विश्व

विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवसमनुष्य ही नहीं समस्तप्राणीमात्र – सृष्टि के समस्त जीव - इस स्वयंभू शाश्वत और विहंगम प्रकृति का अंगहै | इसी से समस्त जीवों की उत्पत्ति हुई है | प्रकृति के विकास के साथ ही हम सबकाभी विकास होता है यानी विकास यात्रा में हम प्रकृति के सहचर हैं – सहगामी हैं |प्रदूषित पर्यावरण के द्वारा



"अयोध्या - राम"टैम्पल "

"अयोध्या - राम"टैम्पल "--------० ------------------मित्र देश का साथी, था वह बोल रहा ?है हमें बनाने को ,निर्णय मन से लिया | शिव मंदिर यहाँ पर, टैंपल राम अयोध्या || अजब दीवाना जीवन, लौटकर आए न आए, सागर सा यह हृदय, फूल मरुस्थल खिलाए,स्वप्न टीसते रहते,टैंपल राम अयोध्य



कहां जायेंगे

जब लोगों को अपने पन से तकलीफ होने लगें, आपकी बातें उन्हें ताने लगनी लगे, तो कहां जाओगे? उन्हें कब तक अपना समझ, समझाओगे, मनाओगे? जिसके दिल की जगहें संकुचित होने लगे। प्रेम और समझ ,शक में सिमटने, सिकुड़ने लगे। समाज जंजीर बन जकड़ने लगे। आपका विश्वास (साथी)आपसे अकड़ने लगे। तो दूरी के सिवा क्या दवा है।



नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले

#नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले#नारी के हालात नहीं बदले,हालात अभी, जैसे थे पहले,द्रौपदी अहिल्या या हो सीता,इन सब की चीत्कार तू सुन ले। राम-कृष्ण अब ना आने वाले,अपनी रक्षा अब खुद तू कर ले,सतयुग, त्रेता, द्वापर युग बीता,कलयुग में अपनी रूप बदल ले।लक्ष्य कठिन है, फिर भी



जब दुनिया ने ठीक से जीना नहीं सीखा था, तब नालंदा ने पढ़ना सिख लिया था

यूनेस्को द्वारा नालंदा यूनिवर्सिटी को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्ज़ा दिया गया ।'नालंदा' नाम की उत्पत्ति 3 संस्कृत शब्दों के संयोजन से हुई: "ना", "आलम" और "दा", जिसका अर्थ है 'ज्ञान के उपहार को ना रोकना'।नालंदा यूनिवर्सिटी दुनिया की सबसे प्राचीन रेज़िडेंशियल यूनिवर्सिट



विश्वास, अविश्वास, और विज्ञान मार्ग गाथा ( मनन - 3 )

* विश्वास,अविश्वास,और विज्ञान मार्ग गाथा * ( मनन - 3 )विश्वास-मार्ग,अविश्वास-मार्ग,और विज्ञान-मार्ग की यह गाथा है;जानना है, क्या हैं इनको करने के आधार-मार्ग, और समझना इनकी गाथा है।01।बिना जाने ही स्वीकार कर लेना *विश्वास* है;निज अनुभव में आधार नह



ज्ञान की ओर - ( मनन - 2 )

** ज्ञान की ओर - ( मनन - 2 ) **हम ज्ञान की ओर तभी बढ़ेंगे;जब हमें जानने की इच्छा हो;उत्सुकता हो;हमारे स्वयं के निज ज्ञान में क्या है या क्या नहीं है कि स्पष्टता हो;हमारे स्वयं के निज अनुभव में क्या आया है या क्या नहीं आया है कि स्पष्टता हो। एक उदाहरण लेलें, तो बात औ



द्वितीय विश्व युद्ध की दर्दनाक दास्ताँ को बयां करतीं हैं ये 15 दुर्लभ तस्वीरें

द्वितीय विश्व युद्ध की घटना पूरे विश्व के लिए एक बहुत ही भयानक घटना थी। छः साल चलने वाले इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए। कई ऐसे लोग होते हैं जिन्हें इतिहास जानने में तो दिलचस्पी होती है पर इतिहास पढ़ने में नहीं। मगर इतिहास के इन्हीं पन्नों को तस्वीरों की मदद से उनके स



कुमार विश्वास की कवितायेँ - Kumar Vishwas poems in Hindi

डॉ.कुमार विश्वास “कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है”कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी 1970 को पिलखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डॉ. चन्द्रपाल शर्मा आर एस



