सनातनी विधाता छन्द

सनातनी विधाता छन्द===============================१२२२ १२२२ १२२२ १२२२नज़ारे देखकर सावन बरसने मेघ आते हैं lशराफ़त देखकर उनकी तड़पते लोग जाते हैंllइमारत यह खड़ी कैसे पसीनें खून हैं उनके ,कयामत देखती दुनियाँ शराफ़त भूल जाते हैंllनज़ाकत वक्त का देखो कहर ढाते रहे नित दिन,तवायफ़ बन लुटी शबनम ग़रीबी को भुना



भारतीय कौन ?

भारतीय शब्द का आधार भारत है व भारत का आधार हमारी सनातन पुरातन वैदिक सभ्यता व संस्कृति.हिंदू शब्द का प्रचलन यहाँ के मूल निवासियों के लिए प्रोयोगित किया जाता है जो यहाँ हज़ारों वर्षों से अलग अलग अलग पंथो को स्वीकारकर अंगिगत करते चले आ रहे है।अंतर दोनो में कुछ नहीं है बस कोई इतिहास में इस्लामिक आक्रांत



जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु: :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सकल सृष्टि में समस्त जड़ चेतन के मध्य मनुष्य सिरमौर बना हुआ है | जन्म लेने के बाद मनुष्य को अपने माता - पिता एवं सद्गुरु के द्वारा सत्य की शिक्षा दी जाती है | यह सत्या आखिर है क्या ? तीनो लोक चौदहों भुवन में एक ही सत्य बताया गया है वह है परमात्मा | जिसके लिए लिखा भी गया है :-- "ब्रह्म सत्यं जगत



भगवान का वांग्मय स्वरूप है श्रीमद्भागवत :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के आदिकाल में वेद प्रकट हुए , वेदों का विन्यास करके वेदव्यास जी ने अनेकों पुराणों का लेखन किया परंतु उनको संतोष नहीं हुआ तब नारद जी के कहने से उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की | श्रीमद्भागवत के विषय में कहा जाता है यह वेद उपनिषदों के मंथन से निकला हुआ ऐसा नवनीत (मक्खन) है जो कि वेद



षट्कर्म :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में षट्कर्मों का विशेष स्थान है | जिस प्रकार प्रकृति की षडरितुयें , मनुष्यों के षडरिपुओं का वर्णन प्राप्त होता है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में षट्कर्म भी बताये गये हैं | सर्वप्रथम तो मानवमात्र के जीवन में छह व्यवस्थाओं का वर्णन बाबा जी ने किया है जिससे कोई भी नहीं बच सकता | यथा :- जन्म ,



सनातन धर्म संस्कार व त्योहार

📿📿📿📿📿📿📿📿📿 *जय श्रीमन्नारायण*🌹☘🌹☘🌹☘🌹☘🌹 *श्री राधे कृपा हि सर्वस्वम* 🌲🌳🌲🌳🌲🌳🌲🌳🌲 *सनातन संस्कृति एवं त्योहार* समस्त मित्रों एवं श्रेष्ठ जनों को दीपावली गोवर्धन पूजा यम द्वितीय की हार्दिक शुभकामनाएं यह पावन पंच पर्व जन-जन में ज्ञान अन्न धन से परिपूर्ण करें यही कामना है आज पा



अन्नकूट :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन पा करके मनुष्य लंबी आयु जीता है | जीवन को निरोगी एवं दीर्घ जीवी रखने के लिए मनुष्य की मुख्य आवश्यकता है भोजन करना | पौष्टिक भोजन करके मनुष्य एक सुंदर एवं स्वस्थ शरीर प्राप्त करता है | मानव जीवन में भोजन का क्या महत्व है इसको बताने की आवश्यकता नहीं है , नित्य अपने घरों में अनेकों प्रकार



गोवर्धन पूजा अर्थात प्रकृति पूजा :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*कार्तिक माह में चल रहे "पंच महापर्वों" के चौथे दिन आज अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा | भारतीय सनातन त्योहारों की यह दिव्यता रही है कि उसमें प्राकृतिक , वैज्ञानिक कारण भी रहते हैं | प्रकृति के वातावरण को स्वयं में समेटे हुए सनातन धर्म के त्योहार आम जनमानस पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ते हैं



सर्वपितृ अमावस्या :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत विभिन्न मान्यताओं और मान्यताओं में श्रद्धा व विश्वास रखने वाला देश है | इन्हीं मान्यताओं में एक है पितृयाग | पितृपक्ष में पितरों को दिया जाने वाला तर्पण पिण्डदान व श्राद्ध इसी श्रद्धा व विश्वास की एक मजबूत कड़ी है | पितृ को तर्पण / पिण्डदान करने वाला हर व्यक्ति दीर्घायु , पुत्र-पौत्र



