शायरी



शेर

मेरे आँखों का आँसू क्यों तुम्हारे आँखों से बह रहा है तुम चुप हो मगर तुम्हारी चुप्पी सबकुछ कह रहा है जो कल गुज़री थी मुझपर उसका पछतावा तुम्हे आज क्यों तुम्हारा भी किसी ने दिल तोड़ दिया या तुमने शादी कर लिया



पैगाम

ख़ाली ही सही मेरी तरफ़ जाम तो आयाआप आ न सके आप का पैग़ाम तो आया-अश्विनी कुमार मिश्रा



ख़फ़ा

वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैंमगर उन से बात करने को जी चाहता हैरोज़ मिलते हैं उन से मगर बात नहीं होती हैभला हम क्या हमारी ज़िंदगी क्यान जाने हम में है अपनी कमी क्याबस तय ये हुआ कि मैं बुरा हूँइस से आगे तो इन से कोई बात नहीं होती है....-अश्विनी कुमार मिश्रा



चंद अलफ़ाज़ दिल के

■□■चंद अल्फाज़ दिल के■□■आपकी पारखी आँखों ने,पलकों पे जब से बिठा के रखा है।चुपके से उतर-टगर दिल की,धड़कनों में समातूफ़ान मचाए रखा है।।★☆★☆★☆★☆★☆★खुदकी ख़ुशबुओं से मदहोश,प्यार का ख़्वाब देखा है शायदउल्फ़त के काँटों की चुभन,दिल को नासाज़ किये रखा है।हुश्न तो होता है लाज़वाब सदा,सोहबत हुई- ईमान चकनाचूर किये रखा



चंद अलफ़ाज़ दिल के



आ न जाने को आ

ऐ दोस्त किसी रोज़ न जाने के लिए आतू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आमुझ को न सही ख़ुद को दिखाने के लिए आजैसे तुझे आते हैं न आने के बहानेऐसे ही बहाने से न जाने के लिए आआ फिर से मुझे न छोड़ के जाने के लिए आ-अश्विनी कुमार मिश्रा



शायरी

यूँ बेफिक्र होकर मेरी फिक्र क्यों करता है बात मोहब्बत की हो तो मेरा जिक्र क्यों करता है रब के जगह महबूब को रखो तो रब रूठ जाते हैं तुम तो दिल में हो...यूँ कदमों में सर क्यों झुकता है



इंतज़ार के लम्हें

■□■□■◇●□●◇■□■□■★☆★इंतजार के लम्हें★☆★★☆★☆★☆★☆★☆★☆★माना के इंतज़ार है दुश्वार लम्हें इनको खुर्दबीन से मत निहारा करो।हौसला ओ' दम है गर-चे- पास तोकारवां के संग-संग बस चला करो।।💎💎💎💎💎💎💎💎💎💎ख़्वाबों से ख्वाहिश न पूरी हुई है कभी।मुक़ाम की ओर किश्ती को धुमा बहा चलो-साहिल पे नज़र सदा रखना अपनी कड़ी।।फरि



इत्तेफाक

"इत्तफ़ाक"इत्तेफाक़ से गुज़रे बगल से जब वो,उन्हें देख कर, सन्न सा हो गया।शायद कई जन्मों का था साथ ,आँखें मिलीं- दिल एक दूजे में खो गया।।ख़ुशबू कैद हो गई ज़ेहन में गहरी,तरन्नुम की बेहिसाब अगन लगी।सोहबत की ललक इस कदर मची,मदहोश पीछे-पीछे जान चल पड़ी।।इत्तफ़ाक़ से,शहर की सरहद पे ठिठकना।एक दरख़्त के पीछे छुप बाते



मज़बूरियां आशिक़ी की

मज़बूरियां आशिकी मेंखुदगर्जी आदमजात की फ़ितरत- दुनियावी शौक है!चाहतोँ का शिलशिला मजबूरी- न ओर है- न छोर है!!अपनी कमियों पर पर्दा डाल सभी पाक - साफ नज़र आते हैं!इनकार करते हैं मगर इकरार के दो लब्ज़ खातिर तरस जाते हैं!!टूटा है हर आशिक़ मगर- अबतलक़ बिखरा नहीं है।अश्क दिखते तो हैं हजार- मगर खुल रोता नहीं है



