“कुंडलिया” आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज।

16 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (55 बार पढ़ा जा चुका है)

 “कुंडलिया”  आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज।

“कुंडलिया”


आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज।

पीछे-पीछे भागते होकर हम निस्तेज॥

होकर हम निस्तेज कहाँ थे कहाँ पधारे।

मुड़कर देखा गाँव आ गए शहर किनारे॥

कह गौतम कविराय चलो मत भागे-भागे

करो वक्त का मान न जाओ उससे आगे॥


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

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