शायरी



इत्तेफाक

"इत्तफ़ाक"इत्तेफाक़ से गुज़रे बगल से जब वो,उन्हें देख कर, सन्न सा हो गया।शायद कई जन्मों का था साथ ,आँखें मिलीं- दिल एक दूजे में खो गया।।ख़ुशबू कैद हो गई ज़ेहन में गहरी,तरन्नुम की बेहिसाब अगन लगी।सोहबत की ललक इस कदर मची,मदहोश पीछे-पीछे जान चल पड़ी।।इत्तफ़ाक़ से,शहर की सरहद पे ठिठकना।एक दरख़्त के पीछे छुप बाते



मज़बूरियां आशिक़ी की

मज़बूरियां आशिकी मेंखुदगर्जी आदमजात की फ़ितरत- दुनियावी शौक है!चाहतोँ का शिलशिला मजबूरी- न ओर है- न छोर है!!अपनी कमियों पर पर्दा डाल सभी पाक - साफ नज़र आते हैं!इनकार करते हैं मगर इकरार के दो लब्ज़ खातिर तरस जाते हैं!!टूटा है हर आशिक़ मगर- अबतलक़ बिखरा नहीं है।अश्क दिखते तो हैं हजार- मगर खुल रोता नहीं है



रिश्ते

काव्य सृजन प्रतियोगिता में"महाकौशल काव्य श्री सम्मान''प्राप्त मेरी एक रचना■□■□■□■□■□■◆◇○शीर्षक: रिश्ते○◇◆■□■□■□■□■□■जानता हूँ- चाह कर भी उड़ नहीं सकते।बेवफ़ा हो,वफ़ाई के किरदार- बन नहीं सकते।।★☆★☆★☆★☆★☆★☆★"रिश्ता" बनाया है बेजोड़ तो तूं 'तोड़' न देना।प्यार किया, नफ़रत की चादर ओढ़ न लेना।।•••••••••••••••



लिखूँगा

उठाया है क़लम तो इतिहास लिखूँगामाँ के दिए हर शब्द का ऐहशास लिखूँगाकृष्ण जन्म लिए एक से पाला है दूसरे ने उसका भी आज राज लिखूँगापिता की आश माँ का ऊल्हाश लिखूँगा जो बहनो ने किए है त्पय मेरे लिए वो हर साँस लिखूँगाक़लम की निशानी बन जाए वो अन्दाज़ लिखूँगाकाव्य कविता रचना कर



टूट गया

तुम्हें पता है मेरा दिल तब टूट गया था जब तुमने यह मुस्कराकर कहाँ अब हमारे बीच में कोई रिश्ता नहीं सब भूल जाओ



याद

दिन रात ऐसा कोई पल नहीं जब तू याद ना आया हो ऐसी कोई सांस नहीं ली जब तुझे मैंने भुलाया हो //



चल चलते है

चल चलते है कुछ दूर साथ,क्या तूम आज भी साथ आओगे ?अगर कुछ पल को साथ आ जाओ,तो हो जायेगा सफ़र आसां,आओ साथ चलकर तो देखों,कुछ तुम बदलकर देखों,कुछ हम बदलकर देखें,तुम कुछ दूर हमारे साथ चलो,हम दिल की कहानी कह देंगे,समझे न जिसे तुम आँखों से,वो बात ज़ुबानी कह देंगे,वो बात ज़ुबानी कह देंगे........चल चलते है कुछ



राखी हूँ

थोड़ी सी डरती हूँ थोड़ी झगड़ती हूँ प्यार बहुत सारा भाई से करती हूँ। ... मै मेरे भाई की परी हूँ जब भी साथ वो होते किसी से नहीं डरी हूँ सारी दुनिया में एक भाई तो है जिस पर विश्वास करी हूँ एक अच्छा भाई सुलभ प्राप्त नहीं होता वो तो लाखो में एक होता है भाई को जो बहन रक्षा ब



खुदको बदल पाओगी

मै जानता हूँ सब बदल जायेगा। आज जान हो कल अंजान हो जाओगी। मेरे घर के हर कमरे की मान थी, अब मेहमान कहलाओगी। मै जानता हूँ सब बदल जायेगा, क्या खुद को बदल पाओगी। आज अम्बर धरती झील नदिया सब पूछते है जहाँ कल तक दोनो का नाम दिखाया करती थी, क्या अब उनकी भी खबर रख पाओगी। मै जानता हूँ सब बदल जायेगा, क्या रिश्त



