विश्व



महिला क्रिकेट विश्व कप फाइनल - पोस्टमार्टम

भारतीय महिला क्रिकेट टीम का विश्व कप का सफर इसी के साथ पूरा हुआ भारतीय टीम को एक बार फिर से उप विजेता का खिताब मिला।।पिछले विश्व कप में भी जो पचास ओवर का था , भारतीय टीम इंग्लैंड के हाथो परास्त हुई थी ।।हालांकि वो हार , इस हार से ज्यादा कड़वी थी क्युकी आज के फाइनल मैच में पहली बॉल से टीम ऑस्ट्रेलिया



जैसी श्रद्धा वैसा फल

एक बार की बात है, हर जीवधारी में भगवान का रूप देखने वाले एकनाथ ने एक प्यासे साधारण से गधे के अंदर भगवान का रूप देखकर उसको गंगाजल पिला दिया। तो साथ चल रहे लोगों ने विरोध करना शुरू किया और आश्चर्य से कहने लगे, ‘महाराज! भगवान शंकर को जो जल चढ़ाना था, वह आप किसको पिला रहे



भारतीय राजनीति की नई ‘गुगली’।

स्वतंत्र भारत के राजनैतिक इतिहास में बीता कल अभूतपूर्व कहलायेगा! यह घटना राजनैतिक भूचाल नहीं, बल्कि ‘भूकम्प’ है, जो स्वतंत्रता के बाद देश के राजनैतिक पटल पर प्रथम बार हुआ है। राजनीति में नैतिकता के निरंतर गिरते स्तर के बावजूद, इस तरह की यह पहली अलौकिक, अनोखी, अचम्भित करने वाली एक आश्चर्यजनक घटना है।



लौह पुरुष सरदार पटेल ,सच्ची श्रद्धांजली धारा 370 ,35A की समाप्ति है

स्वर्गीय सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजली धारा 370, 35 a की समाप्ति है डॉ शोभा भारद्वाज 15 अगस्त 1947 देश आजाद हुआ अधिकाँश प्रांतीय कांग्रेस समितियों के सरदार पटेल के पक्ष में होने के बाद भी गांधी जी कीइच्छा का सम्मान करते हुए नेहरू जी देश के प्रधान मंत्री बनाया गया ,पटेल उपप्रधान मंत्री एवं गृह मं



टूट गयी डोर

बिन विश्वास के रिश्ते बिन विश्वास के रिश्तों में, सफाईयां, सबूत चलते हैं। फिर भी रिश्ते कहां चलते हैं? ये हैं आज के शिशमहल जैसे, बड़े सुंदर दिखते हैं। नादान पत्थर फेंकने वालों से चोटिल हो जातें हैं। ये रिश्तों के कांच भला कितने दिन टिकते हैं? ये रिश्ते बड़े सुंदर दिखते हैं। ये चाइना के सामान की तरह



भारत एक विश्वगुरु

हम मानते है कि भारत विश्वगुरु था. और हमें फिर से विश्वगुरु बनना है. सबसे अच्छी बात ये है कि इस के लिए कोई भी देश प्रतिस्पर्धा में नहीं है. सभी देश अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने , अपने वैज्ञानिक स्तर को ऊँचा उठाने, अपनी जनता को खुशहाल बनाने में लगे है. अमेरिका और चीन दुनियाँ की सबसे बड़ी ताकत



सफलता

बस कुछ ही दूर थी सफलता, दिखाई दे रही थी स्पष्ट, मेरा प्रिय मित्र मन, प्रफुल्लित था, तेज़ प्रकाश में, दृश्य मनोरम था, श्वास अपनी गति से चल रहा था, क्षणिक कुछ हलचल हुई, पैर डगमगाया, सामने अँधेरा छा गया, सँभलने की कोशिश की, किन्तु गिरने से ना रोक पाया अपने आप को, ना जाने कौन था, जो धकेल कर आगे चला गया,



विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवसमनुष्य ही नहीं समस्तप्राणीमात्र – सृष्टि के समस्त जीव - इस स्वयंभू शाश्वत और विहंगम प्रकृति का अंगहै | इसी से समस्त जीवों की उत्पत्ति हुई है | प्रकृति के विकास के साथ ही हम सबकाभी विकास होता है यानी विकास यात्रा में हम प्रकृति के सहचर हैं – सहगामी हैं |प्रदूषित पर्यावरण के द्वारा



"अयोध्या - राम"टैम्पल "

"अयोध्या - राम"टैम्पल "--------० ------------------मित्र देश का साथी, था वह बोल रहा ?है हमें बनाने को ,निर्णय मन से लिया | शिव मंदिर यहाँ पर, टैंपल राम अयोध्या || अजब दीवाना जीवन, लौटकर आए न आए, सागर सा यह हृदय, फूल मरुस्थल खिलाए,स्वप्न टीसते रहते,टैंपल राम अयोध्य



