तित करने में सक्षम होती है | जहाँ शिक्षा का अर्थ होता है ज्ञानार्जन करना वहीं दीक्षा का अर्थ दिशा प्राप्त करना बताया गया है | पूर्वकाल में गुरु के द्वारा पहले शिष्य की योग्यता के अनु



वैचारिक आतंकवाद :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह न



आज की युवा पीढ़ी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!*सनातन धर्म की दिव्यता विश्व विख्यात है | संपूर्ण विश्व ने सनातन धर्म के ग्रंथों को ही आदर्श मान कर दिया जीवन जीने की कला सीखा है | प्राचीन काल में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा नहीं था जितना इस समय है परंतु हमारे पूर्वज अनुभव के आधार पर समाज के सारे कार्य कुशलता से संपन्न कर दे



परिवार का महत्त्व :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया है , जिनमें से सर्वश्रेष्ठ आश्रम गृहस्थाश्रम को बताया गया है , क्योंकि गृहस्थ आश्रम का पालन किए बिना मनुष्य अन्य तीन आश्रम के विषय में कल्पना भी नहीं कर सकता | मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है समाज का निर्माण परिवार से होता है | व्यक्ति के जीवन में



एक बच्चे के मन की उलझन

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साधक , सिद्ध , सुजान :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर जीवन जीने के लिए जिस प्रकार हवा , अग्नि एवं अन्न / जल की आवश्यकता होती है उसी प्रकार एक सुंदर जीवन जीने के लिए मनुष्य में संस्कारों की आवश्यकता होती है | व्यक्ति का प्रत्येक विचार , कथन और कार्य मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है इसे ही संस्कार कहा जाता है | इन संस्कारों का समष्टि रूप ही चर



क्यों बेअसर हो जाते है मोटिवेशनल विचार कुछ वक्त बाद ?

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आइये कुछ बदलें -2

मित्रों , मैंने पहले एक लेख में बदलाव के कुछ सरल विषय लिखे थे जिनमें हमारे समाज को बदलने की आवश्यकता है. फिर मैंने ट्रैफिक के केवल तीन बिंदुओं पर आप सब का ध्यान आकर्षित किया था-फालतू हॉर्न बजाना; वाहन ठीक से पार्क करना एवं द



ऐसे करे दहेज के दानव का नाश

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