"हाइकु"मेरे आँगन

23 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (90 बार पढ़ा जा चुका है)

"हाइकु"


मेरे आँगन

गीत गाती सखियाँ

तुलसी व्याह।।-१


कार्तिक माह

भर मांग सिंदूर

तुलसी पूजा।।-२


तुलसी दल

घर-घर मंगल

सु- आमंत्रण।।-३


तुलसी चौरा

रोग विनाशक

दीप प्रकाश।।-४


तुलसी पत्ता

साधक सुखवंता

दिव्य औषधि।।-५


महातम मिश्र गौतम गोराखपुरी

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“हाइकु” सजी बाजर राखी रक्षा त्यौहार रंग बिरंगी॥-1 रंग अनेक कच्चे पतले धागेराखी वन्धन॥-2 पावनी राखी रिश्ता ऋतु बैसाखी सुंदर पल॥-3 ओस छाई रीवर्षा ऋतु आई रीझूलती नारी॥-4 विहग उड़ेपग सिहर पड़ेडरती नारी॥ -5 आ रे बसंततूँ ही दिग-दिगंतसुंदर नारी॥-6 महतम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
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“कुंडलिया” आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज। पीछे-पीछे भागते होकर हम निस्तेज॥ होकर हम निस्तेज कहाँ थे कहाँ पधारे। मुड़कर देखा गाँव आ गए शहर किनारे॥ कह गौतम कविराय चलो मत भागे-भागेकरो वक्त का मान न जाओ उससे आगे॥महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
16 अगस्त 2018
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