आज़ादी

16 अगस्त 2018   |  sweta sinha   (98 बार पढ़ा जा चुका है)

देशभक्ति आज़ादी अभी मैं कैसे जश्न मनाऊँ,कहाँ आज़ादी पूरी है, शब्द स्वप्न है बड़ा सुखद, सच में जीना मजबूरी है। आज़ादी यह बेशकीमती, भेंट किया हमें वीरों ने, सत्तावन से सैंतालीस तक ,शीश लिया शमशीरों ने। साल बहत्तर उमर हो रही,अभी भी चलना सीख रहा, दृष्टिभ्रम विकास नाम का,छल जन-मन को दीख रहा। जाति,धर्म का राग अलाप,भीड़ नियोजित बर्बरता, नहीं बेटियाँ कहीं सुरक्षित,बस नारों में गूँजित समता। भूखों मरते लोग आज भी,शर्म कहाँ तुम्हें आती है? आतंकी की गोली माँ के लाल को कफ़न पिन्हाती है। आज़ादी क्या होती है पूछो ,कश्मीर के पत्थरबाजों से, इंसान जहाँ बिकते डर के , कुछ जेहादी शहजादों से। मन कैसे हो उल्लासित, बंद कमरों में सिमटे त्योहार, वाक् युद्ध अब नहीं चुनावी, मैले दिल बदले व्यवहार। आँखें मेरी सपना बुनती, एक नयी भोर मुस्कायेगी शिक्षा की किरण तम को हर कर,भय भय,भूख से मुक्ति दिलायेंगी हम सीखेंगे मनुष्यता और मानवता के पुष्प खिलायेंगे। स्वयं के अहं से ऊपर उठकर सब भारतवासी कहलायेंगे। भूल विषमता व्यक्तित्व परे,सब मिलकर अलख जगायेंगे। कन्या से कश्मीर तक स्वर में जन-मन-गण दोहरायेंगे। ---श्वेता सिन्हा

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रेणु
16 अगस्त 2018

प्रिय श्वेता -- आजादी के जश्न के बीच देश में प्याप्त अनाचार और भ्रष्टाचार के लिए चिंतित मन की भावों को बहुत ही सार्थकता से अभिव्यक्ति दी है आपने |
हम सीखेंगे मनुष्यता और मानवता के पुष्प खिलायेंगे।
स्वयं के अहं से ऊपर उठकर सब भारतवासी कहलायेंगे।!!!!!!!!
सचमुच भारत सदैव से ही एकता और अखंडता की मिसाल रहा है जो इसका समर्थन करता है और इस भाव को जीता है वही सच्चा भारतवासी है | एक बार फिर मेरा प्यार |

रेणु
16 अगस्त 2018

प्रिय श्वेता -- अपने प्रिय मंच पर आपको साक्षात् पाकर मन बहुत आह्लादित है ब्लॉग जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर आज आपने इस मंच
के पाठकों की ओर रुख किया ये शब्द नगरी और उसके पाठकों के लिए बहुत ही शुभता का पल है | ब्लॉग की तरह ही मेरी बहन का यहाँ भी खूब नाम | हो मेरी यही दुआ रहेगी | मेरी अनंत शुभकामनाएं और हार्दिक प्यार प्रिय श्वेता |

अमित
16 अगस्त 2018

स्वयं के अहं से ऊपर उठकर सब भारतवासी कहलायेंगे। भूल विषमता व्यक्तित्व परे,सब मिलकर अलख जगायेंगे। कन्या से कश्मीर तक स्वर में जन-मन-गण दोहरायेंगे। वाह्ह... ख़ूबसूरत लेख ... उम्दा कृति श्वेता जी... वाह्ह

अमित
16 अगस्त 2018

स्वयं के अहं से ऊपर उठकर सब भारतवासी कहलायेंगे। भूल विषमता व्यक्तित्व परे,सब मिलकर अलख जगायेंगे। कन्या से कश्मीर तक स्वर में जन-मन-गण दोहरायेंगे। वाह्ह... ख़ूबसूरत लेख ... उम्दा कृति श्वेता जी... वाह्ह

अमित
16 अगस्त 2018

स्वयं के अहं से ऊपर उठकर सब भारतवासी कहलायेंगे। भूल विषमता व्यक्तित्व परे,सब मिलकर अलख जगायेंगे। कन्या से कश्मीर तक स्वर में जन-मन-गण दोहरायेंगे।

अमित
16 अगस्त 2018

बहुत बढ़िया... उम्दा रचना श्वेता जी... वाह

अमित
16 अगस्त 2018

बहुत बढ़िया... उम्दा रचना श्वेता जी... वाह

अमित
16 अगस्त 2018

बहुत बढ़िया... उम्दा रचना श्वेता जी... वाह

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