मेरा यार

लिखता मैं तेरी मेरी बात हूँ तू यार है मेराना मैं बदला हूँ ना तू बदलाना आदतें बदली हैंबस वक़्त बदला है और तुम नजरिया बदल लोवो भी वक़्त की बात थी ये भी वक़्त की बात हैकल तू साथ था मेरे आज मुझसे दूर हैउदास मत होना क्यूकी मै साथ हूँ सामने ना सही आस पास हूँवक़्त के साथ ढल



गुमान

उन्हें गुमान था बेहतर है वोमुझसेशायद कोई आने वाला लम्हा बता सके कौन बेहतर है-अश्विनी कुमार मिश्रा



बेइंतिहा जुगलबंदी

शायरीजुगलबंदी : बेइंतिहा•●★☆★□■बेइंतिहा■□★☆★●•१इनकार किया-बेइंतिहा की खाई थी कसमखून से लिखा कई बार- मोहसिन ओ' हमदम२छुप के बैठा दिल में- खंगाल कर जरा तो देखबेइंतिहा इश्क-तम्मना न दबा- इज़हार फेंक३बेइंतिहा प्यार हमारा साथ पचास पारघुल जाती है तुरंत आई बेवज़ह खार४लबों पे तेरे सारा जहाँ सिमटा सदा नज़र आता ह



तुझमें और तेरे इश्क़ में अंतर है इतना

कल मिलने आइ वो,मेरा पसंदीदा पकवान लाई वो।हम दोनो बहुत सारी बातें किये,उसकी और मेरे नयन ने भी मुलाक़ातें किए।अचानक से पूछी मुझसे.ये बताओ, मुझमे और इश्क़ में क्या अंतर हैं?मैंने कहाँ, तुझमें और तेरे इश्क़ में अंतर है इतना,तु ख़्वाब है और वो है सपना।अब वो नाराज़ हो गईं,रोते-रोते मेरे हाई कँधो पर सो गईं



तू कोमल कली

तु वो बाग़ की कोमल कली हैतुझे तोड़ा अधर्मी वो बली हैजिसे तूने तन मन से माना हैउसने ही तुझे ये पापी दाग़ में साना हैमैं माली हूँ बाग़ से टूटे कली कातु कर भरोसा मेरे साँस कीतेरा छोड़ अब किसका होने वाली हूँतुझे डर किस बात कीदेख मुझे हज़ारों ग़म है फिर भी मतवाली हूँतु छंद है मेरे पंक्तियों की मैं नशा



गैरों से बातें

जा मिल कर उनसे मोहब्बत की बातेंतु ख़ुश है उसके साथ तो तेरा क्या करे हम बात तुझे ऐहशास क्या होगा मेरे दिल पर जो बिता वो विश्वास क्या होगा किसी को मत तड़पा इतना डर मुझे लगता है कही तुझे हुआ तो वो अवकाश क्या होगा



इश्क़ में बहने लगा

वो मुझे कहने लगातेरे इश्क़ में बहने लगावक़्त की बात है फिर तुझसे हुई मुलाक़ात हैंकर लेंगे हम आहिस्ता आहिस्ता तुझ पर भी भरोसा अब जो उसका आश खोने लगाहम है तेरे लिए बेशक ग़ैर हैमगर हमें तो आज भी भरोसा है जैसे चाँद को तारों से इश्क़ होने लगा



नाम क्यूँ नहीं लेते

लोग कहते हैं तुम नाम क्यूँ नहीं लेते...!!!मैंने कहा छोड़ो यारों मैंने उन्हें छोड़ दिया इससे ज़्यादा और क्या इल्ज़ाम देते...!!!



आँखों में लाली

देखो ना आँखों में लाली छाई हैं।रातों में जगा हूँ फिर से तुम्हारी याद आइ हैं।



चिराग

उपरवाले ने हाथ में दे तो दिया है चिरागे ज़िंदगी "रंजन", कुछ तो मेहनत करना ही पड़ेगा गर जिन्न को बुलाना है। https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



मोटिवेशन

Goal को पाने के लिए यदि हम तन,मन व धन से मेहनत करते है,तो सच कहता हूं दोस्तो, कुंडली के सितारे भी अपनी जगह बदल देंगेंा



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