रिश्ते

काव्य सृजन प्रतियोगिता में"महाकौशल काव्य श्री सम्मान''प्राप्त मेरी एक रचना■□■□■□■□■□■◆◇○शीर्षक: रिश्ते○◇◆■□■□■□■□■□■जानता हूँ- चाह कर भी उड़ नहीं सकते।बेवफ़ा हो,वफ़ाई के किरदार- बन नहीं सकते।।★☆★☆★☆★☆★☆★☆★"रिश्ता" बनाया है बेजोड़ तो तूं 'तोड़' न देना।प्यार किया, नफ़रत की चादर ओढ़ न लेना।।•••••••••••••••



लिखूँगा

उठाया है क़लम तो इतिहास लिखूँगामाँ के दिए हर शब्द का ऐहशास लिखूँगाकृष्ण जन्म लिए एक से पाला है दूसरे ने उसका भी आज राज लिखूँगापिता की आश माँ का ऊल्हाश लिखूँगा जो बहनो ने किए है त्पय मेरे लिए वो हर साँस लिखूँगाक़लम की निशानी बन जाए वो अन्दाज़ लिखूँगाकाव्य कविता रचना कर



टूट गया

तुम्हें पता है मेरा दिल तब टूट गया था जब तुमने यह मुस्कराकर कहाँ अब हमारे बीच में कोई रिश्ता नहीं सब भूल जाओ



याद

दिन रात ऐसा कोई पल नहीं जब तू याद ना आया हो ऐसी कोई सांस नहीं ली जब तुझे मैंने भुलाया हो //



चल चलते है

चल चलते है कुछ दूर साथ,क्या तूम आज भी साथ आओगे ?अगर कुछ पल को साथ आ जाओ,तो हो जायेगा सफ़र आसां,आओ साथ चलकर तो देखों,कुछ तुम बदलकर देखों,कुछ हम बदलकर देखें,तुम कुछ दूर हमारे साथ चलो,हम दिल की कहानी कह देंगे,समझे न जिसे तुम आँखों से,वो बात ज़ुबानी कह देंगे,वो बात ज़ुबानी कह देंगे........चल चलते है कुछ



राखी हूँ

थोड़ी सी डरती हूँ थोड़ी झगड़ती हूँ प्यार बहुत सारा भाई से करती हूँ। ... मै मेरे भाई की परी हूँ जब भी साथ वो होते किसी से नहीं डरी हूँ सारी दुनिया में एक भाई तो है जिस पर विश्वास करी हूँ एक अच्छा भाई सुलभ प्राप्त नहीं होता वो तो लाखो में एक होता है भाई को जो बहन रक्षा ब



खुदको बदल पाओगी

मै जानता हूँ सब बदल जायेगा। आज जान हो कल अंजान हो जाओगी। मेरे घर के हर कमरे की मान थी, अब मेहमान कहलाओगी। मै जानता हूँ सब बदल जायेगा, क्या खुद को बदल पाओगी। आज अम्बर धरती झील नदिया सब पूछते है जहाँ कल तक दोनो का नाम दिखाया करती थी, क्या अब उनकी भी खबर रख पाओगी। मै जानता हूँ सब बदल जायेगा, क्या रिश्त



मेरा यार

लिखता मैं तेरी मेरी बात हूँ तू यार है मेराना मैं बदला हूँ ना तू बदलाना आदतें बदली हैंबस वक़्त बदला है और तुम नजरिया बदल लोवो भी वक़्त की बात थी ये भी वक़्त की बात हैकल तू साथ था मेरे आज मुझसे दूर हैउदास मत होना क्यूकी मै साथ हूँ सामने ना सही आस पास हूँवक़्त के साथ ढल



गुमान

उन्हें गुमान था बेहतर है वोमुझसेशायद कोई आने वाला लम्हा बता सके कौन बेहतर है-अश्विनी कुमार मिश्रा



बेइंतिहा जुगलबंदी

शायरीजुगलबंदी : बेइंतिहा•●★☆★□■बेइंतिहा■□★☆★●•१इनकार किया-बेइंतिहा की खाई थी कसमखून से लिखा कई बार- मोहसिन ओ' हमदम२छुप के बैठा दिल में- खंगाल कर जरा तो देखबेइंतिहा इश्क-तम्मना न दबा- इज़हार फेंक३बेइंतिहा प्यार हमारा साथ पचास पारघुल जाती है तुरंत आई बेवज़ह खार४लबों पे तेरे सारा जहाँ सिमटा सदा नज़र आता ह



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x