यार



माँ मुझे अच्छे से प्यार कर लेना

माँ मुझे अच्छे से प्यार कर लेना, मेरी आँखों में अपनादुलार भर देना,दुनियाँ को सारी मैं ममता सिखाऊँ,ऐसा तुम मेरा श्रंगार कर देना । ....माँ मुझे अच्छे से मैं घुटनों चलूँगी, गिर- गिर पड़ूँगी, गोदी नाचूँगी, खिल खिल हसूँगीझुलूंगी, खेलूँगी , सबको खिलाऊँगी, आँगन मेँ



आज सात जनवरी है , मेरा दर्द

आज सात जनवरी है मेरा दर्द डॉ शोभा भारद्वाज आन्दोलन के नाम पर शर्तेमनवाने के लिए सड़के रोक लेना कभी इस जाम में फंसी सीरियस रोगियों ,प्रसव पीड़ा सेतड़पती महिलाओं को ले जाती एम्बूलेंस , थ्रीव्हीलर या गाड़ियां जिनमें सीरियस मरीज निराशासे रास्ता रोके खड़े लोगों के सामने गिड़गिड़ाते स्वजन प्लीज रास्ता दे दीजिय



लव जेहाद ,प्यार में शर्त कैसी ?

लव जेहाद , प्यार में शर्त कैसी? डॉ शोभा भारद्वाज कोई शर्त होती नहीं प्यार में ,मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया फ़िल्मी गाना लव जिहाद के लिए सटीक बैठता है . लव जिहाद ऐसा मानना है मुस्लिम युवको द्वारा गैर-मुस्लिम समुदायों की लड़कियों को टारगेट कर प्रेम का ढोंग रचना है चिंता इस लिए है आजकल मुस्लिम लड़कों



बसेरा

बसेरातिनतिन बिन, बना बसेरा लेती चिड़ियाँ।सांझ से रह बसेरे मे, रात गुजार लेती चिड़ियाँ।उड़ भोर परे खेतों से, दाना चुँग लेती चिड़ियाँ ।कुछ दबा चोच मे दाना, उड़ आती चिड़ियाँ ।बैठ बुने बसेरे मे, बच्चो को दाना चुनती चिड़ियाँ।कर प्यार पूरा, उड़ेल दाना बच्चे के मुँह मे,दूर गगन मे उड़ जाती चिड़ियाँ।न मांगती भीख किस



मौन

मौन भी एक कला है , जो दर्शाती अपनी भावनाएं भी; मौन एक नाराजगी भी,और साथ ही प्रेम की भाषाएं भी;मौन रहना किसी का आदर भी,और सहन शक्ति की पराकाष्ठा भी।मौन मस्तिष्क में संचित ऊर्जा का रूप,कभी बन जाता सुंदरता का स्वरूप;मौन ऋषि मुनियों की साधना,यह



बरिश की बूंदे

ए बारिश की बूंदे जब भी पड़ती हैमुझे मेरा यौवन याद आता हैकभी श्रृंगार की हुईं नव वधू की तरह दिखती हैकभी मानो अपने मै समा जाने को तरसती हैजब भी आती है साथ अपने प्यार लाती है



शब्दों का चरित्र

शब्द बड़े चंचल,बड़े विचित्र,बड़े बेशर्म और होशियार;शब्दों को एक जगह बैठाओ,बैठने को नहीं तैयार;उन्हें बोला मिलकर बनाओ वाक्य श्रृंखला साकार;सोशल डिस्टेंसिंग का बहाना कर मिलने को नहीं तैयार।चुन चुन कर पास लाया उन्हें, लेकिन दूर हो जाते बार



आभार

प्रिय राजन,शायद प्रतिदिन न लिख सकूँ। षर कोशिश जरूर करुंगा । प्रेमचंद न सही , हो सकता है एक दिन नफरतचंद तो बन ही जाऊं। कोई न पढ़े तो भी हर्ज नहीं । लिखने की गति तो तेज होगी ही। शुक्रिया मेरे भाई , इतना बल देने के लिये कि प्रयास तो कर ही सकूँ । शुरूआत में ज्यादा नहीं लिख प



रुठे है अपने

मुझे कहता ए जमाना बिगड़ा, मैं किसी की सुनतीं ही नहीं.. मुझसे रूठे है मेरे अपने, घर बाहर यार परिवार, अब कोई बात करता नहीं। मुझे कहता है जमाना बिगड़ा, मैं किसी की सुनतीं ही नहीं... मैं भी हूं आखिर इंसान, कब तक मैं झुकती रहूं.. दिल पर लगें हैं कितने घाव, ये किसी ने कभी पूछिया ही नहीं, सब अपने गए हैं रू