सर्व श्रद्धया दत्त श्राद्धम् :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे सनातन धर्म-दर्शन के अनुसार जिस प्रकार जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु भी निश्चित है; उसी प्रकार जिसकी मृत्यु हुई है, उसका जन्म भी निश्चित है | ऐसे कुछ विरले ही होते हैं जिन्हें मोक्ष प्राप्ति हो जाती है | पितृपक्ष में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष के तथा तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों



श्राद्ध की आवश्यकता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारतीय संस्कृति में जन जन का यह अटूट विश्वास है कि मृत्यु के पश्चात जीवन समाप्त नहीं होता | यहां जीवन को एक कड़ी के रूप में माना गया है जिसमें मृत्यु भी एक कड़ी है | प्राय: मृत व्यक्ति के संबंध में यह कामना की जाती है कि अगले जन्म में वह सुसंस्कारवान तथा ज्ञानी बने | इस निमित्त जो कर्मकांड संपन्न



महालक्ष्मी पूजा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म इतना बृहद एवं विस्तृत है कि इसके विषय में जितना जानने का प्रयास करो उतनी ही नवीनता प्राप्त होती है | सनातन धर्म के संपूर्ण विधान को जान पाना असंभव सा प्रतीत होता है | जिस प्रकार गहरे समुद्र की थाह पाना एवं उसे तैरकर पार करना असंभव है उसी प्रकार सनातन धर्म की व्यापकता का अनुमान लगा पाना



श्राद्ध में दुर्गुणों का त्याग आवश्यक :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण करना अनिवार्य बताया गया है | जो व्यक्ति तर्पण / श्राद्ध नहीं कर पाता है उसके पितर उससे अप्रसन्न होकर के अनेकों बाधाएं खड़ी करते हैं | जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के लिए श्राद्ध एवं तर्पण अनिवार्य है उसी प्रकार श्राद्ध पक्ष के कुछ न



पितरों को श्राद्ध की प्राप्ति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में पितरों के लिए श्राद्ध की अनेक विधियां बताई गई हैं , इन सभी विधियों में सबसे सरल दो विधि बताई गई है :- पिंडदान एवं ब्राह्मण भोजन | मृत्यु के बाद जो लोग देवलोक या पितृलोक में पहुंचते हैं वह मंत्रों के द्वारा बुलाये जाने पर उन लोकों से तत्क्षण श्राद्घदेश में आ जाते हैं और निमंत्रित ब्



त्रिपिण्डी श्राद्ध :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म के अनुयायी अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए धर्म और शास्त्रों के अनुसार हविष्ययुक्त पिंड को प्रदान करते हैं यही कर्म श्राद्ध कहलाता है | जब मनुष्य अपने पितरों के लिए श्रद्धा करते हैं तो इससे उनके पितरों को शांति मिलती हैं और वे सदैव प्रसन्न रहते हुए दीर्घायु, प्रसिद्धि एवं कुसलता प्



दान की परिभाषा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*दान की परिभाषा:-----**द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् !* *चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते !!**अर्थात :-- “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन भेद और तीन विनाश साधन हैं, ऐसा कहा जाता है ।”**👉 दान के दो हेतु हैं :--- दान का थोडा होना



श्राद्ध के अधिकारी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मनुष्य की अंतिम क्रिया से लेकर की श्राद्ध आदि करने के विषय में विस्तृत दिशा निर्देश दिया गया है | प्रायः यह सुना जाता है पुत्र के ना होने पर पितरों का श्राद्ध तर्पण या फिर अंत्येष्टि क्रिया कौन कर सकता है ? या किसे करना चाहिए ?? इस विषय पर हमारे धर्म ग्रंथों में विस्तृत व्याख्या दी ह



श्राद्ध की सरलतम विधि :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में पितृऋण से उऋण होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को समय समय पर विशेष रूप से श्राद्घपक्ष (पितृपक्ष) में अपने पितरों के लिए तर्पण , श्राद्ध / पिंडदानादि करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है | बिना श्राद्ध / तर्पण किये व्यक्ति सुखी नहीं रह सकता तथा पितृदोष से ग्रसित हो जाता है | वैसे तो हमारे ध



समुद्रमन्थन का रहस्य :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे सनातन ग्रंथों में एक कथानक पढ़ने को मिलता है जो समुद्र मंथन के नाम से जाना जाता है | देवताओं एवं दैत्यों ने अमृत प्राप्त करने के लिए मन्दाराचल को मथानी एवं वासुकि नाग को रस्सी बनाकर समुद्र का मन्थन किया | अथक परिश्रम से मन्थन करने के बाद समुद्र से अमृत निकला परंतु अमृत निकलने के पहले समुद्र स



अनन्त चतुर्दशी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मानव कल्याण के लिए अनेकों व्रत विधान की एक लंबी श्रृंखला है जो कि जो मानव जीवन के कष्टों को हरण करते हुए मनुष्य को मोक्ष दिलाने का साधन भी है | इसी क्रम में भाद्रपद शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को "अनंत चतुर्दशी" का व्रत किया जाता है | भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है यह व्रत | अनन्त अर्



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