1


!!! श्राद्ध खाने नहीं आऊंगा, कौआ बनकर !!!

(आँखो में आंसू ला दिये इस कहानी ने .......) "अरे ! भाई बुढापे का कोई ईलाज नहींहोता । अस्सी पार चुके हैं, अब बस सेवा कीजिये ।" डाक्टर पिताजी कोदेखते हुए बोला ।"डाक्टर साहब ! कोई तो तरीका होगा, साइंस नेबहुत तरक्की कर ली है ।""शंकर बाबू ! मैं अपनी तरफ से दुआ ही करसकता हू



जाने चले जाते हैं कहाँ ......

जाने चले जाते हैं कहाँ ,दुनिया से जाने वाले, जाने चले जाते हैं कहाँ कैसे ढूढ़े कोई उनको ,नहीं क़दमों के निशां अक्सर मैं भी यही सोचती हूँ आखिर दुनिया



कब और कैसे करें महालय (कनागत या श्राद्ध)वर्ष 2019 में..

भाद्रपद (भादों मास) की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक कुल सोलह तिथियां श्राद्ध पक्ष की होती है। इस पक्ष में सूर्य कन्या राशि में होता है। इसीलिए इस पक्ष को कन्यागत अथवा कनागत भी कहा जाात है। श्राद्ध का ज्योतिषीय महत्त्व की अपेक्षा धार्मिक महत्व अधिक है क्योंकि यह हमारी धार्मिक आस



क्या करें मृत आत्मा की शांति के लिए--

पितृ सदा रहते हैं आपके आस-पास। मृत्यु के पश्चात हमारा और मृत आत्मा का संबंध-विच्छेद केवल दैहिक स्तर पर होता है, आत्मिक स्तर पर नहीं। जिनकी अकाल मृत्यु होती है उनकी आत्मा अपनी निर्धारित आयु तक भटकती रहती है। हमारे पूर्वजों को, पितरों को जब मृत्यु उपरांत भी शांति नहीं मिलती और वे इसी लोक में भटकते रह



जानिए पितृपक्ष में पितरों के लिए पिण्डदान और श्राद्ध कैसे करें??

शास्त्रों में मनुष्य के लिए तीन ऋण कहे गये हैं- देव ऋण, ऋषि ऋण व पितृ ऋण। इनमें से पितृ ऋण को श्राद्ध करके उतारना आवश्यक है। क्योंकि जिन माता-पिता ने हमारी आयु, आरोग्यता तथा सुख सौभाग्य की अभिवृद्धि के लिए अनेक प्रयास किये, उनके ऋण से मुक्त न होने पर हमारा जन्म लेना निरर्थक होता है। इसे उतारने में क



पितृ पक्ष में पूर्वज क्यों आते हैं धरती पर? जानिए इसके बारे में 15 अहम जानकारियां

13 सितंबर से पूरा देश पितृपक्ष मना रहा है और ये पूरे 15 दिनों तक चलेगा इसमें जो हमारे घर के पितर लोग मर जाते हैं तो उनके श्राद्ध का काम चलता है। इस दौरान लोग ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षणा देते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं कि उनके पितर लोग जहां भी हैं चैन और खुशी के साथ रहें। शास्त्रों के अनुसार पि



श्रद्धा और भक्ति का पर्व श्राद्ध पर्व

श्रद्धाऔर भक्ति का पर्व श्राद्ध पर्वकलयानी बारह सितम्बर को भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी – क्षमावाणी – अपने द्वारा जानेअनजाने किये गए छोटे से अपराध के लिए भी हृदय से क्षमायाचना तथा दूसरे के पहाड़ सेअपराध को भी हृदय से क्षमा कर देना – के साथ जैन मतावलम्बियों के दशलाक्षण पर्व कासमापन हुआ | वास्तव में कितनी उद



विशेष -- श्राद्ध पक्ष 2019 पर---

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की शतभिषा नक्षत्र में शुरू हो रहे पितृ आराधना के पर्व में श्राद्ध करने से सौ प्रकार के तापों से मुक्ति मिलेगी।इस वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा पर 13 सितंबर 2019 ( शुक्रवार) को शततारका (शतभिषा) नक्षत्र,धृति योग,वणिज करण एवं कुंभ राशि के चंद्रमा की साक्



श्रद्धा का पर्व श्राद्ध पर्व

<!--[if gte mso 9]><xml> <o:OfficeDocumentSettings> <o:RelyOnVML/> <o:AllowPNG/> </o:OfficeDocumentSettings></xml><![endif]--><!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSc



श्राद्ध:जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें

श्राद्ध:जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें | https://ptvktiwari.blogspot.com/2018/09/blog-post_43.html



श्राद्ध किसके लिए

आजकल एक बार फिर पितृपक्ष चल रहा है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर श्राद्ध किसका करना चाहिए? मरे हुए परिवारी जनों का अथवा जीवित माता-पिता का? यह एक गम्भीर चिन्तन का विषय है। मुझे श्राद्ध का अर्थ यही समीचीन लगता है कि अपने जीवित माता



श्राद्ध

लाला चतुर्भुज अपने पिता की इकलौती संतान थे, अतः पिता की वणिक बुद्धि और व्यापार उन्हें पूरा पूरा मिला. पिता प्यार से उन्हें चतुर कहा करते थे, और वे यथानाम तथागुण चतुर ही थे. पिताजी के कड़वे तेल के धंधे को रिफाइंड आयल बिजनेस में बदलकर उ





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x