वचनामृत

https://vishwamohanuwaach.blogspot.com/2020/06/blog-post_26.html वचनामृतक्यों न उलझूँ बेवजह भला!तुम्हारी डाँट से ,तृप्ति जो मिलती है मुझे।पता है, क्यों?माँ दिखती है,तुममें।फटकारती पिताजी को।और बुदबुदाने लगता हैमेरा बचपन,धीरे से मेरे कानों में।"ठीक ही तो कह रही है!आखिर कितना कुछसह रही है।पल पल ढह र



कोरोना की मार

वाह! क्या हाल और समाचार है? सावन की बौछार है। कोरोना की मार है। बनती बिगड़ती सरकार है, चुनाव कराने के लिए आयोग हर हाल में तैयार है। बाहरवी में बहुत से बच्चे 90% से पार है। वही दसवीं कक्षा का रिजल्ट पिछली बार से बेकार है। चीन, पाकिस्तान सीमा पर कर रहा वार है। इधर नेपाल भी कर रहा तकरार है। यूपी में



प्यार

प्यार एक खूबसूरत एहसास है जो अधूरा होकर भी अपने आप में ही पूरा होता है प्यार अगर सच्चा हो तो वो बदले में प्यार नहीं चाहता बल्कि उसको खुश देखना चाहता है जिससे प्यार करता है चाहे उसे प्यार म मिले न मिले ....... वो बस....



दिल कमजोर

पढ़ें लिखे समझदार लोग, सांख्य, सवालों में गुम हो गए हैं। हर बात की नुक्ता चीनी में, रिश्ते दिमाग में कैद हो गये‌ है। पहले से ज्यादा भावों के अभाव हो गये है। लोगों के दिल तंग हो गये है, दिलों में अब खूबसूरत अहसास कम हो गये है। लोग बैठ अकेले, तन्हाई के मेले में खोकर , दुनिया से ही गुम हो गए हैं। प्या



बेपनाह प्यार है आजा हिंदी सोंग लिरिक्स हिंदी में

सूना सूना लम्हा लम्हा मेरी राहें तन्हा तन्हा आकर मुझे तुम थाम लो मंजिल तेरी देखे रस्ता मुड़के जरा अब देख लो ऐसा मिलन फिर हो ना हो सब कुछ मेरा तुम ही तो हो बेपनाह प्यार है आज्या पूरे सोंग के लिरिक्स देखने के लिए नीचे क्लिक करें सूना सूना लम्हा लम्हा



अल्लाह ओ अकबर

रोज रोज अल्लाह हु अकबर सुनते सुनते परेशान हो गया हूं ये साला अकबर के इतिहास को जानना जरुरी है अकबर के समय के इतिहास लेखक अहमद यादगार ने लिखा-“बैरम खाँ ने निहत्थे और बुरी तरह घायल हिन्दू राजा हेमू के हाथ पैर बाँध दिये और उसे नौजवान शहजादे के पास ले गया और बोला, आप अपने पवित्र हाथों से इस काफिर का कत्



तुम

मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँहाँ, मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ। एक अरसे से साथ हैं हम, और इस साथ के बारे मे लिखती हूँ। मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ। जानती हूँ कभी कहोगे नहीं तुम, परये बात बहुत खुशी देती है तुम्हे, किमैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ। वो अहसास जो कुछ 18 साल



पानी को पानी रहने दो

पानी को पानी रहने दोनदी अकेले बहकर अनेको घाट बनाती थी। हर घाट निराला होता था।पनघट मे पानी भरी बाल्टी रस्सी से खीच कर औरत सुस्ताती थी।भर मटका कलस फुरसत मे सखी सहेलियों से बतियाती थी, बेटी बहू।चरवाहा बैठ पेड़ की छांव मे मन से गीत गुंगुनाता, गीले होठो से। जानवर तालाबो मे डुबकी लगाते तैरते इतराते ले प



मैं जब भी

कविताजब भी मैंमैं चुप बैठकर जब भी खुद से बात करता हूँ,मैं हर उस पल उसके साथ टहलता और विचरता हूँ।साथ मेरे दूर तक जाती है वीरान तन्हाईयां,फिर भी मैं उसकी बाहों में गर्म राहत महसूस करता हूँ।होता है सफर मेरा अधूरा दूर छीतिज तक, मैं फिर भी हर सफर में उसके साथ रहता हूँ।होती नहीं वो पास मेरे किसी भी पड़ा



तोहमत ए दिलशिकनी

उनकी नाराज़गी में भी अगर है प्यार, हमारी नाराज़गी में भी नफरत तो नहीं है. वो है दिलशाद हम भी संगदिल तो नहीं है.दिलशिकनी की तोहमत क्यों हम पे लगी है. (आलिम)



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