व्यंग



सिंदूर

"सिंदुर''ब्रह्मरंध नियंत्रण सिंदूर कापारा करता है।सुहागन का जीवनतनाव मुक्त करता है।।अनिद्रा मुक्त कर श्नायु तंत्र कोचैतन्य रखता है।।🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩परंपरा, धर्म जब ताखे पर रख डालाब्रह्मरंध्र का क्या दे फिर मित्र हवालानींद गई-सुख-चैन गया- झेलें तुर्राचित्त चंचल- स्वप्नों की हलचल 🌊🌊🌊🌊🌊🌊



बेबात की जलन

🔥🔥 बेबात जलन 🔥🔥ब्याह किये मुझसे,माँ-बाप के संग बैठ समय-जाया करते हो!माना आँचल पाया माँ का,मुझको अवहेलित तुम करते हो!!पिता ने पढ़ा-लिखा जॉब दिलाया,माँ को सैलरी भी देते हो!मेरी भी कुछ हैं जरुरते,मायके भी जाने नहीं मुझे देते हो!!माँ ने खीर जली बना लाई,चाट कर- कटोरी साफ करते हो!मैंने रोटी चुपड़ दाल सं



चौबे चले छब्बे बनने , दुबे बन कर लौटे

चौबे चले छब्बे बनने , दुबे बन कर लौटेजब से ई मुआ कोरोना आया है तब से चौबाइन बड़ी परेशान है। चौबाइन अपने घर के अंदर से कोरोना को गरियाते हुये बाहर निकली तो कुछ लौंडे लपारिए निहायत ही निठल्ले से उसके घर के स



भास्कर मलिहाबादी

पत्नी की पूजा करो जो चाहो कल्यान जन्म सफल हो जायेगा बात लीजिये मान। बात लीजिये मान आरती रोज उतारो पत्नी सेवक बनो हुक़्म मत उसका टारो। देख उसे नाराज लोट चरणों पर जाओ तो सुख मि



हास्य व्यंग

हाँस्यम, व्यंग्य और हाँस्य "दोहा"झूठ मूठ का हास्य है, झूठ मूठ का व्यंग।झूठी ताली दे सजन, कहाँ प्रेम का रंग।।"मुक्तक"अजब गजब की बात आप करते हैं भैया।हँसने की उम्मीद लगा आए हैं सैंया।महँगाई की मार ले गई चढ़ी जवानी-अब क्या दूँ जेवनार रसोई बिगड़ी दैया।।आलू सा था गाल टमाटर सा पिचका है।कजरारे थे नैन प्याज क



राजनीतिक पत्रकारिता

राजनैतिक पत्रकारिता पहले में यह बताना चाहता हूँ कि मैंमीडिया का सम्मान करता हूँ और इसकी अनिवार्यता, उपयोगिता और सार्थकता मेंकोई संदेह नहीं है। पत्रकारों का काम कभी बहुत कठिन लगता है और कभीबडा आसान।आजकल पत्रकारों के नाम से सिर्फ राजनीतिके क्षेत्र में काम करने वाले पत्रकार ही ध्यान में आते। कह सकते है



चुनावी मौसम में

चुनावी मौसम में झूठ पर झूठ बोली जाएगी,खाई जाएगी,परोसी जाएगी,झूठ चासनी में डुबायी जाएगी। बड़े प्यार से खिलायी जाएगी। उसकी बन्दिशें हटायी जाएंगी। चुनाव की होली है। कई हफ्तों खेली जायेगी। कीचड़ उछाल खेली जायेगी। झूठ को मौका है अभी जी भर के इतराएगी । आखिर में उसकी असली जगह जनमत द्वारा दिखा दी जायेगी।



REVIVE

प्रयागराज vs इलाहबाद अब अल्लाह+आबाद मतलब इलाहबाद का नाम “प्रयागराज“ के नाम से ही जाना जायेगा। दो नदियों के संगम स्थल को प्रयाग कहते हैं। यह स्थान नदियों का ऐसा एकलौता संगम स्थल है जहाँ पर दो नहीं बल्की तीन नदियाँ आपस मे मिलती है और इसलिए प्राचिन भारत मे इस पवित्



तैमूर लंग

Monday, November 12, 201!! घर वापसी !! चलो माना की कानून बनाकर हलाला बंद करवा दोगे पर जो १४ सौ सालों से नस्ल खराब होकर बने उस गंदे खून को कैसे साफ करोगे....? Family Tree बनवाकर देख लो, कुछ को तो अपने बाप-दादाओं तक का पता नही होगा। मुल्लियों को एक मुफ्त मे सलाह द



