माता का दायित्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मनुष्य अपने जीवनकाल में अनेक प्रकार के मार्गदर्शक एवं गुरुओं की शरण में जाता है परंतु इन सबसे पहले जब मनुष्य इस संसार में आता है तो जिस प्रथम गुरु से उसका सामना होता है उसे इस सृष्टि में माँ कहा जाता है | बालक का प्रथम क्रीड़ास्थल माता की गोद की होती है , शास्त्रों में माता को बालक का प्रथम गुरु कह



चरित्र निर्माण :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत आदिकाल से संस्कृति एवं शिक्षा के विषय में उच्च शिखर पर रहा है | विश्व के लगभग समस्त देशों ने हमारे देश भारत से शिक्षा एवं संस्कृति का ज्ञान अर्जित किया है | इतिहास के पन्नों को देखा जाय तो जितना दिव्य इतिहास हमारे देश भारत का है वह अन्यत्र कहीं भी नहीं देखने को मिलता है | आदि काल से



बेटी

बेटीबेटे से बाप का बटवारायुगों से होता चला आया है!माँ को बाप से विलगा- शपीड़ा तक भी बटवाया है!!उसर कोख का ताना लेकोर्ट का चक्कर मर्द लगता है!कपाल क्रिया कर वहआधे का हक सहज पा जाता है!!बेटी सिंदूर लगवाएक साड़ी में लिपट साथ हो लेती है!माँ-बाप का दु:ख सुनते हींवह दौड़ी चली आती है!!मरने पर वह साथ न हो



सहिष्णुता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में प्राय: एक शब्द सुनने को मिलता है सहिष्णुता एवं असहिष्णुता | आज यह शब्द अधिकतर प्रयोग किया जा रहा है , तो इसके विषय में जान लेना परम आवश्यक है कि सहिष्णुता कहा किसे कहा जाता है | सहिष्णुता का तात्पर्य है सहनशीलता ! किसी दूसरे के विचारों से सहमत ना होने के बाद भी उसे समझना एवं उसका सम्



नस नस में फैल रहा नशा :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर मनुष्य के लिए वैसे तो अनेक प्रकार के सुख ऐश्वर्य एवं संपत्ति विद्यमान है परंतु किसी भी मनुष्य के लिए सबसे बड़ा धन उसका स्वास्थ्य होता है | अनेकों प्रकार के ऐश्वर्य होने के बाद भी यदि स्वास्थ्य नहीं ठीक है तो वह समस्त ऐश्वर्य मनुष्य के लिए व्यर्थ ही हो जाता है इसलिए मनुष्य को सबसे पहल



अपनी पहचान बनाकर रखें :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से समस्त विश्व में हमारी पहचान हमारी सभ्यता और संस्कृति के माध्यम से होती रही है | समस्त विश्व नें हमारी पहचान का लोहा भी माना है | विदेशों में हमें "भरतवंशी" कहा जाता है | हमारे पूर्वजों ने अपनी पहचान की कीर्ति पताका समस्त विश्व में फहराई है | मनुष्य की पहचान उसके देश समाज एवं परिवार से होत



अर्जुन के तीर

🔥⚜🔥⚜🔥⚜🔥⚜🌸⚜🔥 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹 *युवा शक्ति राष्ट्र शक्ति का नारा भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक "स्वामी विवेकानन्द जी" ने दिया था | आज के युवा कि दिशा और दशा परिवर्तित हो गयी है | आज अधिकतर युवा गांजे , भाँग ,



खबरों से कहां गायब हो गया विकास ?

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सृष्टि की धुरी नारी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि का सृजन परमात्मा ने पंच तत्वों को मिलाकर के किया है , यह पांच तत्व मिलकर प्रकृति का निर्माण करते हैं | प्रकृति एवं पुरुष मे ही सारी सृष्टि व्याप्त है , पुरुष के बिना प्रकृति संभव नहीं है और प्रकृति के बिना पुरुष का कोई अस्तित्व भी नहीं है | इस प्रकार नर नारी के सहयोग से सृष्टि पुष्पित पल्



हम बदलेंगे सब बदलेगा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारत देश अपनी महानता , पवित्रता , सहृदयता एवं अपनी सभ्यता / संस्कृति के लिए संपूर्ण विश्व में जाना जाता रहा है | लोक मर्यादा का पालन करके ही हमारे महापुरुषों ने भारतीय सभ्यता की नींव रखी थी | मानव जीवन में अनेक क्रियाकलापों के साथ लज्जा एक प्रमुख स्थान रखती है लोक लज्जा एक ऐसा शब्द माना जाता था जिस



नववर्ष :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस विश्व का सबसे प्राचीन एवं पुरातन धर्म यदि कोई है तो वह सनातन है | सनातन धर्म की प्रत्येक मान्यता एवं परंपरा मानव मात्र के कल्याण के लिए तो है ही साथ ही सनातन धर्म के प्रत्येक क्रियाकलाप में प्रकृति का सामंजस्य एवं वैज्ञानिकता का समावेश भी रहता है | यह सृष्टि निरंतर चलायमान है दिन बीतते जाते हैं



बेटा या बेटी!!!