कहां जायेंगे

जब लोगों को अपने पन से तकलीफ होने लगें, आपकी बातें उन्हें ताने लगनी लगे, तो कहां जाओगे? उन्हें कब तक अपना समझ, समझाओगे, मनाओगे? जिसके दिल की जगहें संकुचित होने लगे। प्रेम और समझ ,शक में सिमटने, सिकुड़ने लगे। समाज जंजीर बन जकड़ने लगे। आपका विश्वास (साथी)आपसे अकड़ने लगे। तो दूरी के सिवा क्या दवा है।



नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले

#नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले#नारी के हालात नहीं बदले,हालात अभी, जैसे थे पहले,द्रौपदी अहिल्या या हो सीता,इन सब की चीत्कार तू सुन ले। राम-कृष्ण अब ना आने वाले,अपनी रक्षा अब खुद तू कर ले,सतयुग, त्रेता, द्वापर युग बीता,कलयुग में अपनी रूप बदल ले।लक्ष्य कठिन है, फिर भी



जब दुनिया ने ठीक से जीना नहीं सीखा था, तब नालंदा ने पढ़ना सिख लिया था

यूनेस्को द्वारा नालंदा यूनिवर्सिटी को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्ज़ा दिया गया ।'नालंदा' नाम की उत्पत्ति 3 संस्कृत शब्दों के संयोजन से हुई: "ना", "आलम" और "दा", जिसका अर्थ है 'ज्ञान के उपहार को ना रोकना'।न



विश्वास, अविश्वास, और विज्ञान मार्ग गाथा ( मनन - 3 )

* विश्वास,अविश्वास,और विज्ञान मार्ग गाथा * ( मनन - 3 )विश्वास-मार्ग,अविश्वास-मार्ग,और विज्ञान-मार्ग की यह गाथा है;जानना है, क्या हैं इनको करने के आधार-मार्ग, और समझना इनकी गाथा है।01।बिना जाने ही स्वीकार कर लेना *व



ज्ञान की ओर - ( मनन - 2 )

** ज्ञान की ओर - ( मनन - 2 ) **हम ज्ञान की ओर तभी बढ़ेंगे;जब हमें जानने की इच्छा हो;उत्सुकता हो;हमारे स्वयं के निज ज्ञान में क्या है या क्या नहीं है कि स्पष्टता हो;हमारे स्वयं के निज अनुभव में क्या आया है या क्या नहीं आया है कि स्पष्टता हो। एक उदाहरण लेलें, तो बात औ



द्वितीय विश्व युद्ध की दर्दनाक दास्ताँ को बयां करतीं हैं ये 15 दुर्लभ तस्वीरें

द्वितीय विश्व युद्ध की घटना पूरे विश्व के लिए एक बहुत ही भयानक घटना थी। छः साल चलने वाले इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए। कई ऐसे लोग होते हैं जिन्हें इतिहास जानने में तो दिलचस्पी होती है पर इतिहास पढ़ने में नहीं। मगर इतिहास के इन्हीं पन्नों को तस्वीरों की मदद से उनके स



कुमार विश्वास की कवितायेँ - Kumar Vishwas poems in Hindi

डॉ.कुमार विश्वास “कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है”कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी 1970 को पिलखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डॉ. चन्द्रपाल शर्मा आर एस



सूरज पर प्रतिबंध अनेकों - कुमार विश्वास

Hindi poem - kumar vishwas सूरज पर प्रतिबंध अनेकों सूरज पर प्रतिबंध अनेकों और भरोसा रातों परनयन हमारे सीख रहे हैं हँसना झूठी बातों परहमने जीवन की चौसर पर दाँव लगाए आँसू वालेकुछ लोगों ने हर पल, हर दिन मौके देखे बदले पालेहम शंकित सच पा अपने, वे मुग्ध स्वयं की घातों परनयन हमारे सीख रहे हैं हँसना झूठी ब



उनकी ख़ैरो-ख़बर नही मिलती - कुमार विश्वास

Hindi poem - Kumar vishwasउनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलती उनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलतीहमको ही खासकर नहीं मिलती शायरी को नज़र नहीं मिलतीमुझको तू ही अगर नहीं मिलती रूह मे, दिल में, जिस्म में, दुनियाढूंढता हूँ मगर



मेरे पहले प्यार - कुमार विश्वास

Hindi poem - Kumar vishwas मेरे पहले प्यार ओ प्रीत भरे संगीत भरे!ओ मेरे पहले प्यार!मुझे तू याद न आया करओ शक्ति भरे अनुरक्ति भरे!नस-नस के पहले ज्वार!मुझे तू याद न आया कर।पावस की प्रथम फुहारों से जिसने मुझको कुछ बोल दियेमेरे आँसु मुस्कानों कीकीमत पर जिसने तोल दियेजिसने अहसास दिया मुझको मै अम्बर तक उठ



बांसुरी चली आओ - कुमार विश्वास

Hindi poem - Kumar vishwas बांसुरी चली आओ तुम अगर नहीं आई गीत गा न पाऊँगासाँस साथ छोडेगी, सुर सजा न पाऊँगातान भावना की है शब्द-शब्द दर्पण हैबाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण हैतुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी हैतीर पार कान्हा से दूर राधिका-सी हैरात की उदासी को याद संग खेला है कुछ गलत ना कर बैठें मन ब



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