मुर्ख जनता महामूर्ख प्रतिनिधि

कंटक लगती है #राजनीति अब हमें एहसास में,कत्थक करती है जनता यहाँ प्रतिनिधि के साथ में।भक्षक लगती है राजनीति अब हमें एहसास में,जनता की सारी नब्ज़ है सियासियो के हाथ में।काली लगती है राजनीति हमे दिन और रातो में,फ़बती दिखती है नेताओ की #इंकलाबी बातो में।वार लगती है राजनीति अब हमें एहसास में,मजबूरी लगती है



कोई ऐसा भी है

वो #मुस्लिम होकर भी #हिन्दू प्रेम का #कर्तव्य समझा गये---वो #हिन्दू होकर #मुस्लिम की #अहमियत को दर्शा गये ---#संवेदना यह है फिर भी दोनों के #बंदे#समाज को #चूर्णित कर गये--- - अरुण मलिहाबादी



थोथी विद्वता :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से सनातन धर्म यदि दिव्य एवं अलौकिक रहा है तो उसका कारण हमारे सनातन धर्म के विद्वान एवं उनकी विद्वता को ही मानना चाहिए | संसार भर में फैले हुए सभी धर्मों में सनातन धर्म को सबका मूल माना जाता है | हमारे विद्वानों ने अपने ज्ञान का प्रचार किया सतसंग के माध्यम से इन्हीं सतसंगों का सार निकालकर ग्र



रिश्ता पक्का है नाटिका

पात्र – परिचय लड़का --- दिनेश (ऑफिसमें अकाउंटेंट)लडके का पिता श्री सतीश बहल -- (पेशे से टीचर)लडके कि माँ शशिबाला --------- (गृहणी)लड़के का छोटा भाई ------------ वरुणलडके की बहन-------------------- कल्पनारिश्ता करवाने वाला व्यक्ति---- शास्त्री जी लडकी का परिवारलड़की – संजनालडकी की बहन –रंजनालडकी



अफसोस

सुबह टी वी पर न्यूज़ में दिखारहे थे किसी स्कूल के कुछ छात्र एक अध्यापक को पीट रहे थे । अध्यापक से वे छात्रइस बात से खफा हो गये थे कि उसने उनके नकल करने पर आपत्ति जतायी थी और उसमेंव्यवधान डाला था। मन खिन्न हो गया । किन्तु अगले ही पलों में खुलासा हुआ मामलामात्र नकल का नह



आजकल

ठहरे पानी में पत्थर उछाल दिया है । उसने यह बड़ा कमाल किया है ।वह तपाक से गले मिलता है आजकल । शायद कोई नया पाठ पढ़ रहा है आजकल । आँखों की भाषा भी कमाल है । एक गलती और सब बंटाधार है ।



“गज़ल” झूठ पर ताली न बजती व्यंग का बहुमान कर

मापनी-२१२२ २१२२ २१२२ २१२ समांत- आन पदांत- कर “गज़ल” कुछ सुनाने आ गया हूँ मन मनन अनुमान कर झूठ पर ताली न बजती व्यंग का बहुमान करहो सके तो भाव को अपनी तराजू तौलना शब्द तो हर कलम के हैं सृजन पथ गतिमान कर॥ छू गया हो दर्द मेरा यदि किसी भी देह कोउठ बता देना दवा है जा लगा दिलजान



गरीब और त्यौहार

गरीबों के लिये टसुए न टपकाइये ,कुछ कर सकते हैं तो करिये ,बेचारगी न फैलाइये . गरीबी पर राजनीति होती रही है और होती रहेगी .गरीबों पर तरस न फैशन बनाइये .साल भर में क्या किया जरा वो गिनाइये .एन त्यौहार पर आत्मग्लानि न पसराइये पर्व



रामरहीम दास

गुस्सा तो समझे ,था किसबात पे ?नाराज तो समझे ,थे किनसे ?ये आगजनी और हिंसा,किन लोगों पर ?कुछ नहीं सूझ रहा था। तो अपने सर फोड़ लेते। गुलाम, मालिक के वास्ते ,इतना तो कर सकते थे । -र र



अच्छे दिन... (व्यंग कविता)

कवि श्री सम्पत 'सरल' जी की अच्छे दिन पर एक व्यंग रचना...



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