shabd-logo

ईयर

hindi articles, stories and books related to year-45471


चंद्र की शुभ्र किरणेंले रही विदा दुल्हन की तरह.रात्री की डोली मेंबैठकर उन्हें सूर्योदय के घर जाना है.तम तो प्रकाशतक जाने का प्रतिदिन का साधन है.किंतु आज पिछले बरस कोसबको नवीनवर्ष से मिलवानाहै.शिल्पा रोंघे

वहीं खड़े है वृक्ष सभी तनकर.वहीं खिल रहे है फूल सुंगध फैलाकर.सदियों से वहीं खड़े पर्वत विशाल.उसी समुद्र में जाकर मिल रही तरंगिणी.उसी डाल पर बैठा है पक्षी घरौंदा बनाके,उसी नभ में उड़ रहा है पंख फैलाकर.कुछ नहीं बदलता नवीन वर्ष के साथ हां बस संकल्प निश्चित ही हो जाते है दृढ़.बीते वर्ष में मिली सीखें मा

झड़ने दो पुराने पत्तों को.🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂गिरने दो फूलों को जमीं पर.🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼कि नए पत्ते फिर आएंगे शाखों पर.🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿कि नए फूल फिर उगेंगे डाली पर.🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ताकेंगे आसमान की ओर.🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴गिरने से मत डरो, झड़ने से ना डरो.बीज भी जमीन में गिरकर ही पौधे

किताब पढ़िए

लेख पढ़िए