सूरज पर प्रतिबंध अनेकों - कुमार विश्वास

Hindi poem - kumar vishwas सूरज पर प्रतिबंध अनेकों सूरज पर प्रतिबंध अनेकों और भरोसा रातों परनयन हमारे सीख रहे हैं हँसना झूठी बातों परहमने जीवन की चौसर पर दाँव लगाए आँसू वालेकुछ लोगों ने हर पल, हर दिन मौके देखे बदले पालेहम शंकित सच पा अपने, वे मुग्ध स्वयं की घातों परनयन हमारे सीख रहे हैं हँसना झूठी ब



उनकी ख़ैरो-ख़बर नही मिलती - कुमार विश्वास

Hindi poem - Kumar vishwasउनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलती उनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलतीहमको ही खासकर नहीं मिलती शायरी को नज़र नहीं मिलतीमुझको तू ही अगर नहीं मिलती रूह मे, दिल में, जिस्म में, दुनियाढूंढता हूँ मगर



मेरे पहले प्यार - कुमार विश्वास

Hindi poem - Kumar vishwas मेरे पहले प्यार ओ प्रीत भरे संगीत भरे!ओ मेरे पहले प्यार!मुझे तू याद न आया करओ शक्ति भरे अनुरक्ति भरे!नस-नस के पहले ज्वार!मुझे तू याद न आया कर।पावस की प्रथम फुहारों से जिसने मुझको कुछ बोल दियेमेरे आँसु मुस्कानों कीकीमत पर जिसने तोल दियेजिसने अहसास दिया मुझको मै अम्बर तक उठ



बांसुरी चली आओ - कुमार विश्वास

Hindi poem - Kumar vishwas बांसुरी चली आओ तुम अगर नहीं आई गीत गा न पाऊँगासाँस साथ छोडेगी, सुर सजा न पाऊँगातान भावना की है शब्द-शब्द दर्पण हैबाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण हैतुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी हैतीर पार कान्हा से दूर राधिका-सी हैरात की उदासी को याद संग खेला है कुछ गलत ना कर बैठें मन ब



सब तमन्नाएँ हों पूरी - कुमार विश्वास

Hindi poem - Kumar vishwasसब तमन्नाएँ हों पूरी सब तमन्नाएँ हों पूरी, कोई ख्वाहिश भी रहेचाहता वो है, मुहब्बत में नुमाइश भी रहेआसमाँ चूमे मेरे पँख तेरी रहमत सेऔर किसी पेड की डाली पर रिहाइश भी रहेउसने सौंपा नही मुझे मेरे हिस्से का वजूदउसकी कोशिश है की मुझसे मेरी रंजिश भी रहेमुझको मालूम है मेरा है वो म



भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा- कुमार विश्वास

Hindi poem - Kumar vishwasभ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामाभ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामाहमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामाअभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत कामैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामाकभी कोई जो खुलकर हंस लिया दो पल तो हंगामाकोई ख़्वाबों में आकर बस लिया द



कोई दीवाना कहता है , कोई पागल समझता है - कुमार विश्वास

Hindi poem - kumar vishwasकोई दीवाना कहता है कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!यह



क्या आपको पता है प्रथम विश्व युद्ध कितने भारतीय हुए शहीद?

आज से ठीक 100 साल पहले। तारीख 11 नवंबर 1918। इतिहास में दर्ज वह तारीख है जब चार साल तक दुनिया को हिलाकर रख देने वाला प्रथम विश्व युद्ध आखिर थम चुका था। जब भारत में समुद्र यात्रा को भी अशुभ माना जाता था, उस वक्त कुछ हजार या 2-4 लाख नहीं, बल्कि 11 लाख भारतीय सैनिक प्रथम विश



“विश्व पर्यटन दिवस‌” (27 सितम्बर)

आजकल के समय में हर व्यक्ति किसी नाकिसी परेशानी से घिरा हुआ है, पैसे और चकाचौंध के बीच ऐसा लगता है मानोखुशी तो कहीं गुम हो गई है । इन सबके बावजूद हर व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ समयऐसा जरूर निकालना चाहिए जिससे वो दूसरे देश या जगह का पर्यटन करे और खुशियों को फिर से गले



ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप : सौरभ चौधरी ने जीता स्वर्ण पदक

एशियाई खेलों में स्वर्णपदक विजेता सौरभचौधरी ने गुरुवारको आईएसएसएफ विश्वचैम्पियनशिप में जूनियर10 मीटर एयर पिस्तौल में स्वर्ण पदक जीत लिया है लेकिनवरिष्ठ निशानेबाज फिर से प्रभावित करने में असफल रहे । अर्जुन सिंह छीमाने इसी इवेंट में कांस्यपदक जीता और भारत



विश्व आत्महत्या निवारण दिवस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में आत्महत्या से 800,000 से अधिक लोग मर जाते हैं| यह हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति है| इस घातक कार्य कोकरने का इ



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