शायरी



गुलज़ार साहब की 25 मशहूर शायरियां | Gulzar Quotes Shayari

जब भी शायरी की बात होती है तो हर किसी के ज़हन में सबसे पहले मिर्ज़ा गालिब का नाम आता है लेकिन फिल्म इंडस्ट्री से ताल्लुख़ रखने वाले गुलज़ार साहब का भी कोई जवाब नहीं है। इन्होंने फिल्मों में गाने, संवाद, कविताएं और एक से बढ़कर एक शायरिया



मर्ज़

मर्ज़ कोई ले गया चुराकर ऐसा मैं बीमार हुआ। शुमार नहीं था किस्मत में जोक्यों उसका दीदार हुआ।। 💔



रॉक गार्डन पर कविता

रॉक गार्डन पर कविता- फ़र्क बस नज़रिये का था.टूटी हुई चीज़ समझकर बेज़ान मान लिया गया.इक शख़्स ने जोड़ जोड़कर मुझे खूबसूरत बागीचा बना लिया.शिल्पा रोंघे



मौन के रुप अनेक

एक ही मौन के देखो कितने रूप.कभी ध्यान है,कभी निद्रा है मौन,कभी उपासना है मौन,कभी भोरतो कभी रात का काला सन्नाटा है मौन,ना पूरा "हां" ना पूरा "ना"है मौन.ना पूरा है ना अधूरा हैसचमुच एक रहस्य ही है मौन.शिल्पा रोंघे



ग़ज़ल

फना करके कई सपने मेरा किरदार ज़िंदा है।।कहानी में महज अब तो मेरा यह प्यार ज़िंदा है।। गिरेबाँ तक किसी के हाथ को आने नहीं दूंगा। तुझे किस बात का डर है तेरा ये यार ज़िंदा है।।किसी को दोष क्या दूं मै मुकद्दर है यही मेरा। कि अपना घर जला करके मेरा फनकार ज़िंदा है।।



ग़ज़ल

आज लौटकर मिलने मुझसे मेरा यार आया हैशायद फिर से जीवन में उसके अंध्यार आया हैबचकर रहना अबकी बार चुनाव के मौसम मेंमीठी बातों से लुभाने तुम्हें रंगासियार आया हैबहुत प्यार करता है मुझसे मेरा पड़ोसीमुझे यह समझाने लेकर वो हथियार आया हैगले मिलकर गले पड़ना चाहता है दुश्मनलगता है अबकी बार बनके होशियार आया हैमे



मोहोब्बत

उसकी मोहोब्बत ने मुझे इस तरह जकड़ा हुआ था। में सुबह ये भूल जाता था कि रात में किस बात पर झगड़ा हुआ था।।



साथी

साथी उसे बनाओं जो सुख दुख में साथ दे.ना कि उसे जो सिर्फ तस्वीरों में आपकी शोभा बढ़ाएं.शिल्पा रोंघे



वक्त वक्त की बात

कहते है जो ये कि वक्त के पंजों से बचालेंगे तुम्हेंवहीं सबसे बड़ेशिकारी होते हैं.शिल्पा रोंघे



जीने की कला

हां दर्द सहना भी एक कला है। गम बर्दाश्त कर लेना भी एक कला है। खुद नाखुशी के दौर में रहकरदूसरों से ना जलना भी एक कला है। छिपकर रोना भी एक कला है । अंधेरे में भी जुगनू बनकर जीनाएक कला है। कहती है अगर खुदगर्ज़ दुनिया तोकहने तो कहने दो। क



सिड्रेंला और लैला जब मिली

सिड्रेंला और लैलामें बहस एक दिनजमकर हुई। लैला सिड्रेंलाकी किस्मत कोबेहतर बता गईसिड्रेंला को लैलाने कहा देखोफर्श से तू अर्शपर पहुंचगई। मैं महलों की रानीहोकर अकेली ही रह गई। कुछ इस तरह वो फ़कीरीको वो अमीरी से बेहतरबता गईऔर कह गई प्यार मेंउंच और नीचकी बात गलती से भी ना कर



सच - दो लफ़्जों की कहानी

सच को कड़वा ही रहने दो दोस्तो.गर वो मीठा होता तो तिजारत ही बन जाता.शिल्पा रोंघे



चाटुकारिता

ना कोई फ़ीस लगती है ना कोईसिफारिश लगती है.चाटुकारिता की शिक्षा बिल्कुल मुफ़्त में मिलती है.शिल्पा रोंघे



सोशल प्राणी का सच

खुश है कुछ लोगइंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, और ट्विटरपर अपनी फ़ैन फॉलोइंग को गिनकर.अपनी निज़ी जिंदगी को सार्वजनिककर.मगर भूल जाते है इस वर्चुअल दुनियामें खोकर उस पड़ोस को जो सबसेपहले पूछते है उनका हाल चाल.वो स्कूल कॉलेज और दफ़्तर केदोस्त जो बिना बताएं ही जान लेते हैदिल की बात.उंगल



काश

काश कोई आईना ऐसा भी होता.क्या मंजूर है दुनिया बनाने वाले को,पहले से ही बता देता, दिल की उलझन को चुटकियों में ही सुलझा देता.शिल्पा रोंघे



अब नारी सम्मान की बात कहां करे ?

क्या अब नारी सिर्फ देव लोक में हीसम्मानित रह गई है ?मां की कोख में होतब भ्रूणहत्या की बात सोचकर सहम जाती है.गर दुनिया में आने का सौभाग्य पा जाए तोतब अस्मत को लेकर जाती है सहम.चढ़ती है डोली तबदहेज जैसे दानव को देखकर जाती है सहम.दुनिया मे



खुदा

खुदा बेरहम हो नहीं सकता!क़ायनात का दम घुट नहीं सकता!!फक़त औजार हैं हम तेरे,बेगुनाह पर वार हो नहीं सकता!!!डॉ. कवि कुमार निर्मल



सुधार की कैसी चाह ?

है जुटे हुए कुछ लोगसुधार में.है जुटे कुछ लोग आधुनिकताकी दुहाई देकर पंरपराओं कोप्राचीन बताने में.तो कुछ पंरपराओं की आड़ लेकरबदलाव को ठुकराने में.है जुटे हुए कुछ लोगअपनी ही बात सही मनवाने में.उनकी इच्छाओं का नहीं कोईअंत, सिर्फ इसलिए जुटे है व



स्वप्न मेरे: हमारी नाव को धक्का लगाने हाथ ना आए

लिखे थे दो तभीतो चार दाने हाथ ना आएबहुत डूबेसमुन्दर में खज़ाने हाथ ना आएगिरे थे हम भीजैसे लोग सब गिरते हैं राहों मेंयही है फ़र्क बसहमको उठाने हाथ ना आएरकीबों ने तोसारा मैल दिल से साफ़ कर डाला समझते थे जिन्हेंअपना मिलाने हाथ ना आएसभी बचपन कीगलियों में गुज़र कर देख आया हूँकई कि



मतलब

वाकिफ हैं हम दुनिया के रिवाजो से,मतलब निकल जाये तो हर कोई भुला देता हैं.



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