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पिछले एक साल में विज्ञापन पर मोदी सरकार का खर्चा जानकर केरल वाले फैल जाएंगे

सोशल मीडिया. वो प्लेटफॉर्म, जिसने 2014 में बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने का रास्ता बनाया. मुख्यत: फेसबुक और ट्विटर. पिछले दो हफ्ते से सोशल मीडिया पर लोग केंद्र सरकार को हांक रहे हैं कि वो केरल की ज़्यादा मदद क्यों नहीं कर रही है. सरकार की आलोचना के लिए लोग यही तर्क इस्तेमाल



इन 18 पुराने विज्ञापन को देखकर आप अपनी सिर पीट लेंगे

किसी भी प्रोडक्ट को बाज़ार में लोकप्रिय बनाने के लिए विज्ञापन बहुत ज़रूरी है, तभी तो बड़ी-बड़ी कंपनियां करोड़ों रुपए सिर्फ विज्ञापनों पर ही फूंक डालती हैं और कुछ विज्ञापन वाकई इतने अच्छे होते हैं कि उन्हें बार-बार देखने का मन होता है, मगर सब इतने अच्छे नहीं होते। कुछ विज



भाषा-व्यक्तित्व का आईना

भाषा-व्यक्तित्व का आईना डा. वेद प्रकाश भारद्वाज भाषा एक आईने की तरह होती है। हम जैसी भाषा बोलते हैं या लिखते हैं वैसा ही हमारा व्यक्तित्व होता है जो भाषा के आईने से सबके सामने आ जाता है। इस दृष्टि से यदि हम आज के युवाओं और बच्चों की भाष



Bidvertiser क्या हैं ? Bidvertiser से पैसे कैसे कमाएँ ?

नमस्कार दोस्तों,दोस्तों अगर आप एक newbie ब्लॉगर हैं |और अपने ब्लॉग से ऑनलाइन पैसा कमाने की सोच रहे हैं |तो ये पोस्ट आपके लिएँ सबसे best हैं |क्योंकि आज में आपको Bidvertiser क्या हैं ? Bidvertiser से पैसे कैसे कमाएँ ? के बारे बताने वाला हूँ |इससे आप एडसेंस से भी ज्यादा और



ब्लॉगर में Page Level Ads(विज्ञापन) कैसे लगायें ?

नमस्कार दोस्तों,दोस्तों एक जमाना था जब हमको internet use करने के लिएँ | computer की जरूरत पड़ती थी |लेकिन अब हम को internet पर कुछ भी search करना होता हैं |तो सबसे पहले mobile का use करते हैं |इसका एक प्रमुख कारण ये हैं |की हमारे देश में आज भी सबसे ज्यादा internet 2G speed



खतरनाक प्रोडक्ट्स का पैसे के लिए विज्ञापन करते भारतीय सेलिब्रिटीज और जेम्स बांड!

हमारे देश में यह नई बात नहीं है कि सिर्फ और सिर्फ पैसे की खातिर तमाम सेलिब्रिटीज उन वस्तुओं को भी प्रमोट करते नज़र आ जाते हैं, जो आम जनता के लिए सीधे तौर पर हानिकारक होता है. अगर घुमा फिरा के बात ना की जाए तो हमें नज़र आ जायेगा कि तमाम टॉप ग्रेड स्टार बॉलीवुड के सितारे हों अथवा क्रिकेट खिलाड़ी हों, उन



विज्ञापन विज्ञान - व्यंग्य ‬

यह विज्ञापनों का देश था।कुछ विज्ञापन देकर कमाते थे, कुछ लेकर।गली, मोहल्ले, बाजार, स्कूल, पेड़, पौधे, सार्वजनिक सुविधा घर यहां तक कि दूसरों की फेसबुक दीवार और रोटी पर तक लोग विज्ञापन लगाने से नहीं चूकते थे। जो लोग विज्ञापन नहीं लगवाना चाहते थे वे भी अपनी दीवारों पर विज्ञापन देकर लिखते थे कि यहां विज्ञ





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