1


पितृ सत्ता

समाजसामाजिक मान्यताओं के आधार पर चलता है। लम्बे समय से चली आ रहीमान्यतायें को आधार बनाकर क़ानून बना दिया जाता है। मान्यताओंके आधार पर ही समाज में संतान की जाति-धर्म को तय किया जाता है । दो तरह की सत्ताएं होती हैं , एक - पितृ सत्ता , दूसरी मात्र सत्ता। संतान कीजाति व् धर्म जब पिता की जाति



मेरे लिए

कुछ तो जीते है मकसद के लिए, कुछ बिना मकसद जिए जा रहे है. कुछ नहीं कर पाए जो इस जिंदगी में, मज़हब के नाम पर लड़े जा रहे है. सत्ता की भूख ने छुड़ाया घर अपना, अब दुसरो के घर भी छुड़वा रहे है. जिन्हे फ़िक्र ना थी कभी अपने घर की, दुनिया



सियासत, समाजवाद और सत्ता

आसनसोल (जहाँगीर आलम) :- जिस प्रधानमंत्री का मुद्दा शुरूआती दौर से ही गरीबी और विकास की रही हो, उस प्रधानमंत्री के ऐसे फैसले पर आश्चर्य कैसा? लेकिन सवाल तो उठते थे और उठते रहेंगे. ये बात और है की सरकारे अपने कार्यकाल के दौरान गरीबो और ग्रामी



आप ही सोंचिये

एक देश में दो राजा थे, एक अँधा और एक काना. उस देश में 40 प्रतिशत ऐसे लोग थे जो अंधे थे, 40 प्रतिशत ऐसे थे जो काने थे, और 20 प्रतिशत लोगो की दोनो आँखे ठीक थी.अंधे लोग कानो से नफ़रत करते थे, काने अंधो से, और आँख वाले लोग अंधे और काने दोनो



500 - 1000 के नोट बंदी को लेकर देहात क्षेत्रों में खासा परेशानी, आपबीती बताई

फेझत तो बड़ी हॉवे लागल हो। सरकार चाहे जेतना कैह लो आर सत्ता पक्ष भी चाहे झुठलाय दो, सच तो यहे लागो कि आदमी सब के बड़ी तफलिक होय रहल हो। हां , ई बात दोसर हो कि कुछ आदमी एकरा हंसके सहे रहलो तो कुछ कुढ़ करके, पर सहे तो दुयो रहल हो। दू दिन से एते एते आदमी के पास पैसा



शिक्षा का अर्थ भुलाकर - धन का संयोजन ।‏

मंदिर वैदिक काल में एक ऐसी जगह होती थी जहाँ समाज का सबसे बुद्धिमान ब्यक्ति रहता था एवं वो उस समाज की गतिविधियों को देखते हुए आगे की रणनीति तय करता था। अपने अपने समाज की उन्नति के लिए लोग मन्दिरों में इच्छानुसार दान देते थें ताकि उस विद्वान को समाज के हित हेतु किये जा रहे



सत्ता का नशा

@@@@@@@@@@@@@@@@@@अहँकार भरे भाषण सुनकर,हो गयी एलर्जी ऐसी |आपातकाल के क्रूर दौर में ,हुई काँग्रेस से जैसी ||चाल चरित्र और चेहरे से,जो है काँग्रेस की बहना |लगी है वो जोड़ तोड़ में , कठिन हो गया सहना ||@@@@@@@@@@@@@@@@@@



17 दिसम्बर 2015

#सत्ता ज़हर है या मिलावट ज़हर है?

दृष्टिकोण और नजरिया दोनों अलग अलग हो सकते है? ईमानदार राजनीती में मिलावट भर्ष्टाचार का, भर्ष्टाचार में मिलावट ईमानदारी का ज़हर है?दबंग राजनीती में मिलावट शराफत का, शराफत वाली राजनीती में मिलावट दबंगई का ज़हर है?धर्म निरपेक्षता की राजनीती में धर्म का, और धर्म की राजनीती में मिलावट धर्म निरपेक्षता ज़हर ह





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x