भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च कितना है?

13 फरवरी 2020   |  बबीता राणा   (425 बार पढ़ा जा चुका है)

चिकित्सीय विज्ञान में इन विट्रो फ़र्टिलाइज़ेशन यानी आईवीएफ तकनीक उन महिलाओं के लिए वरदान है जो माँ बनने की चाह रखते हुए भी गर्भावस्था का सुख नहीं ले पाती है। आईवीएफ तकनीक यानि टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया, बांझपन के उपचार में काफी कारगर साबित हो रही है। टेस्ट ट्यूब बेबी की प्रक्रिया लम्बी होने के साथ-साथ महंगी भी होती है, भारत में IVF उपचार का खर्च लगभग 80000 रुपये से लेकर 50000 तक आ सकता है।


आईये अब जानते हैं भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया में कौन-कौन से खर्च शामिल हैं,

यूं तो आईवीएफ उपचार के हर चक्र में क्या शामिल होगा और क्या नहीं, यह डॉक्टर, क्लिनिक, मरीज़ के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। मगर आमतौर पर आईवीएफ उपचार की लागत में प्रक्रिया के दौरान ओवेरियन स्टिमुलेशन का खर्च, अल्ट्रासाउंड परीक्षण व मॉनिटरिंग का खर्च, एग रिट्रीवल का खर्च, स्पर्म प्रीपरेशन का खर्च, फर्टिलाइजेशन और एम्ब्र्यो ट्रांसफर का खर्च शामिल होता है।


IVF उपचार के दौरान होने वाले खर्च इस प्रकार हैं :

आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए ओवरियन स्टिमुलेशन

ओवरियन स्टिमुलेशन आईवीएफ ट्रीटमेंट का पहला चरण है। इस चरण में गर्भाशय को उत्तेजित करने के लिए महिला को 8 से 12 दिनों तक इंजेक्शन दिया जाता है ताकि अधिक अंडों का उत्पादन हो सके। इस दौरान दिये जाने वाले इंजेक्शन, महिला की स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकते हैं, जिसका खर्च IVF लागत में शामिल होता है।


आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए अल्ट्रासाउंड परीक्षण और मॉनिटरिंग

अल्ट्रासाउंड के माध्यम से महिला के गर्भाशय और अंडाशय के विकास की निगरानी की जाती है ताकि सही समय पर आगे की आईवीएफ प्रक्रिया और चरणों को पूरा किया जा सके जो आईवीएफ के सफल होने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आईवीएफ उपचार में अल्ट्रासाउंड और मॉनिटरिंग का खर्च भी शामिल होता है।


आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए अंडा निकालना

IVF ट्रीटमेंट में एग रिट्रीवल की लागत भी शामिल होती है। टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के इस चरण में महिला के गर्भाशय से अंडे को बाहर निकाला जाता है जो बहुत ही सावधानीपूर्वक किया जाना ज़रूरी होता है। इसके लिए महिला को बेहोश किया जाता है और सुई एवं कैथिटर जैसे उपकरणों की मदद अंडे को बाहर निकाला जाता है, जिसमें 20-30 मिनट का समय लग सकता है।


आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए शुक्राणु को तैयार करना

आईवीएफ सेंटर या क्लिनिक में महिला के अंडे से भ्रूण बनाने के लिए उपयोग किये जाने वाले शुक्राणुओं को एक ख़ास प्रक्रिया के माध्यम से साफ किया जाता है, जिससे सबसे स्वस्थ शुक्राणुओं को अलग कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को स्पर्म वॉश कहते हैं। हालांकि स्पर्म वॉश की प्रक्रिया अस्पताल के तकनीक के अनुसार भिन्न हो सकती है। इसका खर्च आईवीएफ उपचार के लिए होने वाले खर्च में शामिल जरूर होता है मगर यह खर्च अस्पताल-दर-अस्पताल भिन्न हो सकता है।


आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए प्रजनन एवं निषेचन की प्रक्रिया

प्रयोगशाला में भ्रूण बनाने की प्रक्रिया के लिए अंडे और स्वस्थ शुक्राणुओं को एक साथ मिलाया जाता है जिसकी जांच कम से कम 16 से 20 घंटों के बाद की जाती है। इस जांच से यह पता चलता है कि निषेचन की प्रक्रिया सफल हुई है या नहीं। फर्टिलाइजेशन के बाद, विकास को सुनिश्चित करने के लिए एम्ब्र्यो को पांच-छह दिन तक प्रयोगशाला में रखा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का खर्च भी आईवीएफ के खर्च में शामिल होता है।


आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए भ्रूण स्थानातंरण की प्रक्रिया

आईवीएफ ट्रीटमेंट के आखिरी चरण में प्रयोगशाला में विकसित भ्रूण को सही समय पर एक पतली कैथेटर ट्यूब की मदद से महिला के गर्भ में स्थानांतरित किया जाता है। आईवीएफ की लागत में एम्ब्र्यो ट्रांसफर का खर्च भी शामिल होता है। इन मुख्य चरणों के अलावा उपयोग में लायी जाने वाली दवाओं का खर्च, किये जाने वाले परीक्षण, इंजेक्शन, एनेस्थिसिया, शैल्य क्रिया के माध्यम से की जाने वाली प्रक्रिया व उससे जुड़े उपकरणों का खर्च और भ्रूण को रखने की जगह की लागत भी शामिल होती है जो क्लिनिक, डॉक्टर पर निर्भर करती है।

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