शायरी



नशामुक्ति

नशा "नाश" का दूसरा नाम है.ये नाश करता है बुद्धि का.ये नाश करता है धन का.ये नाश करता है संबंधों का.ये नाश करता है नैतिक मूल्यों का.नाश नहीं निर्माण की तरफ बढ़ोयुवाओं तुम नशामुक्त समाज बनानेका संकल्प लो.शिल्पा रोंघे



खिलौनों की सभा- बाल कविता

हुई सभा एक दिन गुड्डे गुड़ियों की.गुड़िया बोली,मैं सुंदरता की पुड़ियामुझसे ना कोई बढ़िया.इतने में आया गुड्डापहन के लाल चोला,कितनों का घमंड है मैंने तोड़ा.बीच में उचका काठी का घोड़ाअरे चुप हो जाओ तुम थोड़ा.मैंने ही हवा का रुख़ है मोड़ा.लट्टू घूमा, कुछ झूमा.बोला लड़ों



बाल कविता - एक अश्व है निकला सागर किनारे

इक अश्व है निकला सागर किनारेपंख लगा के नभ में उड़ता जाए.हरा हरा सा है रुप हरियाली काकुहरा सा छाया है मतवाला सा.पीठ पे बिठा के परियों को स्वर्ग से आया धरती के दर्शन कराने को.अब तक था कहानियों में सिमटामोतियों से लिपटा,सुंदर बच्चों को लगता.सो



सोने की चिड़िया ?

फ्रेंच के साथ फ्रांसीसी जर्मन के साथ जर्मनवासी,जापानी भाषा के साथ जापान निवासी बना गए देश को विकसित और उन्नत.अंग्रेजी सभ्यता के बनकरअनुगामी, विकासशील से विकसित राष्ट्र का सफर अब तक क्या तय कर पाए है हिन्दुस्तानी ?



मुहब्बत

मौत को नकारकर ज़िंदगी से मुहब्बत कर लिया , क़ातिल को भी जीने को मज़बूर अलबत कर लिया , अब उन्हें महसूस है अपनी कारस्तानी का "रंजन", अब तड़पते हैं जान देने को, जब मुहब्बत कर लिया ।। https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com https://s



तुम्हारा स्वागत है शीत ऋतु

सर्द धूप के साथ हो चुकी है शुरू स्वेटरों की बुनाई.और रज़ाईयों की सिलाई.हो चुका है ठंड से बाज़ार गर्म अब.अदरक की खुशबू से महकने लगी है चाय की दुकाने कुछ ज्यादा ही.हो चुका है ठंड से बाज़ार गर्म अब.गज़क और तिल के लड्डूओंसे सजने लगी है दुकानें



चलो कुछ चुस्कियां चाय की हो जाए

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सफलता का मूलमंत्र

सांप सीढ़ी सिर्फखेल नहीं,जीवन दर्शन भी है.सफलता और विफलता दुश्मन नहीं, एक दूसरे की साथी है.हर रास्ते पर सांप सा रोड़ा, कभी मंजिल के बेहद करीब आकर भी लौटना पड़ता है.कभी सिफ़र से शिखर तो कभी शिखर से सिफ़र का सफ़र तय करना पड़ता है.सफलता का कोई



छोटे शहर की खुशबू

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नीतेश शाक्य

ज़माने की हकीकत में झूठ मिले, मेरे दोस्त खजाना लूट चले | मैने जिनके लिए इतने बैश किये, मुझे धोखा दे गैरों पे मरे || मुहब्बत में धोखे हजारों मिले, जो जाने कभी न मुहब्बत करे | वो गैरों की बाहों में सोने लगे, मेरे प्यारे हम क्या खिलौने लगे || जब चाहा दिल तोड़ चले,



चेताबनी शायरी by नीतेश शाक्य

सोने के पीछे सोना भुला दिया, खजाना भूल के खजाना लुटा दिया | दौलत के खजाने के पीछे , दिल का खजाना भुला दिया | जान गए मन की तेरी, तू औरों के दिल मे बसी | तू है पराये दिल की चिड़िया, समझे नहीं मेरे दिल के कभी|| जिस-जिस को धोखा मिला, सोचले वह अब मुझे जीने का मौका



अंकों का खेल

क्या स्कूल और कॉलेज के अंक ही सफलता का अंकशास्त्र लिखते है ?क्या यही सफलता की आखिरी सीढ़ी होते है ?अंकों का अतीत ही सुनहरे भविष्य की गारंटी हो सकता है ?समझ गया जो जीवन को बहुमूल्य समझ ले वो ये भी, सफलता असफलता अंकों से परे होती है, ये दृष्टिकोण मेंहोती है, प्रमाणपत्रों तक ही सीमित नहीं.शिल्पा रोंघे



एक बच्चे के मन की उलझन

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एक कलम हूं मैं

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मासूम

मासूम बन के बहुत दिल तोड़ लिए साहिब, अब गुनाह कबूलने का है वक्त आ गया. आग इश्क की लगाईं जो है दिल में मेरे, उस आग में जलने का तेरा वक्त आ गया. ना जियेंगे हम ना तुम ही यूँ जी पाओगे, खेल आग का है इससे यूँ बच ना पाओगे. आसान



ज़िन्दगी है

ज़िन्दगी है चलना हैं तो चलना हैं रास्ते में काटें हैं उनको कुचलकर चलो रास्ते में फूल हैं उनको सूँघकर चलो रास्ते में हार हैं उसको हराकर चलो रास्ते में जीत हैं उसको गले लग कर चलो रास्ते में यादें हैं उनको मुट्ठी में बंद करके चलो रास्ते में सबक हैं उसको धौराते



पशु और पक्षी के लिए काव्यात्मक अभिव्यक्ति

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शायरी

कुछ तो तड़प शांत हो जाएंगी हमारी।जब तेरे पहलू में कुछ पल सुकून के बिताया हम करें ।।💓💓💓💓💓💓💓मिथ्या ✍



शायरी

💘तेरी चाहत में बात दिल में बस अब इतनी है सनमतुम हमें देखों हम तुझे यूँ ही निहारा करें ।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹व्यंजना आनंद ( मिथ्या)



गीत सुनता हूं

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