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩बेटा बचाओ- बेटी बहु बन कहीं जा घर बसाएगी!जो बहु बन आए वह क्या (?) ''बेटी'' बन पाएगी!!सुसंस्कार वरण कर पिया का घर-संसार बसाएगी!उच्च घर में जा कर वह निखरेगी वा सकुचाएगी!!विदा करते तो शुभ कहते पुरोहित् अभिवावक हैं!माँ-बाप का हुनर समेटे, वही बनती बड़भागिन है!!बेटा पास बैठ



गुहार क्यों ?

दोस्तों ,मेरी यह कविता समाज के उन वहशी गुनहगारों के लिए है, जो वहशियत की सीमाएँ लाँघने के बाद भी स्वयं के लिए माफ़ी की उम्मीद रखते हैं। गुहार क्यों ?साँप तुम सभ्य तो हुए नहीं ,फिर ये दया की गुहार क्यों ?हाँ , यह तेरा ज़हर ही है ,जो तुझे असभ्य बनाता है ,जो तेरे मस्तिष्क के साथ , हलक में आकर वहशियत फै



षडयंत्र :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही संपूर्ण विश्व में विशेषकर हमारे देश भारत में सत्ता प्राप्ति के लिए मनुष्य के द्वारा अनेक प्रकार के क्रियाकलाप किए जाते रहे हैं | कभी तो मनुष्य को उसके सकारात्मक कार्यों एवं आम जनमानस में लोकप्रियता के कारण सत्ता प्राप्त हुई तो कभी मनुष्य सत्ता प्राप्त करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद आदि क



अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ ये तो नहीं......

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रामराज्य की कल्पना कैसे फलीभूत होगी ?? :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*किसी भी देश का निर्माण समाज से होता है और समाज की प्रथम इकाई परिवार है | परिवार में आपसी सामंजस्य कैसा है ? यह निर्भर करता है कि हमारा समाज कैसा बनेगा | परिवार में प्राप्त संस्कारों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में क्रियाकलाप करता है | हम इस भारत देश में पुनः रामराज्य की स्थापना की कल्पना किया करते



साहित्यिक चोरी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से मनुष्य में सद्गुण एवं दुर्गुण साथ - साथ उत्पन्न् हुए इस धराधाम पर अनेकों सदुगुणों को जहाँ मनुष्य ने स्वयं में आत्मसात किया है वहीं दुर्गुणों से भी उसका गहरा सम्बन्ध रहा है | मनुष्य में सद्गुण एवं दुर्गुण उसके पारिवारिक परिवेश एवं संस्कारों के अनुसार ही प्रकट होते रहे हैं | सम्मान , सदाचार



विप्लव

🌺 🌻 🌹🌷🌹 🌻 🌺गदा - अग्निवाण - सुदर्शन चक्र -ब्रह्मास्त्र अवतारों ने बहुत चलाया🌺🌸🌻🌹🌹🌻🌸🌺लाखों शवों से 'कुरुक्षेत्र' को पटायासुर्य देव अस्त होते होते उगते ठहर गया🌺 🌸🌻🌹🌹🌻🌸 🌺'रुद्रावतार' ध्वज पर चड़ा, चक्का धस गयाधर्म का झंडा फिर गड़ा, महाभारत बन गया🌺🌸🌻🌹🌷🌹🌷🌹🌻🌸🌺ऋषियों के तपो



दोषी कौन.......?

दोषी कौन.......? आज विद्यालय में बहुत चहल -पहल थी। विद्यार्थियों को अर्धवार्षिक परीक्षाओं के रिपोर्ट कार्ड मिल रहे थे। इस बदलते दौर में विकास को बहुत तेजी से छू लेने को आतुर बच्चे और उनके माता-पिता, रिपोर्ट कार्ड लेकर आगे बढ़ते जा रहे थे। कुछ में अपनी आशाओं के अनुरूप अंक न देखकर ,चेहरे पर ख़ुशी नहीं थ



भारत में “मी टू” आंदोलन की प्रासंगिकता

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